10/12/2025
#ब्रांड_ट्रॉफी_में_आयोजक_काली_करतूतें:
आशीष और सद्दाम एक ट्रॉफी करवा रहा है। आज उसका सेमीफाइनल, फाइनल है । खुद दोनों ने मिलकर चार टीम उतारा और तमाम नियमों की धज्जियां उड़ाकर खुद ही इस टूर्नामेंट को कचरा कर दिया है।
1. ऑक्शन बेस्ड टूर्नामेंट में सद्दाम बार - बार अपना टीम बदला और साकेत का भी टीम तीन बार बदला। और अंततः दोनों एक ही टीम के लिए खेला।
2. चाहत खान जैसे कुछ के नाम बदल कर ऑक्शन टेबल पर आने ही नहीं दिया और उसे अनसोल्ड रखा। और अपने टीम में शामिल किया।
3. एक ओनर ( Young 11 ) नाम का एक फेक टीम बनाकर अंतिम समय में बोला वो टीम भाग नहीं ले सकती है अब। उसके खिलाड़ी को जब जिधर चाहा लॉटरी के नाम पर कर दिया। साकेतसाकेत सद्दाम उसी टीम में थे, उसे लॉटरी से दूसरे टीम को दिया लेकिन खेला वो तीसरे टीम में।
4. शाफीन जैसे युवा को खेलने नहीं दिया गया, रितेश सिंह जैसे कोशी के अनुभवी खिलाड़ी से धोखेबाजी किया और खेलने नहीं दिया।
5. मेरे पास दस से ज्यादा खिलाड़ियों की शिकायत है कि पैसे नहीं मिल रहे हैं खेलने के बाद।
6.कुछ युवा खिलाड़ियों ने शिकायत की है कि रजिस्ट्रेशन फीस के अलावा हमसे ड्रेस का फीस लिया गया।
7. किसी पब्लिक स्कूल की टीम को जिताने के लिए सारे प्रयास किए जा रहे हैं।
8. शुभम् स्टार जो मधेपुरा के पुराने ओनर हैं उन्होंने खिलाड़ी की अनुपलब्धता के कारण सेमीफाइनल खेलने से इनकार कर दिया है। बोला एक दो दिन टूर्नामेंट को बढ़ा दीजिए क्योंकि खिलाड़ी कर्ण ट्रॉफी के कारण खिलाड़ी उपलब्ध नहीं है फिर सेमीफाइनल में विपक्षी टीम को जीत दे दिया गया। सेमीफाइनल में पहुंचे तीन ओनर ने कहा कि कर्ण ट्रॉफी के कारण एक दिन टूर्नामेंट को बढ़ा दिया जाए लेकिन दोनों ने एक नहीं सुनी।
9. किसी भी टीम को अनसोल्ड को नहीं लेने दिया जा रहा था और एक पब्लिक स्कूल के टीम को जहां से संभव हो सकता था टीम में दिया गया और सद्दाम उसी टीम में खेल रहे हैं। ( तीन बार टीम बदलकर जबकि इस बार नियम था कोई ट्रेड नहीं हो सकता है)
10. ना तो पानी पीने की व्यवस्था थी, ना बाउंड्री पर चूना की व्यवस्था ना खाने की व्यवस्था और ना ही ग्राउंड को चारों ओर से सजाया गया था।
आप समझ सकते हैं खिलाड़ी जो जिंदगी भर क्रिकेट को समर्पित रहता है वो मात्र एक टूर्नामेंट में इतना बेईमानी, धोखेबाजी, भ्रष्टाचार और धूर्तता पर आ जाएगा ये किसी ओनर ने सोचा नहीं था।
इस टूर्नामेंट में खिलाड़ी रजिस्ट्रेशन नहीं कर रहे थे और ओनर भाग लेना नहीं चाहते थे तो मैंने कम से कम 50 खिलाड़ी का रजिस्ट्रेशन करवाया और चार टीम दिया। लेकिन टूर्नामेंट आगे बढ़ने पर इनके गलतियों पर जब भी सवाल किया तो ये बोलते थे कि केवल आपको ही दिक्कत होता है ?
इस बार ये मात्र 1 से 2 लाख की बचत के लिए इतना गिर गए सोचा नहीं था जबकि ये यदि फेयर टूर्नामेंट कराते तो तब भी इन्हें लगभग इतना पैसा बच ही जाता।
लगभग सभी ओनर दुखी, आक्रोशित थे और सभी एक दूसरे की बात से सहमत थे कि यहां एंट्री लेकर बड़ी गलती कर दी। ज्यादातर ने कहा कि इनके काठ की हांडी दूसरी बार नहीं चढ़ेगी।