02/01/2023
यार! जिम भी जाता हूं और वेट भी उठाता हूं, फिर भी बॉडी नहीं बन रही।
दुनिया में बहुत सारे लोग है जो बहुत ही अच्छे जेनेटिक्स के साथ पैदा होते हैं। मेरे जिम में तो वो भैया हैं ना वो तो कुछ भी खाते हैं बॉडी बन जाती है। अरे मेरे चाचा का लड़का तो जिम भी नहीं जाता फिर भी उसकी बॉडी बन जाती है। मैं तो कितनी भी मेहनत करूं मेरे शरीर पर तो कोई असर आता ही नहीं है। यार मेरा ट्रेनर को नॉलेज नहीं है। यार वो तो स्टेरोइड लगाकर ऐसी बॉडी बनाया है। आपके आस-पास भी बहुत सारे लोग ऐसे होते हैं जिनसे आप ये कहानी सुनते हैं या फिर जिनको आप ये कहानी सुनाते हैं। तो भाई ऐसी बात है कि ये सब आपके साथ इसलिये हो रहा है क्योंकि आपको बॉडी-बिल्डिंग के बेसिक्स का ज्ञान नहीं है। आप आज भी जिम जाकर अपने ट्रेनर के कहने पर गधा-मजदूरी कर रहे हैं या फिर कूड़ा -कबाड़ खाकर एक्सरसाईज कर रहे हैं। दूसरा आज भी ज्यादातर लोगों के लिये बॉडी-बिल्डिंग स्लो और स्टेडी गेम है जिसके पीछे एक कारण उनका लेक ऑफ नॉलेज या ज्ञान की कमी है जिसकी वजह से वो लगातार एक जैसी गलतियां करके सेल्फ डाउट में जी रहे होते हैं कि यार मेरे बस का तो है ही नहीं बॉडी बनाना। मैं तो मॉर्निंग वाक करके ही अपना वजन कम कर लूंगा। बेकार में क्यों बॉडी बनाकर अपने शरीर को कष्ट देना। तो आज इस आर्टिकल में हम लोग जानेंगे कि क्या कारण है कि इतनी सारी मेहनत करने के बाद भी हमारी बॉडी नहीं बनती और हम सेल्फ डाउट में जीते रहते हैं और एक आकर्षक व्यक्तित्व तक पहुंचने में बहुत देर कर जाते हैं।
हमारे साथ ये हमेशा होता है कि शुरुआत में जब हम जिम जाते हैं तो हमारी बॉडी पर असर दिखना शुरु हो जाता है लेकिन कुछ समय बाद सब प्रोग्रेस रुक जाती है। हम सोचते हैं कि यार मैं तो सब कुछ पहले ही जैसा कर रहा हूं। खाना-पीना भी सही है। एक्सरसाईज भी ठीक ही चल रही है लेकिन फिर भी ना तो फेट लोस हो रहा है और ना ही मसल्स बन रही हैं। आखिर गलती हो कहां रही है और इस तरह से आधे लोग तो जिम छोड़ देते हैं और बाकी के बचे लोग एक और गलती करते हैं और वो ये है कि वो लग जाते हैं ओवर ट्रेनिंग में। पहले जहां जिम में एक से डेढ घंटा रहते थे, अब एक्सरसाईज या मजदूरी चलती है पूरे दो-ढाई घंटे। पागलों की तरह ट्रेडमिल पे दौड़ रहे हैं घंटों-घंटों। क्रॉसट्रेनर की इंटेंसिटी बढ़ा रखी है 20 और घिसट रहे हैं उसपे। खाने को कर दिया है और भी कम और यही तो कहा भी था कोच सर ने। ‘‘बेटा मेहनत तो कर रहा है पर कार्ब ज्यादा है तेरे, प्रोटीन खा ये वाला प्रोटीन और हां रोटी और चावल बंद कर दे। सिर्फ सलाद खा। फिर देख कैसे पतला होता है।’’ और इस तरह से हम अपनी मूर्खता और अपने स्मार्ट कोच की बात मानकर अपनी और मां-भेन करवा लेते हैं। पर करें तो क्या करें। यू-ट्यूब पे भी तो सब लगभग यही कर रहे हैं। 10-20 मिनट का वीडियो देखने के बाद समझ में ही नहीं आता कि आखिर करें क्या। जो आदमी थोड़ी देर पहले कुछ बोलता है दूसरे वीडियो में बिल्कुल अगल बात कर रहा होता है।
तो आईये बिना किसी और लम्बी भूमिका के जानते हैं कि आखिर गलती हो कहां रही है। जिससे कि मसल्स बन नहीं रही हैं।
गलती न0 1 - आप सेम रैप रेंज पर हमेशा से ट्रेनिंग कर रहे हो।
फिटनेश और बॉडी बिल्डिंग कम्यूनिटी में हमेशा से इस बात पर डिबेट हो रही है कि मसल्स बिल्डिंग के लिये सबसे बढ़िया रैप रेंज क्या है और लगभग सभी लोग इस बात पर सहमत होते हैं कि 6-12 रैप ही सबसे फेवरेबल है मसल्स बनाने के लिये। लेकिन यह बात भी उतनी ही सत्य है कि इस रैप रेंज पर काम करने से भी कुछ समय के बाद आपकी प्रोग्रेस रुक जायेगी क्योंकि एक टाइम के बाद मसल्स हाइपोट्रोफी के लिये ये रेंज काफी नहीं होगी। तो इसलिये आपको तीन अलग-अलग रैप रेंज पर टाईम-टू-टाईम काम करना चाहिये, लो, मीडियम, और हाई।
लो रैप रेंज यानी 1-5 रैप - लो रैप रेंज में वेट उठाने से आपकी वेट लिफ्टिंग कैपेसिटी बढ़ती हैं और आप बाकी की दो रेप रेंज में और अधिक वेट उठा पाते हो। इस रेप रेंज में आपकी स्ट्रेंथ बढ़ जाती है।
मीडियम रैप रेंज यानी 6-12 रैप - यह रेंज दुनिया में ज्यादातर बॉडी बिल्डर यूज करते हैं और मसल्स हाईपोट्रोफी के लिये यह सबसे उपयुक्त मानी गयी है।
हाई रैप रेंज यानी 12 ज्यादा - इस रैप रेंज में वेट ट्रेनिंग करने से आपका इन्ड्यूरेंस का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। मोस्टली इस रैप रेंज का प्रयोग बिगनर और फेट बर्निग के लिये किया जाता है।
गलती न0 2 - आप बहुत ज्यादा ओवर ट्रेनिंग कर रहे है।
ये एक सबसे बड़ी गलती है जो ज्यादातर लोग करते है। और इसमें भी सबसे ज्यादा लड़किया हैं जिनको बहुत ज्यादा ट्रेनिंग करनी होती है। उनका जिम आने का मकसद ही होता है कि बॉस आज तो मजदूरी करनी ही करनी है। जिम की फीस दी है भाई, मैं तो सारी मशीनें उठाना चाहता हूं, मैं तो सब-कुछ करुंगी। बताओ मुझे कितनी मजदूरी करनी है। बस मुझे आज ही पतला कर दो। मेरी बॉडी बना दो।
बस यही एक गलती है जो ज्यादातर लोग करते हैं और फिर परेशान होते हैं कि मुझे रिजर्ट नहीं आ रहे। या मेरे घुटनो में कमर में क्या दर्द रहता है। मेरा जिम आने का मन क्यों नहीं करता, या मैं जिम जाने के बाद इतनी कमजोरी क्यों फील करती हूं।
तो यह एक मिथ है कि जितनी ज्यादा एक्सरसाईज करेंगे उतनी ज्यादा मसल्स बनेंगी या फेट लोस होगा।
यहां हम इस आर्टिकल में बात कर रहे हैं मसल्स बिल्डिंग की। फेट लोस की दूसरे किसी आर्टिकल में बात करेंगे। तो जो लोग ये लॉजिक लगाते हैं कि जितना ज्यादा मैं वेट उठाउंगा या मेहनत करुंगा उतनी ज्यादा मेरी मसल्स बन जायेगी ये गलत धारणा जितनी जल्दी छोड़ दो उतना अच्छा है। जब आपका प्राईमरी गोल मसल्स बनाना है तो आपको अपने शरीर को ज्यादा से ज्यादा समय देना होता है रेस्ट और रिकवरी में। जिम जाने से आपकी मसल्स नहीं बनती है। जिम जाने से मसल्स को स्टीमूलेट करते हो। आपकी मसल्स बनती हैं जब आप अपने शरीर को सही भोजन और आराम देते हो। हर व्यक्ति का मसल्स रिकवरी टाईम अलग-अलग होता है। और जब आप लगातार काफी समय तक वर्क आउट करते हो तो आपको पता चलता है कि आपका शरीर कितना समय में रिकवर करता है और उसको कितना वर्क आउट का स्ट्रेस चाहिये। तो ध्यान रखे, जिम में घंटों मजदूरी नहीं करनी है अपने वर्क-आउट का टाइम एक से डेढ घंटे के बीच में रखे जिसमें कि वार्म अप और पोस्ट वर्कआउट स्ट्रेचिंग शामिल हो।
गलती न0 3. आपका भोजन सही नहीं है।
जैसा कि हमने इससे पहले वाले पाईंट में डिस्कर्स किया कि जिम जाने से बॉडी नहीं बनती है। सहीं आराम और खाने से शरीर में आवश्यक बदलाव आते हैं। इंटरनेट के इस दौर में लगभग सभी को पता है कि क्या खाना चाहिये और क्या नहीं। लेकिन फिर भी एक चीज है जिसके लिये सारे इंटरनेट और हमारे सो-काल्ड ट्रेनर गुरुजी पीछे पड़े रहते है। ‘‘प्रोटीन खाओ, प्रोटीन। इसीलिये बॉडी नहीं बन रही। प्रोटीन खाओ। अरे तू मुर्गा नहीं खाता, ओ हो, बॉडी कैसे बनेगी। प्रोटीन खा प्रोटीन।’’ जो कि काफी हद तक सही भी है। प्रोटीन हमारे शरीर के मसल्स टिस्यूज के मेन बिल्डिंग ब्लाक्स होते हैं। और ये इसेंसियल अमीनो एसिड्स की चेन है जो कि हमारे शरीर के लिये और मसल्स के लिये बहुत आवश्यक है। लेकिन इनके अलावा भी दो और मैक्रो न्यूट्रियंट्स है जिनको कि हम इग्नोर तो नहीं करते लेकिन जिनको ज्यादा इज्जत की नजरों से नहीं देखते और वो हैं कार्ब यानी की कार्बोहाईड्रेट और फैट।
कार्बोहाइड्रेट हमारे शरीर को शक्ति देता है जिससे कि हम अपने रोजमर्रा के सभी काम करने के साथ-साथ वेट जिम में वेट उठाते हैं। ये हमारे दिमाग का सबसे प्रिय भोजन भी हैै। साथ ही फेट एक बहुत महत्वपूर्ण माईक्रो न्यूट्रीयेंट है जो कि टेस्टेस्टोरोन के प्रोडक्शन के साथ ही अन्य ग्रोथ हार्मोन के प्रोडक्शन के लिये उपयोगी है। जब आपके शरीर में इन हार्मोन का बैलेंस और आपूर्ति बराबर होती है तो आपका शरीर मशल्स बिल्डिंग आसानी से कर पाता है। अगर आपकी डाईट में फैट नहीं होगा तो फैट सोल्यूबल विटामिन ए, डी, ई, के काम नहीं करेंगे।
तो आराम करने और जिम जाने के अलावा आपको अपने भोजन का चयन भी बहुत सोच-समझ कर करना है। आपको अपनी डाईट में प्रोटीन, कार्ब और फेट का चुनाव सही और अच्छे सोर्सेस से करना है। साथ ही साथ आपको अपने गोल के हिसाब से चाहे वो मसल बिल्डिंग हो या फेट लोस, उसके अनुसार अपना कैलोरी गोल सेट करके सही मात्रा में प्रोटीन, कार्ब और फेट लेने हैं।
गलती न0 4. आप कम खाना खा रहे हैं।
जब आपका टारगेज मसल मास बनाना है तो आप ये टारगेट कम खाना खा के पूरा नहीं कर सकते। आपको अपनी रेगुलर मेंटेनेस कैलोरी से ज्यादा खाना खाना पड़ेगा यानी कि आपको कैलोरी सरप्लस पर रहना होगा तभी जाकर आप मसल बिल्ड कर पाओगे। तो सिर्फ तीन बार नॉर्मल खाना खाने से आप मसल्स को एक लिमिट से ज्यादा बिल्ड नहीं कर पाओगे। आपको लगभग 5-6 छोटे-छोटे मील रखने होते हैं। जिनमें कि आपका प्री-वर्कआउट और पोस्ट-वर्कआउट मील बहुत आवश्यक है।
गलती न0 5. आप हैवी वेट लिफ्ट नहीं कर रहे हैं -
आपके शरीर का प्राइमरी काम आपको जीवित रखना है। उसको मसल्स बनाने में कोई दिलचस्पी नहीं है। जब आप हैवी लिफ्ट करते हैं तो आपकी मसल्स अपने कंफर्ट जोन से निकल कर हाईपोट्रोफी की रेंज में आती है। आपके मसल्स टिश्यू ब्रेक डाउन होते हैं। और जब आप लगातार अपने शरीर को थोड़ा ज्यादा मेहनत करने पे लगाते हो, थोड़ा और हैवी वेट उठाते हो तो आपके मसल्स धीरे-धीरे ग्रो करने लगती हैं। ज्यादातर लोग जिम में या तो वेट उठाते ही नहीं हैं या जो उठाते हैं वो अपने कंफर्ट जोन से बाहर आकर थोड़ा आगे नहीं बढ़ना चाहते। ज्यादातर लोगों के पास पार्टनर नहीं होता इस बात का रोना-रोते हैं कि ट्रेनर सपोर्ट नहीं करता। बॉस बॉडी आपको बनानी है तो पार्टनर भी आपको ही ढूंढना होगा। और वैसे भी जिम एक अकेली जगह है जहां लोग बिना पूछे भी आपको सपोर्ट करने को तैयार रहते हैं। आप किसी भी अगर सपोर्ट के लिये बोलते हो तो वो आपको मना नहीं करता, बल्कि 4 नयी ज्ञान की बात बता के चला जाता है। तो अगली बार जब भी आप जिम में हों और वेट उठा रहे हैं। हर बार पुराने बार से ज्यादा वेट उठाये और लास्ट के 3 रैप के लिये सपोर्ट ले लें। धीरे-धीरे आपके वेट लिफ्टिंग कैपेसिटी बढ़ जायेगी और इसी के साथ बढ़ जायेगी आपकी मस्कुलेरिटी भी।
गलती न0 6. आप डंबल और बारबेल का प्रयोग करने की बजाय फैन्सी मशीनों पे ज्यादा ध्यान देते हो।
ज्यादातर लोग जिम में जाकर मशीनों पर एक्सरसाईज को महत्व देते हैं। उनको लगता है कि अगर जिम में फैन्सी मशीनें लगी हैं तो हमारे बॉडी बन जायेगी। जबकि अगर हम एक्चुअल में ओल्ड स्कूल जिम देखते हैं या फिर गांव-कस्बों के जिम देखते हैं तो पता चलता है कि वहां पर तो मशीनों के नाम पर सिर्फ बेंच और डम्बल, रोड, प्लेट और कुछ बेसिक मशीन होती हैं लेकिन उसके बाद भी हर जिम में अच्छे-खासे बॉडी बिल्डर रहते हैं। तो अगली बार जब जिम में रहो तो अपना ध्यान मशीनों से ज्यादा फोकस करो डम्बल और बारबेल यानी की रोड पे। जब हम मशीनों से एक्सरसाईज करते हैं तो वो एक पर्टीकुलर मसल को फोकस करती हैं और हमारे सारे मसल फाईबर ट्रेन नहीं होते। इसके विपरीत डम्बल और रॉड यानी की फ्री वेट से एक्सरसाईज करने पर जहां ज्यादा मसल्स फाईबर स्टीमूलेट होते हैं वहीं छोटे-छोटे स्टेबलाईजर मसल्स पर भी काम होता है जिससे कि आपकी भविष्य में वेट उठाने की क्षमता बढ़ती जाती है। अगर आपको मशीनें यूज करनी भी हैं तो आप उनको आखिरी में टारगेट मसल की एक्सरसाईज के लिये यूज कर सकते हो। इसके अलावा एक और जरूरी बात। जब भी हम हैवी वेट लगा रहे होते हैं तो सर के पीछे यानी की बिहाइंड द नेक एक्सरसाईज को अवाईड करना चाहिये। इससे हमारे सोल्डर पर बहुत ज्यादा लोड आता है और साथ ही साथ नेक इंजरी के चांस भी रहते हैं। वैसे भी कई स्टडीज के अनुसार बिहाईंड द नेक एक्सरसाईज बेन एक्सरसाईज मानी गयी हैं।
गलती न0 7. आप रेगुलर नहीं हो -
और इसी के साथ सारे प्वांईंट एक तरफ और ये वाला प्वाईंट एक तरफा। कोई भी काम को अगर आप लगातार नहीं करते हो तो उस काम के सिद्ध होने में शंका रहती है। वो कहते हैं ना कि ‘करत करत अभ्यास ते, जड़मति होत सुजान, रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निशान। यानी की आपके पास और कोई सुविधा हो या न हो लेकिन अगर आप लगातार अभ्यास कर रहे हैं तो जिस तरह से रस्सी की रगड़ से पानी के कुएं के पत्थर पर निशान पड़ जाता है आप भी अपनी मंजिल को एक दिन पा ही लोगे। तो बॉडी बिल्डिंग का सबसे महत्वपूर्ण फंडा है कंसीस्टेंसी। अगर आप कंसीस्टेंट नहीं हो तो एक बार को जैसे-तैसे आप बॉडी बना लोगे, लेकिन वो ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं है। तो सबसे पहले प्वाईंट न0 7 से स्टार्ट करिये और धीरे-धीरे आप देखेंगे आपके सिर्फ शरीर में ही बदलावा नहीं आ रहा है बल्कि आपकी पूरी लाईफ बदल रही है। जो लोग कभी आपके जिम जाने पे हंसते थे, जो कभी आपको पतला या मोटा कहकर चिढ़ाते थे, अचानक से उनकी आंखों में रिस्पेक्ट आती हुई देखेंगे आप। तो इसलिये ये सारे प्वांईंट को पढ़िये और लग जाईये अपनी लाईफ के सबसे आवश्यक मिशन यानी की अपने आप पर और थोड़े समय में आप देखेंगे कि आपने वो पा लिया है जिसके लिये लोग सपने देखते हैं।
मनोज सुन्दरियाल
सर्टिफाईड फिटनेश ट्रेनर, डाईटीशियन