Shankar Chowk

Mohabbat Aisi Thi Ke Unko Batayi Na Gayi,Chot Dil Par Thi Iss Liye Dikhayi Na Gayi,Chahte Nahi The Unse Dur Hona Par,Doo...
01/07/2018

Mohabbat Aisi Thi Ke Unko Batayi Na Gayi,
Chot Dil Par Thi Iss Liye Dikhayi Na Gayi,
Chahte Nahi The Unse Dur Hona Par,
Doorie Itni Thi Ke Mitaayi Na Gayi.
मोहब्बत ऐसी थी कि उनको बताई न गयी,
चोट दिल पर थी इसलिए दिखाई न गयी,
चाहते नहीं थे उनसे दूर होना पर,
दूरी इतनी थी कि मिटाई न गयी।
खामोशियों में धीमी सी आवाज़ है, तन्हाईयों में भी एक गहरा राज़ है, मिलते नही हैं सबको अच्छे दोस्त यहाँ, आप जो मिले हो हमें खुद पर नाज़ है।.
Bichhad Ke Usne Mohabbat Hi Adhoori Kar Di, Mere Mukaddar Mein Dard Aaya Toh Kya Hua, Khuda Ne Uski Khwahish Toh Poori Kar Dai.
उसने मुझसे ना जाने क्यों ये दूरी कर ली, बिछड़ के उसने मोहब्बत ही अधूरी कर दी, मेरे मुकद्दर में दर्द आया तो क्या हुआ, खुदा ने उसकी ख्वाहिश तो पूरी कर दी।
Aye Khuda Aaj Yeh Faisla Karde, Use Mera Ya Mujhe Uska Karde. Bahut Dukh Sahe Hai Maine, Koi Khushi Ab Toh Muqadar Karde. Bahut Mushkil Lagta Hai Usse Duur Rehna, Judai Ka Safar Ko Kam Karde. Jitna Duur Chale Gaye Woh Mujhse, Use Utna Kareeb Karde. Nahi Likha Agar Nasib Me Uska Naam, To Khatam Kar Ye Zindagi Aur Mujhe Fanaa Karde.

15/08/2017

आज विदा की वेला आई,
सरहद मुझे पुकारती|
आज विदा की वेला आई,
सरहद मुझे पुकारती|

भरत भारती का मैं बैटा
शेरों के संग पला बढ़ा हूँ,

माँ का मान बचाने को मैं
इन शिखरों पर सदा चढ़ा हूँ|

अरिदल चढ़ आया सीमा पर
विकल हुई माँ भारती,
अरिदल चढ़ आया सीमा पर
विकल हुई माँ भारती,

आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती| (2)

नन्दन-वन के शेरों को
एक गीदड़ ने धमकाया है,

घर में बैठे-बैठे उसने
अपना काल बुलाया है|
घर में बैठे-बैठे उसने
अपना काल बुलाया है|

उस कायर की करतूतों को
सारी दुनिया धिक्कारती (2)

आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|
आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|

उसके सीने की चोड़ाई
मेरी गोली नापेगी,

ऐसी दूंगा मोत, नरक में
उसकी रूह भी कांपेगी|
ऐसी दूंगा मोत, नरक में
उसकी रूह भी कांपेगी|

‘बन जाऊँगी काल’
‘बन जाऊँगी काल’
मेरी बंदूक की नाल दहाड़ती,

आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|
आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|

बनकर लावा अब फूटेगा
ठंडा बर्फ हिमालय का,
बनकर लावा अब फूटेगा
ठंडा बर्फ हिमालय का,

मेरा शोणित घोण करेगा
भारत माँ की जय-जय का| (2)

अरिमुंडो की माला के संग
भाव भरी हो आरती,
आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती| (2)

कश्मीर की क्यारी को अब
अपने खून से सिचुंगा,
कारगिल के रश्मि-रंथो को
अन्त समय तक खीचूँगा|

अब तो मुझको बनना ही है
कृष्ण सरीखा सारथी,
अब तो मुझको बनना ही है
कृष्ण सरीखा सारथी,

आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती| (2)

माँ के चरणों के वन्दन को
अपना शीश चढ़ा दूंगा,
माँ के चरणों के वन्दन को
अपना शीश चढ़ा दूंगा,

जननी का जो दूध रगों में
उसका कर्ज चूका दूंगा| (2)

चलती जो हर सांस,
इसी माता ने मुझे उधार दी, (2)

आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|
आज विदा की वेला आई
सरहद मुझे पुकारती|

रवि शंकर सिंह आरा

Jay hind.
09/01/2017

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06/01/2017
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11/03/2015

Good night ..............................

02/02/2015

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