વાવેચી સરહદ ફાર્મર્સ પ્રોડ્યુસર કંપની

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દાતણ.....મહર્ષિ વાગભટ્ટ ના મત અનુસાર 9 થી 10પ્રકાર ના દાતણ આવે છે જે નીચે પ્રમાણે ના વૃક્ષ દ્વારા સરળતા થી ઉપલબ્ધ છે. કર...
28/12/2025

દાતણ.....
મહર્ષિ વાગભટ્ટ ના મત અનુસાર 9 થી 10પ્રકાર ના દાતણ આવે છે જે નીચે પ્રમાણે ના વૃક્ષ દ્વારા સરળતા થી ઉપલબ્ધ છે.
કરંજ, લીમડો , વડ, આંબો, જાંબુડો, બાવળ, ખીજડો, ખેર, આવેળ, અશોક(આસોપાલવ), ગુલર, આમળા, હરડે
આ ઉપર જણાવેલ તમામ વૃક્ષો ના દાતણ સદુપયોગ છે
📌 આંબા નું દાતણ જેઠ મહિનામાં કરવાથી શરીર માં કફ નું સમસ્યા ઘટે છે , વાળ કાળા રહે છે અને તંદુરસ્તી આખું વર્ષ જળવાઈ રહે છે આંબા નું દાતણ ત્યારે જ કરવું જ્યારે સાચી કેરી ની સાચી સિઝન ચાલુ થઈ જાય.
📌 લીમડા નું દાતણ હોળી પછી કરવું જોઈએ , આ દાતણ ઉનાળામાં ખાસ કરી ને ચૈત્ર વૈશાખ માં જરૂર કરવું જોઈએ , આ લીમડો અતિ ગુણકારી હોવાથી તે પિત નું શમન કરી ને ગરમી અને તજા ગરમી થી છુટકારો અપાવે છે.
📌 લીમડા ના દાતણ ઉનાળામાં જ કરવું
📌 વડ નું દાતણ ચોમાસામાં કરી શકાય અને ઉનાળા માં પણ કરી શકાય વડ ના દાતણ થી દાંત ના પેઢા મજબૂત થાય છે. વ્યસનના કારણે નબળા થયેલ દાંત સ્વસ્થ થાય છે.
📌 ખેર નું દાતણ ગરમી માં કરવું જોઈએ જે ઉનાળામાં મોઢા ના ચાંદા ઓ થી છુટકારો આપવે છે ,
📌 બાવળ નું દાતણ(દેશી બાવળ) નો ઉપયોગ કોઈ પણ ઋતુ માં કરાય પણ ખાસ શિયાળામાં વધુ ઉપયોગી છે. આ દેશી બાવળ ના દાતણ માં સલ્ફર હોઈ જે માણસ ને વ્યસન મુક્તિ માટે ખૂબ જ ઉપયોગી થાય છે.
📌 આમળા અને હરડે નું દાતણ કોઈ પણ ઋતુ માં કરાય , તેનું દાતણ નિરાપદ છે.
📌 ગુલર , ખીજડો ખેર આ પણ નિરાપદ દાતણ છે.આ સિવાય કણજી નું દાતણ મોઢા માં બનતું ખરાવ એસિડ પણ રોકે છે અને જેને દોડવા માં હાફ ચડતો હોઈ એમને આમળા ના વૃક્ષ નું દાતણ કરવું જોઈએ.
📌 કરંજ નુ દાતણ માત્ર કરવાથી મુખ ની દુર્ગ઼ધ દુર કરવાની સાથે સાથે દાંત માં થતા પાયોરીયા નામક રોગ ને મટાડે છે. એ પણ માત્ર આઠ દસ દિવસ નિયમિત દાતણ કરવાથી સાથે સાથે મોંધીદાટ ટુથપેસ્ટ કરતા સારી ફ્રેશનેસ પણ મળે છે આ દાતણ થી
યાદ રાખો
✏️ આ તમામ પ્રકાર ના દાતણ ત્રણ મહિના જ પૂરતા કરવા ત્યાર બાદ કોઈ બીજા વનસ્પતિ નું દાતણ લેવું.
✏️ આ દાતણ 8 આંગલ લાબું ને એક આંગલ જડુ લેવું અને રસદાર હોઈ એ લેવું.
✏️ ચાવી ગયેલ દાતણ ને કાપી ને નવેસરથી દાતણ કરવું.
✏️ દાતણ ને તાજું લઈ આવો તો વધુ સારું પણ જો ન મેળ આવે તો દાતણ કર્યા પછી વપરાયેલ ભાગ કાપી ને દાતણ ને પાણીમાં બોળી રાખવું .
આ દાતણ અતિ ઉપયોગી અને લાભદાયક છે.

05/08/2024

#જયશ્રીલખાપીરદાદા🫶🚩👏

05/08/2024

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05/08/2024
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29/12/2022

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किसान भाइयों आपकी हर समस्या का एकमात्र समाधान!
खराब मिट्टी को अच्छा करना।।
*खेत जमीन को बिनामूल्य भोजन उपलब्ध कराईये !*

हमें आज लगने लगा है कि रासायनिक खाद डाले बिना खेती नहीं हो सकती परंतु प्रकृति की व्यवस्था बिलकुल इस तरह की बनाई गई है,कि इसके अंदर यह प्रक्रिया अपने आप होती है। हम जानते हैं यदि गर्मी ज्यादा हो तो बरसात अच्छी होगी, अगर बरसात ज्यादा आएगी तो ठंड ज्यादा होगी। कहीं अगर वृक्ष ज्यादा हैं, तो उन प्रदेशों में बरसात ज़्यादा होती है, या जिस भाग में ज़्यादा वृक्ष हैं, उस भाग में ज्यादा वर्षा होती है। यह कुदरत की प्रणाली भी एक दूसरे पर आधारित है। एक चक्र के रूप में इसका कार्य चलता है, तात्पर्य यह कि हमारी मिट्टी में सभी प्रकार के पौधों को बड़ा करने की, फल-फूल देने की व्यवस्था प्रकृति ने बनाई है l और इस प्रणाली को अगर हम समझते हैं,तो हमें खेती करना काफी आसान हो जायेगा ,बगैर रासायनिक खाद के।

*जंगल में वनसंपदा का विकास*

किसान भाइयों, आप किसी जंगल में जाइए वहाँ हमें बड़े-बड़े विशाल वृक्ष देखने को मिलते हैं, छोटे-छोटे पौधे देखने को मिलते हैं, फल के पेड़ों में जो फल लगे हुए हैं, उन पर कोई व्यक्ति किसी रासायनिक दवाईयों का छिड़काव करने नहीं गया था परंतु उस फल के पेड़ में लगे बड़े-बड़े फल हमें कीड और रोग से मुक्त नज़र आते हैं। ऐसे फलों को हम तोड़कर खा सकते हैं, और वहाँ के स्थानिक लोग उन फलों को तोड़कर बाजार में बेचने भी आते हैं। किसान भाइयों, क्या उस जंगल में कोई एन पी के डालने गया था ? ना आप गए थे ना सरकार यह मुमकिन भी नहीं है | जब बिना एन पी के के वहाँ फसल उगती है तो हमारी खेती में एन पी के डालना क्यों आवश्यक है ? इस बात को आप अच्छे से समझ लेते हैं तो खेती करना हमारे लिए काफी आसान हो जायेगा।

*मल्टिप्लायर तकनिक खेत को प्राकृतिक बना देती है।*

मल्टीप्लायर खाद का निर्माण करते समय सभी बातों पर विचार किया है। मल्टीप्लायर में कार्बन की मात्रा प्रचंड प्रमाण में उपलब्ध होने के कारण सूक्ष्म जीवाणू बहुत ज्यादा तादाद में अपनी संख्या को बढ़ाएँगे और उतनी ही तादाद में मरने के बाद आपकी फसल को सभी प्रकार के पोषक तत्व मिलेंगे और आपकी फसल अच्छी तरह बढ़ेगी। इस खाद को डालने के बाद सबसे पहले फायदा आपने देखा की सूक्ष्म जीवाणू कि संख्या बढ़ रही है। दूसरा इसमें ये होगा की रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी में आई खराबी के नुकसान में सुधार आएगा इस वजह से मिट्टी का जो पीएच' बिगड़ गया है वह धीरे-धीरे मेंटेन होने लगेगा और पीएच' के मेंटेन होने से हमारी मिट्टी में जो खाद प्रकृती ने हमें दिया है उसका एक पदरी स्वरूप में यानि पहली स्टेज में रूपांतरण होने लगेगा ,तो हमारी फसल को ज्यादा प्रमाण में खाद मिलने लगेगा। इन सब कारण से फसल को ज्यादा प्रमाण में आवश्यक खाद मिलने लगेंगे। फसल ज्यादा उत्पादन देगी और पहले ही साल में कम से कम ५०% तक उत्पादन बढ़ेगा | साथ-साथ मिट्टी में सुधार होना शुरू होगा |

खेती की *समस्या हमेशा के लिए दूर कर के*, आपना *उत्पादन दुगुना* कीजिए l

क्या आपके खेत में निम्न में से कोई समस्या है?
1) *कीड़ और रोगों के प्रकोप में वृद्धि*
2) *उत्पादन में गिरावट*
3) *फसल वृद्धि का रूकना*
4) *मिट्टी का सख्त होना/बंजरता*
5) *उत्पादन लागत में वृद्धि*
6) *कम पानी में फसल उगाना*
7) *बाढ़, बेमौसम बारिश, ज्यादा बारिश... आदि। में हानि। *
8) * आप रासायनिक खेती से थक चुके हैं, आप 100% जैविक खेती करना चाहते हैं, लेकिन आपको कम लागत, कम मेहनत, 100% परिणाम का सही तरीका नहीं मिल रहा है। *
9) *कृषि घाटे का धंधा बन गया है।* (खर्च बढ़ा है, उत्पादन घटा है)

*13 साल के अनुसंधान* के माध्यम से एक किसान द्वारा बनाए गए फार्मूले का उपयोग आज भारत के *27 राज्यों के लाखों किसान* कर रहे हैं। उनका *उत्पादन दुगना होकर तिगुना हो गया है और उनका मुनाफा 5 गुना से ज्यादा हो गया है।* किसानों का *श्रम, समय और पैसा बचाने वाली*यह तकनीक हमें उपरोक्त *समस्याओं से हमेशा के लिए बचा सकती है।*

अधिक जाणकारी के लिये |
मल्टीप्लायर तकनिक
मोबाइल नंबर:- 09456024572

अधिक जानकारी के लिये आगे दि गयी लिंक के उपर क्लिक करके व्हिडिओ देख लिजिये :- https://youtu.be/4c5wRX4cYA4

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29/12/2022

मुझे परखना हो तो मेरे पास चले आना...
ये यहाँ वहाँ की खबरें तुम्हें गुमराह कर देंगी..!!💯

किसान भाइयों आपकी हर समस्या का एकमात्र समाधान!खराब मिट्टी को अच्छा करना।।*खेत जमीन को बिनामूल्य भोजन उपलब्ध कराईये !*हमे...
26/12/2022

किसान भाइयों आपकी हर समस्या का एकमात्र समाधान!
खराब मिट्टी को अच्छा करना।।
*खेत जमीन को बिनामूल्य भोजन उपलब्ध कराईये !*

हमें आज लगने लगा है कि रासायनिक खाद डाले बिना खेती नहीं हो सकती परंतु प्रकृति की व्यवस्था बिलकुल इस तरह की बनाई गई है,कि इसके अंदर यह प्रक्रिया अपने आप होती है। हम जानते हैं यदि गर्मी ज्यादा हो तो बरसात अच्छी होगी, अगर बरसात ज्यादा आएगी तो ठंड ज्यादा होगी। कहीं अगर वृक्ष ज्यादा हैं, तो उन प्रदेशों में बरसात ज़्यादा होती है, या जिस भाग में ज़्यादा वृक्ष हैं, उस भाग में ज्यादा वर्षा होती है। यह कुदरत की प्रणाली भी एक दूसरे पर आधारित है। एक चक्र के रूप में इसका कार्य चलता है, तात्पर्य यह कि हमारी मिट्टी में सभी प्रकार के पौधों को बड़ा करने की, फल-फूल देने की व्यवस्था प्रकृति ने बनाई है l और इस प्रणाली को अगर हम समझते हैं,तो हमें खेती करना काफी आसान हो जायेगा ,बगैर रासायनिक खाद के।

*जंगल में वनसंपदा का विकास*

किसान भाइयों, आप किसी जंगल में जाइए वहाँ हमें बड़े-बड़े विशाल वृक्ष देखने को मिलते हैं, छोटे-छोटे पौधे देखने को मिलते हैं, फल के पेड़ों में जो फल लगे हुए हैं, उन पर कोई व्यक्ति किसी रासायनिक दवाईयों का छिड़काव करने नहीं गया था परंतु उस फल के पेड़ में लगे बड़े-बड़े फल हमें कीड और रोग से मुक्त नज़र आते हैं। ऐसे फलों को हम तोड़कर खा सकते हैं, और वहाँ के स्थानिक लोग उन फलों को तोड़कर बाजार में बेचने भी आते हैं। किसान भाइयों, क्या उस जंगल में कोई एन पी के डालने गया था ? ना आप गए थे ना सरकार यह मुमकिन भी नहीं है | जब बिना एन पी के के वहाँ फसल उगती है तो हमारी खेती में एन पी के डालना क्यों आवश्यक है ? इस बात को आप अच्छे से समझ लेते हैं तो खेती करना हमारे लिए काफी आसान हो जायेगा।

*मल्टिप्लायर तकनिक खेत को प्राकृतिक बना देती है।*

मल्टीप्लायर खाद का निर्माण करते समय सभी बातों पर विचार किया है। मल्टीप्लायर में कार्बन की मात्रा प्रचंड प्रमाण में उपलब्ध होने के कारण सूक्ष्म जीवाणू बहुत ज्यादा तादाद में अपनी संख्या को बढ़ाएँगे और उतनी ही तादाद में मरने के बाद आपकी फसल को सभी प्रकार के पोषक तत्व मिलेंगे और आपकी फसल अच्छी तरह बढ़ेगी। इस खाद को डालने के बाद सबसे पहले फायदा आपने देखा की सूक्ष्म जीवाणू कि संख्या बढ़ रही है। दूसरा इसमें ये होगा की रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी में आई खराबी के नुकसान में सुधार आएगा इस वजह से मिट्टी का जो पीएच' बिगड़ गया है वह धीरे-धीरे मेंटेन होने लगेगा और पीएच' के मेंटेन होने से हमारी मिट्टी में जो खाद प्रकृती ने हमें दिया है उसका एक पदरी स्वरूप में यानि पहली स्टेज में रूपांतरण होने लगेगा ,तो हमारी फसल को ज्यादा प्रमाण में खाद मिलने लगेगा। इन सब कारण से फसल को ज्यादा प्रमाण में आवश्यक खाद मिलने लगेंगे। फसल ज्यादा उत्पादन देगी और पहले ही साल में कम से कम ५०% तक उत्पादन बढ़ेगा | साथ-साथ मिट्टी में सुधार होना शुरू होगा |

खेती की *समस्या हमेशा के लिए दूर कर के*, आपना *उत्पादन दुगुना* कीजिए l

क्या आपके खेत में निम्न में से कोई समस्या है?
1) *कीड़ और रोगों के प्रकोप में वृद्धि*
2) *उत्पादन में गिरावट*
3) *फसल वृद्धि का रूकना*
4) *मिट्टी का सख्त होना/बंजरता*
5) *उत्पादन लागत में वृद्धि*
6) *कम पानी में फसल उगाना*
7) *बाढ़, बेमौसम बारिश, ज्यादा बारिश... आदि। में हानि। *
8) * आप रासायनिक खेती से थक चुके हैं, आप 100% जैविक खेती करना चाहते हैं, लेकिन आपको कम लागत, कम मेहनत, 100% परिणाम का सही तरीका नहीं मिल रहा है। *
9) *कृषि घाटे का धंधा बन गया है।* (खर्च बढ़ा है, उत्पादन घटा है)
*13 साल के अनुसंधान* के माध्यम से एक किसान द्वारा बनाए गए फार्मूले का उपयोग आज भारत के *27 राज्यों के लाखों किसान* कर रहे हैं। उनका *उत्पादन दुगना होकर तिगुना हो गया है और उनका मुनाफा 5 गुना से ज्यादा हो गया है।* किसानों का *श्रम, समय और पैसा बचाने वाली*यह तकनीक हमें उपरोक्त *समस्याओं से हमेशा के लिए बचा सकती हैं।।
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17/12/2022

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*🤔'मिट्टी बचाना या सेंद्रिय खेती' करना क्यों जरूरी है?*

*🌱मिट्टी बचाएं : अगर ये ना हुआ, तो हमारे जीवन को खतरा है!*

https://youtu.be/9SScyOFM0Z4

*👉🌱बचाएं मिट्टी : हमारा अपना शरीर!*

https://youtu.be/t-hZ8RSufaI

*👉मिट्टी बचाएं : रसायनमुक्त खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ!*

https://youtu.be/sW-O-m7t154

*👉'मल्टीप्लायर तकनीक' कैसे काम करता है?*

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 #रासायनिक उर्वरक इस्तेमाल करने मिट्टी कड़ी होकर हो रही है बंजर!*गौर करने वाली बात यह है कि देश की कुल उर्वरक खपत में यूर...
10/12/2022

#रासायनिक उर्वरक इस्तेमाल करने मिट्टी कड़ी होकर हो रही है बंजर!*

गौर करने वाली बात यह है कि देश की कुल उर्वरक खपत में यूरिया का हिस्से में भारत हर साल 2.4 से 2.5 करोड़ टन यूरिया का उत्पादन करता है, लेकिन घरेलू मांग उत्पादन से अधिक है, जिसे पूरा करने के लिए प्रत्येक वर्ष 80 से 90 लाख टन यूरिया का आयात करना पड़ता है.

इस्तेमाल किए जाने वाले उर्वरकों में आधे से ज्यादा यूरिया है। यूरिया से इस अत्यधिक मोह के कारण मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों मसलन जिंक, जिप्सम, कॉपर सल्फेट व कैल्शियम की भारी कमी हो गई है।

1950-51 में रासायनिक उर्वरकों की सालाना खपत 70 हजार टन थी वहीं 2010-11 में यह बढक़र साढ़े पांच करोड़ टन हो गई है।
*यूरिया से इस अत्यधिक मोह के कारण मिट्टी में सूक्ष्म पोषक तत्वों मसलन जिंक, जिप्सम, कॉपर सल्फेट व कैल्शियम की भारी कमी हो गई है। यूरिया की अधिकता से कार्बनिक तत्वों की कमी हो गई है जिससे मिट्टी कड़ी होकर तेजी से अनुपजाऊ मिट्टी में तब्दील होती जा रही है।* गंगा के मैदानी इलाकों समेत अधिकांश जगह उत्पादन स्थिर या नकारात्मक हो गया है। रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते दखल से कृषि की लागत में भी अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है, लिहाजा छोटे किसान खेती छोड़ रहे हैं।
*नाइट्रोजन की अधिकता के कारण यूरिया पर्यावरण की दृष्टि से भी खतरनाक है और हमारी आसपास की आबो-हवा को भी तेजी से बिगाड़ रहा है।*

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*🌱मिट्टी बचाएं : अगर ये ना हुआ, तो हमारे जीवन को खतरा है!*

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*👉🌱बचाएं मिट्टी : हमारा अपना शरीर!*

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*👉मिट्टी बचाएं : रसायनमुक्त खेती मल्टीप्लायर तकनीक के साथ!*

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*👉'मल्टीप्लायर तकनीक' कैसे काम करता है?*

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