29/08/2018
आज फिर से गॉव की याद आ गई।
अबसर गांव की कुछ यादेँ।
बो अबसर गांव को फाटक आळो खेल्डो।
काई काई खेलणियो ही जान सक है।
बो अबसर गाव को ताल।
क्रिकेट खेलणियो ही जान सक है।
बो आबसर गाव को शिव् मंदीर्।
नगारा बजाणियो ही जान सक है।
बो अबसर गाव को लालतोडों पिपळ गट्टो।
रात की 2 बजे ताणी बेठणियो ही जाण सक है।
बो आबसर गाव को बासी धोरो।
घी की थैली स्यु तिसलणियो ही जाण सक है।
बा अबसर गाव की बडोड़ी स्कूल।
बीम पढणियो ही जाण सक है।
बा गोदाम म नेमीचंद स्वामी की दूकान।
खातो चलाणियो ही जाण सक है।
बो अबसर गाव को बासी तळाव।
बीम तो न्हायो जाको ही जान सक है।
बा श्रवण स्वामी की दूकान ।
कचोरी खायो जाको ही जान सक है।
बा परमेश (बाणियो) की दूकान।
पान खायो जको ही जाण सक है।
बे इन्दरचंद सांखला का भजन।
सुनणियो ही जाण सक है।
बा नंदू स्वामी (नंदू रेड़ी)की रेड़ी।
निम्बुरस की फांक खाणियो ही जान सक है।
बा छोटकी स्कूल।
सतोळियो खेलणियो ही जान सक है।
बा आबसर की पंचायत।
ताश खेलणियो ही जान सक है।
बे आबसर की गळ्या ।
फिरणियो ही जान सक है।
बे भंवरदास पुजारी जी का मंदिर म हेल्ला।
सुनाणियो ही जान सक है।
बो बिचले गुवाड़ को घिनड।
घालणीयो ही जाण सक है।
बा अबसर की दादागिरी।
खालिया, भानिसर,सिमसिया, धातरि का छोरा ही जान सक है।
बो अबसर को पहलवान सुन्दर।
काम करवाणियो ही जान सक है।
बे आबसर म बाराती आवणा।
बान कुटणियो ही जान सक है।
बो अबसर को चिकणो ताल।
बीम तिसलणियो ही जान सक है।
बो लाध बाबा ळो ठेक्को।
बीम जाणियों ही जान सक है।
बो पंथवारि वाळो खेल्डो।
बिन पटकणियो ही जान सक है।
बा आबसार की गैंग।
बीम रेणीयो ही जान सक है।
बा नारायण जी की शिव मंदिर म स्कूल।
बीम पढणियो ही जान सक है।
बे अबसर क शिव मंदिर म गांजलिया।
बठ बेठणियो ही जान सक है।
बे डोसीजी का मीठा मिन सत्तू।
खाणियो ही जान सक है।
बा अबसर म किशनजी खटीक की बोडी वाली बस।
चढ्यो जको ही जान सक है।
बा तलाव आळी दादी।
रोटी खाई जाको ही जान सक है।
बा अबसर की गटरा दादी।
मटकों ल्यायो जाको ही जाण सक है।
बे आबसर की स्कूल का प्रोग्राम।
देखणियो ही जान सक है।
(और अंतिम में 1 छोटी सी बात।)
बो ढोलकियो आबसर को।
ठुमका पर नाच्यो जको ही जान सक है।
जो मेने ये कविता लिखी है ये एकदम हकीकत है।
और इनमे से 2या3 लाइने आपको आज के समय में मिलेगी।
बाकी की सब पुरानी यादे है।
जिस जिस को याद है वो 1 बार जरूर कमेंट बॉक्स में अपनी राय दे।
(ढोलकियो आबसर को)
धन्यवाद