पिछले कई वर्षो के गहन अध्यन, सामाजिक चिंतन, अनुभव एवं मूल्यांकन के उपरान्त यह अनुभव किया की आज के इस मशीनी युग में मानव जीवन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है जिससे उनका शारीरिक, मानसिक, बोद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास बाधित हुआ है | आज बच्चो का अधिकाँश समय किताबें एवं टेलीविजन में व्यतित होता है जिसके कारण उनमे बाल्यावस्था से ही शारीरिक विकार शुरू हो जाते है | माता-पिता की अत्यधिक व्यस्तता के चलते बच्चे पर
पूर्ण ध्यान नहीं दिया जाता | स्कूल में एक शिक्षक के पास 40-50 बच्चों की क्लास में इतने अवसर नहीं होते की वें बच्चो की प्रकर्ति को पूर्ण रूप से समझ कर उसके चहुमुखी विकास की रुपरेखा तैयार कर सके | परिवार और स्कूल दोनों की उपेक्षाओं के चलते बच्चा विमुख हो जाता है और सीधा बाहरी दुनिया के संपर्क में आकर अच्छे-बुरे विचारों को ग्रहण कर लेता है | समाज के मध्यम वर्गीय माता-पिता की यह एक बड़ी समस्या बन गयी है | इन सभी समस्याओं को ध्यान में रख कर डिफेन्स स्पोर्ट्स ओर्गेनाइजेशन (DSO) की स्थापना 26 जनवरी 2004 को की गई जो आज एक बहुत बड़ी स्वयंसेवी संस्था बन चुकी है जो बच्चों को मुख्यता खेलो एवं स्वास्थ के प्रति रुझान पैदा कर उनके सम्पूर्ण विकास के प्रति वचनबद्ध है सोसाइटी द्वारा बच्चो को कुशल प्रशिक्षण देकर स्वतंत्र रूप से उनके भीतर की संभावनाओं को तलाशने व् विकास के अवसर मुहैया करवाने में मदद करती है बच्चो, युवाओं एवं महिलाओं को खेलकूद व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना मुख्य उदेश्य है |
देश की एकता, अखंडता एवं स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों के प्रति आदर, मान-सम्मान एवं सदभावना की प्रेरणा देने एवं देश की रक्षा को सर्वोपरी रखने के लिए DSO वचनबद्ध है | तो आइऐ, हम सब एक साथ मिल कर एक नया व खुशहाल भारत बनाकर स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करे |