01/05/2026
उज्जैन योग इंस्टीट्यूट में बुद्धत्व योग महोत्सव का हुआ आयोजन -
"बुद्धं शरणं योगं शरणं"
उज्जैन, 1 मई 2026
बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर उज्जैन योग इंस्टीट्यूट (इंदिरा गांधी चौराहा, फ्रीगंज) द्वारा 'बुद्धत्व योग महोत्सव 2026' का गरिमामय आयोजन किया गया। विश्व रिकॉर्ड होल्डर एवं योग गुरु डॉ. मिलिन्द्र त्रिपाठी के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध नागरिकों, प्रमुख योगचार्यो और योग साधकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
विशेष ध्यान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण:
सत्र की शुरुआत भगवान बुद्ध के शांति संदेशों और 'आनापानसती' ध्यान के साथ हुई। डॉ. मिलिन्द्र त्रिपाठी ने 'क्रोध से शांति की ओर' विषय पर चर्चा करते हुए क्रोध के वैज्ञानिक पहलुओं को समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे 90 सेकंड का सचेत विराम हमारे मस्तिष्क के 'अमिग्डाला हाईजैक' को रोककर हमें शांति की ओर ले जा सकता है। उन्होंने कहा, "बुद्धत्व जागरूकता की वह पराकाष्ठा है जिसे योग के माध्यम से हर व्यक्ति प्राप्त कर सकता है।"
योग गुरु डॉ.त्रिपाठी ने कहा जब हम 'बुद्धं शरणं योगं शरणं' कहते हैं, तो हम वास्तव में यह कह रहे हैं कि हम उस 'अवेयरनेस' की शरण में जा रहे हैं जो हमारे प्री-फ्रंटल कॉर्टेक्स को सक्रिय करती है और अमिग्डाला के डर को शांत करती है। बुद्ध का ध्यान केवल आँखें बंद करना नहीं है, बल्कि आँखें खोलकर अपने भीतर के शोर को पहचानना है।
योग शरीर को लचीला बनाता है, और बुद्ध का दर्शन मन को। जब शरीर और मन दोनों लचीले होते हैं, तो क्रोध का पत्थर उन पर चोट नहीं कर पाता, वह पानी की तरह बह जाता है।"
बुद्ध ने कहा है कि शांति कही बाहर नही बल्कि हमारे भीतर है इस बात में ही आज की हर समस्या का समाधान संभव है । सभी ने ध्यान के पश्चात "बुद्धं शरणं गच्छामि।"
"शांति: शांति: शांति:।" का उच्चारण किया ।
प्रमुख योगाचार्यों की गरिमामयी उपस्थिति:-
कार्यक्रम में उज्जैन के प्रमुख योग विशेषज्ञों और गणमान्य हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सेवानिवृत्त वन विभाग अधिकारी राम प्रसाद चौधरी, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पंकज पाटीदार, उर्मिला ठाकुर, रत्नेश व्यास और संगीता मेहर, शीतल बैरागी, टीना पलोड़, उमा कड़ोदिया, लता शर्मा, रेखा पंथी, प्रिया शाह, उषा ठाकुर, रिंकी कौशल, मोनिका श्रीकांत, वैभव बंसल, अंकित सोलंकी और मोनिका जाटव ने भी अपने विचार साझा किए और सामूहिक योग अभ्यास में सहभागिता की।
कार्यक्रम का उद्देश्य बुद्ध के करुणा और मैत्री के संदेश को योग के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाना है। कार्यक्रम के अंत में सभी साधकों ने विश्व शांति के लिए प्रार्थना की।