03/08/2026
बात है 1983 की। भारतीय टीम में एक 20 साल के युवा बल्लेबाज़ का डेब्यू हुआ। उस बल्लेबाज़ ने वेस्टइंडीज़ के खतरनाक गेंदबाज़ों के सामने घुटने टेक दिए। उसने 90 मिनट तक बैटिंग की, लेकिन सिर्फ 20 रन ही बना पाया। वो इतने डर-डर कर खेल रहा था कि एक भी बड़ा शॉट नहीं मार सका।
अगले दिन देश के एक बहुत मशहूर क्रिकेट पत्रकार (Rajan Bala) ने अख़बार के पहले पन्ने पर एक भयंकर लेख (Article) छापा। उस लेख की हेडिंग थी The Stroke-less Wonder (बिना शॉट मारने वाला अजूबा)।
पूरे देश में उस युवा बल्लेबाज़ का भयानक मज़ाक उड़ाया गया। उसे टीम इंडिया से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया।
वो लड़का उस अख़बार को पढ़कर अपने कमरे में फूट-फूट कर रोने लगा।लेकिन फिर उसके पिता ने उसे रोते हुए देखा और कहा रोने से दुनिया नहीं बदलेगी, अपने बल्ले से इस अख़बार वाले को जवाब दे!और फिर शुरू हुआ इतिहास का सबसे खौफनाक कमबैक(Comeback)।
उस लड़के ने अख़बार की उस अपमानजनक कटिंग को कैंची से काटा और अपनी अलमारी (Wardrobe) के शीशे पर चिपका लिया, ताकि रोज़ सुबह उठते ही उसे अपनी बेइज़्ज़ती याद रहे।
उस दिन के बाद, वो लड़का रोज़ सुबह 4 बजे उठता। उसने कसम खाई कि जब तक वो रोज़ाना नेट्स में 300 छक्के (300 Sixes) नहीं मार लेगा, वो पानी भी नहीं पिएगा! छक्के मारते-मारते उसके हाथों के छाले फट जाते थे, खून रिसने लगता था, दस्ताने लाल हो जाते थे... लेकिन वो पागल लड़का अलमारी पर चिपके उस अख़बार को याद करके और ज़ोर से छक्के मारता था। यह खूंखार तपस्या पूरे 4 साल तक चली।
4 साल बाद उस लड़के को 1987 के वर्ल्ड कप टीम में दोबारा चुना गया। दुनिया उसी पुराने डरपोक बल्लेबाज़ की उम्मीद कर रही थी।लेकिन जब वो बल्लेबाज़ क्रीज़ पर उतरा, तो उसने दुनिया के सबसे खतरनाक स्पिनर्स (Craig McDermott से लेकर John Emburey तक) की धज्जियां उड़ा दीं। वो अपनी क्रीज़ से बाहर निकलता और गेंद को सीधे स्टेडियम की छत पर मारता।
उसने वर्ल्ड कप में लगातार 4 मैचों में 4 तूफानी अर्धशतक ठोके और उस टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा छक्के उड़ाने वाला खिलाड़ी बन गया!वो लड़का कोई और नहीं... बल्कि हमारे नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) थे! जिन्हें पूरी दुनिया ने सिक्सर सिद्धू का नया नाम दिया।
और सबसे बड़ा चमत्कार तो तब हुआ, जब 1987 वर्ल्ड कप के बाद उसी पत्रकार (Rajan Bala) ने अख़बार में एक नया लेख लिखा, जिसकी हेडिंग थी From a Stroke-less Wonder to a Palm-Grove Hitter(एक अजूबे से लेकर गेंद को ताड़ के पेड़ों के पार मारने वाला खूंखार बल्लेबाज़)।
दोस्तों, इसे कहते हैं अपने आलोचकों के मुंह पर अपने हुनर से तमाचा मारना! सिद्धू पाजी ने अपनी ज़िंदगी में कभी उस पत्रकार को पलटकर जवाब नहीं दिया, बल्कि अपने खून-पसीने से उसका अख़बार ही बदलवा दिया।
क्या आपको नवजोत सिंह सिद्धू की इस भयंकर तपस्या और कमबैक के बारे में पता था? अगर नहीं, तो कमेंट्स में ज़रूर लिखें!
अगर आप भी मानते हैं कि कड़ी मेहनत से कोई भी बेइज़्ज़ती का बदला लिया जा सकता है, तो इस अनसुनी और प्रेरणादायक कहानी को अपनी टाइमलाइन पर SHARE करें।
साभार: सोशल मीडिया