Abhishek Matha

Abhishek Matha Aao sath chale to change the nation nd save our values

14/08/2016

Wish you all a happy Independence Day

16/02/2016

🙏कोई पहुंचा दो मेरा ये ख़त 🙏

प्रति,
राहुल गांधी
सांसद/ महासचिव
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस

राहुल जी, आज आप का में दिया भाषण सुना और मजबूर हुआ ये पत्र लिखने को।आज आपने महज दो हजार छात्रो के सामने ही भाषण नहीं दिया बल्कि आपने छात्र के लिबास में वहां घूम रहे राष्ट्र विरोधी ताकतों को भी सम्बल प्रदान कर दिया कि हिंदुस्तान मुर्दाबाद और पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने पर उस राजनैतिक दल को कोई आपत्ति नहीं है जिसने आजादी के बाद 60 सालो तक इस देश की कमान संभाली है और भविष्य में भी इस देश की कमान सँभालने को अपना स्वाभाविक हक़ मानती है।

राहुल,आपने में कहा कि छात्रो की आवाज दबाने वाला सबसे बड़ा राष्ट्रद्रोही है। आपका मतलब हिंदुस्तान की न्यायपालिका ने आप की ही सरकार के दौरान जिस आतंकवादी अफजल गुरु को फाँसी दी थी उसको नाजायज मान कर उसे शहीद का दर्जा देने वाले राष्ट्रद्रोही पर अगर सरकार कार्यवाही करती है तो क्या वो सरकार राष्ट्रद्रोही सरकार है।

जी आप ने कहा कि युवा अपनी बात कहते है तो सरकार उन्हें देशद्रोही कहती है। आप का मतलब है कि "कितने अफजल तुम मारोगो-हर घर से अफजल निकलेगा" के नारे लगाने वाले और... "हमको चाहिए आजादी" के नारे लगाने वालो को सरकार ताम्रपत्र से सम्मानित करना था ?

रोलिंस कालेज से स्नातक और केम्ब्रिज विश्वविद्यालय से मिली एम्फिल की डिग्री आप को किस पढाई पर मिली मैं ये नही जानता पर इतना जरूर लगता है कि आज का आप का भाषण न आपकी दादी स्व.इंदिरा गांधी को पसंद आया होगा और न आप के पिता स्व.राजीव गांधी को।उन्हें भी आज शायद यही लगा होगा की उन्हें आप को हिंदुस्तान के किसी सरकारी स्कूल में पढ़ाना था जहाँ और कुछ पढ़ाया जाय या न पढ़ाया जाय... राष्ट्रभक्ति के भाव और उसका प्रकटीकरण जरूर सिखाया जाता है।

आप मेरी इस समीक्षा को मेरे भाजपाई होंने से जोड़ कर प्लीज ख़ारिज मत कीजियेगा। हाँ मैं हूँ भाजपाई.... ...। पर भाजपाई होने से पहले एक हिंदुस्तानी हूँ और आप ने आज मेरे जैसे करोडो हिन्दुस्तानियो का दिल दुखाया है।हिंदुस्तान को गाली और पाकिस्तान के लिए दुआ मांगने वालो के साथ आप का खड़ा होना वाकई एक सच्चा हिंदुस्तानी होने की वजह से शर्म से आज मेरा सर झुक गया।

आज आपके एक भाषण ने वो कर दिया जो पाकिस्तान की पूरी आईएसआई और सैकड़ो हाफिज सईद नहीं कर पाये...। वो है हम हिंदुस्तानियो का मनोबल तोड़ना...देश के सैनिको के मन में इस प्रश्न को पैदा करना कि वो अपनी जान की बाजी किसके लिए और क्यों लगा रहे है..?

मैंने सीताराम येचुरी को कोई पत्र नहीं लिखा क्यों कि वो वही कह रहे है जिसकी मुझे उनसे उम्मीद थी...पर आप से इस भाषण की उम्मीद नहीं थी मुझे।

राहुल जी..आप नरेंद्र मोदी से नफरत कीजिये वो आप का हक़ है पर..देश से आप प्यार करेंगे ये तो उम्मीद हम रख सकते है न.....आप भारतीय जनता पार्टी को खूब भला बुरा बोलिये...वो भी आप का हक़ है मगर...राहुल जी... देश को भला बुरा बोलने वालो के साथ आप नहीं खड़े होंगे ये उम्मीद तो हम रख ही सकते है न...फिर क्यों...आखिर क्यों..??

राहुल जी मामले में आप दो दिन चुप रहे तो लगा कि आप भी भारत जिंदाबाद करने वालो के साथ है...मगर जब आपने बोला तो अफसोस... आपने देश को आतंकवाद के मामले में दो भाग में बाँट दिया...।

भारत की विश्व भर में आतंकवाद के मुद्दे पर छेड़ी गई लड़ाई को घरेलू मोर्चे पर ही आपने कमजोर कर दिया।

जरा सोच के देखियेगा कि आप के एक भाषण ने कश्मीर मुद्दे पर भारत को कितनी क्षति पहुचाई है ?

इशरत जहाँ आतंकवादी थी ये हेडली की गवाही से एक बार फिर साबित हुआ है। अब आप अपनी और अपनी पार्टी के पिछले बयानों और क्रियाकलापो पर चिंतन कीजिए। नफरत के हद तक मोदी विरोध की तीब्र इच्छा और प्रयास ने आप को देश द्रोहियो के कवच-कुंडल की तरह तो नहीं खड़ा कर दिया है...? चिंतन कीजिये

मुझे आप की राष्ट्रभक्ति पे प्रश्नचिन्ह लगाने का कोई हक़ नहीं है और न मैं कोई प्रश्नचिन्ह लगा रहा हूँ...। मुझे आपकी राष्ट्रभक्ति के प्रकटीकरण के उस तरीके पर एतराज है जो दुश्मनो का मनोबल बढाये और राष्ट्रभक्तो का मनोबल तोड़े। ये तब भी होता है जब देश का प्रधानमंत्री विश्व मंच पर आतंकवाद के खात्मे का नारा दे कर पूरे विश्व को एक करता है और उसके घर लौटने से पहले आप उसकी छिछालेदर में जुट जाते है।

दिग्विजय सिंह की क्लास में जहाँ आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को "ओसामा जी" कह कर बुलाने की शिक्षा दी जाए वो क्लास ठीक नहीं है।

राहुल जी अभी एक न्यूज़ चॅनल ने दिल्ली में सर्वे कराया जिसमे उसने आप की लोकप्रियता सात प्रतिशत बताई।मुझे लगता है कि यह आंकड़ा दिल्ली में आपकी पार्टी को मिलने वाले व्होट प्रतिशत से भी बेहद कम है।आप और आपकी पार्टी ने इस सर्वे को नकारा नहीं है। तो अगर ये सर्वे सही है तो भाजपाई हो कर भी मेरी सलाह है कि आप अपने काम करने का बाकी तरीका बदले या न बदले मगर अपनी राष्ट्रभक्ति के प्रस्तुतिकरण के तरीके पर आत्मचिंतन अवश्य कीजिये।क्यों कि अगर आपके इस प्रगटीकरण और भाषण से हाफिज सईद और जकी उर रहमान लखवी पाकिस्तान में बैठ कर खुश हो रहे है तो कही न कही कुछ गड़बड़ जरूर है...।

और कुछ नहीं तो अपने भाषण लिखने वाले को तो आज ही बदल डालिये.. प्लीज ....

भवदीय
एक राष्ट्रभक्त

10/02/2016

Health bulletin issued by Army Hospital Research and Referral (R&R) in New Delhi today is placed below.

“L/Nk Hanamanthappa K of 19 MADRAS, was buried under 35 ft of ice and snow at 20500 ft for five days since the avalanche at Siachen on 03 Feb 16. He was rescued from the site on 08 Feb 16. On recovery, he was found to be conscious but drowsy and disoriented. He was severely dehydrated, hypothermic, hypoxic, hypoglycemic and in shock. He was immediately resuscitated by the doctors at the site, who had been there for the past five days in the hope of a survivor.
He was treated with warm intravenous fluids, humidified warm oxygen and passive external re warming. He was flown out from the site on 09 Feb 16 by helicopter along with a Medical Specialist to the Siachen base camp, from where he was brought to the Thois air base. He was then transferred to Delhi by a fixed wing aircraft of the IAF along with a Critical Care Specialist of the IAF and Medical Specialist from the Siachen Base Camp.
He is currently comatose and continues to be in shock with low blood pressure. He has pneumonia and his investigations have revealed liver and kidney dysfunction. Fortunately there was no cold exposure related frost bite or bony injuries to him. He is being treated by a team of intensivists, neurologist, nephrologist, endocrinologist and surgeons. He has been treated with fluids, drugs to bring up his blood pressure and antibiotics. He has been placed on a ventilator to protect his airway and lungs in view of his comatose state. He remains extremely critical and is expected to have a stormy course in the next 24 to 48 hrs due to the complications caused by re warming and establishment of blood flow to the cold parts of the body”.

General Dalbir Singh, COAS visited Army Hospital Research and Referral (R&R) today and commended the brave heart for his indomitable mental robustness and his refusal to give in to harsh elements of nature. He also conveyed best wishes on behalf of all ranks of the Army for his early and complete recovery. Dear friends let's really keep this brave soldier in our prayers

Let's see how many salute to these nawans

08/02/2016

एक गाँव में एक बार एक तेंदुआ आया .......🐅

फिर वो बार बार आने लगा
🐅🐅🐅

उसने वो काम कर दिखाया जो सरकार पिछले 40 साल में नहीं कर सकी ......

अब गाँव में सब लोग १००%.......

शौचालय का प्रयोग कर रहे हैं

😃😃😃😜😜😃😜

07/02/2016

1. Girl :- Lets go for a dinner tonight.
Boy ( ) :- Ok.
Girl :- But where will you take me?
Boy :- We will go to Mint Food (an economic restaurant).
Girl :- No. That's a very cheap place. Let's go to Tomato's (A brutally costly place)
Boy :- *silence for a minute* Ok, See you at 7. I will pick you up from your place.
Boy picks up girl at 7, On the way...
Boy :- Once I had pani puri (a.k.a. gol-gappa, an indian street food) competition with my sister and she ate 30 pani-puris and defeated me.
Girl :- What's so difficult in it?
Boy :- Defeating me in Pani-puri eating competition is difficult.
Girl :- I can easily beat you.
Boy :- Please leave it. It's not your cup of tea.
Girl :- Let us have that competition right now.
Boy :- So you want to see yourself defeated?
Girl :- Let's see.
They both stop at a Pani-puri stall. They start eating. After about 30 Pani-puri the boy gave up. The girl was also full, but to defeat her boyfriend, she ate one more and shouted, "You lose."
The bill was 120rs
'The main aim of # is to identify & control the Cost '😂😂😂😂😁😉

06/02/2016

06/02/2016

कोर्ट में मुकदमा दो साल तक चला।
आखिर पति-पत्नी में तलाक हो गया।
तलाक के पसःमंजर बहुत मामूली बातें थीं। इन मामूली बातों को बड़ी घटना में रिश्तेदारों ने बदला। हुआ यों कि पति ने पत्नी को किसी बात पर तीन थप्पड़ जड़ दिए। पत्नी ने इसके जवाब में अपना सैंडिल पति की तरफ़ फेंका। सैंडिल का एक सिरा पति के सिर को छूता हुआ निकल गया।
मामला रफा-दफा हो भी जाता, लेकिन पति ने इसे अपनी तौहीन समझा। रिश्तेदारों ने मामला और पेचीदा बना दिया। न सिर्फ़ पेचीदा बल्कि संगीन, सब रिश्तेदारों ने इसे खानदान की नाक कटना कहा, यह भी कहा कि पति को सैडिल मारने वाली औरत न वफादार होती है न पतिव्रता। इसे घर में रखना, अपने शरीर में मियादी बुखार पालते रहने जैसा है। कुछेक रिश्तेदारों ने यह भी पश्चाताप जाहिर किया कि ऐसी औरतों का भ्रूण ही समाप्त कर देना चाहिए।
बुरी बातें चक्रवृत्ति ब्याज की तरह बढ़ती हैं। सो, दोनों तरफ खूब आरोप उछाले गए। ऐसा लगता था जैसे दोनों पक्षों के लोग आरोपों का वॉलीबॉल खेल रहे हैं। चुनांचे, लड़के ने लड़की के बारे में और लड़की ने लड़के के बारे में कई असुविधाजनक बातें कही।
मुकदमा दर्ज कराया गया। पति ने पत्नी की चरित्रहीनता का तो पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया। छह साल तक शादीशुदा जीवन बीताने और एक बच्ची के माता-पिता होने के बाद आज दोनों में तलाक हो गया। पति-पत्नी के हाथ में तलाक के काग़ज़ों की प्रति थी। दोनों चुप थे। दोनों शांत। दोनों निर्विकार।
मुकदमा दो साल तक चला था। दो साल से पत्नी अलग रह रही थी और पति अलग, मुकदमे की सुनवाई पर दोनों को आना होता। दोनों एक दूसरे को देखते जैसे चकमक पत्थर आपस में रगड़ खा गए हों। दोनों गुस्से में होते। दोनों में बदले की भावना का आवेश होता। दोनों के साथ रिश्तेदार होते जिनकी हमदर्दियों में ज़रा-ज़रा विस्फोटक पदार्थ भी छुपा होता।
लेकिन कुछ महीने पहले जब पति-पत्नी कोर्ट में दाखिल होते तो एक-दूसरे को देख कर मुँह फेर लेते। जैसे जानबूझ कर एक-दूसरे की उपेक्षा कर रहे हों। वकील औऱ रिश्तेदार दोनों के साथ होते। दोनों को अच्छा-खासा सबक सिखाया जाता कि उन्हें क्या कहना है। दोनों वही कहते। कई बार दोनों के वक्तव्य बदलने लगते। वो फिर सँभल जाते।
अंत में वही हुआ जो सब चाहते थे यानी तलाक।
पहले रिश्तेदारों की फौज साथ होती थी। आज थोड़े से रिश्तेदार साथ थे। दोनों तरफ के रिश्तेदार खुश थे। वकील खुश थे। माता-पिता भी खुश थे।
तलाकशुदा पत्नी चुप थी और पति खामोश था। यह महज़ इत्तेफाक ही था कि दोनों पक्षों के रिश्तेदार एक ही टी-स्टॉल पर बैठे। कोल्ड ड्रिंक्स लिया। यह भी महज़ इत्तेफाक ही था कि तलाकशुदा पति-पत्नी एक ही मेज़ के आमने-सामने जा बैठे। लकड़ी की बेंच और वो दोनों।
''कांग्रेच्यूलेशन!... आप जो चाहते थे वही हुआ।'' स्त्री ने कहा।
''तुम्हें भी बधाई। तुमने भी तो तलाक दे कर जीत हासिल की।'' पुरुष बोला।
''तलाक क्या जीत का प्रतीक होता है?'' स्त्री ने पूछा।
''तुम बताओ?''
पुरुष के पूछने पर स्त्री ने जवाब नहीं दिया। वो चुपचाप बैठी रही। फिर बोली, ''तुमने मुझे चरित्रहीन कहा था। अच्छा हुआ। अब तुम्हारा चरित्रहीन स्त्री से पिंड छूटा।''
''वो मेरी गलती थी। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था।'' पुरुष बोला।
''मैंने बहुत मानसिक तनाव झेला।'' स्त्री की आवाज़ सपाट थी। न दुःख, न गुस्सा।
''जानता हूँ। पुरुष इसी हथियार से स्त्री पर वार करता है, जो स्त्री के मन और आत्मा को लहू-लुहान कर देता है... तुम बहुत उज्ज्वल हो। मुझे तुम्हारे बारे में ऐसी गंदी बात नहीं करनी चाहिए थी। मुझे बेहद अफ़सोस है, '' पुरुष ने कहा।
स्त्री चुप रही। उसने एक बार पुरुष को देखा। कुछ पल चुप रहने के बाद पुरुष ने गहरी साँस ली। कहा, ''तुमने भी तो मुझे दहेज का लोभी कहा था।''
''गलत कहा था।'' पुरुष की ओऱ देखती हुई स्त्री बोली। कुछ देर चुप रही फिर बोली, ''मैं कोई और आरोप लगाती लेकिन मैं नहीं...'' प्लास्टिक के कप में चाय आ गई। स्त्री ने चाय उठाई। चाय ज़रा-सी छलकी। गर्म चाय स्त्री के हाथ पर गिरी। स्सी... की आवाज़ निकली। पुरुष के गले में उसी क्षण 'ओह' की आवाज़ निकली। स्त्री ने पुरुष को देखा। पुरुष स्त्री को देखे जा रहा था।
''तुम्हारा कमर दर्द कैसा है?''
''ऐसा ही है। कभी वोवरॉन तो कभी काम्बीफ्लेम,'' स्त्री ने बात खत्म करनी चाही।
''तुम एक्सरसाइज भी तो नहीं करती।'' पुरुष ने कहा तो स्त्री फीकी हँसी हँस दी।
''तुम्हारे अस्थमा की क्या कंडीशन है... फिर अटैक तो नहीं पड़े?'' स्त्री ने पूछा।
''अस्थमा। डॉक्टर सूरी ने स्ट्रेन... मेंटल स्ट्रेस कम करने को कहा है, '' पुरुष ने जानकारी दी।
स्त्री ने पुरुष को देखा। देखती रही एकटक। जैसे पुरुष के चेहरे पर छपे तनाव को पढ़ रही हो।
''इनहेलर तो लेते रहते हो न?'' स्त्री ने कहा

हाँ, लेता रहता हूँ। आज लाना याद नहीं रहा, '' पुरुष ने कहा।
''तभी आज तुम्हारी साँस उखड़ी-उखड़ी-सी है,'' स्त्री ने हमदर्द लहजे में कहा।
''हाँ, कुछ इस वजह से और कुछ...'' पुरुष कहते-कहते रुक गया।
''कुछ... कुछ तनाव के कारण,'' स्त्री ने बात पूरी की।
पुरुष कुछ सोचता रहा। फिर बोला, ''तुम्हें चार लाख रुपए देने हैं और छह हज़ार रुपए महीना भी।''
''हाँ... फिर?'' स्त्री ने पूछा।
''वसुंधरा में फ्लैट है... तुम्हें तो पता है। मैं उसे तुम्हारे नाम कर देता हूँ। चार लाख रुपए फिलहाल मेरे पास नहीं है।'' पुरुष ने अपने मन की बात कही।
''वसुंधरा वाले फ्लैट की कीमत तो बीस लाख रुपए होगी। मुझे सिर्फ चार लाख रुपए चाहिए।'' स्त्री ने स्पष्ट किया।
''बिटिया बड़ी होगी... सौ खर्च होते हैं।'' पुरुष ने कहा।
''वो तो तुम छह हज़ार रुपए महीना मुझे देते रहोगे,'' स्त्री बोली।
''हाँ, ज़रूर दूँगा।''
''चार लाख अगर तुम्हारे पास नहीं है तो मुझे मत देना,'' स्त्री ने कहा। उसके स्वर में पुराने संबंधों की गर्द थी।
पुरुष उसका चेहरा देखता रहा। कितनी सह्रदय और कितनी सुंदर लग रही थी सामने बैठी स्त्री जो कभी उसकी पत्नी हुआ करती थी।
स्त्री पुरुष को देख रही थी और सोच रही थी, ''कितना सरल स्वभाव का है यह पुरुष, जो कभी उसका पति हुआ करता था। कितना प्यार करता था उससे... एक बार हरिद्वार में जब वह गंगा में स्नान कर रही थी तो उसके हाथ से जंजीर छूट गई। फिर पागलों की तरह वह बचाने चला आया था उसे। खुद तैरना नहीं आता था लाट साहब को और मुझे बचाने की कोशिशें करता रहा था... कितना अच्छा है... मैं ही खोट निकालती रही...''
पुरुष एकटक स्त्री को देख रहा था और सोच रहा था, ''कितना ध्यान रखती थी। स्टीम के लिए पानी उबाल कर जग में डाल देती। उसके लिए हमेशा इनहेलर खरीद कर लाती। सेरेटाइड आक्यूहेलर बहुत महँगा था। हर महीने कंजूसी करती, पैसे बचाती, और आक्यूहेलर खरीद लाती। दूसरों की बीमारी की कौन परवाह करता है? ये करती थी परवाह! कभी जाहिर भी नहीं होने देती थी। कितनी संवेदना थी इसमें। मैं अपनी मर्दानगी के नशे में रहा। काश, जो मैं इसके जज़्बे को समझ पाता।''
दोनों चुप थे। बेहद चुप। दुनिया भर की आवाज़ों से मुक्त हो कर, खामोश। दोनों भीगी आँखों से एक दूसरे को देखते रहे...
''मुझे एक बात कहनी है, '' उसकी आवाज़ में झिझक थी।
''कहो, '' स्त्री ने सजल आँखों से उसे देखा।
''डरता हूँ,'' पुरुष ने कहा।
''डरो मत। हो सकता है तुम्हारी बात मेरे मन की बात हो,'' स्त्री ने कहा।
''तुम बहुत याद आती रही,'' पुरुष बोला।
''तुम भी,'' स्त्री ने कहा।
''मैं तुम्हें अब भी प्रेम करता हूँ।''
''मैं भी.'' स्त्री ने कहा।
दोनों की आँखें कुछ ज़्यादा ही सजल हो गई थीं। दोनों की आवाज़ जज़्बाती और चेहरे मासूम।
''क्या हम दोनों जीवन को नया मोड़ नहीं दे सकते?'' पुरुष ने पूछा।
''कौन-सा मोड़?''
''हम फिर से साथ-साथ रहने लगें... एक साथ... पति-पत्नी बन कर... बहुत अच्छे दोस्त बन कर।''
''ये पेपर?'' स्त्री ने पूछा।
''फाड़ देते हैं।'' पुरुष ने कहा औऱ अपने हाथ से तलाक के काग़ज़ात फाड़ दिए। फिर स्त्री ने भी वही किया। दोनों उठ खड़े हुए। एक दूसरे के हाथ में हाथ डाल कर मुस्कराए। दोनों पक्षों के रिश्तेदार हैरान-परेशान थे। दोनों पति-पत्नी हाथ में हाथ डाले घर की तरफ चले गए। घर जो पति-पत्नी का था!!

भावार्थ :

भाई लोगो वकील कुछ नही करता, किसी की वकालत करना उसका पेशा है, उसकी रोजी रोटी है। तलाक के मुकदमो में असली हाथ परिवारजनो व् रिश्तेदारो का ही होता है। इसलिए सभी पति पत्नियो से निवेदन है सब मिलजुल कर आपसी समझ से प्यार से रहे,

हमारी रोटी की व्यवस्था प्रभु कही और करेगा।
........एक वकील

Wish you a happy and prosperous Republic Day, nd say I Am proud to be an Indian nd taking oth to change my nation to mak...
25/01/2016

Wish you a happy and prosperous Republic Day, nd say I Am proud to be an Indian nd taking oth to change my nation to make the best ever place to love with. Let's join me to proud on our country which is unique in the world

25/01/2016

Wish you a happy and prosperous Republic Day, nd say I Am proud to be an Indian

19/01/2016

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