Devbhumi Agribusiness Ventures LLP

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आम का गुच्छेदार रोग (मैंगो मालफॉर्मेशन) एक गंभीर फफूंदजनित रोग है, यह रोग "फुसेरियम मोलिलीफोर्मे" नामक फफूंद के कारण होत...
04/01/2026

आम का गुच्छेदार रोग (मैंगो मालफॉर्मेशन) एक गंभीर फफूंदजनित रोग है, यह रोग "फुसेरियम मोलिलीफोर्मे" नामक फफूंद के कारण होता है। इससे पत्तियाँ, फूल और शाखाओं की सामान्य वृद्धि रुक जाती है। यह भारत की लगभग सभी आम किस्मों में पाया जाता है। इससे फूल और फल उत्पादन को भारी नुकसान पहुँचाता है। समय पर नियंत्रण न होने पर आम की उपज बहुत कम हो जाती है।

🌿 गुच्छेदार (मालफॉर्मेशन) रोग के प्रकार —

1️⃣ पत्तियों का गुच्छेदार रोग (Leaf Malformation):-
इसमें छोटी-छोटी पत्तियाँ गुच्छों में निकलती हैं, शाखाएँ बौनी रह जाती हैं और पेड़ का विकास रुक जाता है।

2️⃣ फूलों का गुच्छेदार रोग (Floral Malformation):-
इसमें फूल असामान्य गुच्छों में निकलते हैं, फल नहीं बनते या बहुत कम बनते हैं। यह प्रकार सबसे अधिक नुकसानदायक होता है।

✅️ गुच्छेदार रोग का नियंत्रण करने का तरीका —

■ रोगग्रस्त शाखाओं को काटकर खेत से बाहर निकालें और जला दें या मिट्टी में दबा दें।

■ कार्बेन्डाजिम 12% + मैंकोजेब 63% का छिड़काव करें। या फिर एज़ोक्सीस्ट्रोबिन 18.2% + डिफ़ेनोकोनाज़ोल 11.4% SC का 20 ml प्रति 15 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

■ पैक्लोबुट्राजोल 23% SC को 1 ml प्रति लीटर पानी में घोलकर पेड़ की जड़ों में डालें। इससे फूल बनने की प्रकिया तेज होती है और फलों की गुणवत्ता में सुधार होता है।

🌿 सही समय पर पहचान और प्रबंधन से आम के गुच्छेदार रोग को नियंत्रित किया जा सकता है और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है।

भाग 27. नमी बनाए रखने में मददगार :सफेदी का लेप तने में नमी बनाए रखने में सहायक होता है, खासकर गर्म और शुष्क मौसम में। यह...
04/01/2026

भाग 2

7. नमी बनाए रखने में मददगार :
सफेदी का लेप तने में नमी बनाए रखने में सहायक होता है, खासकर गर्म और शुष्क मौसम में। यह पेड़ को सूखे और गर्मी के प्रभाव से बचाता है।

✅️ तने पर सफेदी (बोर्डो पेस्ट) कैसे लगाएं :--

■ सामग्री :

● 1 किलो बुझा हुआ चूना

● 200 ग्राम तूतिया (कॉपर सल्फेट)

● 10 लीटर पानी

■ सफेदी लगाने का तरीका :

1. ऊपर दिए गए सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर घोल तैयार करें।

2. ब्रश की मदद से इस घोल को तने पर नीचे से ऊपर तक लगाएं।

3. विशेष ध्यान दें कि तने का कम से कम 4-5 फीट वाला हिस्सा अच्छी तरह से कवर हो।

■ कब लगाना चाहिए :

1. सफेदी लगाने का सबसे उपयुक्त समय जनवरी, मार्च और अक्टूबर-नवंबर होता है। यह वे समय हैं जब पेड़ की वृद्धि धीमी होती है और यह कीटों व बीमारियों के लिए कम संवेदनशील रहता है।

2. सफेदी लगाना एक सरल, सस्ता और बेहद प्रभावी तरीका है, जो आम के पेड़ को लंबे समय तक स्वस्थ, मजबूत और कीट-मुक्त बनाए रखता है।

बरसात के बाद मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे कीट, दीमक और छाल खाने वाले कीड़े पनपने लगते हैं। पेड़ पर सफेदी लगाना एक प...
04/01/2026

बरसात के बाद मिट्टी में नमी बनी रहती है, जिससे कीट, दीमक और छाल खाने वाले कीड़े पनपने लगते हैं। पेड़ पर सफेदी लगाना एक पारंपरिक कृषि तकनीक है, जिसे किसान पीढ़ियों से अपनाते आ रहे हैं। यह केवल पेड़ की सजावट के लिए नहीं, बल्कि उसे स्वस्थ रखने, कीट एवं बीमारियों से बचाने और फलोत्पादन बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

✅️ जनवरी लास्ट से मार्च में सफेदी (बोर्डो पेस्ट) लगाने के मुख्य कारण :--

1️⃣ कीटों से सुरक्षा :
सफेदी का लेप दीमक, छाल खाने वाले कीट और अन्य हानिकारक कीटों को दूर रखता है। यह तने पर एक सुरक्षात्मक परत बनाता है, जिससे कीट पेड़ की छाल तक आसानी से नहीं पहुँच पाते।

2️⃣ मिट्टी और जड़ों की सेहत के लिए फायदेमंद :
सफेदी में मिलाया गया कॉपर सल्फेट (तूतिया) फफूंदनाशक का काम करता है। यह मिट्टी में मौजूद रोगजनकों को भी खत्म करता है और पेड़ की जड़ों को सड़ने से बचाता है।
इससे जड़ों की वृद्धि बेहतर होती है और पेड़ का संपूर्ण स्वास्थ्य सुधरता है।

3️⃣ पौष्टिक तत्वों की आपूर्ति :
चूना मिट्टी में कुछ आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराता है। ये तत्व पेड़ की जड़ों और तने के माध्यम से अवशोषित होकर उसकी वृद्धि और विकास में मदद करते हैं।

4️⃣ तापमान नियंत्रण :
अक्टूबर–नवंबर में धूप तेज होती है, पर हवा ठंडी होती है।
इस समय तने का ऊपरी भाग धूप से गर्म और नीचे का भाग ठंडा रहता है, जिससे छाल में तनाव और दरारें बन सकती हैं।
चूना लगाने से तने का रंग सफेद हो जाता है, जो सूरज की किरणों को परावर्तित करता है। इससे पेड़ का तना अत्यधिक गर्म नहीं होता और उसकी नमी बनी रहती है।

5️⃣ छाल की दरारों की सुरक्षा :
पुराने पेड़ों की छाल में समय के साथ दरारें पड़ जाती हैं। ये दरारें रोग और कीटों का घर बन सकती हैं। सफेदी का लेप इन दरारों की रक्षा करता है और उन्हें बाहरी हानिकारक तत्वों से बचाता है।

6️⃣ पेड़ को स्वस्थ और फलों से भरपूर रखना :
सर्दियों के बाद फरवरी–मार्च में आम के पेड़ में नई कोंपलें, बौर (फूल) और फिर फल लगने लगते हैं। अगर अक्टूबर–नवंबर में सफेदी कर दी जाए तो पेड़ पूरी तरह स्वस्थ रहता है और नई कोंपलों को बेहतर पोषण व सुरक्षा मिलती है। इससे अगले मौसम में फलोत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ती हैं।

🌱 जनवरी में लहसुन के लिए ज़रूरी उपायजिससे कंद का साइज बड़ा, भरावदार और गुणवत्तायुक्त बनेजनवरी महीना लहसुन की फसल में कंद...
04/01/2026

🌱 जनवरी में लहसुन के लिए ज़रूरी उपाय
जिससे कंद का साइज बड़ा, भरावदार और गुणवत्तायुक्त बने
जनवरी महीना लहसुन की फसल में कंद बनने (Bulb Development) का सबसे अहम समय होता है। इस दौरान सिंचाई, पोषण और रोग-कीट नियंत्रण में थोड़ी सी भी गलती कंद के आकार और उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
1️⃣ सिंचाई प्रबंधन
✔️ 12–15 दिन के अंतर से हल्की सिंचाई करें
✔️ खेत में पानी का भराव न होने दें
✔️ ठंड के मौसम में अधिक पानी देने से कंद सड़ने की आशंका रहती है
2️⃣ निराई–गुड़ाई
✔️ जनवरी में एक हल्की निराई–गुड़ाई अवश्य करें
✔️ मिट्टी भुरभुरी रहने से कंद का विकास अच्छा होता है
✔️ खरपतवार पोषक तत्व और नमी चुरा लेते हैं, इन्हें समय पर हटाएँ
3️⃣ नाइट्रोजन (N) का सीमित उपयोग
❌ अधिक यूरिया का प्रयोग न करें
❌ ज़्यादा नाइट्रोजन से पत्तियाँ तो बढ़ती हैं, लेकिन कंद छोटे रह जाते हैं
✔️ आवश्यक होने पर अंतिम मात्रा:
👉 यूरिया 20–25 किलो/एकड़
4️⃣ पोटाश (Potash) – बड़े कंद के लिए सबसे ज़रूरी
✔️ पोटाश से कंद का वजन, सख्ती और भराव बढ़ता है
✔️ प्रयोग करें:
• MOP (पोटाश) 25–30 किलो/एकड़
या
• सल्फेट ऑफ पोटाश (SOP) 20 किलो/एकड़
5️⃣ सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients)
✔️ पत्तियों पर छिड़काव करें:
• बोरोन – 0.2%
• जिंक – 0.5%
• मैग्नीशियम सल्फेट – 1%
👉 10–12 दिन के अंतर से 1–2 छिड़काव पर्याप्त
6️⃣ सल्फर (Sulphur) – स्वाद व गुणवत्ता बढ़ाने के लिए
✔️ सल्फर से लहसुन की तीखापन, चमक और गुणवत्ता बढ़ती है
• बेंटोनाइट सल्फर 8–10 किलो/एकड़
या
• सल्फर 0.3% का छिड़काव
7️⃣ रोग व कीट नियंत्रण
❌ जनवरी में प्रमुख समस्याएँ:
• पत्ती झुलसा रोग
• थ्रिप्स (Trips)
✔️ बचाव के लिए:
• मैनकोजेब 2.5 ग्राम/लीटर
• थायोमेथोक्साम 0.25 ग्राम/लीटर
8️⃣ ठंड व पाले से बचाव
✔️ पाले की संभावना हो तो शाम के समय हल्की सिंचाई करें
✔️ आवश्यकता पड़ने पर खेत में धुआँ (Smoke) करें
✅ विशेष सलाह (Golden Tips)
✔️ जनवरी के बाद नाइट्रोजन का प्रयोग बंद कर दें
✔️ पानी और पोटाश का संतुलन ही बड़े कंद का सबसे बड़ा रहस्य है
✔️ स्वस्थ पत्तियाँ = भारी और बड़े कंद

आप सभी को शारदीय नवरात्र महानवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ ....इस पावन अवसर पर प्रार्थना है कि आपके जीवन में धर्म, न्याय, सद...
01/10/2025

आप सभी को शारदीय नवरात्र महानवमी की हार्दिक शुभकामनाएँ ....

इस पावन अवसर पर प्रार्थना है कि आपके जीवन में धर्म, न्याय, सद्भाव और सेवा की भावना सुदृढ़ हो तथा हर घर में सुख, शांति, यश और समृद्धि का वास हो।

।। जय माता दी ।। 🌺

HIMALAYA DAY
11/09/2025

HIMALAYA DAY

चीना(चीणा) शायद अब ये फसल विलुप्त हो चुकी है या बहुत कम मात्रा में उगाई जा रही है, कई वर्षों से देखा नही इस फसल को। चीना...
27/08/2025

चीना(चीणा) शायद अब ये फसल विलुप्त हो चुकी है या बहुत कम मात्रा में उगाई जा रही है, कई वर्षों से देखा नही इस फसल को।
चीना का भात खाने का जिसे भी सौभाग्य मिला है वह जानता है कि यह कितना टेस्टी होता है। पहले यह चावल का विकल्प था। इसको खाने में सबसे बड़ी सावधानियां है कि अगर आप इसे दाल या दही के साथ खा रहे हैं तो अपनी अपने साथ रखिए। चीना भारत में उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण लघु फसल है। फसल जल्दी पकने के कारण सूखे से बचने में सक्षम है। अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता वाली कम अवधि की फसल (60 -90 दिन) होने के कारण, यह सूखे की अवधि से बच जाती है और इसलिए शुष्क भूमि क्षेत्रों में गहन खेती के लिए बेहतर संभावनाएं प्रदान करती है। असिंचित परिस्थितियों में, बाजरा आमतौर पर खरीफ मौसम के दौरान उगाया जाता है, लेकिन जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां उच्च तीव्रता वाले चक्रों में ग्रीष्म फसल के रूप में इसे लाभप्रद रूप से उगाया जाता है।यह एक सीधा शाकीय वार्षिक पौधा होता है जो प्रचुर मात्रा में उगता है। इसका पौधा 45-100 सेंटीमीटर की ऊंचाई तक बढ़ता है। तना स्पष्ट रूप से सूजे हुए गांठों के साथ पतला होता है। जड़ें रेशेदार और उथली होती हैं। पत्तियाँ रेखीय, पतली होती हैं और पत्ती आवरण पूरे इंटर्नोड को घेरता है।चीना की पौष्टिकता प्रमुख अनाज की फसलों से बेहतर है। यह कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम, सोडियम, मैग्नीशियम, मैंगनीज, आयरन और जस्ता जैसे खनिजों का एक अच्छा स्त्रोत है। इसमें सभी आवश्यक अमीनो एसिड पाए जाते हैं। इसका आवश्यक अमीनो एसिड इंडेक्स 51 प्रतिशत है जो गेहूं की तुलना में अधिक है।
चीना का सेवन ब्लडप्रेशर और मधुमेह के मरीजों के लिए रामबाण होता है. चीना भिंगोकर, सुखाकर और भूनकर खा सकते हैं. इसे भात, खीर, रोटी आदि बनाकर खाया जाता है. पोषक तत्वों और फाइबर से भरपूर है. प्रति 100 ग्राम चीना में 13.11 ग्राम प्रोटीन और 11.18 ग्राम फाइबर के अतिरिक्त बड़ी मात्रा में आयरन और कार्बोहाइड्रेट पाये जाते हैं. इसलिए इसे पोषक तत्व फसल कहते हैं। इसका भात दही के साथ गजब का स्वाद देता है और भूनकर गुड मिलाकर खाने में भी मज़ेदार होता है ।

क्या करे किसान?
27/08/2025

क्या करे किसान?

उत्तराखंड के पौड़ी जिले में स्थित सिमालू गांव के श्री सत्यप्रकाश बड़थ्वाल, जो एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, ने अपनी 78 वर्ष की उम्र में भी खेती के प्रति अपनी लगन और कड़ी मेहनत का बेहतरीन परिचय दिया है। उन्होंने अपनी ज़मीन पर जैविक आमों की शानदार पैदावार तैयार की है।

​ये आम पूरी तरह से शुद्ध जैविक हैं और बिना किसी रासायनिक दवा या कृत्रिम तरीके से पकाए गए हैं, जिससे इनका स्वाद और गुणवत्ता बेमिसाल है।

​हालांकि, पहाड़ के कई किसानों की तरह, श्री बड़थ्वाल को भी अपने उत्पादों की मार्केटिंग में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से उन्हें अपनी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पा रहा।

मां भारती के अमर सपूत, देश की स्वाधीनता के लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाले, "आजाद हिन्द फौज" के संस्थापक और महान स्वतंत्रत...
18/08/2025

मां भारती के अमर सपूत, देश की स्वाधीनता के लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाले, "आजाद हिन्द फौज" के संस्थापक और महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस जी की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि 💐 🙏

उत्तराखंड के लोक पर्व  #हरेला की हार्दिक शुभकामनाएंहरेला सिर्फ एक त्यौहार न होकर उत्तराखंड की जीवनशैली का प्रतिबिंब है। ...
16/07/2025

उत्तराखंड के लोक पर्व #हरेला की हार्दिक शुभकामनाएं
हरेला सिर्फ एक त्यौहार न होकर उत्तराखंड की जीवनशैली का प्रतिबिंब है। यह प्रकृति के साथ संतुलन साधने वाला त्यौहार है प्रकृति संरक्षणऔर संवर्धन हमेशा से पहाड़ की परंपरा का अहम हिस्सा रहा है। आप सभी को प्रकृति और लोक परंपरा को समर्पित लोकपर्व हरेला की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

लोक पर्व हरेला हमारी समृद्ध संस्कृति का प्रतीक होने के साथ ही प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भी पर्व है।
हरयाव क सबू कूं शुभकानाएं 🌺

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Village Amoli, Jakhand, Kirti Nagar
Tehri-Garhwal
249161

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