Taekwondo Sports Academy Haryana

Taekwondo Sports Academy Haryana Join us for athletic excellence personal fitness, & overall well-being.

We're a professionally managed, commercial Sports & Fitness Academy offering high-quality training in TKD and multiple fitness disciplines with certified and well experienced coaches.

01/09/2026

शानदार पहल है साथ चलेंगे आगें बढ़ेंगे।

05/05/2026
22/03/2026

आपके बच्चे में भी छुपा हो सकता है एक चैम्पियन

19/03/2026

04/03/2026

नवजीवन का आधार हैं - प्राणायाम!

आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मानसिक तनाव, अनिद्रा और शारीरिक असंतुलन आम समस्याएँ बन चुकी हैं। जिसकी गिरफ्त में छोटी उम्र से लेकर व्यस्क और प्रौढ़ तक शामिल हैं।
ऐसे समय में प्राणायाम केवल एक योग क्रिया नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और ऊर्जावान बनाने की सशक्त विधि है।
"माई जिम" यमुनानगर में हमारा उद्देश्य केवल दिखावटी फिटनेस नहीं, बल्कि सुरक्षित, प्राकृतिक, अनुशासित और वैज्ञानिक तरीके से संपूर्ण स्वास्थ्य प्रदान करना है।
हमारा आज का विषय है "प्राणायाम"।
तो प्राणायाम क्या है ? सबसे पहले यह जानना ही महत्वपूर्ण है। आइए सबसे पहले प्राणायाम के इन्हीं पहलुओं को आम बोलचाल की भाषा में समझने का प्रयास करते हैं।
योग विज्ञान और योग दर्शन के अनुसार ‘प्राण’ का अर्थ है "जीवन ऊर्जा" और ‘आयाम’ का अर्थ होता है "विस्तार"।
साधारण भाषा में समझें तो प्राणायाम का अर्थ है – श्वास के माध्यम से जीवन ऊर्जा का संतुलन और विस्तार। श्वास - प्रश्वास अर्थात सांस लेने और छोड़ने की यह प्रक्रिया ना सिर्फ शरीर, मन और आत्मा को एक सूत्र में जोड़ने की प्रक्रिया है, अपितु हमें शारीरिक और मानसिक रूप से अद्भुत लाभ प्रदान करती है ।
अब सवाल यह उठता है कि नये अभ्यर्थी प्राणायाम की शुरुआत करें तो कैसे करें ? तो सबसे पहले हमें,
सही समय और सही स्थान का चयन करना होगा।
स्वच्छ, शांत और हवादार स्थान सबसे बेहतरीन।
यदि संभव हो तो सुबह खाली पेट अभ्यास करें। या फिर, खाने के 3 से 4 घंटे बाद।
अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही सही आसनों का चयन करें। सुखासन, वज्रासन या पद्मासन में तभी बैठें जब आप बैठनें में सक्षम हों। अन्यथा आप कुर्सी पर रीढ़ सीधी और शरीर शिथिल रख कर बैठने का अभ्यास कर सकते हैं।
शुरुआत में दीर्घ श्वास-प्रश्वास (2 से 3 मिनट) करें। यदि आप एक बार में लंबे गहरे सांस लेने में दिक्कत महसूस करते हैं तो किसी योग्य गुरु की देखरेख में अपनी सांसों को नियंत्रित करना सीखें। शीघ्र ही आप अपने आप को प्राणायाम करने के लिए तैयार कर सकेंगे। प्राणायामों की श्रंखला में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध अनुलोम-विलोम प्राणायाम को करने से पहले, मौसम और आवश्यकता के अनुसार सूर्यभेदी और चंद्रभेदी प्राणायाम का अभ्यास धीरे-धीरे लंबे गहरे सांसों के साथ करें। मानसिक शांति हेतु भस्त्रिका और भ्रामरी प्राणायाम किसी टानिक से कम नहीं हैं। बशर्ते सही मार्गदर्शन में किया जायें।
शुरुआत में प्राणायाम का अभ्यास कम समय से शुरू करें, पर नियमित अभ्यास करें। ध्यान रखें कि निरंतर अभ्यास ही सफलता की कुंजी है।
उच्च रक्तचाप या हृदय रोग में विशेषज्ञ से परामर्श लें। श्वास को जबरदस्ती न रोकें।
शरीर की क्षमता के अनुसार अभ्यास करें।
माई जिम यमुनानगर में हम मानते हैं कि स्वास्थ्य ही वास्तविक संपत्ति है। प्राणायाम के माध्यम से हम केवल शरीर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, अनुशासन और सकारात्मक सोच का विकास करते हैं। “प्राणायाम केवल श्वास का अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और जागरूक बनाने की कला है, अर्थात प्राणायाम नवजीवन का आधार है । सही मार्गदर्शन, धैर्य और नियमितता से हर व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति को जागृत कर सकता है।”
माई जिम यमुनानगर में हम अपने अनुभवों को सांझा कर एक स्वस्थ समाज के निर्माण में अपने योगदान को सुनिश्चित करने का प्रयास पिछले कई वर्षों से निरंतर करते चले आ रहें हैं। माई जिम सिर्फ एक हैल्थ क्लब ना होकर सुरक्षित एवं अनुशासित वातावरण देने वाला पारिवारिक केंद्र बन चुका है। महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास किए जाते रहे हैं।
माई जिम में बिना किसी स्टेरॉयड के कड़ी मेहनत से प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धति पर आधारित तकनीक सिखाना ही हमारी USP है। ना सिर्फ शारीरिक व्यायाम अपितु प्राणायाम के सूक्ष्म अनुभव—जैसे ऊर्जा का प्रवाह, मानसिक शांति और एकाग्रता—को समझने में भी सहायता करना हमारे अनुभवों का हिस्सा है।
यदि आप अपने या अपने परिवार के लिए सुरक्षित और प्रभावी प्राणायाम प्रशिक्षण चाहते हैं, तो माई जिम यमुनानगर आपके लिए समर्पित है। माई जिम यमुनानगर में आपके परिवार के बड़ों से लेकर छोटों तक सभी सदस्यों के सुंदर स्वास्थ्य के लिए प्रतिबद्ध है। स्वस्थ रहें, अनुशासित रहें, जागरूक रहें। आप जानते ही हैं कि माई जिम यमुनानगर की टैगलाइन ही है “योग बनें निरोगी बनें और उपयोगी बनें।”
प्रभाकर शर्मा
माई जिम यमुनानगर।

07/12/2025

"नामदेव के नेतृत्व का तमाचा: पदकों ने विरोधियों की जुबान बंद कर दी !"

भारतीय ताइक्वांडो लंबे समय से कानूनी विवादों, संगठनात्मक टूट-फूट और आंतरिक राजनीति के कारण लगातार बाधित होता रहा है। लेकिन इस शोरगुल और भ्रम के बीच भारतीय खिलाड़ियों द्वारा अंडर 21 वर्ल्ड ताइक्वांडो प्रतियोगिता के अंतर्राष्ट्रीय मंच पर जीते गए पदकों ने न केवल इतिहास बदला, बल्कि उन लोगों की बोलती भी बंद कर दी है जो लगातार इंडिया ताइक्वांडो और इसके अध्यक्ष नामदेव शिरगांवकर को खेल का “बाहरी”, “अनुभवहीन” या “खिलाड़ी-विरोधी” साबित करने में जुटे थे। यह उपलब्धियाँ ऐसे समय में आई हैं जब विरोधी गुटों ने पिछले कई वर्षों से माहौल विषाक्त बनाने, खिलाड़ियों को भ्रमित करने और खेल को भीतर से कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

वर्ल्ड ताइक्वांडो और भारत सरकार द्वारा इंडिया ताइक्वांडो को दी गई आधिकारिक और वैधानिक मान्यता किसी भी चर्चा को समाप्त कर देने के लिए पर्याप्त थी, परन्तु इसके बावजूद समानांतर फेडरेशनों और उनके समर्थकों ने लगातार गलत सूचनाएँ फैलाकर यह तर्क दिया कि नामदेव शिरगांवकर का नेतृत्व खिलाड़ियों के हित में नहीं है। वे यह साबित करने पर तुल गए कि भारत का ताइक्वांडो किसी ऐसे व्यक्ति के हाथों में है जो इस खेल को समझता ही नहीं। लेकिन विगत 3 वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर आए इन ऐतिहासिक पदकों ने सिद्ध कर दिया है कि नेतृत्व की कसौटी अदालतों के आदेशों या सोशल मीडिया की बयानबाजी से नहीं, बल्कि परिणामों से होती है, और परिणाम दुनिया के सामने हैं।

लगभग पचास वर्षों से भारतीय ताइक्वांडो जिस पदकहीन दौर की पीड़ा झेलता रहा, उसे समाप्त करने का श्रेय आज उन खिलाड़ियों को जाता है जिन्होंने इंडिया ताइक्वांडो के बैनर तले एशिया से लेकर विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में तिरंगा फहराया। उसकी बराबरी का श्रेय उस नेतृत्व को भी दिया जाएगा जिसने तमाम विरोध, दुष्प्रचार और अवरोधों के बावजूद खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रशिक्षण, अवसर और संरचना उपलब्ध कराई।

दूसरी ओर उन संगठनों और व्यक्तियों की मंशा अब पूरी तरह उजागर हो चुकी है जो लगातार अदालतों, मंत्रालयों और कमेटियों की आड़ लेकर यह भ्रम फैलाते रहे कि इंडिया ताइक्वांडो अवैध है, अमान्य है या खिलाड़ियों के भविष्य को नष्ट कर रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि इन्हीं लोगों ने वर्षों तक खिलाड़ियों को वैश्विक मंच से दूर रखा, चयन प्रक्रियाओं को विवादों में फँसाया और ताइक्वांडो को एक ऐसे अंधकार में धकेला जहाँ प्रतिभाएँ गुम होती चली गईं। और आज जब भारतीय खिलाड़ी पहली बार इस स्तर पर पदक लेकर लौटे हैं, तो यह सफलता उन लोगों के लिए करारा तमाचा है जो राजनीति, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और भ्रम फैलाने के अलावा भारतीय ताइक्वांडो को कुछ नहीं दे सके।

यह समय सत्य और परिणामों के बीच चुनाव करने का है। एक ओर वे लोग हैं जिन्होंने कभी भारत को विश्व ताइक्वांडो की मुख्यधारा से जोड़ने का साहस नहीं दिखाया, जो सिर्फ कुर्सियों की लड़ाई लड़ते रहे और खिलाड़ियों का उपयोग अपनी कानूनी रणनीतियों के मोहरे की तरह करते रहे। दूसरी ओर वे लोग हैं जिन्होंने खिलाड़ियों को मौके दिए, उनके लिए रास्ते खोले और वास्तविक अंतर्राष्ट्रीय मंच दिलाया। खिलाड़ियों द्वारा जीते गए ये पदक इसी चुनाव का निष्पक्ष और कठोर फैसला हैं।

भारतीय ताइक्वांडो समुदाय आज जिस दोराहे पर खड़ा है, वहाँ यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि भविष्य उन लोगों का होगा जो खेल को राजनीति से ऊपर रखेंगे। विरोधी गुटों द्वारा फैलाए गए भ्रम, झूठे दस्तावेज़, अनर्गल आरोप और लगातार की गई व्यवधानकारी गतिविधियाँ अब खिलाड़ियों की सफलता के सामने फीकी पड़ चुकी हैं। अब यह बहस की बात ही नहीं रह गई है कि कौन-सा नेतृत्व खिलाड़ियों को विश्व स्तर पर ले जा सकता है, क्योंकि इसके प्रमाण पदकों के रूप में मौजूद हैं।

कल आए ये पदक केवल चमकते हुए धातु के मेडल नहीं, बल्कि एक कठोर संदेश हैं। एक संदेश उन लोगों के लिए जिन्होंने भारतीय ताइक्वांडो को दशकों तक बंधक बना रखा था। एक संदेश कि खेल राजनीति से बड़ा है। खिलाड़ियों का पसीना अदालतों के आदेशों से ज्यादा पवित्र है। और सबसे महत्वपूर्ण, सफलता हमेशा वहाँ जाती है जहाँ नीयत साफ हो और दिशा सही।

भारतीय ताइक्वांडो का यह ऐतिहासिक क्षण सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि एक निर्णायक मोड़ है। यह तय करता है कि भारत इस खेल में आगे किस दिशा में जाएगा, उनके साथ जो वर्षों से केवल अवरोध पैदा कर रहे हैं, या उन लोगों के साथ जिन्होंने वास्तविक उपलब्धियाँ दी हैं और भारतीय खिलाड़ियों को दुनिया के सर्वोच्च मंचों पर पहुँचाया है। वर्तमान परिस्थितियाँ और उपलब्धियाँ स्पष्ट रूप से दूसरे विकल्प की ओर संकेत कर रही हैं।

05/12/2025

आज का दिन भारतीय ताइक्वांडो के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से अंकित होने योग्य है। वर्ल्ड ताइक्वांडो के इस प्रतिष्ठित मंच पर भारत ने जो उपस्थिति दर्ज कराई है, वह केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि दशकों की मेहनत, धैर्य और अनुशासन का चमकदार परिणाम है। कोच संदीप कुमार और कोच अंकित मेर ने जिस परिपक्वता, रणनीति और संतुलित व्यवहार का परिचय दिया, वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच की सर्वोच्च मानक प्रणाली को स्पर्श करता है। उनकी जितनी प्रशंसा की जाए, कम है।

विश्व ताइक्वांडो पटल पर राष्ट्रगान न सुन पाने का दर्द अवश्य है, लेकिन इस पीड़ा के साथ एक अद्भुत संतोष भी जुड़ा है—कि भारत की ताइक्वांडो टीम आज विश्व की प्रतिस्पर्धी शक्तियों में अपना अलग, दृढ़ और सम्मानजनक स्थान बना चुकी है। “विशेष पहचान” इसलिए भी, क्योंकि पहली बार भारतीय खिलाड़ी न सिर्फ अंतिम चरणों तक पहुंचे हैं, बल्कि उन्होंने पूरे सम्मान, शालीनता और नियमों के प्रति पूर्ण निष्ठा के साथ खेल का स्तर ऊँचा उठाया है।

फाइनल में कोच एवं खिलाड़ी द्वारा प्रदर्शित अनुशासन, खेलभावना और विश्व नियमों का शत-प्रतिशत पालन भारतीय ताइक्वांडो के चरित्र का श्रेष्ठ परिचय देता है। आज या कल कुछ तुच्छ मानसिकता वाले लोग कोच संदीप की शालीनता पर प्रश्न उठा सकते हैं, परंतु यह समझना आवश्यक है कि ताइक्वांडो में दिए गए निर्णय अंतिम होते हैं और उन्हें भावनाओं या दबाव के आधार पर परिवर्तित नहीं किया जाता। विवादों से इतर, आज का दिन इस बात का जश्न मनाने का है कि—एक समय जहां हमारे खिलाड़ी क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने में संघर्ष करते थे, वहीं आज वे विश्व के शीर्ष मंच पर इतिहास लिख रहे हैं।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए कोच संदीप कुमार, अंकित मेर, भारतीय खिलाड़ियों और पूरे ताइक्वांडो परिवार को हार्दिक बधाई। साथ ही इस प्रगति के असली सूत्रधार, इंडिया ताइक्वांडो के अध्यक्ष नामदेव शिरगांवकर को भी विशेष सम्मान देना आवश्यक है, जिनके नेतृत्व, नीतिगत दृष्टिकोण और संगठित प्रयासों ने भारतीय ताइक्वांडो को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर नई मजबूती और दिशा प्रदान की है।

भारतीय ताइक्वांडो का भविष्य पहले से कहीं अधिक उज्ज्वल है—और आज का गौरवशाली दिन इसका प्रमाण है।

05/12/2025

वर्ल्ड ताइक्वांडो अंडर-21 चैम्पियनशिप नैरोबी, केन्या में भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन

वर्ल्ड ताइक्वांडो द्वारा आयोजित अंडर-21 विश्व चैम्पियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए नया इतिहास रच दिया है। नैरोबी, केन्या में चल रही इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में भारत ने पहली बार अपनी गरिमामय और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर उभरती भारतीय प्रतिभाओं ने अपने जज़्बे और कौशल से यह साबित किया कि देश में ताइक्वांडो खेल का भविष्य अब पहले से कहीं अधिक मजबूत और सुनहरा है।

प्रतियोगिता के पुरुष वर्ग में अब तक भारत दो पदक अपने नाम कर चुका है। यह उपलब्धि न सिर्फ खिलाड़ियों के अथक परिश्रम और वर्षों की अनुशासित तैयारी का परिणाम है, बल्कि भारतीय ताइक्वांडो की व्यवस्थित प्रगति का भी परिचायक है। इन पदकों ने भारतीय दल के आत्मविश्वास को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया है और कोचिंग स्टाफ की रणनीतियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सही साबित किया है।

महिला वर्ग में भी भारत की उम्मीदें बरकरार हैं, जहाँ कम से कम दो पदक की संभावना अभी जीवित है। भारतीय महिला खिलाड़ियों ने लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज की है। उनके प्रदर्शन ने यह संकेत स्पष्ट कर दिया है कि भारत जल्द ही महिला ताइक्वांडो में भी विश्व स्तर पर अपनी मजबूत पहचान स्थापित करने को तैयार है।
भारतीय ताइक्वांडो दल के प्रशिक्षक संदीप ने बताया कि, भारतीय खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने और उनके मनोबल को सुदृढ़ करने के लिए इंडिया ताइक्वांडो के अध्यक्ष नामदेव शिरगांवकर स्वयं दर्शक दीर्घा में मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने खिलाड़ियों में नया जोश भरा और राष्ट्रीय दल के भीतर एक सकारात्मक माहौल का निर्माण किया। अध्यक्ष की यह पहल भारतीय ताइक्वांडो प्रशासन की खिलाड़ियों के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

नैरोबी में भारतीय दल का यह प्रदर्शन न केवल देश के ताइक्वांडो इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ता है, बल्कि युवा खिलाड़ियों के लिए एक नई प्रेरणा भी स्थापित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस उपलब्धि के बाद भारत विश्व ताइक्वांडो मंच पर और अधिक सशक्त दावेदार के रूप में उभरकर सामने आएगा।

प्रतियोगिता के आगामी मुकाबलों पर अब पूरे भारतीय खेल जगत की निगाहें टिकी हुई हैं, और देश को उम्मीद है कि भारतीय खिलाड़ी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन को जारी रखते हुए तिरंगे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और भी ऊँचा उठाएँगे।

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