30/05/2026
भगवान शिव सृष्टि के आदि और अनंत स्वरूप माने जाते हैं। वे करुणा, शक्ति, त्याग और तपस्या के प्रतीक हैं। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र, जटाओं में पवित्र गंगा और कंठ में नाग विराजमान है। त्रिशूल और डमरू उनके दिव्य स्वरूप की पहचान हैं। भगवान शिव अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होकर उन्हें सुख, शांति और आशीर्वाद प्रदान करते हैं। उनका शांत और रौद्र दोनों रूप जीवन के संतुलन का संदेश देता है।