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(भानगढ़ फोर्ट: भूतों का गढ़ बोले जाने वाले इस फोर्ट का क्या है इतिहास??? जानें)राजस्थान के अलवर जिले की अरावली पर्वतमाला...
11/05/2023

(भानगढ़ फोर्ट: भूतों का गढ़ बोले जाने वाले इस फोर्ट का क्या है इतिहास??? जानें)

राजस्थान के अलवर जिले की अरावली पर्वतमाला के एक गांव में स्थित भानगढ़ किला एक नहीं बल्कि कई दिलचस्प कहानियों के लिए फेमस है। इस फोर्ट को राजस्थान के साथ-साथ भारत के सबसे डरावनी जगहों में भी शामिल किया जाता है। पहाड़ों से घिरा यह फोर्ट भूतों जा गढ़ माना जाता है। लेकिन ऐसे बहुत कम लोग ही है जो इस फोर्ट के इतिहास के बारे में जानते हैं। अगर आप भी भूतों का गढ़ बोले जाने वाले भानगढ़ फोर्ट का इतिहास जानना चाहते हैं, तो फिर आपको इस लेख को ज़रूर पढ़ना चाहिए। आइए जानते हैं।

इस फोर्ट का इतिहास काफी प्राचीन है। लगभग 17 वीं शताब्दी में बना हुआ यह किला प्राचीन और मध्य कालीन काला का एक नमूना माना जाता है। इस भुतहा फोर्ट को लेकर यह बोला जाता है कि आमेर के राजा ने अपने छोटे भाई के लिए बनवाया था। भानगढ़ का किला चारों ओर से पहाड़ों से घिरा है इसलिए इसकी चर्च बहुत होती है। कहा जाता है कि सूर्य उदय होने से पहले और सूर्य अस्त के बाद किसी को इस किले में रुकने की इजाजत किसी को नहीं है।

इस किले की कहानी बेहद ही दिलचस्प है। कहा जाता यहां किला बनवाने से पहले यहां रहने वाले एक साधू से अनुमति मांगी। साधू ने एक राजा के सामने एक शर्त रखा कि जब आप फोर्ट का निर्माण करें तो किले की छाया मेरे घर पर नहीं पड़ना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और किले की छाया साधू के घर पर पहुंच गई। इस बात से साधू नज़ारा हो गया है और उसने श्राप दिया जिसके बाद भानगढ़ किला पूरी तरह से बर्बाद हो गया और भूतिया किला बन गया।

अधिकांश लोगों का मानना है कि भानगढ़ किला भारत की सबसे डरावनी जगह है। कई लोगों का मानना है कि यहां दिन के उजाले में भी अकेले जाने की हिम्मत नहीं करता है। इस फोर्ट के बारे में कहा जाता है कि कुछ लोग शाम के समय यहां घूमने के लिए गए थे, लेकिन वापस लौटकर नहीं आए।

वहीं कुछ लोगों मानना है कि इस फोर्ट से औरत के चिल्लाने, चूड़ियां तोड़ने और रोने की आवाजें सुनी हैं। कुछ लोगों माना है कि ऐसा लगता है जैसे को साया पीछा कर रहा हो।

आपको बता दें कि भानगढ़ किला दिल्ली से लगभग 283 किलोमीटर दूर है। ऐसे में अगर अपनी कार से भी घूमने के लिए जा सकते हैं। देश के किसी भी हिस्से से आप अलवर रेलवे स्टेशन पर पहुंचकर आप भानगढ़ फोर्ट घूमने के लिए जा सकते हैं। अलवर रेलवे स्टेशन से टैक्सी या कैब लेकर आप आसानी से जा सकते हैं।

( #लाल_किले_का_इतिहास)( )लाल किले का निमार्ण शाहजहां ने 1638 ईसवी में करवाई थी। इसे विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया ग...
01/05/2023

( #लाल_किले_का_इतिहास)
( )
लाल किले का निमार्ण शाहजहां ने 1638 ईसवी में करवाई थी। इसे विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है। इस किले को बनवाने के लिए शाहजहां ने अपनी राजधानी आगरा को दिल्ली स्थानांतरित कर लिया था। यहां पर रहकर उन्‍होंने इस शानदार किले को दिल्ली के केन्द्र में यमुना नदी के पास बनवाया। यह यमुना नदीं के तीन तरफ से घिरा हुआ है, जिसके अद्भुत सौंदर्य और आर्कषण को देखते ही बनता है। इस किले का निर्माण 1638 से शुरू होकर 1648 ईसवी तक चला, इसके निमार्ण में करीब 10 साल का समय लगा। इस भव्य किला बनने की वजह से भारत की राजधानी दिल्ली को शाहजहांनाबाद कहा जाता था, साथ ही यह शाहजहां के शासनकाल की रचनात्मकता का मिसाल माना जाता था।
( #सैनिकल_प्रशिक्षण_के_लिए_इस्‍तेमाल)
देश की आजादी के बाद भी इस किले का महत्‍व कम नहीं हुआ, इसका उपयोग भारतीय सैनिकों को प्रशिक्षण देने में किया जाने लगा।, साथ ही यह एक प्रमुख पर्यटन स्थल के रुप में मशहूर हुआ, वहीं इसके आर्कषण और भव्यता की वजह से इसे 2007 में विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया था और आज इसकी खूबसूरती को देखने दुनिया के कोने-कोने से लोग दिल्ली आते हैं।
( #लाल_किले_की_संरचना)
( )
लाल किले का निर्माण लाल बलुआ पत्थर एवं सफेद संगमरमर के पत्थरों से किया गया है। इस किले के निर्माण के समय इसे कई बहुमूल्‍य रत्‍नों व सोने-चांदी से सजाया गया था, लेकिन जब मुगलों का शासन खत्‍म हुआ और अंग्रेजों ने लाल किले पर कब्‍जा जमाई तो उन्‍होंने इस किले से सभी बहुमूल्‍य रत्‍न और धातु निकाल ले गए। करीब डेढ़ किलोमीटर की परिधि में फैले भारत के इस भव्य ऐतिहासिक स्मारक के चारों तरफ करीब 30 मीटर ऊंची पत्थर की दीवार बनी हुई है, जिसमें मुगलकालीन वास्तुकला का इस्तेमाल कर बेहद सुंदर नक्काशी की गई है।
( ाल_किले_के_बारे_में_रोचक_तथ्य)
#1. शाहजहाँ ने अपनी राजधानी आगरा की जगह दिल्ली को बनाने के लिए एक पुराने किले की जगह पर 1638 में लाल किले का निर्माण शुरू करवाया जो 1648 में पूरा हुआ।
#2. जब 1648 में लाल किले का उदघाटन किया गया तब इसके मुख्य कमरों को कीमती पर्दों से सजाया गया। तुर्की की मखमल और चीन की रेशम से इसकी सजावट की गई।
#3. इसे बनाने में करीब एक करोड़ रूपए खर्च हुए थे। इस हिसाब से यह उस समय का सबसे महंगा किला था।
#4.एक करोड़ रूपए में से आधी रकम इसके शानदार महलों को बनाने में खर्च की गई थी।
#5. शाहजहाँ ने जन्नत की कल्पना करते हुए लाल किले के अंदर के कुछ भागों का निर्माण करवाया था जिसे अंग्रेजों ने जमीन दोज़ कर दिया था। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा खुदाई के दौरान लाल किले के असली तल का पता चला जो दिल्ली गेट के पास 3 फुट पर मिला है और नौबत खाने के पास इसकी गहराई छह फुट तक है।
#6. लाल किले के दो प्रवेश द्वार हैं। एक लाहौर गेट और दूसरा दिल्ली गेट। लाहौर गेट आम सैलानियों के लिए है और दिल्ली गेट सरकार के लिए।
#7. लाल किला भी ताजमहल की तरह यमुना नदी के किनारे पर बना हुआ है। लाल किले को घेरने वाली खाई को यमुना के जल से ही भरा जाता था।
#8. 11 मार्च 1783 ईसवी को सिखों ने लाल किले पर हल्ला बोल दिया और इसे मुगलों से आज़ाद करवा दिया। इस कारनामे का सिहरा सरदार बघेल सिंह धालीवाल को जाता है।
#9. लाल किले को बनाने के लिए लाल बालू पत्थरों का प्रयोग किया गया जिसके कारण ही इसका नाम लाल किला पड़ा।
#10. लाल किले की दीवारों की लंम्बाई 2.5 किलोमीटर है। दिवारों की ऊँचाई यमुना नदी की ओर 18 मीटर जबकि शहर की ओर 33 मीटर है।

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