Vaibhav Suryavanshi

Vaibhav Suryavanshi IND -19�,IPL team Rajasthan royals
BIHAR Ranji trophy, Vijay hajare trophy player वैभव सूर्यवंशी

05/05/2025

Prime minister vhaivavsoorvanshi

ताजपुर, समस्तीपुर से आईपीएल तक: 14 साल के वैभव सूर्यवंशी की संघर्ष से सफलता तक की कहानीसमस्तीपुर जिले के ताजपुर ब्लॉक के...
04/05/2025

ताजपुर, समस्तीपुर से आईपीएल तक: 14 साल के वैभव सूर्यवंशी की संघर्ष से सफलता तक की कहानी

समस्तीपुर जिले के ताजपुर ब्लॉक के छोटे से गांव मोतीपुर से निकले 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने अपने सपनों को हकीकत में बदलकर इतिहास रच दिया है। राजस्थान रॉयल्स की टीम में शामिल होकर वैभव ने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि पूरे बिहार का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

यह सफलता सिर्फ एक प्रतिभा की नहीं, बल्कि उस अथक संघर्ष की कहानी है जो हर सुबह 3 बजे शुरू होती थी। मां बेटे के लिए नाश्ता बनाती थीं, पिता दरवाजे पर खड़े इंतजार करते थे। लगभग 100 किलोमीटर दूर पटना के स्टेडियम तक सफर तय होता था। अक्टूबर की ठंड में भी परिवार का हौसला गर्म था। वहां पहुंचकर वैभव घंटों तक बिना थके बल्ला भांजता। भूख और थकान जैसे शब्दों से अनजान यह बच्चा बस एक ही चीज़ जानता था — मेहनत।

यह सिलसिला कई सालों तक यूं ही चलता रहा। एक ऐसे प्रदेश में जहां खिलाड़ियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का भी टोटा है, जहां खेल प्रतिभाओं को अपना घर छोड़कर बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है, वहां से वैभव का निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं है।

इस संघर्ष की कहानी में सबसे बड़ा योगदान है उनके किसान पिता का, जिन्होंने हर सप्ताह करीब 200 किलोमीटर की यात्रा सिर्फ इसलिए की ताकि बेटे का सपना टूटने न पाए। मां का भी वही समर्पण, जो हर दिन बेटे के लिए बिना शिकायत के खड़ी रहतीं, और अपने आंगन में सपनों का पौधा सींचती रहीं।

"होके मायूस न आंगन से उखाड़ो पौधे,
धूप बरसी है तो बारिश भी यहीं पर होगी।"

आज वही पौधा फल देने लगा है। सिर्फ 14 साल की उम्र में आईपीएल में खेलना, दुनिया की सबसे बड़ी क्रिकेट लीग में जगह बनाना, न सिर्फ वैभव के परिवार की जीत है बल्कि बिहार के उस सिस्टम पर एक जोरदार प्रहार भी है जो सालों से खिलाड़ियों की अनदेखी करता रहा है।

ब्रायन लारा के फैन वैभव सूर्यवंशी ने साबित कर दिया है कि अगर नीयत सच्ची हो, मेहनत अथक हो और परिवार का समर्थन अडिग हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रह सकता।

वैभव की यह उपलब्धि भविष्य के हजारों खिलाड़ियों के लिए उम्मीद की किरण है।

आदर्श..

बिहार में क्रिकेट को एक नया आयाम देने की तैयारी जोरों पर है. बिहार क्रिकेट एसोसिएशन आईपीएल की तर्ज पर पहली बार बिहार प्र...
04/05/2025

बिहार में क्रिकेट को एक नया आयाम देने की तैयारी जोरों पर है. बिहार क्रिकेट एसोसिएशन आईपीएल की तर्ज पर पहली बार बिहार प्रीमियर लीग (BPL) का आयोजन करने जा रहा है. जिसमें टी20 फॉर्मेट में 6 टीमें आमने-सामने होंगी. टूर्नामेंट जल्द ही पटना में खेला जाएगा.

Australia के पूर्व दिग्गज Greg Chappell, जो इंडिया के कोच भी रह चुके हैं, उन्होंने कहा 14 साल के Vaibhav Suryavanshi को ...
03/05/2025

Australia के पूर्व दिग्गज Greg Chappell, जो इंडिया के कोच भी रह चुके हैं, उन्होंने कहा 14 साल के Vaibhav Suryavanshi को Sachin Tendulkar जैसा समर्थन मिलना जरुरी है, कहीं Vinod Kambli या Prithvi Shaw जैसा हाल ना हो जाए

वैभव सूर्यवंशी के माता-पिता, संजीव सूर्यवंशी और सुनीता सूर्यवंशी, बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर गांव के एक साधारण कि...
03/05/2025

वैभव सूर्यवंशी के माता-पिता, संजीव सूर्यवंशी और सुनीता सूर्यवंशी, बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर गांव के एक साधारण किसान परिवार से हैं। संजीव एक किसान हैं, जिन्होंने वैभव के क्रिकेट सपनों को पूरा करने के लिए अपनी जमीन बेच दी और नौकरी छोड़ दी। सुनीता, एक गृहिणी, सुबह 2 बजे उठकर वैभव के लिए खाना बनाती थीं और केवल 3 घंटे सोती थीं।
संजीव कहते हैं, “वैभव अब सिर्फ मेरा बेटा नहीं, पूरे बिहार का बेटा है। उसकी मेहनत और हमारा बलिदान रंग लाया।” सुनीता भावुक होकर कहती हैं, “मेरे बेटे ने हमारे सपनों को सच कर दिखाया।” वैभव की 14 साल की उम्र में आईपीएल 2025 में 35 गेंदों पर शतक की उपलब्धि पर वे गर्व करते हैं, कहते हैं कि उसकी मेहनत और भगवान का आशीर्वाद उसे आगे ले जाएगा।

वैभव सूर्यवंशी का जन्म 27 मार्च 2011 को बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर गांव में हुआ था। उनके पिता संजीव सूर्यवंशी खुद...
03/05/2025

वैभव सूर्यवंशी का जन्म 27 मार्च 2011 को बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर गांव में हुआ था। उनके पिता संजीव सूर्यवंशी खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण उनका सपना अधूरा रह गया। उन्होंने अपने बेटे वैभव को क्रिकेटर बनाने का संकल्प लिया और उसी दिशा में मेहनत शुरू कर दी। वैभव ने बहुत कम उम्र में ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था और पांच साल की उम्र से ही मैदान पर अभ्यास करने लगे थे। जब उनके हमउम्र बच्चे स्कूल का बैग लेकर पढ़ाई में व्यस्त रहते थे, वैभव क्रिकेट किट बैग लेकर ट्रेनिंग के लिए 100 किलोमीटर दूर जाया करते थे।

वैभव की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा है। उनके पिता ने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए जमीन तक बेच दी। दस साल की उम्र में वैभव हर दिन 600 गेंदें खेलते थे और 16-17 साल के नेट बॉलर्स के सामने खुद को मजबूत बनाते गए। उनके संघर्ष और मेहनत का नतीजा यह रहा कि मात्र 14 साल की उम्र में उन्होंने आईपीएल में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया।

वैभव सूर्यवंशी पूर्वाषाढा नक्षत्र में जन्मे हैं, जिसे साहसी और पराक्रमी लोगों का नक्षत्र माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, इस नक्षत्र में जन्मे बच्चे मेहनती, भाग्यशाली और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होते हैं। वैभव ने भी अपने साहस और मेहनत से यह साबित कर दिया है कि कठिन परिश्रम और लगन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।

आईपीएल 2025 में गुजरात जायंट्स के खिलाफ राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए वैभव ने 35 गेंदों में शतक जड़कर सबको चौंका दिया। इस ऐतिहासिक पारी में उन्होंने एक ओवर में 28 रन बनाए, जो किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। खास बात यह रही कि यह ओवर अनुभवी तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा का था, जिन्होंने 2007 में भारत के लिए डेब्यू किया था और आज भारतीय क्रिकेट के सबसे अनुभवी गेंदबाजों में गिने जाते हैं।

ईशांत शर्मा का जन्म 2 सितंबर 1988 को दिल्ली में हुआ था और उन्होंने 2007 में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। अपनी लंबी कद-काठी और तेज गेंदबाजी के लिए मशहूर ईशांत ने भारतीय टीम को कई बार जीत दिलाई है। लेकिन वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा बल्लेबाजों के सामने अनुभवी गेंदबाज भी दबाव में आ जाते हैं, जैसा कि इस मैच में देखने को मिला।

वैभव की पढ़ाई भी जारी है। वे ताजपुर के डॉ. मुक्तेश्वर सिन्हा मॉडेस्टी स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र हैं। हालांकि उनका ज्यादा फोकस क्रिकेट पर है, लेकिन पढ़ाई में भी वे पीछे नहीं हैं। उनके पिता बताते हैं कि वैभव सुबह जल्दी उठकर ट्यूशन भी करते हैं और फिर क्रिकेट की प्रैक्टिस में लग जाते हैं।

वैभव सूर्यवंशी की इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे बिहार और भारत का नाम रोशन किया है। उनकी कहानी बताती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी बच्चा कम उम्र में बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है। आज वैभव आईपीएल के सबसे युवा शतकवीर के रूप में पहचाने जाते हैं और उन्हें 'बॉस बेबी' जैसे उपनाम भी मिल चुके हैं।

वैभव के संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों से यह सीख मिलती है कि सपने पूरे करने के लिए उम्र मायने नहीं रखती, बस जुनून और लगन जरूरी है। उनके पिता और परिवार की कुर्बानी, कोचों की मेहनत और खुद वैभव की लगन ने मिलकर एक नई मिसाल कायम की है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

जिस देश की आबादी 1 अरब से ज्यादा हो और विश्व का सबसे बड़ा देश हो उस देश में सर्फ एक ही 14 साल का वैभव सूर्यवंशी जैसा टैल...
02/05/2025

जिस देश की आबादी 1 अरब से ज्यादा हो और विश्व का सबसे बड़ा देश हो उस देश में सर्फ एक ही 14 साल का वैभव सूर्यवंशी जैसा टैलेंट तो कत्तई नहीं हो सकता है। क्रिकेट और अपने देश के क्रिकेटरों को प्यार तो हर कोई भारतीय करता है लेकिन केवल कुछ ही परसेंट लोग यह जानते होंगे कि यह क्रिकेटर किस प्रक्रिया के तहत चुनकर, जिला स्तर, राज्य स्तर, अंडर-19 टीम इंडिया या फिर #आईपीएल में खेलकर टीम इंडिया का सफर तय करते हैं।

हम में से ज्यादातर लोग यह तो अच्छी तरह जानते हैं कि हमारे देश में एक सरकारी नौकरी के लिए क्या योग्यता होती है और उसे हासिल करने वाले को किस तरह की चयन प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है लेकिन क्या ज्यादातर भारतीय क्रिकेट प्रशंसक यह बता सकते हैं कि एक क्रिकेटर के टीम इंडिया में आने तक का पूरा सफर कैसा होता है? क्या कोई उस पारदर्शी प्रोसेस को अच्छी तरह से डिफाइन कर सकता है जिससे गुजर कर महज 14 साल की उम्र वाले वैभव सूर्यवंशी आईपीएल तक का सफर तय कर लिए हैं और बाकी उनके हमउम्र साथी प्रैक्टस करने वाले अभी गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं?

सच तो यह है कि हम में से ज्यादातर खुद या अपने बच्चों को क्रिकेटर तो बनना या फिर बनाना चाहते हैं लेकिन ज्यादातर वह प्रॉसेस ही नहीं जानते जिससे शुरुआत की जा सके। क्या बीसीसीआई जिस तरह छोटे बच्चों के लिए हर गांवों में शिक्षा के लिए एक बेसिक स्कूल होता है जिसमें बच्चे निःशुल्क शिक्षा ग्रहण करते हैं उसी तर्ज पर गरीब बच्चों के लिए जिनके माता-पिता अपने बच्चों को भविष्य में क्रिकेटर बनाना चाहते हैं उनके लिए हर गांवों या ग्रामसभाओं में निःशुल्क बेसिक क्रिकेट अकादमी खोल सकती है?

यकीन मानिए जिस दिन ऐसा हो गया और हर आम आदमी जो क्रिकेट से प्यार करता है और क्रिकेटर बनना चाहता है या फिर अपने बच्चों को क्रिकेटर बनाना चाहता है उसे नजदीक में ही मुफ्त में क्रिकेट अकादमी मिलने लगी तो बहुत सारी 14 साल की उम्र वाले वैभव सूर्यवंशी जैसी प्रतिभाएं अपना जलवा बिखेरते नजर आने लगेंगे और सिफारिशी खिलाड़ियों की छुट्टी होते देर नहीं लगेगी।

चूहा बोरी उठा नहीं सकता लेकिन फाड़ तो सकता है। आज कल 14 साल के वैभव सूर्यवंशी का चक्कर भारत की महिला क्रिकेट टीम की खिला...
02/05/2025

चूहा बोरी उठा नहीं सकता लेकिन फाड़ तो सकता है। आज कल 14 साल के वैभव सूर्यवंशी का चक्कर भारत की महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ी श्रेयांका पाटिल के साथ में चलने लगा है। श्रेयांका पाटिल ने जब से वैभव की तेज बल्लेबाजी को देखा है तब से वह उनके ऊपर फिदा हो चुकी हैं। यह दोनों अब एक दूसरे से फोन नंबर भी एक्सचेंज कर चुके हैं और दोनों की रात में खूब बातचीत हो रही है।

राजस्थान टीम के मालिक ने कहा...
02/05/2025

राजस्थान टीम के मालिक ने कहा...

वैभव सुर्यवंशी का बयान 🗣
02/05/2025

वैभव सुर्यवंशी का बयान 🗣

आईपीएल में शतक के बाद जीरो पर आउट होने वाले बल्लेबाज।
02/05/2025

आईपीएल में शतक के बाद जीरो पर आउट होने वाले बल्लेबाज।

संजू सैमसन ने कहा: "जब मैंने ड्रेसिंग रूम में कहा कि आज मेरी जगह वैभव सूर्यवंशी ओपनिंग करेगा, तो सभी मुझ पर हंसने लगे। स...
01/05/2025

संजू सैमसन ने कहा: "जब मैंने ड्रेसिंग रूम में कहा कि आज मेरी जगह वैभव सूर्यवंशी ओपनिंग करेगा, तो सभी मुझ पर हंसने लगे। सबको लगा कि यह बच्चा क्या कर पाएगा। लेकिन आज वैभव ने न सिर्फ मेरी इज्जत बचाई, बल्कि खुद को साबित भी किया। मैं चाहता हूं कि वह आगे भी राजस्थान के लिए ओपनिंग करता रहे।"

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