17/06/2026
एक बार फिर वैभव सूर्यवंशी ने अच्छी शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदला। महत्वपूर्ण मुकाबले में उन्होंने 38 रन तो बनाए, लेकिन जिस समय टीम को एक लंबी और जिम्मेदार पारी की जरूरत थी, उसी समय अपना विकेट गंवा बैठे। ट्राई सीरीज की चार पारियों में उनका बल्ला चमका जरूर है, लेकिन अभी तक एक भी अर्धशतक नहीं आया है। यही बात उनके प्रदर्शन पर सवाल खड़े कर रही है।
वैभव के पास प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। उनके शॉट्स, आत्मविश्वास और आक्रामक अंदाज ने पहले ही साबित कर दिया है कि वह भविष्य के बड़े खिलाड़ी बन सकते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिर्फ प्रतिभा काफी नहीं होती। बड़े खिलाड़ी वही बनते हैं जो 30-40 रन को 80-100 रन में बदलना सीखते हैं। फिलहाल वैभव बार-बार अच्छी शुरुआत तो कर रहे हैं, लेकिन उसे मैच जिताने वाली पारी में नहीं बदल पा रहे।
यही कारण है कि अब चयनकर्ताओं को भी थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। युवा खिलाड़ी को लगातार मौके मिलना चाहिए, लेकिन साथ ही उसे यह भी समझाना होगा कि हर गेंद पर हमला करना ही समाधान नहीं होता। क्रिकेट में धैर्य, परिस्थितियों को समझना और बड़ी पारी खेलने की कला उतनी ही जरूरी है जितनी आक्रामक बल्लेबाजी। वैभव के पास समय भी है और क्षमता भी, लेकिन अब उन्हें अपने खेल में परिपक्वता जोड़नी होगी ताकि प्रतिभा के साथ-साथ निरंतरता भी दिखाई दे।