07/08/2023
गाय के शुद्ध देशी घी के फायदे .
तुम सब घी खाओगे। गाय का घी पीला होता है और स्वाद में थोड़ा चरचरा होता है, इसलिए अधिकांश लोग इसे नहीं खाते। इसलिए अधिकांश लोगों को भैंस का घी पसंद है। माना जाता है कि हमारे स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा खाना घी है। गाय का घी कई प्रकार के रोगों में उपचार के रूप में प्रयोग किया जाता है, इसलिए इसे आयुर्वेद में अमृत के समान बताया गया है।
हमारे ऋषि-मुनियों ने बताया गया ज्ञान और उपयोगिता आज हमारे युवा वर्ग से बहुत दूर है। लेकिन महान वैज्ञानिक आज भी पुरानी खोजों की पुष्टि करते हैं। क्या आप जानते हैं कि गाय के घी की गुणवत्ता बहुत कम लोग जानते हैं। गाय के शुद्ध देशी घी के 35 लाभ जानें, जो हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण हैं।
गाय के शुद्ध देशी घी से मिलने वाले 35 लाभ:
माना जाता है कि पुराना घी गुणी होता है। यह सच है कि गाय का घी अधिक गुणी होता जाता है जब वह अधिक पुराना होता है। पुराना घी घाव को मिटाता है, मस्तक रोग, नेत्र रोग, कर्ण रोग, मूच्छा, ज्वर, श्वांस, खांसी, संग्रहणी, उन्माद, कृमि, विष और श्रवण शक्ति को बढ़ाता है। दस साल पुराने घी को कोंच और ग्यारह साल पुराने घी को महाघृत कहा जाता है।
हर रात सोते समय दो बूंद देशी गाय का गुनगुना घी दोनों नाक के छेदों में डालें, इससे स्मरण शक्ति बढ़ेगी। रात भर, यह घी मस्तिष्क को विद्युत तरंगों से चार्ज करता रहता है और उसे प्राणवायु देता रहता है। इससे मस्तिष्क बहुत शक्तिशाली होता है। श्वास प्रवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कई पुराने रोग ठीक होते हैं अगर यह कई महीने तक प्रातः, अपराह्न और रात को सोते समय की जाती रहे।
वायुमार्ग खुलने से श्वास की बाधा दूर होती है और शुष्कता, सूजन, रक्तस्राव, सर्दी, सायनस संक्रमण, नासिका गिल्टी आदि ठीक होते हैं। नाक में घी डालने के बाद दो बूंद घी को नाभि में डालें और अंगुली से दोनों ओर थोड़ी देर घुमाएं। गाय का घी अपने हाथ से पांव के तलवों पर मालिश करें; इससे आपको अच्छी नींद आती है, आपको शांति मिलती है और आप खुश हो जाते हैं।
देसी गाय का घी रसायन है। जो युवावस्था को बचाता है और बुढ़ापे को दूर करता है। काली गाय का घी खाने से एक बूढ़ा आदमी भी जवान लगता है।
गाय के घी में स्वर्ण छार पाए जाते हैं, जिसके अद्भुत औषधिय गुण हैं। जो गाय के घी के अलावा किसी भी दूसरे घी में नहीं होते। गाय का घी सर्वश्रेष्ठ है।
गाय के घी में बीटा-कैरोटीन, वैक्सीन एसिड और ब्यूट्रिक एसिड जैसे माइक्रोन्यूट्रीस होते हैं। इसे खाने से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से बच सकते हैं। गाय के घी से बनने वाले शरीर के माइक्रोन्यूट्रीस में कैंसर को मारने की क्षमता होती है।
गाय का घी शारीरिक और मानसिक शक्ति को बढ़ाता है और बल और पौरुष को बढ़ाता है।
गाय की नाक में घी डालने से वह कोमा से बाहर निकलकर वापस चेतना प्राप्त करती है। गाय की नाक में घी डालने से पागलपन मिट जाता है। गाय का घी नाक में डालकर एलर्जी दूर कर सकते हैं।
आयुर्वेदिक चिकित्सकों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति अनिद्रा से परेशान है, तो शाम को दोनों नथुनो में गाय के घी की दो-दो बूंद डालकर रात को नाभि और पैर के तलुओं में गौघृत लगाकर लेट जाएगा।
नाक में घी डालने से दिमाग तारो ताजा होता है और नाक की खुश्की दूर होती है। गाय का घी नाक में डालने से भी लकवा दूर होता है।
गाय का घी नियमित रूप से खाने से कब्ज और एसिडिटी कम हो जाते हैं।
अगर आपको कमजोरी महसूस होती है, तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री मिलाकर पी लें।
गाय की नाक में घी लगाने से बाल झड़ना खत्म हो जाता है और नए बाल भी निकलने लगते हैं।
गाय का घी नाक में डालने से याददाश्त तेज होती है और मन शांत होता है। इसलिए पहले लोगों को साहस और ज्ञान की कमी नहीं थी, वे मुंह-जबानी पूरा ग्रन्थ पढ़ते थे।
खाली गाय को आधा चम्मच घी देने से हिचकी रुक जाएगी।
गाय की नाक में घी डालने से कान का पर्दा बिना किसी आपरेशन के ठीक हो जाता है।
गाय के घी की मालिश करने से हथेली और पैरों में जलन दूर होगी।
गाय का घी कैंसर के जन्म और फैलने को आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है। देसी गाय का घी कैंसर को मारने में अचूक है। इसे खाने से स्तन और आंत कैंसर से बच सकते हैं।
बच्चों को छाती और पीठ पर गाय का पुराना घी मालिश करने से कफ की शिकायत दूर होती है।
जब आपके हाथों में जलन हो तो गाय के घी को तलवे पर मालिश करें, इससे जलन दूर हो जाएगी।
बीस से पच्चीस ग्राम घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग और गांझे का नशा कम होता है।
सांप काटने पर 100-150 ग्राम घी पिलायें, उसके बाद जितना गुनगुना पानी पिलायें। इससे सांप का विष कम होगा, लेकिन उलटी और दस्त होंगे।
गाय का देसी घी फफोलो को आराम देता है।
सुबह-शाम दो बूंद देसी गाय का घी नाक में डालने से माइग्रेन का दर्द कम हो जाता है। सिर दर्द होने पर गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करने से शरीर गर्म होता है।
गाय का घी, जिस व्यक्ति को चिकनाइ खाने की मनाही है, हृदय को मजबूत बनाता है।
सेक्स के बाद थकान होने पर एक चम्मच देसी गाय का घी को गर्म दूध में मिलाकर पी लें। इससे थकान कम होगी।
याद रखें कि गाय का घी कॉलेस्ट्रॉल को नहीं बढ़ाता है। वह वजन नहीं बढ़ाता, बल्कि उसे संतुलित रखता है। कमजोर यानी का वजन बढ़ता है, जबकि मोटे यानी का वजन कम होता है।
सुबह खाली पेट एक चम्मच गाय का शुद्ध घी, एक चम्मच बूरा और एक चौथाई चम्मच पिसी काली मिर्च को मिलाकर चाटने और रात को सोते समय ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की रौशनी बढ़ती है।
गाय का घी LDL (अच्छा) कोलेसट्रॉल है। गाय का घी उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों को ही खाना चाहिए। यह भी एक अच्छा टॉनिक है। गाय का घी दिन में तीन बार नाक में लगाने से त्रिदोष (वात, पित्त और कफ) को संतुलित किया जा सकता है।
ठन्डे जल में गाय का घी फेंटकर पानी से अलग कर ले। इसे लगभग सौ बार करें और थोड़ा सा कपूर डालकर मिलाएं। इस प्रक्रिया से घी को एक प्रभावी औषधि में बदल दिया जाता है, जो त्वचा से जुड़े हर चर्म रोगों में प्रभावी मलहम के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। सौराइशिस में भी काम करता है।
पिसा हुआ काला चना (घी और छिलका सहित) और पिसी शक्कर (बूरा) समान मात्रा में मिलाकर लड्डू में डालें। स्त्रियों को प्रदर रोग में आराम मिलता है, और पुरुषों का शरीर मोटा, ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है. प्रातः खाली पेट एक गिलास मीठा कुनकुना दूध घूँट-घूँट कर पीना चाहिए। तो क्या आप अभी भी गाय का शुद्ध घी घर लाकर खाएं और कुछ पुराना होने को रखना चाहते हैं? याद रखें कि आपको इसकी जरूरत हो सकती है।
कान में तेज दर्द में फायदेमंद: कान के पर्दे के इलाज के लिए अक्सर कान का ऑपरेशन किया जाता है अगर कोई व्यक्ति का कान का पर्दा खराब हो गया है, जो उसे तेज दर्द या कम श्रवण शक्ति देता है. लेकिन अगर आप गाय के घी से भी इसका इलाज कर सकते हैं, तो ऑपरेशन की क्या जरूरत है? गाय के घी की कुछ बूंदें कान में डालने से आपको फायदा होगा।
गैस से जुड़ी शिकायतें: गाय का घी कब्ज और एसिडिटी को दूर करता है, इसलिए गैस की शिकायत वाले लोगों के लिए सबसे अच्छा है।
हिचकियों में मदद: हमें अक्सर हिचकिचाहट आती है और वह लंबे समय तक रहती है, जिससे हमें बहुत मुसीबत झेलनी पड़ती है। यदि आप ऐसी स्थिति में आधा चम्मच देसी गाय का घी खाते हैं, तो आपको हिचकी नहीं आती।
पैरों में जलन या सनसनाहट की शिकायत करने वाले लोग: गाय के घी से पैर के तलवों की मालिश करना किसी को हाथ या पैरों में जलन या सनसनाहट की शिकायत नहीं होगी।