23/01/2026
वैसे तो हैं तीनों ही खिलाड़ी रंगीले,
बसंत पंचमी पे एक जैसे नज़र आए पीले-पीले।
मैदान हमारा रंगमंच है,
जहाँ हम बसंत के रंग बिखेरते हैं,
रैकेट उठते ही इरादे बोलते हैं,
हर शॉट को winner में बदलते हैं।
सरसों की खुशबू, हवा में उमंग,
दिलों में जीत का बसंती रंग,
पसीने की हर एक बूँद में
जीत के इरादे पलते हैं।।
बसंत कहे—नया जोश जगाओ,
असफलता और आलस को दूर भगाओ।
ये तीनों जब भी साथ खेलें,
तो सामने वाला सिर्फ हार को झेले।
इनकी जुगलबंदी से खेल की दुनिया भी हिले,
सामने वाला पूछे—भाई, हम इनसे खेलने क्यों निकले!
वैसे तो हैं तीनों ही खिलाड़ी रंगीले,
बसंत पंचमी पे एक जैसे नज़र आए पीले-पीले।।
बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं