21/04/2026
"मेरा" कल आज और कल -पढ़ें ?--भाग -{26}-ज्योतिषी झा मेरठ
2010- में --ऑरकुट पर निःशुल्क ज्योतिष सेवा एकबार की शुरुआत की थी जो आज तक चल रही है | ---अस्तु --नेट की दुनिया उत्तम भी है और अधम भी, केवल ये व्यक्ति की सोच पर निर्भर करती है कि आप क्या चाहते हैं | मेरे जैसा साधारण द्विज या कर्मकाण्डी ब्राह्मण को क्या मिलता --तो सोचने लगे -क्यों न अपने हृदय में जो मन्त्र हैं या ज्ञान है उनको लिखें | इससे दो बातें होंगीं पहली -फ्री सेवा देकर आप किसी व्यक्ति के ह्रदय में तभी समा सकते हैं जब आप वस्तुतः सत्य बातों को उकेरने की कोशिश करेंगें | दूसरी बात- बाल्यकाल से जब भी शिक्षा मिली केवल बोलने की मिली तो लिखना भी सीख जायेंगें | --ध्यान दें -कम्प्यूटर के न तो कोई गुरु मिले न ही वेसिक शिक्षा ही ली हमने अतः टाईपिंग मुझको आज भी नहीं आती है --पर हम लिखने में सक्षम हैं -हाँ तरीके से नहीं लिख पाता हूँ इस बात का मुझको खेद है |उस समय गूगल टॉक था लोगों से बातें बहुत होती थीं | दोस्त भी बड़े सभ्य होते थे ,आज भी उन दोस्तों में से कुछ दोस्तों का प्रेम मिलता रहता है | उस समय केवल ऑरकुट पर हिन्दी लिखने की सुविधा थी जो मुझ जैसे हिन्दी भाषी व्यक्ति को मिली | हमने कम से 500 लेख लिखे जो थे तो छोटे पर बड़े काम के थे --इन लेखों और सेवा के प्रभाव से केवल तीन मास में एक हजार दोस्तों की संख्या पूरी कर ली | एक दिन हमने देखा एक जेल का कैदी कोई व्यक्ति मुझको लिखा -श्रीमान आपके लेखों को नित्य पढता हूँ कभी मेरे जैसे व्यक्ति के बारे में भी लिखें | यह मुझको भी पत्ता नहीं था कि हम ब्लॉगर में जो लिखते हैं वो सभी पढ़ते हैं-इसका असर यह हुआ हम पहली बार समझें नेट की दुनिया में आप अपनी कला को ब्लॉगर के द्वारा जन -जन तक पहुंच सकते हैं वो भी निःशुल्क | फिर क्या था -हमने ब्लॉगर को तमाम लिंकों से सजाया साथ ही कोशिश करते रहे और हम क्या कर सकते हैं | यहाँ हमने -1000 आलेख लिखे | घीरे -धीरे नेट की दुनिया को समझने लगे | 2011 में हम पहलीबार फेसबुक पर आये | उस समय फेसबुक पर अच्छे लोग हुआ करते थे भारत के --अच्छे से मतलब एक दिन में बिना निमंत्रण दिए बहुत दोस्त बनते थे साथ ही सबकी प्रोफाइल सही होती थी इतना ही नहीं सक्षम व्यक्ति ही ज्यादा होते थे -हम जैसे अनपढ़ नहीं होते थे | अनपढ़ का अभिप्राय अंग्रेजी विहीन | यहाँ मेरा प्रभाव कैसे बढियां बने इसके लिए हमने चैटिंग से सेवा शुरू की --हम पूछते थे ज्योतिष की जानकारी चाहिए -वो बोलते थे जी जरूर -भविष्य बताएं हम लिखकर सेवा उन तक पंहुचाते थे | पर दिक्क्त थी सभी लोग या तो नेपाल ,बांग्लादेश ,--पाकिस्तान ,या जो भारतीय थे वो सभी दूर देश में रहते थे | साथ ही यह सेवा मुझको खलने लगी कई -कई बार एक ही व्यक्ति सेवा लेने लगे | आगे की कथा की चर्चा आगे करेंगें | |---आपका -खगोलशास्त्री झा मेरठ --ज्योतिष से सम्बंधित सभी लेख इस पेज https://www.facebook.com/Astrologerjhameerut में उपलब्ध हैं |