02/12/2025
यह जो पत्र हनुमान बेनीवाल ने लिखा है, वह केवल एक कागज़ का टुकड़ा नहीं—यह उस संस्कार, साहस और ज़िम्मेदारी की पहचान है जो किसी असली जननेता के भीतर होती है। लेकिन दुख की बात यह है कि आज राजनीति में कुछ ऐसे लोग भी लोकसभा या बड़े पदों तक पहुँच गए हैं जो समाज की भावनाओं को “किसान का रखवाला” का खेल बनाकर भुनाते हैं। कई नेता नेता इसी तरह रिश्तों की राजनीति और भावनाओं के सौदे से संसद पहुँचे और अब अपने आप को किसानों का सबसे बड़ा नेता और कांग्रेस, बीजेपी का अगुवा चेहरा बताने में लगे हैं। सवाल यह है—क्या ऐसे लोग कभी इस तरह का साहसिक, स्पष्ट और तथ्य आधारित पत्र लिख सकते हैं?
सत्र शुरू होते ही एक किसान नेता, पूर्व विधायक और किसान समाज के मजबूत स्तंभ की श्रद्धांजलि को लेकर जिस संवेदनशीलता, दृढ़ता और संसदीय परंपरा की रक्षा के लिए हनुमान बेनीवाल ने आवाज उठाई—क्या ऐसे अवसरवादी नेता वैसी ज़िम्मेदारी निभा सकते हैं? जिनकी राजनीति केवल किसान समाज के नाम पर भावनाएँ भड़काने, फोटो सेशन करवाने और मंचों पर बड़े-बड़े दावे करने तक सीमित हो—क्या वह कभी किसानों के सम्मान की लड़ाई संसद या विधानसभा के भीतर इतनी शिद्दत से लड़ पाएँगे?
सच ये है कि समाज का नाम लेकर,किसानों के भोलेपन का लाभ उठाकर और उनकी भावनाओं से खेलकर नेता तो कोई भी बन सकता है, लेकिन किसानों के अधिकार, परंपरा और सम्मान की रक्षा के लिए इस स्तर की चेतना और हिम्मत हर किसी के पास नहीं होती। समाज को भी यह समझना होगा कि असली नेता वह है जो संसद, विधानसभा में बैठकर अपने क्षेत्र और अपने किसान समुदाय की आवाज़ को मरने नहीं देता—न कि वह जो केवल नाम और नारे के सहारे खुद को बड़ा किसान नेता घोषित कर दे।
आज ज़रूरत ऐसे नेताओं की है जिनके शब्दों में दम हो, जिनकी कलम में सत्य की ताकत हो और जो मंच से लेकर संसद विधानसभा तक अपने समाज के लिए खड़े होने का साहस रखते हों—न कि उन लोगों की जो राजनीति को रिश्तेदारी और भावनाओं का खेल बना चुके हैं। Hanuman Beniwal
माननीय लोकसभा अध्यक्ष श्री Om Birla जी, कल दिनांक 01/12/2025 को संसद का शीतकालीन सत्र प्रारम्भ हुआ और सदन की परम्परा के अनुसार आपने सत्र के प्रथम दिन लोक सभा के पूर्व सम्मानित सांसद जो दिवंगत हो गए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की मगर मुझे यह लिखते हुए खेद है कि आप द्वारा बीकानेर से पूर्व सांसद ,राजस्थान विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष तथा हमारी किसान कौम के दिग्गज नेता स्वर्गीय रामेश्वर जी डूडी का आपने जिक्र तक नहीं किया जिससे प्रदेश व देश के किसान वर्ग में भारी रोष व्याप्त है |
चूंकि आप संवैधानिक पद पर विराजमान है,आप स्वयं राजस्थान से आते है और स्वर्गीय रामेश्वर जी डूडी भी राजस्थान से आते थे और आप उन्हें व्यक्तिगत रूप भी जानते थे ऐसे में यह जो चूक हुई वो किस स्तर पर हुई है उसका जवाब देश का किसान इस सदन के सचिवालय से भी मांग रहा है |
मेरा आपसे आग्रह है कि कल दिनांक 03/12/2025 को जब सदन की कार्यवाही प्रारम्भ हो तब आप स्वर्गीय रामेश्वर जी डूडी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद सदन की कार्यवाही प्रारम्भ करें ताकि इस सदन की परम्परा कायम रहें |
धन्यवाद