चुगली चाची

चुगली चाची Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from चुगली चाची, Sport & recreation, Rewa.

17/06/2021

आप पहली लाइन पढ़ते ही खुद इसके मुख्य नायक हो जाएंगे

एक कहानी - हमारी 🤝 आपकी

बचपन में स्कूल के दिनों में क्लास के दौरान शिक्षक द्वारा पेन माँगते ही हम बच्चों के बीच रौकेट गति से गिरते पड़ते सबसे पहले उनकी टेबल तक पहुँच कर पेन देने की अघोषित प्रतियोगिता होती थी।

जब कभी मैम किसी बच्चे को क्लास में कापी वितरण में अपनी मदद करने पास बुला ले, तो मैडम की सहायता करने वाला बच्चा अकड़ के साथ "अजीमो शाह शहंशाह" बना क्लास में घूम-घूम कर कापियाँ बाँटता और बाकी के बच्चे मुँह उतारे गरीब प्रजा की तरह अपनी बेंच से न हिलने की बाध्यता लिए बैठे रहते। शिक्षक की उपस्थिति में क्लास के भीतर चहल कदमी की अनुमति कामयाबी की तरफ पहला कदम माना जाता था।

उस मासूम सी उम्र में उपलब्धियों के मायने कितने अलग होते थे
A) शिक्षक ने क्लास में सभी बच्चों के बीच अगर हमें हमारे नाम से पुकार लिया .....
😎 शिक्षक ने अपना रजिस्टर स्टाफ रूम में रखकर आने बोल दिया तो समझो कैबिनेट मिनिस्टरी में चयन का गर्व होता था।

आज भी याद है जब बहुत छोटे थे तब बाज़ार या किसी समारोह में हमारी शिक्षक दिख जाए तो भीड़ की आड़ ले छिप जाते थे। जाने क्यों, किसी भी सार्वजनिक जगह पर टीचर को देख हम छिप जाते थे?

कैसे भूल सकते है, अपने उन गणित के टीचर को जिनके खौफ से 13, 17 और 19 का पहाड़ा याद कर पाए थे।

कैसे भूल सकते है उन हिंदी के शिक्षक को जिनके आवेदन पत्रों से ये गूढ़ ज्ञान मिला कि बुखार नही ज्वर पीड़ित होने के साथ विनम्र निवेदन कहने के बाद ही तीन दिन का अवकाश मिल सकता था।

वो शिक्षक तो आपको भी बहुत अच्छे से याद होंगे जिन्होंने आपकी क्लास को स्कूल की सबसे शैतान क्लास की उपाधि से नवाज़ा था।

उन शिक्षक को तो कतई नही भुलाया जा सकता जो होमवर्क कॉपी भूलने पर ये कहकर कि ... *“कभी खाना खाना भूलते हो?” ... बेइज़्ज़त करने वाले तकियाकलाम से हमें शर्मिंदा करते थे।

शिक्षक के महज़ इतना कहते ही कि "एक कोरा पेज़ देना" पूरी कक्षा में फड़फड़ाते 50 पन्ने फट जाते थे।

शिक्षक के टेबल के पास खड़े रहकर कॉपी चेक कराने के बदले यदि सौ दफा सूली पर लटकना पड़े तो वो ज्यादा आसान लगता था।

क्लास में शिक्षक के प्रश्न पूछने पर उत्तर याद न आने पर कुछ लड़के/ लडकियों के हाव भाव ऐसे होते थे कि उत्तर तो जुबान पर रखा है बस जरा सा छोर हाथ नहीं आ रहा। ये ड्रामेबाज छात्र उत्तर की तलाश में कभी छत ताकते, कभी आँखे तरेरते, कभी हाथ झटकते। देर तक आडम्बर झेलते-झेलते आखिर शिक्षक के सब्र का बांध टूट जाता -- you, yes you, get out from my class ....।

सुबह की प्रार्थना में जब हम दौड़ते भागते देर से पहुँचते तो हमारे शिक्षकों को रत्तीभर भी अंदाजा न होता था कि हम शातिर छात्रों का ध्यान प्रार्थना में कम और आज के सौभाग्य से कौन-कौन सी शिक्षक अनुपस्थित है, के मुआयने में ज्यादा रहता था।

आपको भी वो शिक्षक याद है न, जिन्होंने ज्यादा बात करने वाले दोस्तों की जगह बदल उनकी दोस्ती कमजोर करने की साजिश की थी।

मैं आज भी दावा कर सकता हूँ, कि एक या दो शिक्षक शर्तिया ऐसे होते है जिनके शिर के पीछे की तरफ़ अदृश्य नेत्र का वरदान मिलता है, ये शिक्षक ब्लैक बोर्ड में लिखने में व्यस्त रहकर भी चीते की फुर्ती से पलटकर कौन बात कर रहा है का सटीक अंदाज़ लगाते थे।

वो शिक्षक याद आये या नहीं जो चाक का उपयोग लिखने में कम और बात करते बच्चों पर भाला फेंक शैली में ज्यादा लाते ।

हर क्लास में एक ना एक बच्चा होता ही था, जिसे अपनी बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करने में विशेष महारत होती थी और ये प्रश्नपत्र थामे एक अदा से खड़े होते थे... मैम आई हैव आ डाउट इन क्वैशच्यन नम्बर 11 ....हमें डेफिनेशन के साथ उदाहरण भी देना है क्या? उस इंटेलिजेंट की शक्ल देख खून खौलता।

परीक्षा के बाद जाँची हुई कापियों का बंडल थामे कॉपी बाँटने क्लास की तरफ आते शिक्षक साक्षात सुनामी लगते थे।

ये वो दिन थे, जब कागज़ के एक पन्ने को छूकर खाई 'विद्या कसम' के साथ बोली गयी बात, संसार का अकाट्य सत्य, हुआ करता था।

मेरे लिए आज तक एक रहस्य अनसुलझा ही है कि खेल के पीरियड का 40 मिनिट छोटा और इतिहास का पीरियड वही 40 मिनिट लम्बा कैसे हो जाता था ??

सामने की सीट पर बैठने के नुकसान थे तो कुछ फायदे भी थे। मसलन चाक खत्म हुई तो मैम के इतना कहते ही कि "कोई भी जाओ बाजू वाली क्लास से चाक ले आना" सामने की सीट में बैठा बच्चा लपक कर क्लास के बाहर, दूसरी क्लास में " मे आई कम इन" कह सिंघम एंट्री करते।

"सरप्राइज़ चेकिंग" पर हम पर कापियाँ जमा करने की बिजली भी गिरती थी, सभी बच्चों को चेकिंग के लिए कॉपी टेबल पर ले जाकर रखना अनिवार्य होता था। टेबल पर रखे जा रहे कॉपियों के ऊँचे ढेर में अपनी कॉपी सबसे नीचे दबा आने पर तूफ़ान को जरा देर के लिए टाल आने की तसल्ली मिलती थी।

वो निर्दयी शिक्षक जो पीरियड खत्म होने के बाद का भी पाँच मिनिट पढ़ाकर हमारे लंच ब्रेक को छोटा कर देते थे। चंद होशियार बच्चे हर क्लास में होते हैं जो मैम के क्लास में घुसते ही याद दिलाने का सेक्रेटरी वाला काम करते थे "मैम कल आपने होमवर्क दिया था।" जी में आता था इस आइंस्टीन की औलाद को डंडों से धुन के धर दो।

तमाम शरारतों के बावजूद ये बात सौ आने सही हैं कि बरसों बाद उन शिक्षक के प्रति स्नेह और सम्मान बढ़ जाता है, अब वो किसी मोड़ पर अचानक मिल जाएं तो बचपन की तरह अब हम छिपेंगे तो कतई नहीं।

आज भी जब मैं अपने विद्यालय या महाविद्यालय की बिल्डिंग के सामने से गुजरता हूँ तो लगता है कि एक दिन था जब ये बिल्डिंग मेरे जीवन का अभिन्न हिस्सा थी। अब उस बिल्डिंग में न मेरे दोस्त हैं, न हमको पढ़ाने वाले वो शिक्षक। बच्चों को लेट एंट्री से रोकने गेट बंद करते स्टाफ भी नहीं दिखते जिन्हें देखते ही हम दूर से चिल्लाते थे “गेट बंद मत करो भैय्या प्लीज़” वो बूढ़े से बाबा भी नहीं हैं जो मैम से हस्ताक्षर लेने जब जब लाल रजिस्टर के साथ हमारी क्लास में घुसते, तो बच्चों में ख़ुशी की लहर छा जाती “कल छुट्टी है”

अब विद्यालय के सामने से निकलने से एक टीस सी उठती है जैसे मेरी कोई बहुत अजीज चीज़ छिन गयी हो। आज भी जब उस इमारत के सामने से निकलता हूँ, तो पुरानी यादों में खो जाता हूं।

स्कूल/कालेज की शिक्षा पूरी होते ही व्यवहारिकता के कठोर धरातल में, अपने उत्तरदाइत्वों को निभाते, दूसरे शहरों में रोजगार का पीछा करते, दुनियादारी से दो चार होते, जिम्मेदारियों को ढोते हमारा संपर्क उन सबसे टूट जाता है, जिनसे मिले मार्गदर्शन, स्नेह, अनुशासन, ज्ञान, ईमानदारी, परिश्रम की सीख और लगाव की असंख्य कोहिनूरी यादें किताब में दबे मोरपंख सी साथ होती है, जब चाहा खोल कर उस मखमली अहसास को छू लिया।

Copied

सुबह सुबह जंगल में सैर के लिए एक खरगोश जा रहा था।उसने देखा कि एक भालू बैठकर शराब पी रहा है।खरगोश से रहा न गया औऱ उसने भा...
07/06/2021

सुबह सुबह जंगल में सैर के लिए एक खरगोश जा रहा था।

उसने देखा कि एक भालू बैठकर शराब पी रहा है।

खरगोश से रहा न गया औऱ उसने भालू से कहा.....चाचा, क्यों ख़ुद भी मर रहे हो औऱ अपने बाल बच्चों को भी मारने पर तुले हो....शराब बहुत बुरी चीज़ है इसे त्याग दो।

भालू उसकी बातों से बहुत प्रभावित हुआ औऱ रोने लगा।उसने कहा... तू बिलकुल ठीक कह रहा है भतीजे.. आज से शराब बंद।

उसके बाद भालू भी खरगोश के साथ चल पड़ा।

कुछ दूर आगे जाने के बाद दोनों ने देखा कि एक लोमड़ी सिगरेट पी रही है।

उसे देख खरगोश ने कहा...अपना फेफड़ा ख़राब मत करो मौसी....ये सिगरेट बहुत बुरी चीज़ है, अभी से तौबा कर लो नहीं तो जीवन नर्क हो जाएगा तुम्हारा।

लोमड़ी ने खरगोश की बातों को बहुत गंभीरता से लिया औऱ उसने उसी समय सिगरेट छोड़ने का फैसला कर लिया।

अब खरगोश औऱ भालू के साथ लोमड़ी भी चल पई।तीनों कुछ दूर आगे गए ही थे कि एक बाघ ताड़ी पी रहा था।

बाघ को नशा करते देख खरगोश से रहा न गया औऱ उसने अपनी ज़ुबान चलाई....दादा,अगर मरना चाहते हो तो आसान तरीका ढूंढ़ो... नशे की बुरी लत से मरकर क्यों अपने बीबी बच्चों को अनाथ करना चाह रहे हो ??

उसकी बातों को सुनकर बाघ ने भी नशे से तुरंत तौबा कर ली औऱ वो भी उनके साथ हो लिया।

चारो साथ कुछ दूर बढे ही थे कि उन्होंने देखा कि एक जिराफ़ भांग पिस रहा है।उन चारों को देख जिराफ़ बोला... आओ आओ, तुम सब को भांग की शरबत पिलाता हूँ.... इसे पीकर तुमलोग झूमने लगोगे।

खरगोश फिर व्याकुल हो गया औऱ उससे जब रहा न गया तो उसने कहा...ताऊ,तुम्हें अपने शरीर से बैर है क्या??नहीं न ?? फ़िर क्यों भांग की नशा कर रहे हो।नशा करने से आयु कम होती है औऱ आदमी जल्दी टें बोल देता है।

जिराफ़ खरगोश की बातों को सुनकर कुछ पल के लिए खामोश हो गया, उसके बाद बोला...बेटे,उम्र में तू भले ही छोटा है लेकिन बात तो बिलकुल पते की बोल रहा है...चल आज से नशा बंद।

उसके बाद जिराफ़ भी उन सब के साथ हो लिया औऱ सब जंगल में आगे बढ़े।

दूर से ही सबको एक साथ आते जंगल के राजा शेर ने देख लिया।शेर ने उन सब को रोका औऱ दहाड़ मारकर बोला..... " अबे बेवकूफों, कहाँ जा रहे हो तुमसब इस शैतान खरगोश के पीछे पीछे....साला इसको कोई काम नहीं है... सुबह सुबह ख़ुद गांजा पीकर सबको भाषण देता फिरता है औऱ फ़ालतू में अपने साथ पूरा जंगल घुमाता है.... कई बार तो इसने मुझें भी बेवकूफ बनाया है......

शेर के इतना कहते ही खरगोश भागकर झाड़ियों में छुप गया औऱ सभी एक दूसरे का मुंह ताकने लगे।

निष्कर्ष...... ज्ञान सिर्फ़ दूसरों को देने के लिए होता है, उसपर ख़ुद अमल नहीं किया जाता......!!

03/06/2021

एक बात मेरी समझ में कभी नहीं आई , कि ये फिल्म अभिनेता या अभिनेत्री ..; ऐसा क्या करते हैं , कि इनको एक फिल्म के लिए 50 करोड़ -- या 100 करोड़ रुपये मिलते हैं❓
सुशांत सिंह की मृत्यु के बाद , यह चर्चा चली थी , कि जब वह इंजीनियरिंग का टॉपर था , तो फिर उसने फिल्म का क्षेत्र क्यों चुना❓
जिस देश में शीर्षस्थ वैज्ञानिकों , डाक्टरों , इंजीनियरों , प्राध्यापकों , अधिकारियों इत्यादि को प्रतिवर्ष 10 लाख से 20 लाख रुपये मिलता हो ,
जिस देश के राष्ट्रपति की कमाई प्रतिवर्ष 1 करोड़ से कम ही हो - उस देश में एक फिल्म अभिनेता प्रतिवर्ष
10 करोड़ से 100 करोड़ रुपए तक कमा लेता है ! आखिर ऐसा क्या करता है , वह❓
देश के विकास में क्या योगदान है , इनका❓ आखिर वह ऐसा क्या करता है , कि वह मात्र एक वर्ष में इतना कमा लेता है , जितना देश के शीर्षस्थ वैज्ञानिक को शायद 100 वर्ष लग जाएं❓
आज जिन तीन क्षेत्रों ने .; देश की नई पीढ़ी को मोह रखा है , वह है - सिनेमा , क्रिकेट और राजनीति❗️इन तीनों क्षेत्रों से सम्बन्धित लोगों की कमाई और प्रतिष्ठा , सभी सीमाओं के पार है❗️
यही तीनों क्षेत्र आधुनिक युवाओं के आदर्श हैं , जबकि वर्तमान में इनकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगे हैं ! स्मरणीय है , कि विश्वसनीयता के अभाव में चीजें प्रासंगिक नहीं रहतीं और जब चीजें महँगी हों , अविश्वसनीय हों , अप्रासंगिक हों -
तो वह देश और समाज के लिए व्यर्थ ही है , कई बार तो आत्मघाती भी❗️
सोंचिए , कि यदि सुशांत या ऐसे कोई अन्य युवक या युवती , आज इन क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं , तो क्या यह बिल्कुल अस्वाभाविक है❓
मेरे विचार से तो नहीं❗️
कोई भी सामान्य व्यक्ति धन , लोकप्रियता और चकाचौंध से प्रभावित हो ही जाता है❗️
🔺बॉलीवुड में ड्रग्स वा वेश्यावृत्ति ,
🔺क्रिकेट में मैच फिक्सिंग ,
🔺राजनीति में गुंडागर्दी - भ्रष्टाचार ,
इन सबके पीछे मुख्य कारक धन ही है और यह धन , उन तक हम ही पहुँचाते हैं ! हम ही अपना धन फूँककर , अपनी हानि कर रहे हैं ! मूर्खता की पराकाष्ठा है , यह❗️
🔺70-80 वर्ष पहले तक प्रसिद्ध अभिनेताओं को सामान्य वेतन मिला करता था❗️
🔺30-40 वर्ष पहले तक क्रिकेटरों की कमाई भी कोई खास नहीं थी❗️
🔺30-40 वर्ष पहले तक राजनीति भी इतनी पंकिल नहीं थी ! धीरे-धीरे ये हमें लूटने लगे और हम शौक से खुशी-खुशी लुटते रहे ! हम इन माफियाओं के चंगुल में फँस कर , हम अपने बच्चों का , अपने देश का भविष्य को बर्बाद करते रहे🔺
🔺50 वर्ष पहले तक फिल्में इतनी अश्लील और फूहड़ नहीं बनती थीं ! क्रिकेटर और नेता इतने अहंकारी नहीं थे - आज तो ये हमारे भगवान बने बैठे हैं❗️
अब आवश्यकता है , इनको सिर पर से उठाकर पटक देने की - ताकि इन्हें अपनी हैसियत पता चल सके❗️
एक बार वियतनाम के राष्ट्रपति हो - ची - मिन्ह भारत आए थे ! भारतीय मंत्रियों के साथ हुई मीटिंग में , उन्होंने पूछा - " आप लोग क्या करते हैं❓"
इन लोगों ने कहा - " हम लोग राजनीति करते हैं "🔺
वे समझ नहीं सके , इस उत्तर को❓
उन्होंने दुबारा पूछा - " मेरा मतलब , आपका पेशा क्या है❓"
इन लोगों ने कहा - " राजनीति ही हमारा पेशा है "❗️
हो-ची मिन्ह तनिक झुंझलाए बोला - " शायद आप लोग मेरा मतलब नहीं समझ रहे❗️ राजनीति तो मैं भी करता हूँ .; लेकिन पेशे से मैं किसान हूँ , खेती करता हूँ , खेती से मेरी आजीविका चलती है ! सुबह - शाम मैं अपने खेतों में काम करता हूँ ! दिन में राष्ट्रपति के रूप में , देश के लिए अपना दायित्व निभाता हूँ❗️"
भारतीय प्रतिनिधि मंडल निरुत्तर हो गया , कोई जबाब नहीं था , उनके पास ! जब हो-ची-मिन्ह ने दुबारा , वही - वही बातें पूछी , तो प्रतिनिधि मंडल के एक सदस्य ने झेंपते हुए कहा - " राजनीति करना ही , हम सबों का पेशा है❗️"
स्पष्ट है , कि भारतीय नेताओं के पास , इसका कोई उत्तर ही न था ! बाद में एक सर्वेक्षण से पता चला , कि भारत में 6 लाख से अधिक लोगों की आजीविका राजनीति से चलती थी ! आज यह संख्या करोड़ों में पहुंच चुकी है❗️
कुछ महीनों पहले ही जब कोरोना से यूरोप तबाह हो रहा था , डाक्टरों को लगातार कई महीनों से थोड़ा भी अवकाश नहीं मिल रहा था , तब पुर्तगाल की एक डॉक्टरनी ने खीजकर कहा था - " रोनाल्डो के पास जाओ न , जिसे तुम करोड़ों डॉलर देते हो ! मैं तो कुछ हजार डॉलर ही पाती हूँ❗️"
मेरा दृढ़ विचार है , कि जिस देश में युवा छात्रों के आदर्श वैज्ञानिक , शोधार्थी , शिक्षाशास्त्री आदि न होकर .; अभिनेता , राजनेता और खिलाड़ी होंगे , उनकी स्वयं की आर्थिक उन्नति भले ही हो जाए ,
देश की उन्नत्ति कभी नहीं होगी❗️ सामाजिक , बौद्धिक , सांस्कृतिक , रणनीतिक रूप से देश पिछड़ा ही रहेगा हमेशा ! ऐसे देश की एकता और अखंडता , हमेशा खतरे में रहेगी❗️
जिस देश में अनावश्यक और अप्रासंगिक क्षेत्र का वर्चस्व बढ़ता रहेगा , वह देश दिन - प्रतिदिन कमजोर होता जाएगा❗️
देश में भ्रष्टाचारी व देशद्रोहियों की संख्या बढ़ती रहेगी , ईमानदार लोग हाशिये पर चले जाएँगे व राष्ट्रवादी लोग कठिन जीवन जीने को विवश होंगे❗️
सभी क्षेत्रों में कुछ अच्छे व्यक्ति भी होते हैं ! उनका व्यक्तित्व , मेरे लिए हमेशा सम्माननीय रहेगा ! आवश्यकता है हम प्रतिभाशाली , ईमानदार , कर्तव्यनिष्ठ , समाजसेवी , जुझारू , देशभक्त , राष्ट्रवादी , वीर लोगों को ..; अपना आदर्श बनाएं❗️
नाचने - गानेवाले , ड्रगिस्ट , लम्पट , गुंडे - मवाली , भाई - भतीजा - जातिवाद और दुष्ट देशद्रोहियों को जलील करने और सामाजिक , आर्थिक और राजनैतिक रूप से बॉयकॉट करने की प्रवृत्ति विकसित करनी होगी , हमें❗️
यदि हम ऐसा कर सकें , तो ठीक ..; अन्यथा देश की अधोगति भी तय है❗️
👏🙏 आप स्वयं तय करो .; सलमान खान , आमिर खान , अमिताभ बच्चन , धर्मेंद्र , जितेंद्र , हेमा, रेखा , जया ..; देश के विकास में , इनका योगदान क्या है .; हमारे बच्चे मूर्खों की तरह , इनको आइडियल बनाए हुए है❗️

👆🏾👆🏾👆🏾👆🏾बाजार में एक चिड़ीमार  #तीतर बेच रहा था...उसके पास एक बडी जालीदार टोकरी में बहुत सारे तीतर थे..!और एक छोटी जालीदा...
02/06/2021

👆🏾👆🏾👆🏾👆🏾
बाजार में एक चिड़ीमार #तीतर बेच रहा था...

उसके पास एक बडी जालीदार टोकरी में बहुत सारे तीतर थे..!

और एक छोटी जालीदार टोकरी में सिर्फ एक ही तीतर था..!

एक ग्राहक ने पूछा
एक तीतर कितने का है..?

"40 रूपये का..!"

ग्राहक ने छोटी टोकरी के तीतर की कीमत पूछी।

तो वह बोला,
"मैं इसे बेचना ही नहीं चाहता..!"

"लेकिन आप जिद करोगे,
तो इसकी कीमत 500 रूपये होगी..!"

ग्राहक ने आश्चर्य से पूछा,
"इसकी कीमत इतनी ज़्यादा क्यों है..?"

"दरअसल यह मेरा अपना पालतू तीतर है और यह दूसरे तीतरों को जाल में फंसाने का काम करता है..!"

"जब ये चीख पुकार कर दूसरे तीतरों को बुलाता है और दूसरे तीतर बिना सोचे समझे ही एक जगह जमा हो जाते हैं फिर मैं आसानी से सभी का शिकार कर लेता हूँ..!"

बाद में, मैं इस तीतर को उसकी मनपसंद की 'खुराक" दे देता हूँ जिससे ये खुश हो जाता है..!

"बस इसीलिए इसकी कीमत भी ज्यादा है..!"

उस समझदार आदमी ने तीतर वाले को 500 रूपये देकर उस तीतर की सरे आम बाजार में गर्दन मरोड़ दी..!

किसी ने पूछा,
"अरे, ज़नाब आपने ऐसा क्यों किया..?

उसका जवाब था,
"ऐसे दगाबाज को जिन्दा रहने का कोई हक़ नहीं है जो अपने मुनाफे के लिए अपने ही समाज को फंसाने का काम करे और अपने लोगो को धोखा दे..!"

हमारी व्यवस्था में 500 रू की क़ीमत वाले बहुत से तीतर हैं...🙏

प्रतिदिन की तरह वह व्यक्ति पैदल ही अपने घर के लिए जा रहा था ।अचानक रास्ते में एक बिजली के खंभे पर उसने एक कागज चिपका हुआ...
01/06/2021

प्रतिदिन की तरह वह व्यक्ति पैदल ही अपने घर के लिए जा रहा था ।

अचानक रास्ते में एक बिजली के खंभे पर उसने एक कागज चिपका हुआ देखा। पास जाकर उसने पढ़ा तो उसपर लिखा था.....कृपया बहुत ध्यान से पढ़ें......

" इस रास्ते पर मैंने कल एक 100 का एक नोट गंवा दिया है । मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता... जिसे भी मिले वे कृपया नीचे लिखे पते पर दे सकते हैं...मैं बहुत ग़रीब हूँ... भगवान आपका भला करेगा.....।" ..

यह पढ़कर पता नहीं क्यों उस पते पर उस व्यक्ति की जाने की तीव्र इच्छा हुई । उसने पता याद रखा । पास में ही यह उस गली के आखिरी में एक घऱ था ।

वहाँ जाकर उसने आवाज लगाया तो एक वृद्धा लाठी के सहारे धीरे-धीरे बाहर आई । उस व्यक्ति को मालूम हुआ कि वह बिलकुल अकेली रहती है औऱ अब उसका इस दुनिया में कोई नहीं है । उसे ठीक से दिखाई भी नहीं देता ।

हालात को पूरी तरह भांपते हुए उसने आवाज़ लगाई " माँ जी", यहां आईए - "आपका खोया हुआ 100 रुपए मुझे अभी अभी मिला है, उसे देने आया हूँ...ये लीजिए.... ।"

यह सुन वह वृद्धा फूटफूटकर रोने लगी औऱ बोली...

"बेटा, अभी तक करीब 50-60 व्यक्ति मुझे 100-100 ₹ दे चुके हैं । मै पढ़ी-लिखी नहीं हूँ, । ठीक से दिखाई भी नहीं देता....पता नहीं कौन मेरी इस हालत को देख मेरी मदद करने के उद्देश्य से लिख गया है...ये रुपए मेरे नहीं हैं... तुम रख लो... ।"

उस व्यक्ति के बहुत कहने पर बुढ़िया ने पैसे तो रख लिए... पर उसने उससे एक विनती की - " बेटा, वह मैंने नहीं लिखा है । किसी ने मुझ पर तरस खाकर लिखा होगा ,बेसहारा हूँ न शायद इसलिए... जाते-जाते उस काग़ज़ को जरूर फाड़कर फेंक देना बेटा....."।

उस व्यक्ति ने हाँ कहकर बुढ़िया को टाल तो दिया पर उसकी अंतरात्मा ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया कि उन 50-60 लोगों से भी उस "माँ" ने यही कहा होगा । लेकिन किसी ने भी नहीं उस कागज़ को फाड़ा....जिंदगी में हम कितने सही और कितने गलत है, ये सिर्फ दो ही शक्स जानते है..परमात्मा और अपनी अंतरआत्मा..उस व्यक्ति का हृदय उस इंसान के प्रति कृतज्ञता औऱ श्रद्धा से भर गया जिसने इस वृद्धा की सेवा का उपाय करने का ये तरीका ढूँढा । सहायता के तो बहुत से मार्ग हैं , पर इस तरह की सेवा उस व्यक्ति के हृदय को छू गई और उसने भी उस कागज को फाड़ा नहीं ।

दूसरों की मदद करने के तरीके कई हैं .. सिर्फ कर्म करने की तीव्र इच्छा मन मॆ होनी चाहिए।कुछ अच्छाइयां अपने जीवन में ऐसी भी करनी चाहिए जिनका ईश्वर के सिवाय कोई और गवाह ना हो.......परोपकार से बड़ा कोई धर्म नहीं..........

28/05/2021

एक बार एक वकील ने एक शिक्षक को अपना कुआं बेच दिया।

दो दिन बाद वकील उस शिक्षक के पास आया और बोला
"सर मैंने आपको अपना कुआँ बेचा है, उसका पानी नहीं, इसलिए अगर आप पानी लेते हो, तो उसके लिए आपको अलग से किराया देना होगा।"

शिक्षक ने कहा "हाँ, मैं भी तुम्हारे पास आने वाला था, ये कहने के लिए कि तुम मेरे कुएं से अपना पानी निकालो, नहीं तो कल से तुम्हे किराया देना होगा"

वकील ने कहा "अजी, मैं तो मज़ाक़ कर रहा था"

शिक्षक ने कहा "आप जैसे वकील हमारे पास पढ़कर ही वकील बनते हैं".......!!

पिछले स्तंभ का गतांक .....    अम्मा ने पानी का गिलास कजरी चाची के हाथ में थमाते हुए कहा परेशान मत हो कजरी सब ठीक होगा अम...
27/05/2021

पिछले स्तंभ का गतांक .....
अम्मा ने पानी का गिलास कजरी चाची के हाथ में थमाते हुए कहा परेशान मत हो कजरी सब ठीक होगा अम्मा ने ढाड्स बंधाया । अन्नू की मा अभी जेठ में ही तो फगुनिया के बापू के इलाज के लिए दोनों बकरियां बेच दी
अब्दुल भाई को । १४ सैकड़ा तेंदू पत्ता भी तोड़ा था पर बोनस मिलने में अभी महीने बाकी है । कुछ रुपए बचाए भी थे तो पिछले हफ़्ते बिसेशर की बिटिया का बारात आया था वहां थाल परात दे दिए , अभी फगुनिया भी तो बड़ी हो गई है सब टोला परोस के ही भरोसे तो है।
ऐसे में ये मुसीबत आन पड़ी , एक सांस में पूरी कहानी बताई। मेरी अम्मा बहुत ही भावुक और नर्म दिल की हैं ।
रुक जरा करती हूं कुछ । अम्मा भीतर गई और आलते में से कुछ रुपए निकाल कर बाहर आई और मेरे हाथ में थमाते हुए कहा बिट्टू गिन तो जरा १००/१०० के २४ नोट थे गिन कर बताया , कजरी के हाथ में थमाते हुए कहा कि ये रख शायद कुछ काम आ सके । कजरी चाची रुआंसी हो गई कहा अन्नू की माई तुम देवी हो देवी , सबने तो मुसीबत में हांथ खींच लिया था। मेरे पास तो अभी तुम्हे देने के लिए कुछ नहीं है एक बछिया है आज काल में लगी है चाहो तो अन्नू बिटिया के दूध खाने के लिए रख लो ।
अरे नहीं, नहीं फगुनिया की माई , तुम्हे कुछ भी देने की जरूरत नहीं है । जब तुम्हारे पास होंगे लौटा देना। आखिर फगुनिया हमारी भी तो बिटिया है । कृतज्ञ नज़रों से चाची विदा हुई जिसे हम दूर तक देखते रहे।
और देवी जी मैंने अम्मा की ओर पलटते हुए कहा अब मेरा मोबाइल कहां से आएगा जो तुमने इस महीने दिलाने का वादा किया था। अम्मा और मै दोनो हंस रहे थे इस जुएं में हारकर , अम्मा ने गले लगा लिया अन्नू अगले महीने...
जो कि कभी नहीं आने वाले ......

अन्नू के माई घरेन मा हो कजरी चाचीने आवाज़ लगाई। रसोई में चावल के कंकड़ चुनती हुई अम्मा ने मुझको कहा देखा बिट्टू कौन आवा ...
26/05/2021

अन्नू के माई घरेन मा हो कजरी चाची
ने आवाज़ लगाई। रसोई में चावल के कंकड़ चुनती हुई अम्मा ने मुझको कहा देखा बिट्टू कौन आवा है मैंने दरवाजे पर कजरी चाची को देखा हांथ में एक पुराने पॉलिथीन में कुछ लपेटे खड़ी थी। अंदर आओ चाची कैसी हो , अधेड़ उम्र की गोल मटोल डील डौल हरदम बतीसी चियार कर हंसने वाली चाची के चेहरे पर चिंता और हड़बड़ाहट दिख रही थी । अक्सर अपने चटपटी और रोमांचक खबर बाजी के कारण पूरे मुहल्ले में फेमस रहने वाली चाची अंदर आते ही बरामदे के चारपाई पर धंस गई , का बताई अन्नू बिटिया तनिक देखा ता ई का आवा है फगुनिया के पापा के नाम मा , कहते हुए फटे पुरानेराशन कार्ड में लपेटे हुए दो कागज़ को चारपाई पर फैला दिया।
मैंने कागज़ देखते ही समझ लिया पहला पन्ना तो बिजली बिल का है दूसरे पर गौर किया तो पाया की विद्दुत विभाग द्वारा जारी किया गया सरकारी फरमान था जिसमें सुखई चाचा के नाम से सम्हन जारी किया गया था कि पिछले कई महीने से निरंतर बिल न भरने के कारण आपका कनेक्शन काटा जा रहा है , अग्रिम तारीख तक अमुक पेशी में तलब करे, एक सांस में मैंने पढ़कर सुना डाला।
चाची रुआंसी हो गई , अभी पिछले वैशाख में ही तो फगुनिया के बापू से लड़ झगड़कर मीटर लगवाई थी , सगल पैसा य साल बीमारी मा चला गा , अब का होई राम जाने,
अम्मा हाथ में पानी का गिलास लिए बाहर आई , कैसन कजरी काहे परेशान होती हो .......
शेष बाते कल ....
जय भीम

पहली बरसात में कुछ ऐसा दिखता है हमारे रीवा की पहाड़ियां
26/05/2021

पहली बरसात में कुछ ऐसा दिखता है
हमारे रीवा की पहाड़ियां

यूं तो हमारा गांव ज्यादा बड़ा नहीं है पर टोले पूरे ११ हैं  टिकुरा टोला, पहरी टोला, मझार टोला , पांडे टोला, तलाईहा टोला ध...
26/05/2021

यूं तो हमारा गांव ज्यादा बड़ा नहीं है पर टोले पूरे ११ हैं टिकुरा टोला, पहरी टोला, मझार टोला , पांडे टोला, तलाईहा टोला धोबियान टोला , पिपरहवा टोला, और ठकुरान टोला या चौरहवा टोला , हम लोग खाले टोला माने दखिन्न टोला में रहते हैं , अभी विधायक फंड और सरकारी कृपा दृष्टि से हमारे टोले को एक प्राइमरी स्कूल मिला है जिसमें हमारे बच्चे पढ़ने जाते हैं। नाम है शिक्षा गारंटी हरिजन बस्ती स्कूल जिसमें एक गांव प्रधान द्वारा चयनित १२ पास शिक्षक भी हैं । कहने को २,३ मिशनरी और अंग्रेजी कॉन्वेंट स्कूल भी खुल चुके हैं पर वहां माझार टोला और पांडे टोला के ही ज्यादा बच्चे हैं , कुछ तो बनियान टोला से भी जाने लगे हैं। विधायक जी के रिश्ते दार के स्कूल हैं ।
ऐसा नहीं है कि हमारे टोले के बच्चे कॉन्वेंट नहीं जाते
हमारे पड़ोसी रामधनी वर्मा जी के दो बच्चे रिंकी और टॉमी भी जाते हैं । पिताजी कॉन्वेंट स्कूल में हेड पीयून हैं
हैं तो वो भी चमार ही पर अपने आपको वर्मा जी कहलवाने में घोर रुचि रखते हैं।
अरे हां अपने रामदास ताऊ की मुनिया और गुड्डन भी जाती हैं ठकुरान वाले कॉन्वेंट में पर रामदास ताऊ जी का हुक्का चिलम और उठना बैठनातो ठाकुरों के यहां होता है। ये बात अलग है सबेरे गाय भैंसों का चारा भूसा सानी , गोबर कंडे की विशेष जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। पर मजाल है कि मुहल्ले में साकेत जी के अलावा कोई नाम से बुला दे ,
सुखई चाचा घाघ निर्लज्ज हैं जहां चार बड़े आदमी के संगत में इनको बैठे देखेंगे ए रे रमदस्वा चल घरे भौजी बुलाई हां कह के दांत निपोर देते हैं।
ताशेडियों ओर चिलामचियो के बीच इनकी भी गहरी पैठ है , मजाल है अग्रासन दिए बिना बीड़ी फूक ले ।
फगुनिया लाख बार मना कर चुकी है दादा निपुर जाओगे बिन बिआहे हमका , हा मेरी सहेली उनकी बड़की बिटिया , साथाई में ६ कक्षा पढ़ी है, अभी लकड़ी चूल्हे चौके , कढ़ाई सिलाई में सब में पारंगत है। कोई योग्य वर मिले तो बताना चाचा मोटर साइकिल देने वाले हैं।
और ई है हम तुम्हार सहेली अनुराधा अब का सगलें गाम की चुगली कराई लोगे हमसे फिर कहोगे बोलती है।
मस्त गांव है हमार।

Address

Rewa
486001

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when चुगली चाची posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share