23/06/2020
जलनेति एक महत्वपूर्ण शरीर शुद्धि योग क्रिया है जिसमें पानी से नाक की सफाई की जाती और आपको साइनस, सर्दी, जुकाम , पोल्लुशन, इत्यादि से बचाता है। जलनेति में नमकीन गुनगुना पानी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें पानी को नेटिपोट से नाक के एक छिद्र से डाला जाता है और दूसरे से निकाला जाता है। फिर इसी क्रिया को दूसरी नॉस्ट्रिल से किया जाता है। अगर संक्षेप में कहा जाए तो जलनेति एक ऐसी योग है जिसमें पानी से नाक की सफाई की जाती है और नाक संबंधी बीमारीयों से आप निजात पाते हैं। जलनेति दिन में किसी भी समय की जा सकती है। यदि किसी को जुकाम हो तो इसे दिन में कई बार भी किया जा सकता है। इसके लगातार अभ्यास से यह नासिका क्षेत्र में कीटाणुओं को पनपने नहीं देती।
:जलनेति के लाभ👉
1.जलनेति सिरदर्द में : अगर आप बहुत ज़्यदा सिरदर्द से परेशान हैं तो यह क्रिया अत्यंत लाभकारी है।
2.जलनेति अनिद्रामें: अनिद्रा से ग्रस्त व्यक्ति को इसका नियमित अभ्यास करनी चाहिए।
3.जलनेति सुस्ती के लिए : सुस्ती में यह क्रिया अत्यंत लाभकारी होती है।
4.जलनेति बालों का गिरना रोके: अगर आपको बालों का गिरना बंद करना हो तो इस क्रिया का अभ्यास जरूर करें।
5.जलनेति बालों के सफेद में: यह बालों को सफेद होने से भी रोकता है।
6.जलनेति मेमोरी में : आपके के मेमोरी को बढ़ाने में यह विशेषकर लाभकारी है।
7.जलनेति नाक रोग में: नाक के रोग तथा खांसी का प्रभावी उपचार होता है।
8.जलनेति नेत्र-विकार में: नेत्र अधिक तेजस्वी हो जाते हैं। नेत्र-विकार जैसे आंखें दुखना, रतौंधी तथा नेत्र ज्योति कम होना, इन सारी परीशानियों का इलाज इसमें है।
9.जलनेति कान रोग में: कानों के रोगों, श्रवण शक्ति कम होने और कान बहने के उपचार में यह लाभकारी है।
10.जलनेति आध्यात्मिक लाभ: वायु के मुक्त प्रवाह में आ रही बाधाएं दूर करने से शरीर की सभी कोशाओं पर व्यापक प्रभाव डालता है जिसके कारण मनो-आध्यात्मिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है।
11.जलनेति का वैज्ञानिक पक्ष: जलनेति में कुछ अधिक नमकीन जल का प्रयोग करने से नाक के अंदर खुजली होती है जिसके कारण झिल्ली में रक्तप्रवाह बढ़ता है तथा ग्रंथीय कोशाओं का स्राव भी बढ़ता है, जिससे ग्रंथियों के द्वार साफ होते हैं। नेति के कारण मात्र नासा-गुहा को ही लाभ नहीं होता बल्कि नेत्रों एवं विभिन्न साइनसों को भी लाभ मिलता है।