15/02/2026
अमरूद का एन्थ्रेक्नोज (Anthracnose) रोग – वैज्ञानिक विवरण
1. सामान्य नाम (Common Name)
एन्थ्रेक्नोज रोग (Anthracnose of Guava)
2. फसल
अमरूद – Psidium guajava
3. वैज्ञानिक नाम (रोगकारक)
Colletotrichum gloeosporioides
4. रोगकारक (Causal Organism) – वैज्ञानिक जानकारी
यह एक फफूंद (Fungus) जनित रोग है।
यह फफूंद बीजाणु (conidia) द्वारा फैलती है।
गर्म और आर्द्र वातावरण (25–30°C तापमान तथा 80% से अधिक आर्द्रता) में तेजी से फैलती है।
वर्षा एवं तेज हवा से इसके बीजाणु एक पौधे से दूसरे पौधे में पहुंचते हैं।
5. प्रभावित भाग (Affected Plant Parts)
पत्तियाँ
टहनियाँ
फूल
फल (विशेषकर कच्चे व पकते फल)
6. लक्षण (Symptoms)
(क) पत्तियों पर
छोटे भूरे या काले गोल धब्बे बनते हैं।
धब्बे बढ़कर अनियमित आकार के हो जाते हैं।
अधिक संक्रमण होने पर पत्तियाँ झड़ने लगती हैं।
(ख) टहनियों पर
सूखे काले धब्बे दिखाई देते हैं।
टहनियाँ ऊपर से सूखने लगती हैं (die-back लक्षण)।
(ग) फलों पर
प्रारंभ में छोटे, गोल, धंसे हुए (sunken) धब्बे बनते हैं।
बाद में ये धब्बे काले होकर फैल जाते हैं।
संक्रमित फल सड़ने लगते हैं और बाजार मूल्य घट जाता है।
अधिक नमी में धब्बों पर गुलाबी/नारंगी रंग का बीजाणु द्रव्यमान दिखाई देता है।
7. रोग का प्रभाव (Effect on Crop)
फल उत्पादन में 20–40% तक हानि हो सकती है।
फल की गुणवत्ता खराब होती है।
भंडारण क्षमता कम हो जाती है।
निर्यात योग्य फल प्रभावित होते हैं।
8. रोग का जीवन चक्र (Disease Cycle – संक्षेप में)
फफूंद पौधे के अवशेषों में जीवित रहती है।
अनुकूल मौसम में बीजाणु बनते हैं।
वर्षा/हवा से स्वस्थ पौधों में संक्रमण होता है।
घाव या कोमल भाग से प्रवेश करती है।
9. नियंत्रण (Control Measures – वैज्ञानिक विधि से)
(क) सांस्कृतिक विधियाँ (Cultural Control)
रोगग्रस्त फल एवं पत्तियों को तोड़कर नष्ट करें।
बाग में उचित दूरी रखें ताकि वायु संचार बना रहे।
जल निकास की उचित व्यवस्था करें।
रोगमुक्त पौध सामग्री का प्रयोग करें।
(ख) रासायनिक नियंत्रण (Chemical Control)
कार्बेन्डाजिम 0.1% (1 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव।
मैनकोजेब 0.25% (2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी)।
कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 0.3% का छिड़काव।
वर्षा ऋतु में 10–15 दिन के अंतराल पर 2–3 छिड़काव करें।
(ग) जैविक नियंत्रण (Biological Control)
ट्राइकोडर्मा विरिडे (Trichoderma viride) का मिट्टी उपचार।
नीम आधारित जैव-कीटनाशकों का उपयोग।
10. रोकथाम (Preventive Measures)
समय पर छंटाई (pruning) करें।
संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाएं।
अत्यधिक नाइट्रोजन से बचें।
नियमित निरीक्षण करें। #एग्रीकल्चर #नोट्स #एन्थ्रेक्नोज