06/12/2023
निमोनिया के प्रति जागरूक और रोकथाम के लिए टीकारण जरूरी: वसीम अकरम
जेडएमक्यू संस्था के जिला संयोजक वसीम अकरम ने बताया कि मेवात जिले में फिलिप्स के सहयोग से जेडएमक्यू संस्था ने पांच साल से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया की बीमारी पर रोकथाम का निर्णय लिया है। इसके लिए जेडएमक्यू की ओर से नूंह जिले के नगीना और फिरोजपुर झिरका ब्लॉक में अप्रैल माह से जागरूकता अभियान घर घर जाकर, ऑटो कैंपेन द्वारा, बूथ कैंपेन द्वारा और सामूदायिक बैठकों पर जाकर जागरुक किया जा रहा हैं।
वसीम अकरम ने बताया कि 0 से 1 साल तक के बच्चों को निमो कोकल कंजूगेट नामक टीका लगाया जाता हैं। वह टीका आप अपनें गांव में हर महीने आने वाली एएनएम बहनजी से मुफ़्त में अपने बच्चों को लगवाए।
वसीम ने बताया कि निमोनिया एक संक्रमण बीमारी है, जो फेफड़ों को प्रभावित करती है। इस बीमारी में बलगम, बुखार, ठंड लगना व सांस लेने में तकलीफ होने के मुख्य लक्षण हैं। यह बीमारी सबसे ज्यादा पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में ज्यादा होता है। उनके अनुसार हर साल 30 फीसद पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे निमोनिया की बीमारी का शिकार होते हैं।
बताया कि बच्चों को निमो कोकल कंजूगेट नामक पहला टीका डेढ़, दूसरा साढ़े तीन व तीसरा नौ माह के बच्चों को लगाया जाता है। इस टीके का कोई नुकसान नहीं है।
वसीम अकरम ने कहा कि कई तरह से होता है निमोनिया, सबके अलग-अलग हैं लक्षण, लेकिन जीवन के लिए संकट है यह बीमारी निमोनिया बहुत खराब बीमारी है. निमोनिया के लक्षण सर्दी-जुकाम के लक्षण से मिलते जुलते हैं, इसलिए इसकी पहचान बेहद जरूरी है. निमोनिया होने पर तत्परता से केयर करने की जरूरत है।
निमोनिया बेहद गंभीर है. प्रदूषण और सर्दी के मौसम में यह और भी ज्यादा गंभीर होने लगता है. इसलिए कुछ लोग निमोनिया को सर्दी-जुकाम समझ लेते हैं जिसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. निमोनिया सांस से संबंधित खतरनाक बीमारी है जिसमें फ्लूड फेफड़े में भरने लगता है. निमोनिया के कई कारण होते हैं और इन सबमें अलग-अलग लक्षण दिखाई दे सकते हैं. क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक बैक्टीरिया, फंगस और वायरस तीनों सूक्ष्मजीवों के कारण संक्रमित हो सकता है. निमोनिया गंभीर होने पर सांस लेना मुश्किल हो जाता है. यह कोविड 19 और फ्लू की तरह ही लक्षण दिखाते हैं लेकिन जब सांस से संबंधित गंभीर परेशानी हो जाए तो यह निमोनिया के संकेत हो सकते हैं. इसलिए निमोनिया को अन्य बीमारियों से अलग कर पहचानना जरूरी है.
बैक्टीरियल निमोनिया के लक्षण
1. बहुत तेज बुखार जो 105 तक पहुंच सकता है.
2. पीला, हरा या खूनी कफ.
3.बहुत अधिक थकान.
4.सांस लेने में दिक्कत या दम फूलना.
5.पसीना या बहुत अधिक ठंड.
6.छाती में दर्द, पेट में दर्द खासकर जब खांस रहे हों या गहरी सांस ले रहे हो.
7. भूख की कमी.
8. स्किन, नाखून या होंठ पर नीला पड़ जाना.
9. दिगभ्रम या कंफ्यूजन.
वायरल निमोनिया के लक्षण
1. सूखी खांसी.
2. सिर दर्द.
3. मांसपेशियों में दर्द.
4. बहुत अधिक थकान और कमजोरी.
बच्चों में निमोनिया के लक्षण
1. बुखार, ठंड, असहजता, पसीना आना या स्किन लाल हो जाना.
2. कफ, सांस लेने में दिक्कत, जोर से सांस चलना.
3. उल्टी, थकान, एनर्जी की कमी.
4.सांस लेते समय आवाज में घरघराहट.
4.पेशाब की मात्रा में कमी.
5.पहले से अधिक रोना.
6. ज्यादा रोना.
7. खाने में दिक्कत.
बुजुर्ग में निमोनिया की दिक्कत
1. अचानक दिमाग हालत में परिवर्तन.
2. भूख चली जाना.
3. बहुत अधिक थकान.
किसको निमोनिया का खतरा ज्यादा
1. 65 साल से अधिक और 2 साल से कम उम्र के बच्चे को निमोनिया का खतरा ज्यादा है.
2. जिन लोगों को हार्ट और लंग्स से जुड़ी समस्या है या अस्थमा है.
3. जिन लोगों को खाना निगलने में परेशानी होती है. पर्किंसन, स्ट्रोक, डिमेंशिया वाले लोगों को.
4. ज्यादा समय से अस्पताल में रहने वाले लोगों को.
5. स्मोकिंग करने वाले लोगों को.
6.प्रेग्नेंट महिलाओं को.
7. जिन लोगों का इम्यून सिस्टम कमजोर होता है.
फ्लू और निमोनिया में अंतर
हालांकि यह सच है कि कोल्ड-फ्लू वाले लक्षण और निमोनिया के लक्षण में बहुत कुछ समानताएं होती है. इसलिए इसकी जांच होनी जरूरी है. चूंकि निमोनिया जीवन के लिए बहुत जल्दी खतरा पैदा कर देता है, इसलिए इस स्थिति में जल्दी अस्पताल पहुंचना जरूरी है. हालांकि निमोनिया की स्थिति में कुछ लक्षण कोल्ड एंड फ्लू से अलग हो सकता है. निमोनिया में छाती में दर्द और सांस लेने में तकलीफ होती है जो आमतौर पर फ्लू में कम होता है. निमोनिया में बुखार बहुत तेज होता है और पीला या हरा कफ निकलता है. वहीं थूकने पर म्यूकस निकलता है.