Ajay singh yadav

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2 किलो आवाले का मुरब्बा बनाने का आसान तरीकासामग्री👉 आंवला - 2 किलो👉 चीनी - 1.5 किलो (स्वाद अनुसार बढ़ा सकते हैं)👉 पानी -...
22/11/2024

2 किलो आवाले का मुरब्बा बनाने का आसान तरीका
सामग्री

👉 आंवला - 2 किलो
👉 चीनी - 1.5 किलो (स्वाद अनुसार बढ़ा सकते हैं)
👉 पानी - 1 लीटर (चाशनी बनाने के लिए)
👉 चूना (यदि इस्तेमाल करना चाहें) - 1 टेबलस्पून (आंवले की कड़वाहट कम करने के लिए)
👉 इलायची पाउडर - 1 टीस्पून (स्वाद के लिए)
👉 केसर - कुछ धागे (वैकल्पिक)
👉 लौंग - 8-10 (वैकल्पिक)
👉 चुटकीभर नमक (स्वाद और प्रिजर्व करने के लिए)

बनाने की विधि
👉 आंवले की तैयारी - सबसे पहले आंवलों को अच्छे से धो लें आप चाहें तो आंवलों में चाकू से हल्के कट भी लगा सकते हैं ताकि मसाले और चाशनी अच्छे से अंदर तक पहुँच सकें।

👉 आंवले को नरम करना - एक बड़े बर्तन में पानी गर्म करें और उसमें आंवलों को डालें उन्हें करीब 8-10 मिनट तक उबालें ताकि आंवले थोड़े नरम हो जाएं उबालने के बाद आंवले को पानी से निकाल लें और ठंडा होने दें।

👉 चाशनी बनाना - एक बड़े बर्तन में 1.5 किलो चीनी और 1 लीटर पानी मिलाएं इसे मध्यम आँच पर गर्म करें और लगातार चलाते रहें जब तक कि चीनी पूरी तरह से घुल न जाए चीनी घुलने के बाद, इसे तब तक पकाएं जब तक कि एक तार की चाशनी बन जाए। इसे जाँचने के लिए, उंगली और अंगूठे के बीच थोड़ी चाशनी लेकर देखें कि एक तार बन रही है या नहीं।

👉 आंवले को चाशनी में डालना - तैयार चाशनी में उबले हुए आंवले डालें और इसे 10-15 मिनट तक पकाएं ताकि आंवले चाशनी को अच्छे से सोख लें इसमें इलायची पाउडर, केसर के धागे और लौंग डालें, इससे मुरब्बे में एक अच्छा स्वाद आएगा।

👉 आंवले को चाशनी में भिगोना - बर्तन को ढक दें और आंवले को चाशनी में कम से कम 12 घंटे या रात भर भिगोने के लिए छोड़ दें इससे आंवले पूरी तरह से चाशनी में समा जाएंगे और स्वादिष्ट बनेंगे अगले दिन, आंवले को फिर से थोड़ी देर तक मध्यम आँच पर पकाएं ताकि आंवले और ज्यादा मीठे हो जाएं।

👉 स्टोर करना - मुरब्बा तैयार है। इसे ठंडा होने दें और फिर किसी साफ और सूखे कांच के जार में भर लें। इसे आप कई महीनों तक स्टोर कर सकते हैं।

👉 Tips - चूना का प्रयोग यदि आंवले की कड़वाहट अधिक है, तो उबालने से पहले चूना वाले पानी में उन्हें कुछ देर के लिए भिगो सकते हैं। फिर अच्छी तरह धोकर उबालें लंबे समय तक स्टोर करने के लिए मुरब्बे को साफ और सूखे बर्तन में रखें। बीच-बीच में धूप में रखने से मुरब्बा और अधिक लंबे समय तक चल सकता है स्वाद बढ़ाने के लिए आप चाहें तो इसमें थोड़ी सी केसर और इलायची पाउडर का प्रयोग कर सकते हैं मुरब्बे के जार को हमेशा सूखे चम्मच से ही निकालें। नमी से मुरब्बा खराब हो सकता है विटामिन सी से भरपूर होता है और यह इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है।

 #गांव_के_बियाहपहले गाँव मे न टेंट हाऊस थे और न कैटरिंगथी तो बस सामाजिकता ।।गांव में जब कोई शादी ब्याह होते तो घर घर से ...
27/09/2024

#गांव_के_बियाह
पहले गाँव मे न टेंट हाऊस थे और न कैटरिंग
थी तो बस सामाजिकता ।।
गांव में जब कोई शादी ब्याह होते तो घर घर से चारपाई आ
जाती थी,
हर घर से थरिया, लोटा, कलछुल, कराही इकट्ठा हो जाता था
और गाँव की ही महिलाएं एकत्र हो कर खाना बना देती थीं ।।
औरते ही मिलकर दुलहिन तैयार कर देती थीं और हर रसम का
गीत गारी वगैरह भी खुद ही गा डालती थी ।।
तब DJ अनिल-DJ सुनील जैसी चीज नही होती थी और न ही
कोई आरकेस्ट्रा वाले फूहड़ गाने ।।
गांव के सभी चौधरी टाइप के लोग पूरे दिन काम करने के लिए
इकट्ठे रहते थे ।।
हंसी ठिठोली चलती रहती और समारोह का कामकाज भी।
शादी ब्याह मे गांव के लोग बारातियों के खाने से पहले खाना
नहीं खाते थे क्योंकि यह घरातियों की इज्ज़त का सवाल होता
था ।।
गांव की महिलाएं गीत गाती जाती और अपना काम करती
रहती ।।
सच कहु तो उस समय गांव मे सामाजिकता के साथ समरसता
होती थी ।।
खाना परसने के लिए गाँव के लौंडों का गैंग ontime इज्जत
सम्हाल लेते थे ।।
कोई बड़े घर की शादी होती तो टेप बजा देते जिसमे एक
कॉमन गाना बजता था- मैं सेहरा बांधके आऊंगा मेरा वादा है
और दूल्हे राजा भी उस दिन खुद को किसी युवराज से कम न
समझते ।।
दूल्हे के आसपास नाऊ हमेशा रहता, टैम टैम पर बार झारते
रहता था कंघी से और टेम टेम पर काजर-पउडर भी पोत देता
था ताकि दुलहा सुन्नर लगे ।।
फिर दुवरा का चार होता फिर शुरू होती पण्डित जी की
महाभारत जो रातभर चलती ।।
फिर कोहबर होता, ये वो रसम है जिसमे दुलहा दुलहिन को
अकेले में दुइ मिनट बतियाने के लिए दिया जाता लेकिन इत्ते
कम टेम मा कोई क्या खाक बात कर पाता।
सबेरे खिचड़ी में जमके गारी गाई जाती और यही वो रसम है
जिसमे दूल्हे राजा जेम्स बांड बन जाते कि ना, हम नहीं खाएंगे
खिचड़ी। फिर उनको मनाने कन्यापक्ष के सब जगलर टाइप के
लोग आते ।।
अक्सर दुलहा की सेटिंग अपने चाचा या दादा से पहले ही सेट
रहती थी और उसी अनुसार आधा घंटा कि पौन घंटा रिसियाने
का क्रम चलता और उसी से दूल्हे के छोटे भाई सहबाला की भी
भौकाल टाइट रहती लगे हाथ वो भी कुछ न कुछ और लहा
लेता...
फिर एक जय घोष के साथ खिचड़ी के गोले से एक चावल का
कण दूल्हे के होठों तक पहुंच जाता और एक विजयी मुस्कान
के साथ वर और वधू पक्ष इसका आनंद लेते....
उसके बाद अचर धरउवा जिसमे दूल्हे का साक्षात्कार वधू पक्ष
की महिलाओं से करवाया जाता और उस दौरान उसे विभिन्न
उपहार प्राप्त होते ।।

जय माता दी
14/10/2021

जय माता दी

उसे जब याद आएगा वो पहली बार का मिलना, तो पल - पल याद रखेगा या सब कुछ भूल जायेगा, उसे जब याद आएगा गुजरे मौसम का हर लम्हा,...
31/05/2021

उसे जब याद आएगा वो पहली बार का मिलना,
तो पल - पल याद रखेगा या सब कुछ भूल जायेगा,
उसे जब याद आएगा गुजरे मौसम का हर लम्हा,
तो खुद ही रो पड़ेगा या खुद ही मुस्कुराएगा।

👉‪तेरे‬ 👧सिवा कौन ‎समा‬💏 सकता है ‎मेरे‬ ❤दिल में,…….‪रूह‬ 🙇भी गिरवी👍 रख दी है मैंने 👨👈‎तेरी‬ 👧चाहत में !!💐
09/01/2021

👉‪तेरे‬ 👧सिवा कौन ‎समा‬💏 सकता है ‎मेरे‬ ❤दिल में,…….‪रूह‬ 🙇भी गिरवी👍 रख दी है मैंने 👨👈‎तेरी‬ 👧चाहत में !!💐

👬😀 सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहे,  जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे, 👬😀 शाखों से जो टूट जाये वो पत्ते नही है हम...
09/01/2021

👬😀
सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहे,
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे, 👬😀
शाखों से जो टूट जाये वो पत्ते नही है हम,
आंधी से कोई कह दे कि औकात में रहे।
👬😀

01/12/2020

किसी ने मुझे कहा की तुम हर रोज सुबह सुप्रभात करके सबको याद करते हो
तो क्या वो भी तुम्हे याद करते है मेंने कहा मुझे रिश्ता निभाना है मुकाबला नहीं करना!

जहन में हर शाम यादें तुम्हारी आ बैठती हैं ऐसे …किसी दीवार पर दोपहर की धूप चढ़ी हो जैसे
30/09/2020

जहन में हर शाम यादें तुम्हारी आ बैठती हैं ऐसे …
किसी दीवार पर दोपहर की धूप चढ़ी हो जैसे

🎁🎂🎉🎈🎁🍻 हर राह आसान हो, हर राह पे खुशियाँ हो, हर दिन खुबसूरत हो, यही हर दिन मेरी दुआ हो, ऎसा तुम्हारा हर जन्मदिन हो !!! 🍾...
30/09/2020

🎁🎂🎉🎈🎁🍻
हर राह आसान हो,
हर राह पे खुशियाँ हो,
हर दिन खुबसूरत हो,
यही हर दिन मेरी दुआ हो,
ऎसा तुम्हारा हर जन्मदिन हो !!!
🍾😊💐🍹😊🎁🎂🎁🎉

20/07/2020

बिकती है ना ख़ुशी कहीं, ना कहीं गम बिकता है. लोग गलतफहमी में हैं, कि शायद कहीं मरहम बिकता है..

आँख उठाकर भी न देखूँ, जिससे मेरा दिल न मिले, जबरन सबसे हाथ मिलाना, मेरे बस की बात नहीं.
20/07/2020

आँख उठाकर भी न देखूँ,
जिससे मेरा दिल न मिले,
जबरन सबसे हाथ मिलाना,
मेरे बस की बात नहीं.

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