Cricket Lovers MaNish

Cricket Lovers MaNish Cricket, Sports, Etc....

बिजली की फुर्ती से रन आउट और फिर कैचकिंग कोहली ने जिता दिया हिंदुस्तान को मैच ❤️ऑस्ट्रेलिया के स्टार बल्लेबाज टिम डेविड ...
17/10/2022

बिजली की फुर्ती से रन आउट और फिर कैच
किंग कोहली ने जिता दिया हिंदुस्तान को मैच ❤️

ऑस्ट्रेलिया के स्टार बल्लेबाज टिम डेविड 2 गेंदों में 5 रन बनाकर बल्लेबाजी कर रहे थे। हर्षल ने जोश इंग्लिश को 19वें ओवर की दूसरी गेंद धीमी गति से डाली और उसने हल्के हाथों से खेल कर स्ट्राइक रोटेट करने का सोचा।

विराट ने बिजली सी रफ्तार से गेंद फील्ड की और स्ट्राइकर एंड पर थ्रो मार दिया। अपनी लाजवाब फील्डिंग से प्रैक्टिस मैच में टिम डेविड को मैदान के बाहर किया।

20वें ओवर की शमी की तीसरी गेंद लोअर फुलटॉस थी। पैट कमिंस ने करारा प्रहार किया लेकिन सीमा रेखा पर खड़े विराट ने परफेक्ट टाइमिंग के साथ जंप लेकर एक हाथ से कैच लपक लिया। 6 गेंदों पर 7 रनों की कमिंस की पारी का अंत कर दिया।

अंतिम लम्हों में 6 रनों से मिली जीत में विराट की शानदार फील्डिंग का बहुत योगदान रहा। सर्वश्रेष्ठ फील्डिंग के मामले में सबसे आगे किंग का नाम रहा।

बल्लेबाजी के अलावा फील्डिंग से भी मैच जिताएगा
अबकी बार विराट टी-20 वर्ल्ड कप हिंदुस्तान लाएगा..🏆💐

 ान मलिक को हिंदुस्तानी T-20 वर्ल्ड कप टीम में होना चाहिए था। जब आपके पास दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कार हो और आप उसे गैराज म...
15/10/2022

ान मलिक को हिंदुस्तानी T-20 वर्ल्ड कप टीम में होना चाहिए था। जब आपके पास दुनिया की सर्वश्रेष्ठ कार हो और आप उसे गैराज में छोड़ दें, तो फिर आपके पास ऐसी शानदार कार होने का क्या मतलब? यह बयान दुनिया के सबसे तेज गेंदबाज रहे ब्रेट ली ने दिया है। उनका मानना है कि उमरान की एक्सप्रेस स्पीड ऑस्ट्रेलियाई विकेट्स पर भारतीय टीम के बहुत काम आती। उमरान की एक्स्ट्रा पेस और बाउंस टीम इंडिया को मुकाबले जिताती। ब्रेट ली ने जोर देकर कहा कि 135-140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करने वाले और 155 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद डालने वाले बॉलर में फर्क होता है !

भारत के पूर्व बॉलिंग कोच भारत अरुण ने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई पिचों को देखते हुए हमने कुछ ज्यादा ही स्पिनर्स को ले लिया है। एक्सप्रेस स्पीड वाले तेज गेंदबाजों को मौका कम दिया है। अगर टीम में उमरान जैसा कोई तेज गेंदबाज होता तो शानदार होता। ऑस्ट्रेलिया में मैदान जरूर बड़े हैं लेकिन किसी भी मुकाबले में दो से अधिक स्पिनर टीम में शामिल नहीं किए जा सकते। ऐसे में एक स्पिनर की बजाए अगर उमरान को चुना जाता तो भारत की तेज गेंदबाजी को मजबूती मिलती।

आईपीएल 2022 की बात करें तो 14 मुकाबलों में 20.18 की एवरेज से उमरान ने 22 विकेट अपने नाम किया था। पावरप्ले और डेथ ओवर्स के अलावा मिडिल ओवर्स में भी उमरान ने दिग्गज बल्लेबाजों का काम तमाम किया था। IPL के एक मुकाबले में 4 और दूसरे में 5 विकेट लेकर उमरान ने साबित किया था कि उन्हें किसी भी मुकाबले का रुख बदलने में महारत हासिल है। सीजन के 'इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द ईयर' का खिताब जीतकर उमरान ने दुनिया को दिखा दिया था कि वह मुश्किल हालात में भी गेंदबाजी करने के काबिल है।

बीच में खबर आई थी कि उमरान मलिक को ऑस्ट्रेलिया भेजा जाएगा लेकिन बाद में पता चलता है कि बीसीसीआई उनको वीजा नहीं दिला पाया। नतीजा यह हुआ कि भारतीय इतिहास का सबसे तेज गेंदबाज वर्ल्ड कप के लिए ऑस्ट्रेलिया नहीं जा पाया। जब यह सब हो रहा था, उसी समय ईरानी कप में रेस्ट ऑफ इंडिया की तरफ से खेलते हुए पहली पारी में उमरान ने सिर्फ 25 रन देकर 3 विकेट चटकाया था। सौराष्ट्र के तमाम दिग्गज बल्लेबाजों को अपनी खौफनाक पेस और बाउंस के बूते दिन में तारे दिखाया था। अपनी धारदार गेंदबाजी की बदौलत टीम को 8 विकेट से मुकाबला जिताया था।

अब सवाल यह खड़ा होता है कि भारत के सबसे तेज गेंदबाज को अगर बीसीसीआई वीजा नहीं दिला सका तो वह क्या सिर्फ नाम के लिए दुनिया का सबसे शक्तिशाली बोर्ड है? चूंकि टीम में जसप्रीत बुमराह भी नहीं हैं तो अगर उमरान की एक्सप्रेस पेस के अभाव में गेंदबाजी उतनी बेहतर नहीं हो पाती तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? भरोसा है कि जब सवाल तीखे पूछे जाएंगे तो बीसीसीआई मौन होगा.......🏏

 ेंद्र सिंह धोनी... पहचान बताने की जरूरत नहीं क्योंकि नाम ही काफी है। धोनी के भारतीय टीम में सिलेक्शन का सफर जितना दिलचस...
15/10/2022

ेंद्र सिंह धोनी... पहचान बताने की जरूरत नहीं क्योंकि नाम ही काफी है। धोनी के भारतीय टीम में सिलेक्शन का सफर जितना दिलचस्प रहा है, कप्तान बनने का रास्ता उतना ही कांटों भरा। यकीन करना मुश्किल है कि #2007 में जो लोग धोनी के रांची वाले घर को भारत की वर्ल्ड कप में हार के बाद आग के हवाले कर देना चाहते थे, वही लोग उसी #टी20 वर्ल्ड कप की जीत के बाद आतिशबाजी करते हुए धोनी की झलक पाने को बेताब खड़े थे। इस पूरे घटनाक्रम के बारे में आगे बताएंगे लेकिन अब आपको लेकर चलते हैं साल #1992...! इस वक्त माही को उनके जानने वाले मही के नाम से पुकारते थे।

छठी कक्षा के छात्र थे और स्कूल फुटबॉल टीम के गोलकीपर। क्रिकेट टीम के विकेटकीपर का परिवार बेटे की पढ़ाई को लेकर सीरियस था। उधर उसका पत्ता कटा और इधर धोनी की बतौर विकेटकीपर क्रिकेट टीम में एंट्री हो गई। इसी उम्र से धोनी खेल को लेकर बहुत जुनूनी थे। बाकी दुनिया पढ़ाई के बाद बचे समय में क्रिकेट खेला करती थी, धोनी क्रिकेट से बचे समय में थोड़ी-बहुत पढ़ाई कर लेते थे। मेहनत रंग लाई और छोटी सी उम्र में बड़ा नाम बन गया। धोनी को क्रिकेट खेलते देखने के लिए कई किलोमीटर दूर से लोग फील्ड पर पहुंच जाते थे।

बिहार झारखंड में टेनिस बॉल स्टार प्लेयर्स को 500-1000 रुपए देकर नाइट टूर्नामेंट खेलने बुलाया जाता है। उस दौर में दिन से लेकर रात तक होने वाले मुकाबलों में धोनी से बड़ा टेनिस बॉल बल्लेबाज पूरे इलाके में दूसरा नहीं था। लोग धोनी के खेल पर जान छिड़कते थे और साथ में अफसोस भी करते थे कि दिल्ली-मुंबई में होता तो आसानी से इंडियन टीम में जगह बना लेता। यहां तो प्रतिभा गांव-मोहल्ले की मिट्टी में दम तोड़ देगी।

पर कहते हैं ना कि अगर ऊपर वाले ने प्रतिभा दी है तो दुनिया के सामने लाने का जरिया भी वही देगा। 18 साल की उम्र में धोनी ने बिहार की तरफ से रणजी खेला था। 22 के हुए तो पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में बतौर टिकट कलेक्टर नौकरी लग गई। छोटे शहरों की बड़ी समस्या यही होती है कि बच्चों को जब तक सरकारी नौकरी ना मिल जाए, मां-बाप आसमान सर पर उठाए रहते हैं। नौकरी चाहे चपरासी की ही क्यों ना हो लेकिन सरकारी होनी चाहिए। माही ने नौकरी कर तो ली लेकिन रास नहीं आई। रेलवे की तरफ से क्रिकेट खेले और एक दिन सब कुछ छोड़कर घर लौट गए।

धोनी रेलवे के काम में सबसे बेहतरीन थे लेकिन फिर भी उनके सीनियर माही से जलते थे। यह काम भी करता है और क्रिकेट भी खेल लेता है, कैसे? जानबूझकर धोनी को हद से ज्यादा काम दिया जाता था और उनका आत्मविश्वास तोड़ने की भरसक कोशिश की जाती थी। इन सब चक्करों में पड़ कर धोनी की जिंदगी थम गई थी। खैर, माही लौट आए और खुद को क्रिकेट में झोंक दिया।

2003-04 में इंडिया ए की टीम केन्या और जिंबाब्वे के दौरे पर जा रही थी। धोनी को चुन लिया गया। 7 कैच...4 स्टंपिंग...और 7 मुकाबलों में कुल 362 रन। माना कि विरोधी टीमें कमजोर थीं लेकिन अगर वहां ताकत नहीं दिखाते, तो शायद टीम इंडिया में कभी जगह नहीं बना पाते। उस वक्त सोशल मीडिया का दौर नहीं था लेकिन तब भी पूरे देश में कोहराम मच गया। कहा गया कि लंबी जुल्फों वाला एक बल्लेबाज आया है, जो हेलीकॉप्टर उड़ाकर छक्का मारता है। 2004 में भारत के लिए डेब्यू किया लेकिन बगैर खाता खोले आउट। अगली कुछ पारियां भी सस्ते में सिमट गईं।

डर था कि एक तो छोटा शहर और उस पर से कोई बैकिंग भी नहीं, अगर जल्दी बल्ला नहीं बोला तो शायद भारतीय टीम में जगह नसीब नहीं होगी। वनडे की पहली 4 पारियों में केवल 22 रन। विशाखापत्तनम का मैदान और पाकिस्तान के खिलाफ 123 गेंदों पर 148 रन। सबसे बड़े अपोजिशन के खिलाफ सबसे बड़ी पारी...! अब तो कोई माई का लाल चाह कर भी माही का बाल बांका नहीं कर सकता था। थोड़े ही दिनों के बाद श्रीलंका के खिलाफ किसी भी विकेटकीपर बल्लेबाज की तरफ से खेली गई 183 रनों की सबसे बड़ी पारी। एक दिवसीय सीरीज भारत के नाम और धोनी को मैन ऑफ द सीरीज का खिताब। अब यह तय हो गया था कि ये खिलाड़ी लंबा खेलेगा।

एक दिवसीय वर्ल्ड कप 2007 में भारतीय टीम का प्रदर्शन शर्मनाक रहा और हार के बाद क्रिकेट फैंस का गुस्सा भड़क उठा। कुछ लोग नाराजगी में माही के घर को आग लगा देना चाहते थे। उनके घर के बाहर भीड़ काफी बढ़ गई और मुर्दाबाद के नारों से आसमान भर गया। जिस शहर ने धोनी का क्रिकेट के प्रति जुनून देखा था, आज वही शहर माही के लिए अपशब्द सुन रहा था।

सितंबर 2007 में राहुल द्रविड़ से एकदिवसीय कप्तानी लेकर धोनी को सौंप दी गई और उसी महीने घोषित हुई T-20 टीम की कप्तानी भी माही के हिस्से आई। धोनी की रणनीति रंग लाई और पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में आखिरी ओवर कम अनुभवी जोगिंदर शर्मा को देकर धोनी ने इतिहास बना दिया। भारत T-20 विश्व कप जीत गया। अब उनके घर से बाहर बड़े-बड़े पोस्टर हाथों में लेकर लोग आतिशबाजी कर रहे थे। महेंद्र सिंह धोनी जिंदाबाद के नारों से रांची के साथ-साथ पूरा देश गूंज रहा था। जिस वर्ल्ड कप को सचिन और द्रविड़ जैसे सीनियर्स ने छोटा-मोटा समझकर खेलने से इंकार कर दिया, उसी से धोनी ने समूचे हिंदुस्तान को जश्न के समंदर में डुबा दिया। अब उस T-20 वर्ल्ड कप की जीत को 15 साल हो गए हैं।

हर दिल फिर एकबार उन हसीन यादों को दोहराना चाहता है, ऑस्ट्रेलिया से T-20 वर्ल्ड कप जीत भारत लाना चाहता है......

 #टी20 वर्ल्डकप से पहले लि गही तस्वीर जिसमें सभी टीमों के कप्तान उपलब्ध है!🏏🏏💐
15/10/2022

#टी20 वर्ल्डकप से पहले लि गही तस्वीर जिसमें सभी टीमों के कप्तान उपलब्ध है!🏏🏏💐

 िन और विराट में बेहतर कप्तान कौन? साल था 1996 और सचिन ने टीम इंडिया की कमान संभाली। देश को उनसे जीत और सिर्फ जीत की आस ...
15/10/2022

िन और विराट में बेहतर कप्तान कौन? साल था 1996 और सचिन ने टीम इंडिया की कमान संभाली। देश को उनसे जीत और सिर्फ जीत की आस थी। वह साल 2000 तक कप्तान रहे। इस दौरान भारत ने 25 टेस्ट मैच खेले, जिसमें केवल 4 मुकाबलों में हमें जीत मिली। 9 मैच टीम बुरी तरह हारी और 12 मुकाबले ड्रॉ रहे। कप्तान के तौर पर सचिन का टेस्ट क्रिकेट में विनिंग परसेंटेज रहा केवल 16...! चौंकने की जरूरत नहीं, यही हकीकत है।

बात अगर िराट कोहली की करते हैं तो वह साल 2014 से लेकर 2022 की शुरुआत तक टेस्ट क्रिकेट में भारतीय कप्तान रहे। इस दौरान टीम ने 68 टेस्ट खेले, जिनमें 40 जीते, 17 हारे और 11 ड्रॉ रहे। कप्तान के रूप में विराट का टेस्ट क्रिकेट में विनिंग परसेंटेज रहा 58.82। सचिन से साढ़े तीन गुने से भी ज्यादा...! अब यह भी जान लीजिए कि टेस्ट क्रिकेट में विराट भारत के सबसे सफल कप्तान हैं। धोनी और गांगुली का नंबर विराट के बाद आता है।

सचिन ने अपनी ऑटोबायोग्राफी 'प्लेइंग इट माय वे' मे लिखा है कि एक कप्तान के तौर पर वह सब कुछ आजमा कर देख चुके थे लेकिन टीम की किस्मत नहीं बदली। इस दौरान उन्होंने अपनी पत्नी अंजलि से कहा कि अब कुछ नहीं बचा, जिसे करके मैं लगातार मिल रहे हार के सिलसिले को तोड़ सकूं। हालात इतने बुरे थे कि सचिन ने क्रिकेट छोड़ने तक का मन बना लिया था।

1997 में भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर गई थी। वहां पहले 2 टेस्ट मैच ड्रॉ रहे। तीसरे मुकाबले की चौथी पारी में हिंदुस्तान को जीतने के लिए सिर्फ 120 रन बनाने थे। पर पूरी भारतीय टीम केवल 81 रन बनाकर आउट हो गई। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन खुद सिर्फ 4 रन बनाकर चलते बने। भारतीय टीम 38 रनों से मुकाबला गंवा बैठी। सचिन ने अगले दो दिनों तक खुद को कमरे में बंद रखा और लगातार उस हार के बारे में सोचते रहे।

सचिन का प्रदर्शन कप्तान के तौर पर तो निराशाजनक था ही, वह कप्तानी के दबाव में बतौर बल्लेबाज भी अपनी जिम्मेदारी निभा पाने में पूरी तरह नाकाम रहे थे। सचिन को हार से नफरत थी लेकिन वह कुछ भी नहीं कर सके। क्रिकेट के भगवान टेस्ट मैचों की कप्तानी में बुरी तरह फ्लॉप रहे।

#इंग्लैंड के खिलाफ उनके घर में 5-0 से टेस्ट सीरीज वाइटवॉश के बाद ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर भी टेस्ट सीरीज में भारत हार रहा था। ऐसे में धोनी ने 2014 में टेस्ट सीरीज के बीच में ही संन्यास ले लिया। इस वक्त टेस्ट रैंकिंग में टीम इंडिया 7वें पायदान पर थी। हालात बहुत मुश्किल थे। क्रिकेट पंडितों ने कह दिया कि कप्तान के तौर पर विराट सचिन से भी ज्यादा फ्लॉप रहेंगे।

विराट ने कप्तानी संभाली और टीम के हालात बदल दिए। कोहली ने अपनी कप्तानी में अक्टूबर 2016 से लेकर मार्च 2020 तक लगातार 42 महीनों के लिए टीम इंडिया को रैंकिंग में नंबर वन बनाया। इस दौरान टीम इंडिया ने 11 घरेलू सीरीज खेले लेकिन एक भी नहीं गंवाया। विराट ने भारत को 5 ओवरसीज टेस्ट सीरीज भी जिताया। बतौर टेस्ट कप्तान तब विराट ने इतिहास में सबसे ज्यादा 7 दोहरा शतक लगाया। 71 वर्षों बाद ऑस्ट्रेलिया में हिंदुस्तान को 2-1 से टेस्ट सीरीज जिताया।

अब आते हैं सचिन की वनडे कप्तानी पर। 1996 से 2000 के बीच सचिन ने 73 ODI मुकाबलों में कप्तानी की। इनमें भारत सिर्फ 23 मैच जीत सका, 43 में उसे हार मिली और 7 मुकाबले बगैर किसी परिणाम के खत्म हो गए। सचिन का विनिंग परसेंटेज था 35.07...! टेस्ट क्रिकेट के साथ ही वनडे क्रिकेट में भी सचिन की कप्तानी में भारतीय टीम की दुर्दशा जारी रही। उस दौरान हर छोटी-मोटी टीम भी हिंदुस्तान पर भारी रही।

वैसे तो विराट को वनडे की फुल टाइम कप्तानी 2017 में दी गई लेकिन उन्होंने 2013 से लेकर 2021 तक टीम इंडिया को 95 ODI में लीड किया। इनमें भारत 65 मुकाबले जीता, 27 हारा और 3 मुकाबलों का नतीजा नहीं आ सका। कोहली का विनिंग परसेंटेज रहा 70.43...! बतौर कप्तान विराट का वनडे क्रिकेट में जीत का प्रतिशत सचिन से दोगुना है। विराट से ज्यादा ODI क्रिकेट में विनिंग परसेंटेज किसी हिंदुस्तानी कप्तान का नहीं है।

चूंकि T-20 में सचिन ने भारत की कप्तानी नहीं की, इसलिए उसके आंकड़ों पर चर्चा नहीं कर रहे हैं।टेस्ट क्रिकेट और वनडे क्रिकेट के रिकॉर्ड बताते हैं कि सचिन एक तरफ जहां कप्तानी के दबाव में टूट कर बिखर गए, वहीं विराट कप्तानी मिलने के बाद योद्धा की तरह निखर गए। अब आप फैसला कीजिए, सचिन और विराट में बेहतर कप्तान कौnH...

हमारी छोरियां छोरों से कम हैं क्या....!भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने रचा इतिहास,,,सातवीं बार जीता महिला एशिया कप 🏆✌भारत ने...
15/10/2022

हमारी छोरियां छोरों से कम हैं क्या....!

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने रचा इतिहास,,,सातवीं बार जीता महिला एशिया कप 🏆✌
भारत ने ; फ़ाइनल में श्रीलंका को 8 विकेट से हराया
Smriti mandhana 25 गेंदों में 6 चौकों और 3 छक्कों की मदद से 51 रन बनाकर रहीं नाबाद..!!

इस उपलब्धि के लिए 🇮🇳✌
के समस्त खिलाड़ियों को शुभकामनाएं।
हमें देश की बेटियों पर गर्व हैं।
🏏
🏆



CrickCricket Lovers MaNishrCricket Lovers MaNishsCricket Lovers MaNish

वर्ल्ड कप की प्लेइंग 11 पर लग गई अंतिम मुहरबुमराह की जगह शमी बरपाएंगे बॉलिंग से कहर ❤️पीठ की चोट के कारण जसप्रीत बुमराह ...
14/10/2022

वर्ल्ड कप की प्लेइंग 11 पर लग गई अंतिम मुहर
बुमराह की जगह शमी बरपाएंगे बॉलिंग से कहर ❤️

पीठ की चोट के कारण जसप्रीत बुमराह T-20 वर्ल्ड कप से बाहर हो गए। ऐसे में उनकी जगह किसी अनुभवी तेज गेंदबाज को चुना जाना जरूरी था। कोई ऐसा जिसे ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर खेलने का पुराना अनुभव हो और जो बुमराह की ही तरह डेथ ओवर्स में कमाल दिखाए। टीम इंडिया को अपने बूते मुकाबले जिताए।

ऑस्ट्रेलिया में विकेट से गेंदबाजों को सीम और बाउंस मिलता है। ऐसे में मोहम्मद शमी से बेहतर ऑप्शन हिंदुस्तान के पास कोई हो नहीं सकता था। शमी ने जरूर 2021 T-20 वर्ल्ड कप में नामीबिया के खिलाफ भारत के लिए अपना आखिरी T-20 खेला है लेकिन उनका अनुभव उन्हें विशेष बनाता है। निश्चित ही शमी अभ्यास मैच खेलकर परिस्थितियों से तालमेल बिठा लेंगे, उसके बाद अपनी गेंदबाजी से विरोधियों की परेशानी बढ़ा देंगे।

शमी के T-20 करियर की बात करें तो 133 मुकाबले खेल कर उन्होंने 156 विकेट अपने नाम किए हैं। इस दौरान सिर्फ 8 की साधारण इकोनॉमी से रन दिए हैं। जिस तरह गुजरात टाइटंस को IPL 2022 में उनके पहले ही सीजन में 16 मुकाबले खेलकर 20 विकेट चटकाते हुए शमी ने चैंपियन बनाया था, फैंस को यकीन है कि वर्ल्ड कप में भी वही प्रदर्शन दोहराएगा। शमी है तो भरोसा रखो, वर्ल्ड कप भारत आएगा।

आखिरकार रंग ले आई करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों की दुआ
वर्ल्ड कप की टीम में मोहम्मद शमी का सिलेक्शन हुआ

ब्रेट ली ने खलीज टाइम्स से कहा, 'उमरान मलिक 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करता है. मेरा मतलब है कि जब आपके प...
14/10/2022

ब्रेट ली ने खलीज टाइम्स से कहा, 'उमरान मलिक 150 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करता है. मेरा मतलब है कि जब आपके पास दुनिया की बेस्ट कार हो और आप उसे गैराज में छोड़ दें, तब फिर आपके पास ऐसी कार होने का क्या मतलब रहेगा? उमरान मलिक को टी20 वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में शामिल होना चाहिए था!!
❣️

भारत एशिया कप फाइनल मेंसेमीफाइनल में थाईलैंड को 78 रनों से हराया.....🇮🇳
13/10/2022

भारत एशिया कप फाइनल में

सेमीफाइनल में थाईलैंड को 78 रनों से हराया.....🇮🇳

2021 में विराट को कप्तानी से हटाया गया। आज 2022 में सौरव गांगुली से बीसीसीआई अध्यक्ष पद छीना जा रहा है। कर्मा इस दुनिया ...
12/10/2022

2021 में विराट को कप्तानी से हटाया गया। आज 2022 में सौरव गांगुली से बीसीसीआई अध्यक्ष पद छीना जा रहा है। कर्मा इस दुनिया की सबसे बड़ी हकीकत है। ऊपरवाले के घर देर है, अंधेर नहीं...! 2021 में विराट बीसीसीआई के दबाव के कारण T-20 इंटरनेशनल की कप्तानी छोड़ने के बावजूद वनडे क्रिकेट में कप्तानी करना चाहते थे। तब उन्हें बिना बताए रोहित शर्मा को वनडे की कमान सौंप दी गई। पूछने पर सौरव गांगुली ने कहा था कि हम वाइट बॉल क्रिकेट में एक ही कप्तान चाहते थे, इसलिए चयनकर्ताओं ने यह फैसला लिया।

2022 में सौरव गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष बने रहना चाहते हैं लेकिन उनकी मर्जी के खिलाफ रोजर बिन्नी को अध्यक्ष बनाया जा रहा है। दादा को बोर्ड अध्यक्ष के पद से हटाया जा रहा है। कौन भुला सकता है वह दौर जब 2021 T-20 वर्ल्ड कप से पहले गांगुली ने बयान दिया कि हमने विराट को भारतीय T-20 टीम की कप्तानी ना छोड़ने के लिए बहुत समझाया लेकिन वह नहीं माने। इसलिए हमें मजबूरी में उनसे वनडे कप्तानी भी छीननी पड़ी।

इतने बड़े झूठ के बाद तब किंग कोहली सामने आए थे। उन्होंने बताया था कि मेरे T-20 टीम की कप्तानी छोड़ने के निर्णय को बीसीसीआई के द्वारा बहुत खुशी-खुशी स्वीकार किया गया था। मुझे एक बार भी कप्तान बने रहने के लिए किसी की तरफ से कुछ भी नहीं कहा गया था। साजिशों के दौर के बीच आखिरकार किंग ने टेस्ट क्रिकेट में भी कप्तानी छोड़ दी। अपने करोड़ों चाहने वालों का दिल तोड़ दिया।

विराट मतलब टेस्ट, वनडे और टी-20 इंटरनेशनल मैचों में विन परसेंटेज के मामले में भारतीय क्रिकेट इतिहास का सबसे सफलतम कप्तान। विराट ने भारत के लिए 68 टेस्ट मैचों में कप्तानी की, जिसमें टीम ने 40 मुकाबले जीते और कोहली के रहते टेस्ट में 58.81 का विनिंग परसेंटेज हासिल किया। जब 2014 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बीच सीरीज में धोनी ने कप्तानी छोड़ी तो भारत टेस्ट रैंकिंग में 7वें पायदान पर था। कोहली ने अपनी मेहनत के बूते उस टीम को फर्श से अर्श तक पहुंचाया। विराट ने अपनी कप्तानी में अक्टूबर 2016 से लेकर मार्च 2020 तक लगातार 42 महीने हिंदुस्तान को टेस्ट क्रिकेट की नंबर वन रैंकिंग वाली टीम बनाया।

2018-19 में आजादी के 71 साल बाद ऑस्ट्रेलिया को ऑस्ट्रेलिया में पहली बार टेस्ट सीरीज में 2-1 से हराया। विराट की कप्तानी में भारत ने 11 घरेलू टेस्ट सीरीज खेला लेकिन एक

नाम... मोहम्मद सिराज..! मैन ऑफ द सीरीज। साउथ अफ्रीका के खिलाफ 3 वनडे मुकाबलों में 20.80 की एवरेज से 5 विकेट। इकोनॉमी सिर...
12/10/2022

नाम... मोहम्मद सिराज..! मैन ऑफ द सीरीज। साउथ अफ्रीका के खिलाफ 3 वनडे मुकाबलों में 20.80 की एवरेज से 5 विकेट। इकोनॉमी सिर्फ 4.52 की...! 12 साल बाद घरेलू सीरीज में साउथ अफ्रीका पर 2-1 से जीत। एक वक्त पर जसप्रीत बुमराह के बाद भारत का सबसे बड़ा यॉर्कर स्पेशलिस्ट। फिर अचानक टीम इंडिया से बाहर कर दिया गया। मजबूरी में इंग्लैंड जाकर काउंटी क्रिकेट खेला और वहां भी धमाकेदार प्रदर्शन। वारविकशायर की तरफ से खेलते हुए पहले मैच की पहली पारी में ही 5 विकेट।

फैंस को समझ आ गया था कि सिराज में आज भी तेज गेंदबाजी को लेकर वही जज्बा है! अब सिर्फ मौके का इंतजार था...। जिस दौर में भारतीय तेज गेंदबाज आईपीएल में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन हिंदुस्तान के लिए खेलने से पहले चोटिल हो जाते हैं, उस वक्त देश के लिए जी-जान लगाकर खेलने वाला गेंदबाज है सिराज। उसको अंदाजा था कि अगर इस वनडे सीरीज में बढ़िया प्रदर्शन नहीं किया तो शायद आने वाले वक्त में इंडियन टीम में वापसी संभव नहीं हो पाएगी।

कहते हैं कि जब मौका बड़ा होता है, तो दिलेर सीना ठोक कर खड़ा होता है। सामने साउथ अफ्रीका की मजबूत टीम थी और इंडियन पेस अटैक को लीड करने की जिम्मेदारी सिराज के कंधों पर थी। लखनऊ के पहले मुकाबले में प्रदर्शन उम्मीद के अनुरूप नहीं रहा। 8 ओवर्स में बगैर कोई विकेट लिए 49 रन...! बिल में छुपे आलोचक बाहर निकल चुके थे और सिराज के चयन पर सवाल उठाए जाने लगे थे।

रांची में हिंदुस्तान 8 साल से कोई वनडे मुकाबला नहीं जीत सका था और अगर अबकी बार हार जाता तो सीरीज हाथ से निकल जाती। साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया और मैच के तीसरे ओवर की पहली गेंद। सिराज ने वाइड आउटसाइड ऑफ फुल लेंथ बॉल डाली। डीकॉक स्क्वायर ड्राइव खेलना चाहते थे लेकिन गेंद मिडिल ऑफ द बैट पर लगी नहीं। थिक इंसाइड एज विकेट पर और डीकॉक 5 रन बनाकर वापस पवेलियन की ओर। जश्न के मारे 5 फीट तो आसानी से हवा में कूद गए थे सिराज...! उनके उत्साह को देखकर खुशियों से सराबोर हो गया था समूचा हिंदुस्तान।

हेंड्रिक्स ने पहले मुकाबले में अच्छी बल्लेबाजी की थी और दूसरे मैच में भी अर्धशतक बनाकर खेल रहे थे। कप्तान शिखर को सिराज की याद आई। 32वें ओवर की दूसरी गेंद सिराज ने ऑफ स्टंप पर गुड लेंथ रखी। हेंड्रिक्स सीधा स्क्वायर लेग पर तैनात शाहबाज अहमद के हाथ में शॉर्ट आ

𝐂.𝐇.𝐀.𝐌.𝐏.𝐈.𝐎.𝐍.𝐒! 🏆   |  .....ManishCricket Lovers MaNish
11/10/2022

𝐂.𝐇.𝐀.𝐌.𝐏.𝐈.𝐎.𝐍.𝐒! 🏆



| .....

ManishCricket Lovers MaNish

Address

Newai
Tonk
304021

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Cricket Lovers MaNish posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Business

Send a message to Cricket Lovers MaNish:

Share