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MERAGOUN सिर्फ एक पेज नहीं…
ये पहाड़ों की मिट्टी, गाँव की खुशबू और हमारी असली पहचान की आवाज़ है।



चाहे सुबह की धूप हो, खेतों की खुशबू,
बुज़ुर्गों की सीख हो या युवाओं के सपने हर पल को कैद करता है,

हमारा गाँव सिर्फ जगह नहीं, एक एहसास है।

🏔️ गढ़वाल के 52 गढ़ — सत्ता, संघर्ष और इतिहासPart 1 | चाँदपुरगढ़क्या सच में यहीं से गढ़वाल की सत्ता की कहानी ने एक नया म...
31/08/2026

🏔️ गढ़वाल के 52 गढ़ — सत्ता, संघर्ष और इतिहास
Part 1 | चाँदपुरगढ़

क्या सच में यहीं से गढ़वाल की सत्ता की कहानी ने एक नया मोड़ लिया?

गढ़वाल क्षेत्र कभी अनेक छोटी-बड़ी रियासतों और गढ़ों में बंटा हुआ था। इनमें चाँदपुरगढ़ एक महत्वपूर्ण शक्ति केंद्र था।

सरकारी इतिहास के अनुसार, 15वीं शताब्दी के मध्य में चाँदपुरगढ़ जगतपाल के शासन में एक शक्तिशाली रियासत के रूप में उभरा। बाद में अजयपाल ने चाँदपुरगढ़ की सत्ता संभाली और कई रियासतों को एकजुट करके गढ़वाल राज्य को संगठित किया। इसके बाद राजधानी चाँदपुर से देवलगढ़ और फिर श्रीनगर स्थानांतरित हुई।

चाँदपुरगढ़ से जुड़ी कनकपाल और अन्य प्रारंभिक कथाओं में लोकपरंपरा भी शामिल है। इसलिए इस Series में हम हर कहानी में इतिहास और लोकमान्यता को अलग-अलग बताएँगे।

यह सिर्फ 52 गढ़ों की सूची नहीं…
यह गढ़वाल की सत्ता, संघर्ष और इतिहास की 52 कहानियाँ हैं।

क्या आपने चाँदपुरगढ़ के बारे में पहले सुना था?
कमेंट में बताइए 👇

अगले Part में मिलेंगे एक और गढ़ की अनसुनी कहानी के साथ… 🏔️

31/08/2026

चीनी ₹70 किलो… अब घर में चाय भी सोच-समझकर बनेगी! 😂☕

चीनी महंगी क्या हुई, घर की चाय पर ही पंचायत बैठ गई! 😂
पति-पत्नी की नोकझोंक में भी अपना ही मजा है। ❤️🏔️

आपके घर में चीनी महंगी होने पर सबसे पहले किसकी क्लास लगेगी? 😜

😂 अपने उस दोस्त को Tag करो जो दिनभर चाय पीता है!

🤗दुनिया की रीत निराली...रंगी को नारंगी कहे ,दूध जमें को खोया। चलती को गाड़ी कहे, देख कबीरा रोया।।कहते हैं काला रंग अशुभ ...
31/08/2026

🤗दुनिया की रीत निराली...

रंगी को नारंगी कहे ,दूध जमें को खोया।
चलती को गाड़ी कहे, देख कबीरा रोया।।

कहते हैं काला रंग अशुभ होता है पर स्कूल वहीं काला
ब्लैक बोर्ड भविष्य उज्जवल बनाता है
👉अपनी राय comment में जरूर लिखें
mera goun

🌄🙏🤗

पांडवों की अंतिम यात्रा में सबसे पहले कौन गिरा था?उत्तराखंड के माणा गाँव से जुड़ी एक प्राचीन लोकमान्यता के अनुसार, महाभा...
30/08/2026

पांडवों की अंतिम यात्रा में सबसे पहले कौन गिरा था?

उत्तराखंड के माणा गाँव से जुड़ी एक प्राचीन लोकमान्यता के अनुसार, महाभारत के बाद पांडवों ने यहीं से अपनी अंतिम यात्रा यानी महाप्रस्थान शुरू किया।

कहा जाता है कि सरस्वती नदी पार करने के बाद द्रौपदी सबसे पहले यात्रा में गिर पड़ीं।

पांडव आगे बढ़ते गए… और उनकी यह यात्रा हिमालय की ऊँचाइयों की ओर जाती हुई स्वर्गारोहिणी की दिशा से जुड़ती है।

लेकिन सवाल अभी बाकी है—

अगर यह सिर्फ एक लोककथा है, तो माणा और आसपास की इन जगहों के नाम पांडवों की कहानी से इतने गहरे क्यों जुड़े हैं?

आप क्या मानते हैं—आस्था, इतिहास या हजारों साल पुरानी किसी यात्रा की स्मृति?

कमेंट में अपनी राय जरूर बताइए। 👇

30/08/2026

नॉण ,दूध का मेल, पिज्जा बर्गर फेल..

❤️ये है हमारे उत्तराखंड का कणकु, जो
जो आटा, दूध, और मक्खन से तैयार होता है बिना पाणि के शहरों में 500 रुपये की थाली में भी नहीं मिलेगा।
किस-किस ने खाया है? कमेंट में बताओ 👇

क्या है स्वर्गारोहण का रहस्य?उत्तराखंड के पहाड़ों में एक ऐसी राह है… जिसे आज भी स्वर्ग की ओर जाने वाली राह कहा जाता है!क...
30/08/2026

क्या है स्वर्गारोहण का रहस्य?

उत्तराखंड के पहाड़ों में एक ऐसी राह है… जिसे आज भी स्वर्ग की ओर जाने वाली राह कहा जाता है!

कहा जाता है कि महाभारत के बाद पांडवों ने अपना राजपाट छोड़कर अंतिम यात्रा यानी महाप्रस्थान शुरू किया। इस यात्रा को बद्रीनाथ के पास माना गाँव और आगे की हिमालयी राहों से जोड़ा जाता है।

उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार, माना से जुड़ी लोकमान्यता में पांडवों की अंतिम यात्रा का उल्लेख मिलता है। आगे सतपंथ ताल की ओर जाने वाले मार्ग से स्वर्गारोहिणी की दिशा दिखाई देने की बात भी दर्ज है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल…

क्या स्वर्गारोहिणी सिर्फ एक धार्मिक लोककथा है?
या हजारों साल पुरानी किसी यात्रा की स्मृति आज भी इन पहाड़ों में जीवित है?

आप क्या मानते हैं—
आस्था, इतिहास या कोई अनसुना रहस्य?

कमेंट में जरूर बताइए। 👇

जोगेश्वर का इतिहास सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं…अंतिम भाग.. इसके पीछे कत्युरी वंश की भी एक महत्वपूर्ण कहानी जुड़ी है।मध्य...
29/08/2026

जोगेश्वर का इतिहास सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं…अंतिम भाग..

इसके पीछे कत्युरी वंश की भी एक महत्वपूर्ण कहानी जुड़ी है।

मध्यकालीन उत्तराखंड में कत्युरी शासकों का प्रभाव काफी व्यापक था। उनकी स्थापत्य और धार्मिक परंपराओं की छाप कुमाऊँ के अनेक प्राचीन मंदिरों में दिखाई देती है।

जोगेश्वर के प्राचीन मंदिर समूह को भी इसी ऐतिहासिक परंपरा और बाद के निर्माण-विकास के संदर्भ में देखा जाता है।

यही जोगेश्वर की खासियत है—यहाँ पत्थरों में सिर्फ आस्था नहीं, बल्कि पहाड़ के सदियों पुराने इतिहास की कहानी भी दर्ज है।

क्या आपको जोगेश्वर की यह ऐतिहासिक कहानी पहले से पता थी?🌄👈♥️

29/08/2026

हिमालय अब पिघल नहीं रहा, टूट रहा है 🏔️💔

क्या हम सुन रहे हैं?

उत्तराखंड के मंदिरों के अनसुने रहस्य | जागेश्वर -भाग3जागेश्वर की कहानी सिर्फ देवदार के जंगलों और प्राचीन मंदिरों की कहान...
29/08/2026

उत्तराखंड के मंदिरों के अनसुने रहस्य | जागेश्वर -भाग3

जागेश्वर की कहानी सिर्फ देवदार के जंगलों और प्राचीन मंदिरों की कहानी नहीं है।
इन मंदिरों के विकास के पीछे कुमाऊँ के कत्यूरी राजवंश की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उत्तराखंड पर्यटन के अनुसार जागेश्वर के अधिकांश मंदिरों का निर्माण और जीर्णोद्धार कत्यूरी राजाओं के काल में हुआ। मंदिरों का परिसर अलग-अलग कालखंडों की स्थापत्य परंपराओं को भी दिखाता है। �
Uttarakhand Tourism
लेकिन यहाँ एक दिलचस्प बात है…
जागेश्वर को किसी एक राजा या एक ही समय में बनाया गया मंदिर-समूह मानना सही नहीं होगा। यहाँ लगभग 125 मंदिर, करीब 174 मूर्तियाँ और 25 से अधिक शिलालेख मिले हैं—जो इस स्थान के लंबे धार्मिक और सांस्कृतिक विकास की ओर संकेत करते हैं। �
Uttarakhand Tourism
यानी सदियों तक यह घाटी सिर्फ पूजा का स्थान नहीं रही होगी—यहाँ धार्मिक परंपराएँ, कला और स्थापत्य लगातार विकसित होते रहे।
और अब सवाल और बड़ा है…
जागेश्वर के इन प्राचीन मंदिरों पर मिले शिलालेख आखिर किसकी कहानी बताते हैं?
👉 भाग–4 में इसी रहस्य की परत खोलेंगे।
क्या आपको लगता है कि इतने बड़े मंदिर-समूह के पीछे सिर्फ धार्मिक कारण थे, या इसके पीछे कोई और बड़ा कारण भी रहा होगा?
👇 अपनी राय बताइए।

28/08/2026

“उत्तराखंड में रक्षाबंधन सिर्फ राखी बांधने का त्योहार नहीं… कहानी कुछ और भी है!” 🏔️❤️

उत्तराखंड में रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के प्रेम का त्योहार नहीं, बल्कि पहाड़ की अपनी लोक-परंपराओं और मान्यताओं से भी जुड़ा है। ❤️🏔️

Raksha Bandhan is more than just a festival of tying a sacred thread. In the Himalayan villages of Uttarakhand, it is also connected with unique local traditions and customs passed down through generations.

आपके गाँव में रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता है?
How is Raksha Bandhan celebrated in your village? Tell us in the comments. 👇

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Rudraprayag
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