खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा झंझारपुर बाजार

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"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?--भाग -{26}-ज्योतिषी झा मेरठ2010- में --ऑरकुट पर निःशुल्क ज्योतिष सेवा एकबार की शुरुआत की थी ज...
21/04/2026

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?--भाग -{26}-ज्योतिषी झा मेरठ
2010- में --ऑरकुट पर निःशुल्क ज्योतिष सेवा एकबार की शुरुआत की थी जो आज तक चल रही है | ---अस्तु --नेट की दुनिया उत्तम भी है और अधम भी, केवल ये व्यक्ति की सोच पर निर्भर करती है कि आप क्या चाहते हैं | मेरे जैसा साधारण द्विज या कर्मकाण्डी ब्राह्मण को क्या मिलता --तो सोचने लगे -क्यों न अपने हृदय में जो मन्त्र हैं या ज्ञान है उनको लिखें | इससे दो बातें होंगीं पहली -फ्री सेवा देकर आप किसी व्यक्ति के ह्रदय में तभी समा सकते हैं जब आप वस्तुतः सत्य बातों को उकेरने की कोशिश करेंगें | दूसरी बात- बाल्यकाल से जब भी शिक्षा मिली केवल बोलने की मिली तो लिखना भी सीख जायेंगें | --ध्यान दें -कम्प्यूटर के न तो कोई गुरु मिले न ही वेसिक शिक्षा ही ली हमने अतः टाईपिंग मुझको आज भी नहीं आती है --पर हम लिखने में सक्षम हैं -हाँ तरीके से नहीं लिख पाता हूँ इस बात का मुझको खेद है |उस समय गूगल टॉक था लोगों से बातें बहुत होती थीं | दोस्त भी बड़े सभ्य होते थे ,आज भी उन दोस्तों में से कुछ दोस्तों का प्रेम मिलता रहता है | उस समय केवल ऑरकुट पर हिन्दी लिखने की सुविधा थी जो मुझ जैसे हिन्दी भाषी व्यक्ति को मिली | हमने कम से 500 लेख लिखे जो थे तो छोटे पर बड़े काम के थे --इन लेखों और सेवा के प्रभाव से केवल तीन मास में एक हजार दोस्तों की संख्या पूरी कर ली | एक दिन हमने देखा एक जेल का कैदी कोई व्यक्ति मुझको लिखा -श्रीमान आपके लेखों को नित्य पढता हूँ कभी मेरे जैसे व्यक्ति के बारे में भी लिखें | यह मुझको भी पत्ता नहीं था कि हम ब्लॉगर में जो लिखते हैं वो सभी पढ़ते हैं-इसका असर यह हुआ हम पहली बार समझें नेट की दुनिया में आप अपनी कला को ब्लॉगर के द्वारा जन -जन तक पहुंच सकते हैं वो भी निःशुल्क | फिर क्या था -हमने ब्लॉगर को तमाम लिंकों से सजाया साथ ही कोशिश करते रहे और हम क्या कर सकते हैं | यहाँ हमने -1000 आलेख लिखे | घीरे -धीरे नेट की दुनिया को समझने लगे | 2011 में हम पहलीबार फेसबुक पर आये | उस समय फेसबुक पर अच्छे लोग हुआ करते थे भारत के --अच्छे से मतलब एक दिन में बिना निमंत्रण दिए बहुत दोस्त बनते थे साथ ही सबकी प्रोफाइल सही होती थी इतना ही नहीं सक्षम व्यक्ति ही ज्यादा होते थे -हम जैसे अनपढ़ नहीं होते थे | अनपढ़ का अभिप्राय अंग्रेजी विहीन | यहाँ मेरा प्रभाव कैसे बढियां बने इसके लिए हमने चैटिंग से सेवा शुरू की --हम पूछते थे ज्योतिष की जानकारी चाहिए -वो बोलते थे जी जरूर -भविष्य बताएं हम लिखकर सेवा उन तक पंहुचाते थे | पर दिक्क्त थी सभी लोग या तो नेपाल ,बांग्लादेश ,--पाकिस्तान ,या जो भारतीय थे वो सभी दूर देश में रहते थे | साथ ही यह सेवा मुझको खलने लगी कई -कई बार एक ही व्यक्ति सेवा लेने लगे | आगे की कथा की चर्चा आगे करेंगें | |---आपका -खगोलशास्त्री झा मेरठ --ज्योतिष से सम्बंधित सभी लेख इस पेज https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut में उपलब्ध हैं |

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?-"भाग -{24}-- ज्योतिषी झा मेरठ2009 -हम चाहते थे कि अपने तमाम श्लोकों को संगीत से सजायें और माँ...
19/04/2026

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?-"भाग -{24}-- ज्योतिषी झा मेरठ
2009 -हम चाहते थे कि अपने तमाम श्लोकों को संगीत से सजायें और माँ शारदे की कृपा से करने में सफल भी हुए | इस कार्य में मेरी भार्या ने बहुत साथ भी दिया किन्तु 2009 आते -आते सब्र टूट गया भार्या का और उलाहना देने लगी | यद्यपि मेरे घर में किसी वस्तु की कमी नहीं थी -मकान ,वाहन ,प्रेम सबकुछ था पर सगीत के क्षेत्र में मेरी कोई पहचान नहीं थी तो भला मेरे जैसे निकम्मे व्यक्ति का यही हाल होना था | हमने अपने हारमोनियम का परित्याग कर दिया | ऐसा नहीं कि ऐसा व्यक्ति मैं ही संसार में हूँ | बहुत से माता पिता अपनी संतानों पर धन इसलिए खर्च करते हैं कि उनको ज्ञान कम भले ही हो पर ओहदा जरूर मिले क्योंकि आज पढ़ाई धन के लिए पहले होती है ज्ञान के लिए बाद में | ऐसा भोले नाथ के साथ भी हुआ अपने लिए भिखारी रहते हैं तो दूसरों के लिए दानी है | बहुत से छात्र ज्ञान में सक्षम होते हैं किन्तु सफलता नहीं मिलती है तो आत्महत्या भी कर लेते हैं | मेरी ललक शिक्षा थी न कि धन -जब ज्ञान होता है तो धन खुद ही आता है | बहुत से लोग हैं जो जीजान से मेहनत करते हैं किन्तु राजा नहीं बन पाते हैं | ---तो भला मेरे जैसा नाकाम व्यक्ति ज्ञान की बात ही कर सकता है | मैंने अपनी कुण्डली देखने की कोशिश की कि आखिर मुझको सफलता क्यों नहीं मिलती है ऐसी सफलता नहीं जो पद न दिला सके, तो पत्ता चला मेरी कुण्डली में गुरु तृतीय भाव में हैं और शनि भाग्य में इसका मतलब है --मुझसे परिजनों को तो सुख मिलेगा किन्तु मुझको परिजनों से सुख नहीं मिलेगा | आगे मेरा भाग्य तो अच्छा रहेगा किन्तु पद नहीं मिलेगा | तीसरा जीवन में निरन्तर अध्ययन करता रहेगा | अतः हमने सोच लिया जिससे भार्या को कष्ट हो वो कार्य नहीं करेंगें ,संगीत की शिक्षा समाप्त कर दी | ----पर क्या करें गुनगुनाना बंद नहीं हुआ, -- |-------ज्योतिष से सम्बंधित सभी लेख इस पेज https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut में उपलब्ध हैं कृपया पधारें और अपने -अपने योग्य ज्योतिष का लाभ उठायें ,आपका लाभ ही हमारी दक्षिणा होती है ------आपका -खगोलशास्त्री झा मेरठ,झंझारपुर और मुम्बई-- - उपलब्ध हैं |

18 /04 /26 से 01 /05 /26 तक की भविष्यवाणी पढ़ें -खगोलशास्त्री झा मेरठ-------ॐ श्रीसंवत -2083 ,शाके -1948 वैशाख शुक्लपक्ष ...
18/04/2026

18 /04 /26 से 01 /05 /26 तक की भविष्यवाणी पढ़ें -खगोलशास्त्री झा मेरठ
-------ॐ श्रीसंवत -2083 ,शाके -1948 वैशाख शुक्लपक्ष ---तदनुसार दिनांक -18 /04 /2026 से 01 /05 /2026 तक भविष्यवाणी की बात करें प्रमाण देखें ---सूर्यदेव के पीछे मंगल ग्रह का प्रभाव ----आदित्या गच्छति ह्यग्रे पृष्ठे भवति भुसुतः प्रजा कष्ट जो पायेगी ,न मिल हैं उपचार ---अर्थात --प्रस्तुत प्रमाण के अनुसार मंगल के आगे सूर्यदेव के होने से नेतागण भष्टाचार में लिपतायमान रहेंगें | किसी बड़े नेता की जेल यात्रा का संयोग भी बन सकता है | जनता की आवाज राजा लोग अनसुनी करेंगें | फसलों का उचित मूल्य न मिलने से किसानों की दुर्दशा बढ़ती जायेगी | किसी राज्य में किसान आंदोलन से जनता दुःखी रहेगी | कल कारखानों में श्रमिक तथा मालिक के बीच संघर्ष संभव है | युवावर्ग का असन्तोष बढ़ता जायेगा | मंगल शनि के योग में दुश्मन देश अशान्ति फैलाने का प्रयास करेगा | ,जिससे पड़ौसी देशों के साथ सीधा संघर्ष बढ़ सकता है | सरकारी प्रतिष्ठान में सेंधमारी का मामला पकड़ में आयेगा | -----तेजी मंदी की बात करें तो ---रोजमर्रा की वस्तु ,बिल्डिंग मैटीरियल। लोहा ,सीमेन्ट आदि के साथ सोना ,चांदी के दामों में बढ़ोत्तरी होगी | एक और प्रमाण देखें - पन्द्रह से पैतालीस जाय | रतन भाव में अन्न बिकाय || ----इस प्रमाण के अनुसार सभी खाद्य वस्तुएं ,खाद्यतेल ,सुपारी ,कत्था ,चूना आदि की जमाखोरी से कमी महसूस होगी | सरकार व्यापारियों पर कठोर कार्यवाही करने पर मजबूर हो जाएगी | -----आकाश लक्षण की बात करें तो ---स्वर्ग तथा पाताल नाड़ी में ग्रहों से प्रभाव से विपरीत मौसम का सामना करना पड़ेगा | राजस्थान ,मध्य प्रदेश ,उत्तर प्रदेश ,दिल्ली ,हरियाणा ,पंजाब में वर्षा न के बराबर होगी | कहीं अकाल जैसी विषम परिस्थिति का सामना करना पड़ेगा | पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था पर सरकार जोर देगी |
---आपका पसंदीदा पेज --ऑनलाइन ज्योतिष सेवा होने से तत्काल सेवा मिलेगी --खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ संपर्कसूत्र 09897701636 --93588885616

खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ : 18 /04 /26 से 01 /05 /26 तक की भविष्यवाणी पढ़ें -खग...
17/04/2026

खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ : 18 /04 /26 से 01 /05 /26 तक की भविष्यवाणी पढ़ें -खग...

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""मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?-"भाग -{23}-ज्योतिषी झा मेरठ2001 से 2010 तक का समय जो समय मिला हमने भरपूर कोशिश की सदुपयोग कर...
14/04/2026

""मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?-"भाग -{23}-ज्योतिषी झा मेरठ
2001 से 2010 तक का समय जो समय मिला हमने भरपूर कोशिश की सदुपयोग करने की | जिन ग्रन्थों को हमने अध्ययन केवल कण्ठाग्र {याद } किये थे उन ग्रन्थों को हमने पुनः समझने की कोशिश की ,जो संगीत बाल्यकाल में हारमोनियम के आभाव में छूट गया था उसको हमने सीखने का अथक प्रयास किया और सीखा | क्योंकि अगर श्लोकों को अगर आप संगीत से सजाते हैं तो परमात्मा की कृपा और विशेष होती है इतना ही नहीं साधना में और भी आनन्द आता है | किन्तु ध्यान दें संगीत वही उत्तम होता है जो रागों पर आधारित होता है -बहुत से गायक सरगम भी नहीं जानते किन्तु उत्तम गाते हैं किन्तु मेरी नजर में रागों के बिना संगीत अधूरा रहता है | अतः हमें संगीत सीखने में समय लगा क्योंकि गुरु नहीं थे | मेंहदीपुर राजस्थान बालाजी में भी प्रतिष्ठा हेतु हम आचार्य बनें ,दैनिक जगरण के संपादकजी के यहाँ इंदौर मध्य प्रदेश जाने का सौभाग्य मिला ,पटना श्री देवेन्द्र यादवजी के यहाँ 2 बार जाने का सौभाग्य मिला | न जाने कितने लोगों से मिले ,कितने लोगों को कार्य दिए ,धौलपुर राजस्थान के एक यजमान ने मोटरसाईकिल 2006 में दी ,2003 में मेरठ में अपना छोटा सा भवन मिला | जो पैतृक जगह बिहार है वहाँ भी पिताजी ने शानदार भवन हमलोगों के लिए बनवाये | मेरे आराध्य गुरु पुनः दुबारा नहीं मिले न प्रत्यक्ष न अप्रत्यक्ष | सबसे बड़ी बात अपनी जिम्मेदारी को संभालते हुए हमने अध्ययन और अध्यापन की पूर्ण कोशिश की | मेरी तम्मना थी शिक्षक बनू ,पत्रकार बनू साथ ही ज्ञान प्रदाता बनें यह सभी कार्य आपकी और ईस्वर की कृपा से पूर्ण हुए | अब एक संकट और आया- मेरी दो कन्या थीं -लोग कहने लगे तुम इतने बड़े पंडित हो तो पहले पुत्र क्यों नहीं होते --फिर माँ की शरण में गए -माँ के दरबार से कोई खाली नहीं जाता है -एक पुत्र भी मिला 2007 में | मेरी सोच है -किसी विद्वान की पहचान धन नहीं -संस्कार होते हैं ,किसी विद्वान का अलंकार स्वर्ण नहीं विद्या होती है -घर्मो रक्षति रक्षकः --जो धर्म की रक्षा करता है उसे धर्म अपनी गोद में उठाता अतः हम आप सभी को एक बात कहना चाहते हैं --सत्य के मार्ग में देर हो सकती किन्तु अंधेर नहीं | अभी मेरी जीवनी की कुछ विशेष बात बाँकी है जिन्हें आगे बताने की कोशिश करेंगें |--------ज्योतिष से सम्बंधित सभी लेख इस पेज https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut में उपलब्ध हैं कृपया पधारें और अपने -अपने योग्य ज्योतिष का लाभ उठायें ,आपका लाभ ही हमारी दक्षिणा होती है ------आपका -खगोलशास्त्री झा मेरठ,झंझारपुर और मुम्बई-- - उपलब्ध हैं |

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?-"भाग -{22}- ज्योतिषी झा मेरठ1999 -में जो हमने यज्ञ किया वो न तो हम तांत्रिक थे ,न ही दिव्य पु...
14/04/2026

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?-"भाग -{22}- ज्योतिषी झा मेरठ
1999 -में जो हमने यज्ञ किया वो न तो हम तांत्रिक थे ,न ही दिव्य पुरुष थे ,हमें केवल मार्ग की जानकारी थी कि इस विधि से यह जाना जा सकता है -उस विधि का प्रयोग किया और माँ आदिशक्ति की कृपा हुई -उनको पुत्री मिली साथ ही मुझको मन्दिर और निवास मिला पत्ता -कृष्णपुरी धर्मशाला देहली गेट मेरठ | हम आज तक यहाँ विराजमान हैं | --अस्तु --राहु की महादशा समाप्त हुई | अब 16 वर्षों के लिए गुरु की दशा आयी -मेरी कुण्डली गुरु तृतीय भाव में हैं --तो निश्चित ही भार्या सुख और भाग्योदय होना था साथ ही प्रचुर आय भी होनी थी | यह मेरा सौभाग्य रहा -दौराला -मेरठमें शिव की प्रतिष्ठा हेतु हम आचार्य नियुक्त हुए ,शिव चौक बागपत गेट मेरठ यहाँ भी प्रतिष्ठा का दायित्व मिला ,कबाड़ी बाजार एवं जुनेजा मार्किट शहर की प्राण प्रतिष्ठा में आचार्य का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला | सब्जी मण्डी मेरठ में पीपली -पीपल का विवाह हेतु आचार्य बनें जो मेरठ नगर एवं समस्त मीडिया जगत के लिए कौतुहल का विषय था | --जो हम दूसरे पर आधारित थे आज परमात्मा एवं गुरुदेव की कृपा से स्वतंत्र कार्य किये ,साथ ही आज हम इस योग्य बने किअब हम दूसरे को कार्य देने लगे | --एकदिन एक छात्र नाम हीरा ठाकुर ये संगीत सीखने मेरठ के प्रसिद्ध बैण्ड -जय हिन्द बैण्ड के संचालक श्री जगदीश धानक के पास जाते थे ,कौतुहल बस मैं भी देखने गया -जब गया तो हमने पूछा क्या सीखते हो उसने बताया सरगम -हमने कहा यह ऐसे बजाते हैं वो तो फिर कभी सीखने नहीं गया पर हम नित्य सीखने लगे -अब हम -31 वर्ष के हो चुके थे -ये हारमोनियम बजाना तो नहीं जानते थे पर सुरों की उत्तम जानकारी थी और स्वभाव के बड़े ही सनेही थे | कुछ दिनों तक सीखने के बाद मुझको लगा यहाँ हम कामयाब नहीं हो सकते क्योंकि संगीत के लिए उत्तम गुरु और संगति की जरुरत होती है जो मुझको यहाँ नहीं मिलेगी | अतः हमने हारमोनियम ख़रीदा और अपने बाल्य काल के संगीत गुरु का ध्यान किया साथ में टेपरिकार्ड से गाना -गाना सीखने लगा | इतनी उम्र में लोग बच्चों को पढ़ाते हैं किन्तु हम फिर से पढ़ने लगे --ॐ - आपका - ज्योतिषी झा
मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut

ज्योतिष कक्षा पाठ -18 -तिथियां क्यों -पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ"ज्योतिषशास्त्र "में चन्द्रमा की एक कला को तिथि...
10/04/2026

ज्योतिष कक्षा पाठ -18 -तिथियां क्यों -पढ़ें -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ
"ज्योतिषशास्त्र "में चन्द्रमा की एक कला को तिथि माना जाता है | तिथियों की गणना -शुक्लपक्ष -से आरम्भ होती है | -अमावस्या -के बाद की प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक की तिथियां --शुक्लपक्ष -की तथा पूर्णिमा के बाद की प्रतिपदा से आरम्भ करके अमावस्या तक की तिथियां -कृष्णपक्ष -की होती हैं | --इस प्रकार एक माह में दो पक्ष होते हैं --{1 }--शुक्लपक्ष ,----{2 }---कृष्णपक्ष ---|
--------------------------------------तिथि अंक तालिका -----------------------------------------------------

तिथियों के अंक ----- कृष्णपक्ष --- तिथियों के अंक - शुक्लपक्ष

-------1 - -------- --- प्रतिपदा ---- -- -1 ----- प्रतिपदा

--1 - ------------- द्वितीय -2 ------ द्वितीय

--3 --- ------------ तृतीया --- ---3 ---- तृतीया

--4 -- ------------- चतुर्थी ---4 ----- चतुर्थी

--5 ---- --------------- पंचमी ----5 ------ पंचमी

---6 ------------------------- षष्ठी -----6 -------- --- षष्ठी

---7 ----------------------- सप्तमी -----7 ----------- सप्तमी

---8 ----- ------------------ अष्टमी -----8 ---------- अष्टमी

----9 ------ --------------------- नवमी ---9 ----------- नवमी

---10 ---------------------------- दशमी ----10 --------- दशमी

----11 ---- ------------------------ एकादशी ------11 --------- एकादशी

----12 ------------------------------ द्वादशी -----12 --------- द्वादशी

----13 ---- -------------------------- त्रयोदशी ----13 ------- त्रयोदशी

----14 ----- ---------------------------- चतुर्दशी ------14 ---------- --- चतुर्दशी

--15------------------------------- ------ पूर्णिमा ----15 ---------- पूर्णिमा

--उक्त दोनों पक्षों की पूर्णिमा और अमावस्या के अतिरिक्त अन्य तिथियों के नाम एक जैसे होते हैं | ये निम्नलिखित हैं --प्रतिपदा ,द्वितीया ,तृतीया ,चतुर्थी ,पंचमी ,षष्ठी ,सप्तमी ,अष्टमी ,नवमी ,दशमी ,एकादशी ,द्वादशी ,त्रयोदशी ,चतुर्दशी ----चतुर्दशी के बाद शुक्लपक्ष की पंद्रहवीं तिथि को पूर्णिमा तथा कृष्णपक्ष की तीसवीं तिथि को अमावस्या कहा जाता है | तिथियों की 1 ,2 ,3 ,4 आदि अंकों के रूप में लिखा जाता है | पूर्णिमा तक यह क्रम 15 तक की संख्या तक चलता है ,--किन्तु उसके बाद पुनः 1 ,2 ,3 और 4 लिखा जाता है | --जिस दिन अमावस्या होती है ,उस दिन अमावस्या तिथि को 30 अंक के रूप में लिखा जाता है | उपरोक्त तालिका में दोनों पक्षों के अंक के अंक निर्धारित किये गये हैं |
----हमारे पाठकगण -तिथियों की विशेष जानकारी अगले भाग में लिखने का प्रयास करेंगें ---- -- भवदीय निवेदक -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ --ज्योतिष सीखनी है तो ब्लॉकपोस्ट पर पधारें तमाम आलेखों को पढ़ने हेतु -khagolshastri.blogspot.com

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?--"भाग -{21}-ज्योतिषी झा मेरठ1999 -अब हम मेरठ में अपने आप को स्थापित कर रहे थे | परमात्मा और स...
09/04/2026

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?--"भाग -{21}-ज्योतिषी झा मेरठ
1999 -अब हम मेरठ में अपने आप को स्थापित कर रहे थे | परमात्मा और सद्गुरु की सच्ची कृपा तभी होती है जब आप सच्ची निष्ठा से जुड़ते हैं | अभी हमारे अंदर एक कमी थी -मेरठ में मेरा अनुज मुझसे आठ वर्ष छोटा मुझसे सफल था किन्तु ज्ञान का आभाव था | मेरठ जैसे शहर में मंदिर में ज्ञानी पुरुष की जरुरत कम सेवक की ज्यादा होती है | अतः यह अनुज केवल आठवीं पास था पर केवल धन की जिज्ञासा थी तो उसे मंदिर और निवास मिला था | अनुज ने प्रस्ताव दिया मेरे पास रहो ,हम एक अनुज को पहले ही खो चुके थे अतः अपनी संतान जैसा ही चाहते थे और इसे किसी प्रकार का कष्ट न हो यह सोचकर इसके पास स्थान --शिव चौक बागपत गेट मेरठ-में रहने लगा और इसे पढ़ाने भी लगा | एक दिन 1999 में पिता के साथ बच्चे मेरठ आ गए ,पिता छोड़कर चले गए -उनके जाते ही मेरी नन्ही -नहीं सी बच्चियों को ताना मारने लगा -इस बात जानकारी मुझको मिली -मैंने कुछ नहीं कहा ,इसके बाद गर्मी का समय था हम बच्चों के साथ छत पर सो रहे थे तो अनुज ने कमरे में ताला लगा दिया ,मेरी छोटी सी डेढ़ साल की बच्ची दूध के लिए रोने लगी ,जब दूध लेने पतनी कमरे जाने लगी तो ताला लगा देखा -अनुज का अता -पत्ता नहीं चला ,मुझसे बच्ची की दशा देखी नहीं गयी तो हमेंने दरवाजे में धक्का दिया ताला सहित दरवाजा खुल गया | इसके बाद मेरे अनुज ने मकान मालिक से कहा ताला तोड़कर यह मेरे पैसे चुराया है और आपका दरवाजा भी तोड़ दिया | यह शब्द मानो मरने जैसा था | हमने मालिक से अनुरोध किया 15 दिन का समय दें हम घर चले जायेंगें, तत्काल बच्चों को लेकर कहाँ और कैसे जायें | उन्होंने कहा अभी खाली करो मकान --अब हमने चन्द्रलोक मलियाना फाटक मेरठ के पास मेरे एक मित्र थे उनसे अनुरोध किया -उन्होंने मुझे पनाह दी -फिर किराये का मकान दिलाया -इस मित्र ने अपनों से बढ़कर सम्मान दिया | अब मेरा कोई न तो मददगार परिजन न ही ससुराल पक्ष में कोई आसरा देने वाला --अब क्या करें कैसे आगे बढ़ें यही सोचने लगा -- --अब हम सच्ची निष्ठा से परमात्मा के सहारे हो गए फिर क्या था ----पत्रं पुष्पं फलं तोयं मामेकं शरणं व्रज " परमात्मा ने दोनों हाथों से मुझको उठाया -कैसे -जानिए -एक व्यक्ति नाम सुरेश निवासी -धौलपुर राजस्थान मेरठ में रहते थे वो मुझको जानते थे उनकी लड़की खो गयी थी मुम्बई में -हमसे पूछा महराज कैसे मिलेगी ,हमने कहा मिल जाएगी -पर खर्च बहुत होगा -बोले कोई बात नहीं | हमने कहा -मिल जाएगी तब तुम 11००० हजार दक्षिणा देना -पर मैं जो साधना करूँगा उसमें तुम्हें मेरे बच्चों की देखभाल करनी होगी ---हम एक मास बोलेंगें नहीं ,केवल साधना करेंगें ,और इस बीच हमारा राशन पानी सारी जिम्मेदारी तुम्हारी -बोले ठीक है -आप यज्ञ करो --ये व्यक्ति ऐसे थे मानो स्वयं मेरे पिता मेरी रक्षा करने हेतु पधारे हों | इन्होने इतना राशन लाया जिसे हम छे महीने ग्रहण किये ,बिस्तर ,चौकी ,मेरे बच्चों ने पहली बार पिता के साम्राज्य में उत्तम वस्त्र पहनें | अब हमें कोई चिंता नहीं थी तो चिंतन उत्तम होना लाजमी था ---- -आगे की चर्चा आगे करेंगें --ॐ |--ज्योतिष और कर्मकाण्ड की अनन्त बातों को जानने हेतु इस लिंक पर पधारें --https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut. खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

ज्योतिष कक्षा पाठ-17 -अंग्रेजी मास और उनकी उत्पत्ति-पढ़ें ज्योतिषी झा मेरठरोमन तथा आंग्ल भाषा साहित्य में ही नहीं ,संप्रद...
08/04/2026

ज्योतिष कक्षा पाठ-17 -अंग्रेजी मास और उनकी उत्पत्ति-पढ़ें ज्योतिषी झा मेरठ

रोमन तथा आंग्ल भाषा साहित्य में ही नहीं ,संप्रदाय में भी उग्र संक्रांतियां हुई हैं | देवार्चन -को वहां भी महत्व और प्रधानता दी गई है | उसी के आधारभूत देवताओं पर उनके मास प्रस्तुत हैं --
{1 }--जनवरी -जेनस नामक एक रोमन देवता के नाम पर वर्ष के प्रथम मास का नाम जनवरी रखा गया | इस देवता के सम्बन्ध में यह प्रसिद्धि है कि इसके दो मुख थे | एक सामने की ओर तथा दूसरा पीछे की ओर --इस तथ्य में यह औचित्य है कि जब हम बीते हुए वर्ष की सफलताओं और असफलताओं पर विचार करते हैं --तो हमें आगे आने वाले नववर्ष की नूतन योजनाओं का भी विवेचन करना पड़ेगा | भाव यह है कि जेनस आदि और अंत का देवता समझा जाता है |

---{2 }--फरवरी --प्राचीन रोमन जगत में फेबुआ नामक एक बहुत बड़ा भोज हुआ करता था ,जो अति पवित्र तथा पुण्यतम माना जाता था --इसी के नाम पर वर्ष के दूसरे मास को फेबुरी कहा गया |

---{3 }--मार्च ---रोमन के एक देवता का नाम मार्स था | वो देवता युद्ध का प्रतीक माना जाता था | उसी के गुणों के आधार पर तीसरे मास का नाम मार्च रखा गया |

----{4 }---अप्रैल ---रोमन भाषा में दो शब्द हैं --अमोनिया और एपारि जिनका अर्थ है --सब कुछ खोल देना | उसी पर वर्ष के चौथे मास का नाम अप्रैल पड़ा और यह भी कितना सार्थक नाम है --क्योंकि अप्रैल के मास में ही यूरोप की धरती पल्ल्वित होती है | यह अप्रैल ही है --जो धरती पर से बर्फ और कुहासा का आवरण उठा देता है और प्रकृति को सर्व सुन्दर रूप प्रदान करता है |

---{5 }---मई --इस मास का यह नाम एटलस की कन्या "मइया " से उपलब्ध हुआ है | मइया अपनी सातो बहनों से अति सुन्दर थी और वर्ष के बारहो महीनों में भी मई का महीना प्रकृति को सर्व सुन्दर रूप प्रदान करता है |

----{6 }--जून --यह शब्द जुपिटर की पत्नी जूनों से प्राप्त हुआ है | यह अपरिमित सुंदर और सुकोमल थी | इसके रथ के वाहक घोड़े नहीं बल्कि मयूर थे |

---{7 }--जुलाई ---इसका नाम रोमन के महान शासक जूलियस सीजर से मिला | वो यशस्वी और लोकप्रिय शासक थे |

---{8 }---अगस्त --आक्टेवियस का ही एक रूप अगस्त है | यह नाम जूलियस के पोते का था | वो साहित्य और कला के लिए प्रख्यात था इसी के नाम पर अगस्त नाम रखा गया |

----{9 }--सितंबर --सेप्टेम्बर -"सेप्टेम "यह शब्द लेटिन भाषा का शब्द है --जिसका अर्थ सातवां है | वर्ष का आरम्भ जब मार्च से हुआ करता था --तब यह सातवां था | किन्तु जूलियस सीजर के जनवरी को वर्ष का प्रथम मास का स्थान देने के कारण इसका क्रम नवां हुआ |

----{10 }---अक्टूबर -यह भी लेटिन भाषा का शब्द है --जिसका अर्थ आठ है ,किन्तु जनवरी मास को प्रथम स्थान देने से इसका क्रम दसवां हो गया |

---{11 }----नवंबर ---नोवेम भी लेटिन शब्द है | इस मास को रक्त मास नाम से पुकारते हैं ,---क्योंकि इसी मास में मुख्यतः पशु संहार किया जाता था | इस कारण इसका नाम नवंबर रखा गया |

---{12 }---दिसंबर ---लैटिन भाषा के इस शब्द का अर्थ दसवां है | जूलियस ने मासक्रम में इसका स्थान बारहवां रखा है | ईसामसीह का जन्म इसी मास में हुआ था |

---पाठकगण --आधुनिक समय में कोई भी देश हो सबको आंग्लभाषा के साथ -साथ चलना पड़ता है | जबकि सभी देशों में अपने -अपने अनुसार पंचांग हैं किन्तु --सभी ने आंग्लभाषा में समाहित किया है --अतः ज्योतिष की दुनिया में यह ज्ञान हमें अवश्य होना चाहिए --अगले भाग में तिथियों पर चर्चा करेंगें ----- भवदीय निवेदक -खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ --ज्योतिष सीखनी है तो ब्लॉकपोस्ट पर पधारें तमाम आलेखों को पढ़ने हेतु -khagolshastri.blogspot.com

""मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?-भाग -{20}--ज्योतिषी झा मेरठ"कलौ चण्डी महेश्वरः "अर्थात कलयुग में या तो माँ आदिशक्ति की कृपा ...
07/04/2026

""मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?-भाग -{20}--ज्योतिषी झा मेरठ
"कलौ चण्डी महेश्वरः "अर्थात कलयुग में या तो माँ आदिशक्ति की कृपा हो सकती है या बाबा भोले नाथ की "---अस्तु --जिन्होने रूपये दिए- उनका नाम श्री शिव शंकर नागर- निवासी पूर्वा महावीर दिल्ली रोड मेरठ | 1997 में दूसरी पुत्री प्रकट हुई | अब हम सोचने लगे -गुरूजी ने तो धन दे दिया पर दो कन्या ,मकान नहीं ,स्थायी निवास नहीं ,किसी का सहयोग नहीं -उधर अपने परिजन सभी विरोधी हो गए ----अंत में हमने घर बनाने के लिए ईटें खरीदी क्योंकि पढ़ाई से जरुरी यह समझ में आया | पुनः गुरूजी के पास गए वो थोड़ा नाराज हुए पर बोले कोई बात नहीं ,मेरठ केवल उनका सहारा दीखता था यदा -कदा उनसे मिलने चले जाते थे | अब हम पढ़ना नहीं चाहते थे तो सोचने लगा क्या करें जिससे सहारा मिले ,अब धन के साथ स्थीरता की जरुरत थी | सोचा मां की आराधना करें -पर न निवास न व्यवस्था थी, फिर सोचा मंदिर में बैठकर चार पाठ सप्तशती के नित्य करेंगें- तो 25 दिनों में सौं पाठ हो जायेंगें तो जरूर कुछ रास्ता निकल आएगा | नित्य पाठ करता था और समय दूध ब्रेड खाता था | क्योंकि इतना ही साधन था मेरे पास | एकदिन एक व्यक्ति नाम -श्री रामप्रकाश बंसल देवीनगर मेरठ "बाबा खांखी जात्तीबाड़ा मेरठ से गुजर रहे थे साईकिल पर थे मेरी ओर उनकी नजर पड़ी और मिले बोले कल का निमंत्रण देता हूँ -मैंने कहा ठीक है -श्राद्ध का समय था | जब हम भोजन कर रहे थे दोनों प्राणी रोने लगे -मैंने कारण पूछा -बोले हमारे पास सबकुछ था पर अब रोटी का भी साधन नहीं है ,मैंने कहा बस बोले जी भैया जी ,मैंने कहा ,साधन बन जायेगा ,बोले आप रास्ता जानते हो तो बताओ ,मैंने कहा शतचण्डी एक रास्ता है बोले करो -हमने लोम -विलोम नौ दिन के पाठ किये | पाठ पूर्ण होने पर बोले हम आपके पाठ करने से खुश हैं-चाहे माँ भगवती मिले या न मिले | दक्षिणा बतायें -हमने स्वेच्छा कही उन्होंने मुझको 1100 सौ रूपये दिए साथ ही बोले मैं चाहता था आपको एक साईकिल दूँ पर सोचा आप विवाहित हैं पत्ता नहीं आपकी क्या जरुरत है साथ ही बोले कुछ कम हो तो जरूर बतायें | --ध्यान दें -यह अनुष्ठान जीवन का पहला था साथ ही किसी का सहयोग नहीं था और इन्होने जो सम्मान किया जीवन में ऐसा व्यक्ति आजतक नहीं मिला आगे भी अभी तक इनसे जुड़े हैं | 1998 में पतनी बच्चों के साथ मेरठ आ गई | ----आगे की चर्चा आगे करेंगें | --ॐ |--ज्योतिष और कर्मकाण्ड की अनन्त बातों को जानने हेतु इस लिंक पर पधारें --https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut. खगोलशास्त्री ज्योतिषी झा मेरठ

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?---"भाग -{19}-- ज्योतिषी झा मेरठ1996 -अब हम 26 वर्ष के हो चुके थे | राहु में शुक्र का अंतर समा...
07/04/2026

"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?---"भाग -{19}-- ज्योतिषी झा मेरठ
1996 -अब हम 26 वर्ष के हो चुके थे | राहु में शुक्र का अंतर समाप्ति की ओर था | आज हमने पहलीबार अपनी कुण्डली का मंथन किया | आप लोगों में से बहुत से लोग ऐसे होंगें -जो बात मैंने पहले कही कि मेरी आत्मा से आवाज आयी और मानो मेरे साक्षात आराध्य गुरु सरकार मुझको समझा रहे थे -इस बात को सही नहीं मानते होंगें -इसका मैं एक प्रत्यक्ष प्रमाण देता हूँ | जब मैंने आत्मा की बात सुनी उसके बाद हमने अपनी नजरों से दुनिया को झांकने की कोशिश की ,हम मन ही मन सोचने लगे -95 प्रतिशत लोग आचार्य नहीं है फिर भी मन्दिरों में रहते हैं ,2 प्रतिशत लोग हैं जो सक्षम आचार्य हैं वो किसी की चाकरी नहीं करते हैं ,8 प्रतिशत लोग हैं जो किसी के सान्निध्य में रहकर कर्मकाण्ड करते हैं सभी अपना -अपना जीवन व्यतीत करते हैं --फिर तुम कर्मकाण्ड क्यों नहीं करना चाहते हो ,शास्त्र कहते हैं -हर व्यक्ति को दान लेना चाहिए और दान करना भी चाहिए ,शास्त्र कहते हैं -पढ़ना चाहिए और पढ़ाना चाहिए ,शास्त्र कहते हैं -यज्ञ करना चाहिए और कराना चाहिए -तभी यह सृष्टि चलती है | अपनी कमाई का दस प्रतिशत दान करने से धन शुद्ध हो जाता है -तो तुम भी ऐसा करो | यह सोचते -सोचते रात बीती ,अगले दिन एक व्यक्ति मुझको मिला जो यह जनता था कि यह विद्वान है और मेरे जैसे व्यक्ति की जरुरत थी | वजह थी चैत्र नवरात्रि का समय था किसी यजमान को शप्तशती के लोम -विलोम पाठ कराने थे -उसे इस पाठ की जानकारी नहीं थी अतः वो व्यक्ति मुझको भेजा, जब मैं पंहुचा तो मैंने देखा -पूछने वाले व्यक्ति के वदन पर ढंग के वस्त्र नहीं हैं, बीड़ी पीता है और मुझको पूछता है -तुम लोम -विलोम सप्तशती के पाठ करना जानते हो -पहले तो शकल देखकर क्रोध आया -फिर धन की जरुरत थी तो शान्त हो गया और मैंने कहा -गुरूजी बिना पुस्तक देखे आपको मैं पूरी पुस्तक सुना सकता हूँ | उन्होंने जो पूछा सभी का जबाब दिया | बोले धन तुम्हारे हिसाव से काम मेरे हिसाव से -मैंने कहा जी गुरुदेव | मेरे पाठ करने से यजमान और गुरु दोनों खुश हुए | एक दिन मुझको अपने पास बुलाया गुरु ने -जब मैं उनके पास गया तो बोले हम तुमसे खुश है ,तुम्हें जो चाहिए बोलो ----अब मुझको ऐसा लगा स्वभाव से तो अच्छे हैं पर इनका रहन -सहन मेरे योग्य नहीं है फिर भी मैंने कहा मैं पढ़ना चाहता था ,हमारी पढ़ाई रुक गयी --बोले क्या पढ़ना चाहते हो -मैना कहा बीएड करना चाहता हूँ, दिल्ली से, बोले कितना पैसा चाहिए मैंने कहा 15000 हजार बोले ये चैक लो, साथ में 51 रूपये भोजन हेतु भी लो ,इतना ही नहीं उन्होंने एक माणिक की अंगूठी स्वर्ण की दी ---आपलोग जो मेरे हाथ की अनामिका अंगुली में अंगूठी देखते हैं उन्होंने दी | अब मुझको पूर्ण विस्वास हो गया कि मेरी आत्मा की आवाज नहीं मेरे आराध्य गुरु ये हैं | ध्यान दें जब संसार परित्याग कर देता है तो सद्गुरु अपनी गोद में उठाते हैं तब परमात्मा से साक्षात्कार होता है | ----आगे की परिचर्चा कल करेंगें |--ॐ |---- ॐ आपका - ज्योतिषी झा मेरठ, झंझारपुर और मुम्बई----ज्योतिष और कर्मकांड की अनन्त बातों को पढ़ने हेतु या सुनने के लिए प्रस्तुत लिंक पर पधारें https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut

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