03/05/2025
वैभव सूर्यवंशी का जन्म 27 मार्च 2011 को बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर गांव में हुआ था। उनके पिता संजीव सूर्यवंशी खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण उनका सपना अधूरा रह गया। उन्होंने अपने बेटे वैभव को क्रिकेटर बनाने का संकल्प लिया और उसी दिशा में मेहनत शुरू कर दी। वैभव ने बहुत कम उम्र में ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था और पांच साल की उम्र से ही मैदान पर अभ्यास करने लगे थे। जब उनके हमउम्र बच्चे स्कूल का बैग लेकर पढ़ाई में व्यस्त रहते थे, वैभव क्रिकेट किट बैग लेकर ट्रेनिंग के लिए 100 किलोमीटर दूर जाया करते थे।
वैभव की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान रहा है। उनके पिता ने बेटे के सपने को पूरा करने के लिए जमीन तक बेच दी। दस साल की उम्र में वैभव हर दिन 600 गेंदें खेलते थे और 16-17 साल के नेट बॉलर्स के सामने खुद को मजबूत बनाते गए। उनके संघर्ष और मेहनत का नतीजा यह रहा कि मात्र 14 साल की उम्र में उन्होंने आईपीएल में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय खिलाड़ी बनकर इतिहास रच दिया।
वैभव सूर्यवंशी पूर्वाषाढा नक्षत्र में जन्मे हैं, जिसे साहसी और पराक्रमी लोगों का नक्षत्र माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, इस नक्षत्र में जन्मे बच्चे मेहनती, भाग्यशाली और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होते हैं। वैभव ने भी अपने साहस और मेहनत से यह साबित कर दिया है कि कठिन परिश्रम और लगन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
आईपीएल 2025 में गुजरात जायंट्स के खिलाफ राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए वैभव ने 35 गेंदों में शतक जड़कर सबको चौंका दिया। इस ऐतिहासिक पारी में उन्होंने एक ओवर में 28 रन बनाए, जो किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि है। खास बात यह रही कि यह ओवर अनुभवी तेज गेंदबाज ईशांत शर्मा का था, जिन्होंने 2007 में भारत के लिए डेब्यू किया था और आज भारतीय क्रिकेट के सबसे अनुभवी गेंदबाजों में गिने जाते हैं।
ईशांत शर्मा का जन्म 2 सितंबर 1988 को दिल्ली में हुआ था और उन्होंने 2007 में बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट डेब्यू किया था। अपनी लंबी कद-काठी और तेज गेंदबाजी के लिए मशहूर ईशांत ने भारतीय टीम को कई बार जीत दिलाई है। लेकिन वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा बल्लेबाजों के सामने अनुभवी गेंदबाज भी दबाव में आ जाते हैं, जैसा कि इस मैच में देखने को मिला।
वैभव की पढ़ाई भी जारी है। वे ताजपुर के डॉ. मुक्तेश्वर सिन्हा मॉडेस्टी स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र हैं। हालांकि उनका ज्यादा फोकस क्रिकेट पर है, लेकिन पढ़ाई में भी वे पीछे नहीं हैं। उनके पिता बताते हैं कि वैभव सुबह जल्दी उठकर ट्यूशन भी करते हैं और फिर क्रिकेट की प्रैक्टिस में लग जाते हैं।
वैभव सूर्यवंशी की इस उपलब्धि ने न सिर्फ उनके परिवार, बल्कि पूरे बिहार और भारत का नाम रोशन किया है। उनकी कहानी बताती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी बच्चा कम उम्र में बड़ा मुकाम हासिल कर सकता है। आज वैभव आईपीएल के सबसे युवा शतकवीर के रूप में पहचाने जाते हैं और उन्हें 'बॉस बेबी' जैसे उपनाम भी मिल चुके हैं।
वैभव के संघर्ष, मेहनत और उपलब्धियों से यह सीख मिलती है कि सपने पूरे करने के लिए उम्र मायने नहीं रखती, बस जुनून और लगन जरूरी है। उनके पिता और परिवार की कुर्बानी, कोचों की मेहनत और खुद वैभव की लगन ने मिलकर एक नई मिसाल कायम की है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।