14/08/2017
वक्त के साथ ज़िन्दगी कई करवटे लेती है
कई ऊमीद उठती है , गिरती है, तो कई बस पटक देती है ...
कई हमसफर मिलते है , साथ चलते है, मुड जाते है
ज्यू ही लगता है के रौनक है, विराने हो जाते है
फिर भी मगर, आखरी पल तक चलते रहना है
गिर के उठना है, संभालना है ओर फिर चलना है
ठोकर से प्यार चुराना है
वीराने से रोशीनी
कमी ना रह जाए बांटने मे इन चीजो की कभी
मुझे न मिल सकी जो, किसी को ना हो उस बात की कमी
ज़िन्दगी ज़िए इस तरह
के वो क़हे, वाह,
इसको कहते है ज़िन्दगी ....