02/10/2024
🙏 ुरादाबाद_पधारे_गांधी_जी🙏
दिनांक~ 2/10/24
मुरादाबाद और गांधी जी का पुराना नाता रहा है।
सन 1857 में ही मुरादाबाद के क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को अपनी ताकत का लोहा मनवा दिया था व इस क्रांति के वर्षों बाद जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में अंग्रेजों के खिलाफ पूरा देश फिर एकजुट हुआ तो मुरादाबाद इसमें अग्रणी रहा था।
महात्मा गांधी जी अक्टूबर 1920 में पहली बार मुरादाबाद आए थे। यहां उन्होंने डॉ. भगवान दास की अध्यक्षता में महाराजा टाकीज (वर्तमान में सरोज सिनेमा) में बैठक को संबोधित किया था। इसमें असहयोग आंदोलन की भूमिका बनाई गई थी।
इस बैठक में बापू के साथ पं. मदन मोहन मालवीय, पं. मोतीलाल नेहरू, पं. जवाहर लाल नेहरू, डॉ. अंसारी, हकीम अजमत खां, मोहम्मद अली, शौकत अली आदि स्वतंत्रता सेनानी शामिल हुए थे। इस सभा के समापन में महात्मा गांधी ने कहा था कि बहुत गंभीर चिंतन के बाद भी मैं यही मानता हूं कि देश की स्वतंत्रता का एकमात्र मार्ग असहयोग ही है।
बापू की अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग की आवाज पर पूरा शहर एकजुट हो गया था। उनके आह्वान पर छात्रों ने ब्रिटिश सरकार के स्कूल-कॉलेजों में जाना छोड़ दिया व वकीलों ने अदालतों में जाने से इन्कार कर दिया था।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुवीर सरन खत्री, पं. शंकर दत्त शर्मा, प्रो. रामसरन, पं. बाबूराम शर्मा, अशफाक हुसैन, जगन्नाथ सिंघल, पं. बूलचंद दीक्षित, बनवारी लाल रहबर आदि के नेतृत्व में शहर के लोगों का हुजूम गांधी जी के स्वागत में उमड़ा था। अमरोहा गेट स्थित ब्रजरत्न पुस्तकालय आज भी बापू के आगमन की गवाही दे रहा है।
गांधी जी रघुवीर सरन खत्री की बग्गी में बैठकर अमरोहा गेट पहुंचे थे और पुस्तकालय का उद्घाटन किया था। इस पुस्तकालय में महात्मा गांधी के जीवन से संबंधित तमाम पुस्तकें उपलब्ध हैं। स्वतंत्रता सेनानी पं. हरिप्रसाद वैद्य इस पुस्तकालय का संचालन करते थे।
पुस्तकालय की ऊपरी मंजिल पर विनोबा भावे ने सर्वोदय भवन की स्थापना की थी।
इसके अलावा भी हमें गांधी जी और मुरादाबाद से जुड़ी बातें हमें सुनने को मिलती हैं।
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