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23/03/2024
विराट कीर्तिमान!विश्व विख्यात क्रिकेटर Virat Kohli को ODI क्रिकेट में सर्वाधिक 50 शतक का रिकॉर्ड बनाने की हार्दिक बधाई!भ...
15/11/2023

विराट कीर्तिमान!

विश्व विख्यात क्रिकेटर Virat Kohli को ODI क्रिकेट में सर्वाधिक 50 शतक का रिकॉर्ड बनाने की हार्दिक बधाई!

भारत को गौरवभूषित करता यह रिकॉर्ड उनके परिश्रम, अनुशासन और जुनून का प्रतिफल है।

अनेक रिकॉर्ड और बहुत सी यादगार पारियां अभी शेष हैं।

जय हिंद 🇮🇳

𝐁𝐎𝐎𝐌-𝐑𝐀𝐒𝐇 👉👨🏻‍🦱
13/10/2023

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28/09/2022
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26/09/2022

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बायकाट  tv के धारावाहिको का करो. जिसमे  हर दूसरे नाटक मे हमारे देश  के परिवारों  को बर्वादी की  ओर धकेला  जा रहा. इन धार...
23/09/2022

बायकाट tv के धारावाहिको का करो. जिसमे हर दूसरे नाटक मे हमारे देश के परिवारों को बर्वादी की ओर धकेला जा रहा. इन धारावाहिको मे अवैध संबंधो की ट्रेनिंग दी जाती है.
20-25 साल के बच्चे मिलकर अपनी माँ की दूसरी शादी की तैयारी कर रहे है, हद है। पिता जीवित है, उनकी कहीं और सेटिंग चल रही है... अब उनकी माँ कम से कम 45-50 वर्ष की आयु में किसी और से शादी कर रही है।
भाई बहन आपस मे कह रहे है कि हम बड़े भाग्यशाली है कि हमे अपनी मम्मी की डोली सजाने के अवसर मिल रहा है, सबको यह अवसर नही मिलता।
अब उन्हें कौन समझाए की , हद दर्जे के बेफकूफ हो तुम

 #हमारा भी एक  #जमाना था...खुद ही स्कूल जाना पड़ता था क्योंकि साइकिल बस आदि से भेजने की रीत नहीं थी, स्कूल भेजने के बाद ...
22/09/2022

#हमारा भी एक #जमाना था...
खुद ही स्कूल जाना पड़ता था क्योंकि साइकिल बस आदि से भेजने की रीत नहीं थी, स्कूल भेजने के बाद कुछ अच्छा बुरा होगा ऐसा हमारे मां-बाप कभी सोचते भी नहीं थे उनको किसी बात का डर भी नहीं होता था,
🤪 पास/ फैल यानि नापास यही हमको मालूम था... % से हमारा कभी संबंध ही नहीं रहा।
😛 ट्यूशन लगाई है ऐसा बताने में भी शर्म आती थी क्योंकि हमको ढपोर शंख समझा जा सकता था।
🤣
किताबों में पीपल के पत्ते, विद्या के पत्ते, मोर पंख रखकर हम होशियार हो सकते हैं ऐसी हमारी धारणाएं थी।
☺️ कपड़े की थैली में बस्तों में और बाद में एल्यूमीनियम की पेटियों में किताब, कॉपियां बेहतरीन तरीके से जमा कर रखने में हमें महारत हासिल थी।
😁 हर साल जब नई क्लास का बस्ता जमाते थे उसके पहले किताब कापी के ऊपर रद्दी पेपर की जिल्द चढ़ाते थे और यह काम लगभग एक वार्षिक उत्सव या त्योहार की तरह होता था।
🤗 साल खत्म होने के बाद किताबें बेचना और अगले साल की पुरानी किताबें खरीदने में हमें किसी प्रकार की शर्म नहीं होती थी क्योंकि तब हर साल न किताब बदलती थी और न ही पाठ्यक्रम।
🤪 हमारे माताजी/ पिताजी को हमारी पढ़ाई का बोझ है ऐसा कभी लगा ही नहीं।
😞 किसी दोस्त के साइकिल के अगले डंडे पर और दूसरे दोस्त को पीछे कैरियर पर बिठाकर गली-गली में घूमना हमारी दिनचर्या थी।इस तरह हम ना जाने कितना घूमे होंगे।

🥸😎 स्कूल में मास्टर जी के हाथ से मार खाना,पैर के अंगूठे पकड़ कर खड़े रहना,और कान लाल होने तक मरोड़े जाते वक्त हमारा ईगो कभी आड़े नहीं आता था सही बोले तो ईगो क्या होता है यह हमें मालूम ही नहीं था।
🧐😝घर और स्कूल में मार खाना भी हमारे दैनिक जीवन की एक सामान्य प्रक्रिया थी।
मारने वाला और मार खाने वाला दोनों ही खुश रहते थे। मार खाने वाला इसलिए क्योंकि कल से आज कम पिटे हैं और मारने वाला है इसलिए कि आज फिर हाथ धो लिए😀......

😜बिना चप्पल जूते के और किसी भी गेंद के साथ लकड़ी के पटियों से कहीं पर भी नंगे पैर क्रिकेट खेलने में क्या सुख था वह हमको ही पता है।

😁 हमने पॉकेट मनी कभी भी मांगी ही नहीं और पिताजी ने भी दी नहीं.....इसलिए हमारी आवश्यकता भी छोटी छोटी सी ही थीं। साल में कभी-कभार एक आद बार मैले में जलेबी खाने को मिल जाती थी तो बहुत होता था उसमें भी हम बहुत खुश हो लेते थे।
छोटी मोटी जरूरतें तो घर में ही कोई भी पूरी कर देता था क्योंकि परिवार संयुक्त होते थे।
दिवाली में लिए गये पटाखों की लड़ को छुट्टा करके एक एक पटाखा फोड़ते रहने में हमको कभी अपमान नहीं लगा।

😁 हम....हमारे मां बाप को कभी बता ही नहीं पाए कि हम आपको कितना प्रेम करते हैं क्योंकि हमको आई लव यू कहना ही नहीं आता था।
😌आज हम दुनिया के असंख्य धक्के और टाॅन्ट खाते हुए और संघर्ष करती हुई दुनिया का एक हिस्सा है किसी को जो चाहिए था वह मिला और किसी को कुछ मिला कि नहीं क्या पता
स्कूल की डबल ट्रिपल सीट पर घूमने वाले हम और स्कूल के बाहर उस हाफ पेंट मैं रहकर गोली टाॅफी बेचने वाले की दुकान पर दोस्तों द्वारा खिलाए पिलाए जाने की कृपा हमें याद है।वह दोस्त कहां खो गए वह बेर वाली कहां खो गई....वह चूरन बेचने वाला कहां खो गया...पता नहीं।

😇 हम दुनिया में कहीं भी रहे पर यह सत्य है कि हम वास्तविक दुनिया में बड़े हुए हैं हमारा वास्तविकता से सामना वास्तव में ही हुआ है।

🙃 कपड़ों में सिलवटें ना पड़ने देना और रिश्तों में औपचारिकता का पालन करना हमें जमा ही नहीं......सुबह का खाना और रात का खाना इसके सिवा टिफिन क्या था हमें अच्छे से मालूम ही नहीं...हम अपने नसीब को दोष नहीं देते जो जी रहे हैं वह आनंद से जी रहे हैं और यही सोचते हैं और यही सोच हमें जीने में मदद कर रही है जो जीवन हमने जिया उसकी वर्तमान से तुलना हो ही नहीं सकती।

😌 हम अच्छे थे या बुरे थे नहीं मालूम पर #हमारा भी एक #जमाना था। वो बचपन हर गम से बेगाना था।

डॉ राजे नेगी,निदेशक:- नेगी आई केयर सेंटर,ऋषिकेश🙏🏻☺😊

विराट की कप्तानी में भारत 208 डिफेंड नहीं कर पातातो किंग को कप्तानी से हटाने के लिए खूब बयान आता ❤️भारत ने ऑस्ट्रेलिया क...
21/09/2022

विराट की कप्तानी में भारत 208 डिफेंड नहीं कर पाता
तो किंग को कप्तानी से हटाने के लिए खूब बयान आता ❤️

भारत ने ऑस्ट्रेलिया के सामने पहले टी-20 में 209 का टारगेट रखा, जिसे कंगारुओं ने हासिल कर लिया। ऐसा करके करोड़ों हिंदुस्तानियों को दुख से भर दिया। इस मुकाबले में कप्तान रोहित शर्मा की रणनीति बुरी तरह फ्लॉप रही। अगर हिटमैन की जगह किंग कोहली कप्तान होता, तो आलोचकों के बयानों से सोशल मीडिया भर जाता। विराट को कप्तान देखना सबको अखर जाता। बयान आते कि विराट अगर इतना बड़ा टारगेट नहीं डिफेंड कर पा रहा है तो वर्ल्ड कप में क्या खाक कर पाएगा? देख लेना, कोहली निश्चित ही टी-20 वर्ल्ड कप 2022 भी हराएगा।

एशिया कप के सुपर 4 मुकाबले में भुवनेश्वर ने पाकिस्तान के खिलाफ 19वें ओवर में 19 रन और श्रीलंका के खिलाफ 19वें ओवर में 14 रन लुटाया। उनकी धारदार गेंदबाजी ने दोनों ही मुकाबलों में टीम इंडिया को हार का मुंह दिखाया। इससे भी कप्तान रोहित शर्मा ने सबक नहीं सीखा। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ फिर एक बार भुवी को 19वां ओवर सौंपा गया। भुवनेश्वर ने 19वें ओवर में 16 रन और पूरे मैच में 52 रन देकर करोड़ों हिंदुस्तानियों को गमज़दा कर दिया।

ऑस्ट्रेलिया को अंतिम 4 ओवर में जीत के लिए 55 रन चाहिए थे। यहां 17वें ओवर में रोहित के चहेते गेंदबाज भुवनेश्वर आ गए, जिन्होंने तीन वाइड की मदद से 15 रन का तोहफा दिया। फिर लंबे वक्त बाद वापसी कर रहे हर्षल पटेल को हिटमैन ने बॉल पकड़ा दी, जिन्होंने 22 रन लुटा कर तमाम फैंस को चौंका दिया। फिर एकबार 19वें ओवर में भुवी के कमाल के बाद कंगारुओं को जीत के लिए केवल 2 रन चाहिए थे, जिसे उन्होंने 20वें ओवर में आसानी से बना लिया।

जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और मोहम्मद शमी जैसे डेथ ओवर्स स्पेशलिस्ट बॉलर की कमी अंतिम ओवरों में पूरे हिंदुस्तान ने शिद्दत से महसूस की। 208 रन बनाने के बावजूद घटिया गेंदबाजी और खराब कप्तानी ने हमसे निश्चित जीत छीन ली। हकीकत यह है कि मोहम्मद सिराज को विराट ने इतने वर्षों में आईपीएल से लेकर टीम इंडिया तक डेथ ओवर स्पेशलिस्ट गेंदबाज बनाया। बदले में सिराज ने हिंदुस्तान को ढेरों मुकाबला जिताए। पर जबसे कप्तान बदला, सिराज भुला दिए गए।

अगर भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी-20 सीरीज में बढ़िया प्रदर्शन करना है तो टीम कॉम्बिनेशन में बड़ा बदलाव करना होगा। लगातार रन लुटा रहे गेंदबाजों की बजाय आखिरी ओवर्स में सटीक लाइन-लेंथ के बूते बल्लेबाजों को रनों के लिए तरसा देने वाले बॉलर्स को चुनना होगा। अगर कप्तान रोहित ने अपनी रणनीति नहीं बदली, तो बोर्ड पर टँगे बड़े से बड़े रन भी किसी काम के नहीं होंगे। हम हर बार यूं ही मैच जीतने में नाकाम होंगे।

किंग कोहली का अपमान
कभी नहीं सहेगा हिंदुस्तान

16/09/2022

09/07/2022

I im sad 😔 😟 💔 sad song 🎵 😢

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