Azad Sports Club, Shimla

Azad Sports Club, Shimla Sports complements education in virtue and knowledge.Sports really occupies the first place in our lives.

When the body is strong, then one can advance speedily in Knowledge and morality, and reap far-reaching advantages.

"Defending the human rights of Palestinians does not mean you are pro-Hamas.Saying "Free Palestine" does not mean you ar...
18/10/2023

"Defending the human rights of Palestinians does not mean you are pro-Hamas.

Saying "Free Palestine" does not mean you are anti- Semitic or "want all the Jews gone."

"Free Palestine" means free Palestinians from the Israeli occupation that's been robbing them their basic human rights for 75 years.

"Free Palestine" means stop caging 2.3 million Palestinians in the world's largest open air prison, half of whom are children.

"Free Palestine" means end the apartheid imposed by the Israeli government.

"Free Palestine" means give the Palestinians control over the basic infrastructure in their land."

~ Eric Cantona, Manchester United legend

PHOTO:- 25.1.1995, Eric Cantona kung fu kicked a fascist football hooligan, Matthew Simmons, during a match against Crystal Palace. Simmons, who attended far-right National Front and British National Party rallies and heckled Cantona as a "foreigner". His respond after that:- "I should’ve kicked him harder!”

Cantona’s maternal grandfather was from Barcelona, and fought against the forces of fascist general Francisco Franco during the Spanish civil war, before being forced to flee to France after the nationalist victory.

Azad Sports Club, Shimla

In coordination with Scientific And Polemic Society, Shimla !
06/12/2022

In coordination with Scientific And Polemic Society, Shimla !

Green Brigade's banner at  Shakhtar Donetsk vs Celtic FC in the Champions League.Azad Sports Club, Shimla
15/09/2022

Green Brigade's banner at
Shakhtar Donetsk vs Celtic FC in the Champions League.

Azad Sports Club, Shimla

गामा पहलवान सिर्फ एक बेहतरीन खिलाड़ी नहीं,एक बेहतरीन इंसान भी जो अपने हिंदू पड़ोसियों के लिए खड़ा हो गया सांप्रदायिक भीड...
22/05/2022

गामा पहलवान सिर्फ एक बेहतरीन खिलाड़ी नहीं,एक बेहतरीन इंसान भी जो अपने हिंदू पड़ोसियों के लिए खड़ा हो गया सांप्रदायिक भीड़ के सामने:-

बात 1947 की है भारत का बंटवारा होना तह था,गामा (ग़ुलाम मुहम्मद बख्श) पहलवान जिनका जन्म 22 मई,1878 को अमृतसर में हुआ था,उन्होंने देश के राजनीतिक माहौल को देखते हुए 1947 की शुरुआत में लाहौर जाने का फैसला लिया।

वैसे लाहौर गामा के लिए नया नहीं था,वह इस शहर को बहुत अच्छे से वाकिफ थे,उनका अक्सर लाहौर आना जाना लगा रहता था, गामा लाहौर के मोहनि रोड पर बस गए,जिस कॉलोनी में वह रह रहे थे वहां अधिकांश हिंदू परिवार रहते थे जो पहलवान को अपने पड़ोसी के रूप में पाकर काफी उत्साहित थे| पर यह कुशी अधिक समय नहीं टिकी, सांप्रदायिक हवाएं अपने उफान पर थी, रोज़ कही न कही से सांप्रदायिक दंगों की खबरें आ रही थी, गामा को मंडरा रहे खतरे का आभास हो चुका था और इसलिए,उन्होंने अपने इलाके के हिंदुओं से अपील की कि डरने की कोई आवश्यकता नहीं है और वादा किया कि वह उनकी रक्षा के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगाने के लिए भी तैयार हैं|

एक दिन जब कुल्हाड़ियों और तलवारों से लैस उन्मादी भीड़ उनकी कॉलोनी के पास आ पहुंची, तो गामा अपने कुछ पहलवान साथियों के साथ हिंदू परिवारों की रक्षा के लिए उस भीड़ के सामने खड़े हो गए।
भीड़ उन्हें धमकाते हुए हटने के लिए कह रही थी उन्होंने जवाब देते हुए कहा "इस गली के हिंदू मेरे भाई हैं, देखता हूं इनपर कौन आंख या हाथ उठाता है!" और वह टिके रहे, तभी भीड़ में से एक फ़िरकापरस्त गामा की तरह हमला करने के लिए बढ़ा, पहलवान ने कस कर उसे एक घूसा मारा और वह व्यक्ति वहीं बेहोश हो गया, यह देख कर डरपोक भीड़ वहां से रफूचक्कर हो गई|

परन्तु कुछ वक्त में ही सांप्रदायिक दंगे बहुत ही खूंखार रूप ले चुके थे, गामा को इस बात का आभास था कि उनकी कॉलोनी अब सुरक्षित नहीं है और वह बहुत अधिक समय तक कॉलोनी की रक्षा नहीं कर पाएंगे। इसलिए,उन्होंने उन्हें अपने खर्चे से लगभग एक सप्ताह का राशन हिंदू परिवारों को मुहिया करवाया और उन्हें बॉर्डर पार करवाया,अपने पड़ोसियों को अलविदा कहते समय यह फ़ौलादी पहलावन जिसे कोई कभी हरा न पाया था फूट फूट कर रो पड़ा था|

गामा को उनके रिकॉर्ड्स महान नहीं बनाते बल्कि उनका जज़्बा और खूबसूरत व्यक्तित्व उन्हें महान बनाता है|

Azad Sports Club, Shimla

31/08/2021
19/07/2021

Pace of the Game!



Azad Sports Club, Shimla

17/07/2021

Rhythm!

Azad Sports Club, Shimla

यह दुनिया की पहली खिलाड़ियों की ऊर्जा द्वारा संचालित फुटबॉल पिच है। ब्राजील के रियो में निर्मित, इस मैदान,की सतह के नीचे...
05/07/2021

यह दुनिया की पहली खिलाड़ियों की ऊर्जा द्वारा संचालित फुटबॉल पिच है। ब्राजील के रियो में निर्मित, इस मैदान,की सतह के नीचे 200 विशेष रूप से डिज़ाइन की गई टाइलें हैं, जो खिलाड़ियों द्वारा रिलीज की गई गतिज ऊर्जा(kinetic energy) का उपयोग फ्लड लाइट्स को बिजली देने के लिए करती हैं|

इटली के ला स्पेज़िया प्रांत में, लगभग 20 हज़ार की आबादी वाला एक छोटा सा शहर है, सारज़ाना, इस शहर में एक प्रसिद्ध स्थान ह...
16/06/2021

इटली के ला स्पेज़िया प्रांत में, लगभग 20 हज़ार की आबादी वाला एक छोटा सा शहर है, सारज़ाना, इस शहर में एक प्रसिद्ध स्थान है, मिरो लुपेरी सामुदायिक स्टेडियम,यह स्थानीय टीम एसोसिएज़ियोन स्पोर्टिवा डिलेटेंटिस्टिका सरज़ाना का घर है,
जो रोसोनेरो (रेड एंड ब्लैक) के नाम से मशहूर टीम का अपना स्टेडियम है |

परंतु इसकी गाथा सिर्फ इतनी भर नहीं है हुआ यूं कि 1946 में ए.एस.डी सरज़ाना कैलसियो व शहर की जनता ने तय किया कि वह अपने सबसे बहादुर बेटों और बेटियों में से एक के नाम पर स्थानीय स्टेडियम का नाम रखेंगे, उस बेटे की याद और सम्मान में जो कभी मैदान पर बेहतरीन गोलकीपर और बाद में युद्ध के मैदान में फासीवाद के विरुद्ध बने प्रतिरोधी दस्ते के मुख्य नेता व योद्धा बन जनता के साथ खड़ा हुआ|

मिरो लुपेरी का जन्म 29 अप्रैल,1911 को सरज़ाना,ला स्पेज़िया में हुआ था,अपनी युवावस्था में उनका ए.एस.डी. के लिए निर्विवाद रूप से शुरुआती ग्यारह में मुख्य गोलकीपर के रूप में इतालवी फुटबॉल में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण व सफल सफर रहा। यहाँ तक सरज़ाना ने 1940-1941 में लिगुरिया फर्स्ट डिवीजन में भी भाग लिया|

केवल नियति ही रोसोनेरो(रेड एंड ब्लैक) और लुपेरी के उदय को रोकने में सक्षम थी,पहले से ही जर्जर हो चुके इतालवी समाज को मुसोलिनी और हिटलर के फासीवादी गठबंधन ने घोर फासीवादी अंधकार में डुबो दिया, और द्वितीय विश्व युद्ध के प्रकोप के कारण जो फासीवाद द्वारा मानवता पर थोपा गया था,1941-42 फुटबॉल चैंपियनशिप को निलंबित कर दिया गया |

एक इतालवी नागरिक के रूप में मिरो लुपेरी को सैन्य दायित्वों और कर्तव्यों को पूरा करना था, इसलिए पहले मरीन कॉर्प्स में एक तुर्यवादक के रूप में और बाद में उन्हें स्थानीय प्रांत, स्पेज़िया की सेना के शस्त्रागार में एक अन्य कार्यकर्ता के रूप में काम पर रखा गया ।

लेकिन एक सच्चे व जुझारू जन खिलाड़ी को फासीवादी युद्ध में शामिल होना कहाँ मंजूर होता, मिरो ने महसूस किया कि यह युद्ध उसकी जगह नहीं है, और उन्होंने फासीवादी इटली और जर्मन गठबंधन वाली ताकतों की भयावहता का सामना करने का निर्णय लिया और छापामार प्रतिरोधी दस्ते में शामिल हो गए।

इतालवी कम्युनिस्ट पार्टी ने फासीवादी ताकतों के विरुद्ध , "गैरीबाल्डी असॉल्ट ब्रिगेड" को संगठित करने और बनाने का फैसला किया, जिसका उद्देश्य राजनीतिक-सैन्य कैडरों के निर्माण के माध्यम से इटली के प्रत्येक शहर और कस्बे में उपस्थिति और समर्थन प्राप्त करना था।

मिरो लुपेरी, गैरीबाल्डी ब्रिगेड का हिस्सा बने, विशेष रूप से "यूगो मुक्किनी डिटेचमेंट" में, कई संघर्षों में से एक में उनका मिशन था 20 अन्य लड़ाकों के साथ पहाड़ी इलाकों में एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण "मोंटे डी'निमो" को आजाद करवाना जो जर्मनों के चंगुल में था , परन्तु छापामार प्रतिरोधी दस्ते को चारों ओर से घेर लिया जाता है और फासीवादी सेना संख्या और हथियारों दोनों मामले में उनसे बहुत ज्यादा थी,हार के साथ-साथ सभी फासीवादी विरोधी लड़ाकों की मृत्यु निश्चित, लेकिन मिरो ने अपनी टुकड़ी के नेता के रूप में निर्णय ले लिया था, उन्होंने अपना जीवन देना पसंद किया और अपनी अंतिम सांस तक लड़े ताकि कि उनके अन्य साथी वहां से सुरक्षित निकल सके और फासीवादी विरोधी युद्ध को आगे जारी रखें , एक वीर छापामार योद्धा युद्ध में लड़ते हुए शहीद हो गया,यह व्यक्ति पूरी दुनिया में फासीवाद-विरोधी आंदोलन के लिए समर्पण का प्रतीक बन गया, और मरणोपरांत उन्हें वीरता के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।

उनकी ब्रिगेड, गैरीबाल्डी ब्रिगेड, प्रतिरोध की हरावल बन गई और मुक्ति का दिन भी आया, 25 अप्रैल, 1945 को मिरो लुपेरी जैसे अनेक लोगों की स्मृति के साथ-साथ स्वतंत्रता के झंडे लहरा रहे थे फासीवाद को इतिहास के कूड़ेदान में फेंक दिया गया था|

अगर मैल्कम एक्स के शब्दों में कहें तो "इतिहास आम लोगों की स्मृति है", हम सभी फासीवाद पूंजीवाद विरोधी अंतर्राष्ट्रीयवादी लोगों, जनपक्षधर खिलाड़ियों व युवाओं को मिरो और उन तमाम आम जनता की कुर्बानियों को कभी नहीं भूलना है जिसने अंधकार से मुक्ति दिलाई|

मौजूदा दौर में जब जनविरोधी फासीवादी उभार मानवता के सामने दोबारा उठ खड़ा हुआ है यह स्मृतियां और भी ज्यादा प्रासंगिक है|

Azad Sports Club, Shimla

आज Azad Sports Club द्वारा शिमला में फुटबॉल खेला गया.
13/03/2021

आज Azad Sports Club द्वारा शिमला में फुटबॉल खेला गया.

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