Swarn.

Swarn. I M SWARN AKHSAT SINGH.......... MUMMA,S SON............... 16 YEAR OLD :D

02/06/2025

ज्वेलरी



7897273681

शत शत नमन 🙏
02/10/2024

शत शत नमन 🙏

02/10/2024

आँखों में कई ख्वाब,
दिल में कई हसरते अभी बांकी है।
मैं कैसे थक जाऊं...
कई मंजिले अभी बांकी है।
कहाँ कुछ आसान है,
राह में कई मुश्किलें अभी बांकी है।
कैसे छोड़ दूं अधूरी ये कहानी,
मेरी कहानी के कई पन्ने अभी बांकी है।।

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औरत को क्यों..? दुनिया के किसी भी होटल में हमने किसी औरत को खाना बनाते नहीं देखा है। संसार का कोई भी बड़ा शेफ सामान्यत :...
23/09/2024

औरत को क्यों..?

दुनिया के किसी भी होटल में हमने किसी औरत को खाना बनाते नहीं देखा है। संसार का कोई भी बड़ा शेफ सामान्यत : औरत नहीं है। बच्चों की देखभाल के छोटे छोटे सेंटर जगह जगह खुल ही रहे हैं।

बहुत से पुरुष विभिन्न अवसरों पर औरतों या लड़कियों को मेंहदी लगा रहे हैं। ऐसे ढेर सारे काम हैं जो घरों में औरतें करती आ रही हैं। पर जैसे ही उस काम से पैसे मिलने शुरू होते हैं तो औरत पीछे छूट जाती है।

अर्थात जब कभी सदियों से किसी औरत के द्वारा किए जाने वाले काम के साथ अर्थ ( पैसा ) जुड़ता है तो आदमी औरत को रिप्लेस कर देता है। भारत में भी 1962 तक औरतों द्वारा घर में किए गए काम को देश की GDP में गिना जाता था।

सच तो यह है कि औरतों द्वारा किया जाने वाला घर का काम किसी ऑफिस की जॉब से ज्यादा कठिन होता है। किसी बिजनेसमैन की तरह ही व्यस्तता होती है। साल के 365 दिनों में से किसी भी दिन छुट्टी नहीं।

सच यही है कि एक हाउसवाइफ का काम बहुत कठिन और जिम्मेदारी भरा होता है। स्त्री घर पर है। तभी आप बाहर काम कर पाते हैं।

अपना नज़रिया बदल लीजिए। हाउसवाइफ का सम्मान कीजिए। उनकी कीमत उनके न होने पर पता लगती है। दुनिया के सभी धर्मों ने औरत के खिलाफ ही नियम कानून और धार्मिक कर्म निर्धारित किए हैं। किसी ने ज्यादा , किसी ने कम।

आदमी और बाजार ने औरत को केवल कम कपड़े पहनकर शरीर दिखाने भर की स्वतंत्रता दी है। तो किसी ने औरत को ढकने के नाम पर पूरी तरह से उनको कैद करके रख दिया है।

किसी ने भी उनको नेचुरल नहीं रहने दिया है। वह इंसान नहीं वस्तु के रूप में ट्रीट होने लगती है। औरत की कोख से जन्म लेने वाला आदमी खुद औरत की नियति का निर्धारण कैसे कर सकता है।

यह नाक , कान छिदवाना। कान की बाली , गले का हार , नाक में रिंग आदि आभूषण वास्तव में एक लड़की को प्रचलित अर्थों में औरत के रूप में ढालने के औजार हैं और कुछ नहीं।

ये औरत को कमजोर बनाते हैं। अपनी बच्चियों से कहिए कि वे आभूषणों के साथ कॉपी और पेन मांगे। भारत का संविधान मांगे। उसे जानें उसे पढ़ें। अच्छा साहित्य पढ़ें। अच्छी किताबें पढ़ें।अपनी सूझबूझ के साथ भारत की छवि को और निखारें।

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आधी रात में मां की नींद खुल गई थी और बेटे को बहू के कमरे की बजाय अपने बिस्तर पर बच्चों की तरह आड़ा-तिरछा लेटा हुआ पाकर आ...
10/09/2024

आधी रात में मां की नींद खुल गई थी और बेटे को बहू के कमरे की बजाय अपने बिस्तर पर बच्चों की तरह आड़ा-तिरछा लेटा हुआ पाकर आज फिर उसका दिल आशंकाओं से भर उठा था....
बेटे के सर के नीचे एक तकिया लगा उसके माथे को सहलाते हुए वह धीरे से बुदबुदाई -अब तू कुछ परेशान सा रहता है....

नहीं मां....शायद मां के स्पर्श से बेटे की कच्ची नींद भी खुल गई थी और वह करवट ले मां के करीब आ गया था...
पिछले महीने पति के गुजर जाने के बाद अब उसे भी गहरी नींद कहां आती थी..
रातें तो यूंही आंखें मूंद हल्की झपकियों में ही कट रही थी ऊपर से बेटे की यह बेचैनी...

आजकल जाने कब तू मेरे बिस्तर पर आकर सो जाता है। बहू से नाराज है क्या....

नहीं मां.... किसी अबोध की तरह मां से लिपटने की कोशिश करता इस सवाल को भी वह टाल गया...
मां ने वही बिस्तर से सटे मेज पर रखें तांबे के लोटे से एक घूंट पानी पीकर लोटा वापस मेज पर रख दिया था और बिस्तर पर लेटने की बजाय एक तकिए का सहारा ले दीवार से अपनी पीठ टिका बैठ गई थी...
"फिर क्या बात है बेटा...

कुछ भी नही मां...
मां की गोद को छोटे बच्चों की तरह बाहों में भरने की कोशिश करता वह उसके हर सवाल को खारिज कर गया था...

बेटा ....बता ना...
तेरी बेचैनी देख मेरा दिल घबराता है...
उसने बेटे का सर अपनी गोद में रख लिया था।
मां की घबराहट महसूस कर बेटे ने अब खुद सोने या मां के सो जाने का इंतजार करना छोड़ पीठ के बल लेट मां के दोनों हाथ अपने हाथों में ले अपने सीने पर रख लिया था...
"मां.... आपको याद है, जब मैं बड़ा हो रहा था। पापा ने मेरा कमरा अलग कर दिया था...

"अपने लिए अलग कमरे की जिद्द भी तो तूने ही की थी मां ने उसे याद दिलाया था...

"हां....लेकिन तब आप मेरे सो जाने के बाद उस कमरे में आकर मेरे माथे को सहलाती अक्सर मेरे बिस्तर पर ही सो जाया करती थी....

"और सुबह मुझे अपने बिस्तर पर पाकर तू अक्सर मुझसे एक सवाल पूछा करता था...
याद है...
सोई गहरी रात में मां-बेटे भूली-बिसरी बातें याद कर रहे थे...

"हां.... याद है...

"अच्छा...तो बता क्या पूछता था... सुबह की कहीं कितनी ही बातों को शाम तक भूल जाने वाले बेटे को बरसों पुरानी वह बात कहां याद होगी.. यह सोच मां मुस्कुराई थी...

"यही की.... क्या आप पापा से नाराज हो....

बेटे की अद्भुत यादाश्त क्षमता से रूबरू होती मां का निस्तेज होता चेहरा अचानक एक अद्भुत मुस्कान के साथ कमरे की मदीम रोशनी में भी जगमगा उठा...

हां ....पर बेटा....तुझे ऐसा क्यों लगता था....
आज वर्षो बाद शायद मां भी शिद्दत से बेटे के मन की उस बात को जान लेना चाहती थी जिसे जानने की फुर्सत उसे आज से पहले कभी नहीं मिली...

"क्योंकि मैं आपको हमेशा पापा के साथ देखना चाहता था....
पिता को याद करते हुए बेटे ने अपने सीने पर रखे मां के दोनों हाथों पर अपनी पकड़ मजबूत की थी....

"बेटा.... मैं भी तुम्हें हमेशा बहू के साथ देखना चाहती हूं...मां ने झुक कर बेटे का माथा चूमकर कहा...

"मां.... तब आप पापा को कमरे में अकेला छोड़ मेरे पास क्यों आ जाती थी....
बरसों बाद बेटा भी अपने मन की जिज्ञासा मां के सामने रख रहा था...

"बेटा...डर लगता था कि अकेले कमरे में कहीं तू डर ना जाए....

"मां.... अब जब पापा नहीं रहे, मुझे भी डर लगता है...

"क्यों बेटा..." मां अपने बेटे का "डर " जानने को अधीर हो उठी ....

"कहीं आप अपने अकेलेपन से डर ना जाओ...
इसलिए मैं...मै....
इसके आगे वह कुछ कह ही नहीं पाया, मां-बेटा एक दूजे से लिपट गए थे और सारे शब्द आंसुओं में बह गए थे....

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15/09/2023

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12/09/2023

रामचरितमानस 'कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहिं होइ तात तुम पाहीं।'

Happy Rakshbandhan to all Brothers♥️🍫🍫🍫🍫
31/08/2023

Happy Rakshbandhan to all Brothers♥️🍫🍫🍫🍫

HAPPY RAKSHBANDHAN TO ALL SPECIA

I have reached 100 followers! Thank you for your continued support. I could not have done it without each of you. 🙏🤗🎉
16/06/2023

I have reached 100 followers! Thank you for your continued support. I could not have done it without each of you. 🙏🤗🎉

16/06/2023

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