08/04/2020
WISHING YOU VERY HAPPY BIRTHDAY हनुमान जी 🙂 चलिए उनके जन्मदिन पर कुछ special लिखने का मन था ,आशा करता हूँ आपको पसंद आएगा 🙂
-हर अखाड़े या GYM में क्यों पाए जाते है हनुमान जी ?
-“ताक़त या शक्ति की बात” की जहाँ होती हो और बजरंग बली का नाम न आये ऐसा कैसे हो सकता है ?
- क्या "हनुमान" सिर्फ "पहलवान" के ही होते है या फिर ये यूँ कहूँ की पहलवान "हनुमान" के ही होते है ?
-खुराक -खुबात (मेहनत) के अलावा भी बजरंग बली भी जरूरी होते है Body बनाने के लिए ?
इन् सभी बातों के जवाब देने थोड़ा मुश्किल है लेकिन फिर भी कोशिश करते है |
मैं आशा करता हूँ की आप सभी को रामायण का मूलभूत ज्ञान तो आवश्यक होगा , इसीलिए सीधा मुद्दे की बात पर आते है |देखिये भगवान हनुमान प्रमुख तौर पर दो चीजों के प्रतीक रहे है और ये दोनों ही चीजें आपस में कुछ इस तरह जुडी है की एक के बिना दूसरी अधूरी है या फिर यूँ कहूँ की एक दूसरे की पूरक है |
ये दो चीजें है :-शक्ती और भक्ति
-शक्ति (STRONG/SUPER POWERFUL) और
-भक्ति /लगन (DEDICATION/COMMITMENT)
भगवान हनुमान के चरित्र के ये दोनों विश्ष्ट गुण आपस में कुछ इस तरह जुडे थे की उनका सबसे अधीक “शक्तिशाली” होना उनके भगवान राम के प्रति स्वार्थहीन (SELF-LESS) भक्तिभाव से ही था | महान शक्ति उनकी भक्ति का ही एक सीधा प्रतिबिंब (reflection) था ।
जितनी ज़्यादा उनकी भक्ति - उतनी ज़्यादा उनकी ताकत ;
और
शानदार उनकी ताकत - उतनी ही उनकी भक्ति की शुद्धता (Purity) ।
चलिए पहले “शक्ति “ शब्द का मतलब समझते है ।
शक्ति का मतलब आपके के शरीर में कितनी जान है इस से नही है “कितनी जान” हो सकती है उस से है ..(आसान शब्दों में कहूँ तो Potential Energy/Capabilities ) |
बल (Power) शक्ति का एक बहुत छोटा हिस्सा भर है ,एक रिक्शा-चालक रिक्शा खिंच रहा है वो शारीरिक बल तो है लेकिन शक्ति नही |
उसका उल्टा कम बलशाली व्यक्ति भी शक्तिशाली हो सकती है | शक्ति का असल संचार (flow ) ऐसे मौको पर होता है जब सभी शारीरिक क्षमताओ (Physical capacity) से ऊपर उठकर कुछ करते है, आप खुद की क्षमताओं से परे कुछ कर पाते है |
शक्ति =
शारीरिक शक्ति (Physical capabilities) + भक्ति (dedication) + आत्म बोध (self awareness) + आत्म-नियंत्रण (Self-control)
के एक संगम से उत्पन्न होती है। एक व्यक्ति जब तक शक्तिशाली नही माना जा सकता है जब तक की वो एक अच्छा और नैतिक जीवन व्यतीत नहीं करता ।
भगवान हनुमान को उसी शक्ति की मिसाल के रूप में देखा जाता है । हनुमान “शक्ति और पौरूष “ का सार है जो स्पष्ट रूप से एक रचनात्मक जीवन में शक्ति के प्रतीक हैं ।
किसी भी खिलाडी /पहलवान के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। भगवान हनुमान के रूप में अपनी शक्ति के दिव्य रूप (IDEAL IMAGE ) को देख सके ।
अब बात करते है दूसरे पहलू की यानी -"भक्ति की "
शक्ति की तरह, भक्ति (लगन) एक सामान्य अर्थ है जो अपने रोजमर्रा के जीवन में खिलाडियों / पहलवानों के लिए विशेष महत्व प्राप्त है।
भक्ति –लगन (Dedication-Commitment-Discipline) शब्द के दो मुख्यस्वरूप है
पहला यह एक आध्यात्मिक दृष्टिकोण (Meditational prespective) है जो एक पूरे धार्मिक व्यक्तित्व को परिभाषित करने के लिए मात्र प्रार्थना और पूजा से परे चला जाता है। भक्ति जीवन का एक तरीका है। रामचरित्रमानस में, लक्ष्मण, भरत, विभीषण, और सीता सभी के लिए राम -भक्ति प्रेम तो था लेकिन हनुमान जी की भक्ति का प्रभु प्रेम "शुद्ध भक्ति" का एक practical उदहारण है । हनुमान जी द्वारा अपनी छाती चीर "माता सीता और प्रभु राम" की तस्वीर दिखना केवल उनके निश्छल स्वार्थ-हीन (self-less) प्रेम भाव को दर्शन मात्र था जिसमें प्रभु भक्ति को किसी मतलब -स्वरूप या परिणाम की इच्छा रखने हेतु नही किया करते थे ।
खिलाडी या पहलवान के लिए, तथापि, हनुमान जी की “भक्ति और प्रार्थना” खुद पर ध्यान केंद्रित (FOCUS ) का primary Medium है। भक्ति रोजमर्रा की जिंदगी में आत्मचेतना (self consciousness) को जीवत रखने का एक पहलु है ।
काम-व्यायाम, आराम ,खाना खाते समय या किसी भी तरह का दैनिक दिनचर्या के साथ साथ खिलाडी अपने मन की आंखों में सांकेतिक रूप में हनुमान की तय छवि को रखता है । हनुमान की सोच "मन को शांति" देता है, इस जीवन में ऐसा कुछ भी नही है जो एक आदमी नहीं कर सकता है। वह अपने दिल में ,व्यायाम मेंऔर प्रशिक्षण में हनुमान की छवि को संजोता है । यही सिद्धांत जीवन के अन्य पहलुओं के लिए भी सच है। खिलाडी के लिए हर विचार हनुमान है और हर सांस एक “भक्ति प्रार्थना” अपने जीवन जीने के लिए लेना चाहता है।
अभी भक्ति के दूसरे पहलु पर भी बात करते है ।
यह अपने गुरु से अपने रिश्ते के लिए एक मॉडल उपलब्ध कराता है।“ गुरु-चेला” संबंध अखाड़ो में सर्वोपरि हुआ रहे है । एक पहलवान अपने गुरु की सेवा करने के लिए खुद को आत्मसमर्पित करता है। हनुमान जी कई ऐसे काम जो भगवान राम के लिए उन्होंने किये उनके “भक्ति-सेवा” के उदाहरण स्पष्ट करते है । गुरु नैतिक जीवन जीने की राह दिखता है।
खिलाडी या पहलवान छोड़िये एक आम आदमी भी अगर बजरंग बली के इन् ये दो मुख्य गुणो को अपना ले तो वह अपना जीवन सफल बना सकता है 🙂
बस अब जय बजरंग बलि बोलकर post शेयर जरूर कीजिएगा 🙌🙌