Cyclology

Cyclology My Cycling Travelogue....

सायक्‍लोलॉजी के फुरसतिये यानि लवलेश और मैं, 1 मार्च से 14 मार्च के मध्‍य सायक्लिंग को लेकर बहुत व्‍यस्‍त रहे और इसका मुख...
16/03/2025

सायक्‍लोलॉजी के फुरसतिये यानि लवलेश और मैं, 1 मार्च से 14 मार्च के मध्‍य सायक्लिंग को लेकर बहुत व्‍यस्‍त रहे और इसका मुख्‍य कारण था भोपाल सायक्लिंग लीग (BCL) । यह एक आनलाइन प्रतियोगिता थी जिसमें प्रतिभागी को सायकिल द्वारा तय की गई दूरी को strava app के माध्‍यम से record करना होता है एवं इसका आधार पर ही प्रतिदिन का लीडरबोर्ड बनता है । हम दोनों ने अपनी कैटेगरी 30-50 आयुवर्ग में under-20 आने का लक्ष्‍य रखा था और इसके लिये जरूरी था कि लगभग 30 किलोमीटर प्रतिदिन सायकिल चलाना । प्रारंभ के 2-3 दिन भारी गुजरे परंतु धीरे-धीरे 30 किलोमीटर की दूरी आसान लगने लगी और लवलेश ने तो एक दिन 50 के आंकडे को छू लिया । मैं भी खीचतान के 40 किलोमीटर के आंकडे से कुछ ही उपर पहुंच पाया । 14 मार्च को यह प्रतियोगिता संपन्‍न हुई और 30-50 आयुवर्ग में लवलेश ने 407.75 किलोमीटर के साथ 16वां स्‍थान और मैने 392.10 किलोमीटर के साथ 18वां स्‍थान प्राप्‍त किया । 30-50 आयुवर्ग में श्री वरूण नामदेव जी ने बाजी 1803.73 किलोमीटर मारी और डॉ उत्‍कल मिश्रा 1571 किलोमीटर के साथ दूसरे नंबर पर एवं श्री अंकुर सक्‍सेना 1414 किलोमीटर के साथ तीसरे नंबर पर रहे ।

आज 23 फरवरी 2025 को सायक्‍लोलॉजी की आधी टीम यानि सिर्फ मैं, दैनिक भास्‍कर समूह द्वारा आयोजित नर्मदापुरम सायक्‍लोथोन में ...
23/02/2025

आज 23 फरवरी 2025 को सायक्‍लोलॉजी की आधी टीम यानि सिर्फ मैं, दैनिक भास्‍कर समूह द्वारा आयोजित नर्मदापुरम सायक्‍लोथोन में शामिल हुआ । पर्यावरण संरक्षण और स्‍वच्‍छता को संदेश देने वाली सायक्‍लोथोन में बच्‍चों, युवाओं और युवा की दौड से बाहर लोगों ने पूरे उत्‍साह के साथ भाग लिया । सुबह 6.30 बजे से ही नगरपालिका परिसर में सायक्लिस्‍ट अपनी सायकिलों के साथ इकट्ठे होने लगे थे । पहले रजिस्‍ट्रेशन हुआ, बि‍ब मिला और एक जर्सी मिला । लगभग 7.30 बजे मुख्‍य अतिथि श्रीमती माया नारोलिया, राज्‍यसभा सांसद द्वारा रैली को झंडी दिखाई गई और हम निकल पडे सायक्‍लोथोन के निर्धारित पथ पर अपनी अपनी सायकिल लेकर । सायकिलों की भेीड में से अपना रास्‍ता बनाते हुये हम आगे बढ रहे थे, साथ में थे समीर पात्रीकर और श्री जितेन्‍द्र परमार जी जो अच्‍छे सायक्लिस्‍ट हैं । रैली सतरास्‍ता, नेहरू पार्क, कलेक्‍ट्रेट, मालाखेडी चौक, समेरिटन्‍स स्‍कूल चौक, मीनाक्षी चौक होते हुये लगभग 10 किलोमीटर की सायक्‍लोथोन वाटिका होटल में समाप्‍त हुई ।

दिनांक 26/12/2021 को “फिट रहो, अपनी शिक्षा पूरी करो“ संदेश को लेकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक सायकिल यात्रा करने वाले  गुन...
28/12/2021

दिनांक 26/12/2021 को “फिट रहो, अपनी शिक्षा पूरी करो“ संदेश को लेकर कश्मीर से कन्याकुमारी तक सायकिल यात्रा करने वाले गुना निवासी सायकलिस्ट श्री आशीष गलगले का होशंगाबाद आगमन हुआ । नर्मदा महाविद्यालय में हुये एक कार्यक्रम में श्री आशीष गलगले का हार्दिक स्वागत किया गया । इस अवसर पर विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी, खिलाडी वं खेल प्रेमी उपस्थित थे । कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं द्वारा श्री गलगले का आगामी यात्रा के लिये शुभकामनाएं दी । श्री गलगले ने भी सभी का आभार मानते हुये यात्रा संस्मरण साझा किये ।
शाम को निज निवास पर चाय लेते हुये श्री गलगले ने अपने यात्रा के कई खट्टे मीठे संस्मरण सुनाये । श्री गलगले की यह यात्रा दिनांक 12 जनवरी 2022 विवेकानंद जयंती के दिन कन्याकुमारी में संपन्न होगी ।
दिनांक 27/12/2021 को श्री गलगले अपने प्रवास पर बैतूल की ओर रवाना हुये ।

दिनांक 05 जुलाई 2020सायक्लोलाॅजी के फुरसतिये यानि मै और लवलेश लगभग 6 महीने बाद एक लंबी राइड पर निकले । थोडी व्यस्तता, उस...
05/07/2020

दिनांक 05 जुलाई 2020
सायक्लोलाॅजी के फुरसतिये यानि मै और लवलेश लगभग 6 महीने बाद एक लंबी राइड पर निकले । थोडी व्यस्तता, उससे ज्यादा आलस और फिर कोरोना, देखते ही देखते लगभग 6 महीने कैसे निकल गये, पता ही नही चला । इन 6 महीनों में अनेकों बार, अनेक लोगों के साथ रविवार को लंबी राइड के कई फूलप्रूफ प्लान भी बने, जो ताश के पत्तों के महल ही साबित हुये और शनिवार की रात आते-आते ध्वस्त हो गये । पिछले कुछ समय से तो सायक्लोलाॅजी के कुछ मित्रों ने यह भी कहना प्रारंभ कर दिया था कि “सायक्लोलाॅजी के शेर, हो गये ढेर“ । आखिर में इसे अपने उपर तंज मानते हुये हम दोनों ने फैसला किया कि अब इस रुके हुये सिलसिले को फिर चालू करना ही है और हम निकल पडे एक लंबी राइड पर ।
सुबह सुबह तय हुआ कि आज नेशनल हाइवे 69 के बाबई रोड स्थित ग्रीन पार्क ढाबे के पास से नव निर्मित रोड पर चला जाये । यह रोड मूलतः भोपाल को नागपुर से जोडने के लिये बनाया जा रहा है । वर्तमान में कई जगहों पर निर्माण भी जारी है । सुंदर चौडी सडकें, उतार और चढाव, सडक के दोनों और सुंदर हरे खेत, ठंडी हवा, बादलों से भरा आकाश- एक रायडर में जोश भरने के लिये और क्या चाहिये । आज की खास बात यह थी कि इस राइड में हमें साथ मिला बाबा भाई और अशोक भाई का । बाबा भाई जहां स्वयं खेलों से जुडे हुये है और पुराने सायक्लिस्ट है, वही अशोक भाई का सायक्लिस्ट के रुप में तीसरा ही दिन था । एक दूसरे का हौसला बढाते हुये और भविष्य में किसी बडे एक्सपीडि'शन पर जाने की चर्चाओं के साथ 32 किलामीटर की यह राइड संपन्न हुयी ।

अंत में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर समस्त गुरुजनों को नमन ।
नर्मदे हर ।

नर्मदे हर दिनांक २९ अक्टूबर १९ दिनांक ६ अक्टूबर की ओबेदुल्लागंज साइकिल राइड के बाद अगले रविवार यानी १३ अक्टूबर को cyclol...
29/10/2019

नर्मदे हर
दिनांक २९ अक्टूबर १९
दिनांक ६ अक्टूबर की ओबेदुल्लागंज साइकिल राइड के बाद अगले रविवार यानी १३ अक्टूबर को cyclology के फुरसतिये अर्थात मैं और लवलेश उसी जोश में फिर एक बार लम्बी साइकिल राइड पर निकल लिए और इस बार जो स्थान निश्चित हुआ वो था होशंगाबाद से मात्र ३६ किलोमीटर दूर स्थित `तिलकसिन्दूर` |
रविवार यानी १३ अक्टूबर को सुबह लगभग ५.३० बजे हमने घर के लोगों से विदाई ली, पिछले सप्ताह की यात्रा को दृष्टिगत रखते हुए विदाई से पहले सुरक्षा सम्बन्धी अनेक टिप्स भी मिले | लगभग ६.३० बजे हम इटारसी पहुँच गए थे और इसके बाद शुरू होने वाला था एक कठिन सफ़र | इटारसी, ऍफ़सीआइ देहरी, टेमला जमानी तक का रास्ता कच्चा है और बारिश के कारण पूरी तरह से उखड चूका था | जिस तरह खोजी कुत्ते बम का पता लगाने के लिए चप्पे चप्पे को छान लेते है वैसे ही हम इस पत्थर से भरी सड़क में थोड़ी अच्छी पगडंडी खोज रहे थे ताकि साइकिल ठीक से चल सके | टेमला ग्राम से जमानी ग्राम तक हमें आधी सड़क सीमेंट की और आधी सड़क कच्ची मिली | आखिर धीरे धीरे हम ग्राम जमानी तक आ पहुंचे | अब यहाँ से मात्र ६ किलोमीटर शेष रह गया था तिलकसिंदूर | पक्की सड़क और सड़क के दोनों और सागौन साल महु आखैर आदि के ऊँचे ऊँचे वृक्ष ऐसे लग रहे थे मानो तेज धुप से हमारी रक्षा करने के लिए खड़े हो | इटारसी, ऍफ़सीआइ देहरी, टेमला जमानी होते हुए हम लगभग ९ बजे हम तिलकसिन्दूर पहुंचे | ग्राम जमानी की अपनी एक विशेषता है की यह ग्राम हिंदी के सुप्रसिद्ध व्यंगकार स्व श्री हरिशंकर परसाई की जन्मस्थली है |
अब बात की जाए की सतपुड़ा की वादियों में बसे तिलकसिन्दूर की तो यहां शिवजी का प्राचीन मंदिर है जो ढाई सौ मीटर ऊंची पहाड़ी पर मौजूद है | यहां छोटी धार वाली हंसगंगा नदी बहती है | यह मंदिर दुनिया में अपना अलग स्थान लगता है। यहां शिवलिंग पर जल, दूध आदि तो चढ़ता ही है इसके साथ ही सिंदूर चढ़ाने की परंपरा है । ऐसी मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान को प्रसन्न करने के लिए महादेव को सिंदूर अर्पित किया था, जिसके कारण इस स्थान का नाम तिलक सिंदूर पड़ा। हर वर्ष महाशिवरात्रि पर प्रदेश भर से हजारों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए यहां आते हैं | एक किवदंती के अनुसार यह माना जाता है कि भस्मासुर से पीछा छुड़ाने के लिए शिवजी यहीं के पहाड़ों और गुफाओं में छुपे थे और इसी स्थान से पचमढ़ी जाने के लिए भी सुरंग तैयार की थी | माना जाता है कि यह सुरंग आज भी मौजूद है जो पचमढ़ी में खुलती है एवं शिवजी इसी रास्ते से पचमढ़ी गए थे जहां वे जटाशंकर में छुपकर रहे थे | तिलकसिंदूर का शिवमंदिर खटामा के मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
लगभग 1 घंटे के विश्राम के बाद हमने अपनी वापसी की यात्रा प्रारंभ की और दोपहर १२.३० बजे हम सकुशल अपने अपने घर पहुचे | १३ अक्तूबर रविवार को लगभग ७२ किलोमीटर की राइड रही |

नर्मदे हर दिनांक 6 अक्टूबर १९ लम्बी बारिश और खासकर सुबह के वक्त होने वाली बारिश के कारण काफी दिनों से कहीं जाना नहीं हो ...
13/10/2019

नर्मदे हर
दिनांक 6 अक्टूबर १९
लम्बी बारिश और खासकर सुबह के वक्त होने वाली बारिश के कारण काफी दिनों से कहीं जाना नहीं हो पा रहा था परन्तु पिछले कुछ दिनों से बारिश कम होने से ५ अक्टूबर १९ की रात में यह निर्णय हुआ की cyclology के फुरसतिये अर्थात मैं और लवलेश एक बार फिर लम्बी साइकिल राइड पर निकलेंगे और इस बार ओबेदुल्लागंज तक cycling करेंगे |
६ अक्टूबर रविवार को सुबह ५.४५ बजे हमने होशंगाबाद से ओबेदुल्लागंज के लिए प्रस्थान किया | बुधनी तक का सफ़र तो आसान रहा पर बुधनी से बरखेडा तक घाट सेक्शन में साइकिल चलाना मुश्किल हो गया | विपरीत हवा और चढाव वाली सड़क, दोनों ही परीक्षा ले रही थी | लवलेश ने काफी ताकत दिखाई पर मुझे कुछ जगह तो वाकई उतरकर पैदल भी चलना पड़ा | पूरा दम लगते हुए धीरे धीरे हम बरखेडा पहुचे | बरखेडा से ओबेदुल्लागंज की दूरी लगभग ११ किलोमीटर है परन्तु अच्छी सड़क की वजह से ओबेदुल्लागंज पहुचने में कोई दिक्कत नहीं आई | ओबेदुल्लागंज पहुचने के बाद मुझे ज्ञात हुआ की मेरा स्मार्टफोन घाट सेक्शन में कही गिर गया | खैर, विन्ध्याचल ढाबे पर हल्का नाश्ता लेने के बाद हम वापसी के लिए निकल पड़े |
वापसी में सड़क के बाएं तरफ चलने के बावजूद भी मेरा पूरा ध्यान सड़क के दूसरी और था की शायद गुमा हुआ मोबाइल पड़ा हुआ मिल जाय | इसी चक्कर में बरखेडा थाने के निकट मेरी साइकिल एक गड्ढे में ऐसी फंसी की मेरा साइकिल से संपर्क टूट गया और मैं जमीं पर और मेरे ऊपर साइकिल | एक तरफ चश्मा तो दूसरी तरफ छोटा मोबाइल | आखिर जन सहयोग से मुझे उठाया गया, पानी पिलाया गया और आगे के प्रवास के लिए शुभकामनायें भी दी गयी |
बरखेडा के बाद से बुधनि तक उतार होने की वजह से सफ़र आसान हो गया था | लगभग 1 बजे हम होशंगाबाद पहुंचे | आज लगभग ७४ किलोमीटर की राइड रही |
🙏🙏🙏

नर्मदे हरकल यानि 20 जुलाई 2019 का दिन बडा यादगार दिन रहा । दिन भर सतपुडा की रानी पचमढी में ग्राम काजरी से नागद्वारी तक ट...
21/07/2019

नर्मदे हर
कल यानि 20 जुलाई 2019 का दिन बडा यादगार दिन रहा । दिन भर सतपुडा की रानी पचमढी में ग्राम काजरी से नागद्वारी तक ट्रेकिंग, भगवान भोलेनाथ का नर्मदा जल से अभिषेक, जटाषंकर पर नर्मदा जल से अभिषेक और दिन के अंत में मेरे मार्गदर्षक और प्रेरणास्त्रोत एषिया बुक आॅफ रिकार्ड्स फेम श्री राजेन्द्र जायसवाल जी से पचमढी मार्ग पर भेंट । श्री जायसवाल वैसे तो पचमढी हाॅफ मैराथन में भाग लेने पचमढी आये थे परंतु नागपुर से पचमढी की मात्र 250 किलोमीटर की दूरी उन्होने सायकिल से तय की । शनिवार की सुबह लगभग 3 बजे नागपुर से निकलकर शाम को पचमढी तक पहुंचना और फिर रविवार को सुबह से पचमढी से धूपगढ तक एवं वापसी की 21 किलोमीटर की हाॅफ मैराथन में भाग लेना कोई आसान काम नही है परंतु राजेन्द्र भैया कुछ अलग ही मिट्टी के बने हुये हैं ।

भारत के 70वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर श्री जायसवाल ने हाथ में भारतीय तिरगा लेकर 12.30 घंटे में 80.5 किलोमीटर की दूरी तय कर एषिया बुक आॅफ रिकार्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है । सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक श्री जायसवाल नागपुर में निवास करते हैं और पेषे से बिल्डर्स एवं डेवलपर्स है ।

14/07/2019
14/07/2019

नर्मदे हर

साइकोलॉजी की फुरसतिये यानी मैं और योगेश (आज लवलेष आवष्यक कार्य होने से उपलब्ध नही था) आज खोकसर की ओर सायकिल राइड पर निकले । योगेष भी पुराने साथी हैं और पुराने सायकिलबाज भी । कल रात तक असमंजस की स्थिति में होने के बावजूद भी उन्होने अंत में हां कर ही दी ।

सुबह 5ः30 बजे हम लोग खोकसर की निकल पडे ओर रोहना, पलासडोह, बड़ोदिया, पालनपुर गुनारा पर करते हुये लगभग 7ः15 बजे हम खोकसर पहुंचे । खोकसर में गौरी शंकर महाराज जी (जमात वाले बाबाजी) का समाधि स्थल है । उन्होने खेकसर में जीवंत समाधि ली थी । कुछ देर परिसर में घूमने के बाद पुजारीजी ने आरती प्रारंभ होने की सूचना दी । आरती होने के बाद प्रसाद वितरण हुआ । मंदिर परिसर में कच्छ गुजरात के एक महाराज जी से भेंट हुई जो दो दिन पूर्व ही चातुर्मास हेतु निवास करने आये हैं । महाराज जी ने हम लोगों के लिये लेमन ग्रास वाली चाय बनाई और फिर चाय पीते हुये मंदिर परिसर में ही उनके साथ बैठकर सत्संग का लाभ मिला । पूरे मंदिर परिसर में साफ सफाई चल रही थी क्योंकि दो दिन बाद गुरु पूर्णिमा का पर्व है और यहां भंडारा भी आयोजित होता है ।

लगभग 8ः30 बजे हम लोग वापिस होषंगाबाद की ओर चल पडे और 10 बजे के लगभग होषंगाबाद पहुंच गये । आज की सायकिल राइड लगभग 50 किलोमीटर की रही ।

24/06/2019

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-Team Cyclology

नर्मदे हरलगभग 2 महीने की चिलचिलाती गर्मी और सुबह से ही आग बरसाने वाले सूर्यदेव के कारण फुरसतिये यानि लवलेष और मैं, लंबी ...
23/06/2019

नर्मदे हर

लगभग 2 महीने की चिलचिलाती गर्मी और सुबह से ही आग बरसाने वाले सूर्यदेव के कारण फुरसतिये यानि लवलेष और मैं, लंबी सायकिल राइड पर नही जा पा रहे थे पर कल रात को थोडा पानी गिरा, मौसम के मिजाज में नरमी आई और सुबह से आसमान में बादल छाये हुये थे, इसलिये तय हुआ कि आज लंबी सायकिल राइड पर चला जाये । जहां तक जगह के निर्धारण का सवाल है तो बौद्ध स्थल सारु मारु विहार हमारी फेवरिट लिस्ट में पहले नंबर पर था । इसलिये तय हुआ कि सुबह 5 बजे निकला जाये ताकि 9 बजे तक वापसी संभव हो सके ।
सुबह 5 बजे हम निकल पडे सारु मारु विहार की ओर ! नर्मदा ब्रिज आते ही नर्मदे हर का जयकारा लगा हम बढ चले सलकनपुर मार्ग पर आगे की ओर । बुधनी, पीलीकरार, देवगांव, उंचाखेडा, ओंडिया, बायां होते हुये हम पहुंचे ग्राम पानगुराडिया । सडक पर ही मध्यप्रदेष पर्यटन विभाग का बडा बोर्ड लगा हुआ है जिसमें सलकनपुर देवीधाम की दूरी 6 किमी और सारु मारु विहार की दूरी 1 किमी अंकित है । तीर के निषान का अनुसरण करते हुये कच्चे रास्ते से होते हुये हम आ पहुंचे सारु मारु ।
वास्तव में सारु मारु पुरातात्विक दृष्टि से प्राचीन स्तूपों एवं बौद्ध गुफाओं के लिये प्रसिद्ध स्थान है । यहां 5 स्तूप हैं एवं भिक्षुओं के लिये बने प्राकृतिक आवास है । यहां सम्राट अषोक के काल के दो षिलालेख मिलते हैं । ब्राम्ही लिपि में लिखे इन षिलालेखों से ज्ञात होता है कि सम्राट अषोक का इस स्थान पर आगमन हुआ था ।
लगभग 1 घंटे घूमने और फोटोग्राफी करने के बाद लगभग 9.30 बजे हम होषंगाबाद पहुंचे । आज लगभग 56 किमी की राइड रही ।

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