18/03/2025
मैं बर्फ के पास कभी आग को लाकर देखूं
जी चाहता है मैं खुद को गले लगाकर देखूं
जैसे समझाता है कोई किसी टूटे शख्स को
वैसे ही मैं एक बार खुद को समझाकर देखूं
कहते हैं कि अल्फाज़ दवा का काम करते हैं
आज खुद को अल्फाजों में उलझाकर देखूं
देखना है किसको है परवाह मेरे अश्कों की
महफिल में एक बार खुद को रुलाकर देखूं
तमाशा बनता है तो बन जाये; एक बार मेरा
कुछ राज खुद के ; अपनों को सुनाकर देखूं
कहते हैं अपने से ज्यादा चोट खाए को देखो
आज खुद की तस्वीर आईने में लगाकर देखूं