25/06/2026
रामायण कालीन है #द्रोणागिरि पर्वत…
पौराणिक मान्यतानुसार, जब #रामायण काल में लक्ष्मण जी मेघनाथ के शक्तिबाण से मूर्च्छित हो गए थे, तब विभीषण की सलाह पर हनुमान जी रावण के राजवैद्य सुषेण वैद्य को उनके पूरे भवन सहित वानर सेना के शिविर में ले आए। सुषेण वैद्य जी ने बताया कि लक्ष्मण जी के प्राण केवल #संजीवनी बूटी से ही बच सकते हैं, जो सुदूर हिमालय में द्रोणागिरि पर्वत पर मिलती है।
हनुमान जी जब संजीवनी बूटी लेने हिमालय पहुँचे, तो वे पर्वत की सही पहचान नहीं कर पाए। इसके पश्चात वे द्रोणागिरि पर्वत की तलहटी में स्थित द्रोणागिरि गाँव पहुँचे। उस समय वहाँ उन्हें एक वृद्ध महिला मिली। हनुमान जी ने उस महिला से द्रोणागिरि पर्वत के बारे में पूछा, तो उसने इशारे से दिशा बता दी। समय की कमी को देखते हुए हनुमान जी ने कहा कि वे उसे अपने कंधे पर बैठाकर साथ ले जाएंगे, ताकि वह सही पर्वत की पहचान करा सके। महिला तैयार हो गई और हनुमान जी उसे अपने कंधे पर बैठाकर ले गए, जहाँ उसने द्रोणागिरि पर्वत की पहचान कराई।
इसके बाद #हनुमान जी संजीवनी बूटी खोजने लगे, लेकिन द्रोणागिरि पर्वत के देवता ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। हनुमान जी ने उन्हें पूरी स्थिति समझाई, फिर भी वे नहीं माने। तब दोनों के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें हनुमान जी ने पर्वत देवता का दायाँ हाथ तोड़ दिया और द्रोणागिरि पर्वत का पूरा दायाँ हिस्सा अपने साथ लेकर वापस चले गए।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, उस बुजुर्ग महिला द्वारा इस प्रकार हनुमान जी को पर्वत की जानकारी देने से पर्वत देवता अप्रसन्न हो गए और उन्होंने महिलाओं को अपनी पूजा में सम्मिलित न होने का शाप दे दिया। यही कारण है कि आज भी स्थानीय परंपरा के अनुसार पर्वत देवता की पूजा में महिलाओं का सम्मिलित होना वर्जित माना जाता है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, आज भी द्रोणागिरि पर्वत पर रक्त जैसे निशान और पर्वत के खंडित होने के प्रमाण दिखाई देते हैं। गाँव से लगभग 7–8 किलोमीटर की दूरी पर पर्वत के जड़ भाग में यह स्थान स्थित है। पहले वहीं देवता की पूजा की जाती थी, लेकिन पश्वा (देवता के माध्यम) के बुजुर्ग हो जाने और वहाँ तक पहुँचने में असमर्थ होने के कारण अब यह पूजा धीरे-धीरे गाँव के ऊपर एक पत्थर पर आषाढ़ मास में की जाती है।
समुद्र तल से लगभग 3625 मीटर की ऊँचाई पर स्थित द्रोणागिरि गाँव प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम है। वास्तव में हनुमान जी और संजीवनी बूटी से जुड़ा जो पर्वत माना जाता है, वह मुख्य द्रोणागिरि नहीं, बल्कि #पूर्वी दूनागिरि (ईस्ट द्रोणागिरि) है।
सत्य यह भी है कि #जुम्मा गाँव के बाद और #जेलम गाँव से पहले बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) द्वारा “द्रोणागिरि व्यू पॉइंट” का बोर्ड लगाया गया है। लेकिन इस स्थान से द्रोणागिरि की मुख्य चोटी दिखाई नहीं देती। यहाँ से जो दृश्य दिखता है, वह वास्तव में पूर्वी द्रोणागिरि के नीचे की एक पीक है, न कि मुख्य द्रोणागिरि #शिखर। इसी कारण कई लोग भ्रमवश उसे ही द्रोणागिरि चोटी समझ लेते हैं।
द्रोणागिरि घाटी आज भी फूलों और जड़ी-बूटियों से समृद्ध है। यहाँ राज्य पुष्प ब्रह्मकमल, नीलकमल, कीड़ा जड़ी, कूट, कुटकी और ब्लू पॉपी जैसी अनेक दुर्लभ औषधीय वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। यही कारण है कि यह क्षेत्र आज भी वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय बना हुआ है। इस गाँव के पास #नन्दीकुंड, बागनी ग्लेशियर, द्रोणागिरि ग्लेशियर सहित कई ऊँची हिमालयी चोटियाँ स्थित हैं।