08/09/2022
8 सितम्बर,
महान फील्ड हॉकी खिलाड़ी, श्री कैप्टन रुप सिंह बैंस का जन्म दिवस।
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दुनियाँ के महान हॉकी खिलाडी कैप्टन रूप सिंह बैस का जन्म दिनांक 8 सितम्बर 1908 को जबलपुर (मध्य प्रदेश) में हुआ था। कैप्टन रूप सिंह हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान सिंह बैस के छोटे भाई थे। उन्हौने अपना खेल जीवन झाँसी के सुप्रसिद्ध “झाँसी हीरोज़ क्लब” के मैदान पर खेलते हुए प्रारम्भ किया। कैप्टन रुप सिंह टीम में लेफ्ट-इन की पोजीशन पर खेलते थे। उन्होंने अपने बड़े भाई मेजर ध्यान सिंह के साथ 1932- लॉस ऐन्जिल्स ओलम्पिक,1936-बर्लिन ओलम्पिक एवं 1935- न्यूज़ीलैंड टूर में भाग लिया और उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारतीय फील्ड हॉकी को विजय दिलाई। ऐसी महान शख्सियत सदैव नवोदित खिलाडियों के लिए प्रेरणा रहेगी तथा भारतीय हॉकी सदैव कैप्टन रुप सिंह की ऋणी रहेगी।
अंतर्राष्ट्रीय खेल जीवन :-
• 1932- लॉस ऐन्जिल्स ओलम्पिक -
ओलम्पिक का पहला मैच भारत विरुद्ध जापान खेला गया जिसमें भारत ने जापान को 11-1 से हराया।
ओलम्पिक का फाइनल मैच भारत विरुद्ध अमेरिका खेला गया। जिसमें भारत ने अमेरिका को 24-1 से हराया। इस मैच में कैप्टन रूप सिंह के द्वारा 10 गोल किये गए। ओलम्पिक हॉकी इतिहास में कैप्टन रूप सिंह ऐक मात्र ऐसे खिलाडी हैं जिन्होंने ऐक ओलम्पिक मैच में सर्वाधिक 10 गोल विरोधी टीम पर किये थे। ये अजेय और ऐतिहासिक रिकॉर्ड अभी तक किसी हॉकी खिलाडी के द्वारा नहीं तोडा जा सका है। ओलम्पिक हॉकी के इतिहास में भारत द्वारा अमेरिका को 24-1 गोलों के विशाल अंतर से हराया गया यह रिकार्ड भी अभी तक कायम है।
लॉस ऐन्जिल्स ओलम्पिक के दौरान कैप्टन रूप सिंह के प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें उस ओलम्पिक का सर्वश्रेष्ठ हॉकी खिलाडी घोषित कर सम्मानित किया गया तथा उन्हें हॉकी के "रिंग मास्टर" की उपाधि से सम्मानित किया गया।
•1935- न्यूजीलैंड का दौरा -
सन् 1935 में भारतीय टीम द्वारा न्यूज़ीलैण्ड-ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया गया तथा इस दौरान कुल 48 मैच खेले गए। इस पूरे दौरे के दौरान कैप्टन रूप सिंह द्वारा कुल 194 गोल किये गए
• 1936-बर्लिन ओलिंपिक -
बर्लिन ओलम्पिक मे भारतीय फील्ड हॉकी ओलम्पिक मैचों के दौरान सराहनीय प्रदर्शन करते हुए विरोधी टीमों को बड़े गोल अंतरालों से मात दी।
15 अगस्त 1936 के दिन फाइनल मैच भारत एवं मेजबान जर्मनी के बीच खेला गया। ओलम्पिक के इस फायनल मैच में एडोल्फ हिटलर अपनी जर्मनी की टीम के खिलाडियों के उत्साहवर्धन के लिए हज़ारों दर्शकों के साथ स्वयं स्टेडियम में उपस्थित था।
इस संघर्षपूर्ण मैच में भारतीय हॉकी टीम की विजय हुई इस फायनल मैच का टर्निंग पॉइंट ये था कि, फाइनल मैच में मध्यांतर के कुछ समय पहले कैप्टन रूप सिंह द्वारा विरोधी टीम पर पहला अविस्मर्णीय और अदभुद गोल किया गया जिससे भारतीय हॉकी खिलाड़ी जोश से भर गए तथा उसके बाद भारतीय हॉकी टीम ने जर्मनी के विरुद्ध लगातार गोल कर जर्मनी को 8-1 से शिकस्त दी
• कैप्टन रूप सिंह द्वारा भारतीय हॉकी टीम के चयन समिति सदस्य एवं ग्वालियर जिले में खेलों के विकास के लिए शिक्षा विभाग में सहायक संचालक जैसे पदों पर कार्यरत रहते हुए खेलों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।
जीवनपर्यन्त वे खेलों के विकास के लिए सक्रिय रूप से हमेशा तत्पर रहे उनका देहावसान दिनांक 16 दिसंबर 1977 को ग्वालियर (म.प्र.)मे हुआ।
•भारतीय हॉकी के प्रति उनकी लग्न निष्ठां एवं समर्पण को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उनके नाम से प्रतिवर्ष खेल दिवस के अवसर पर कैप्टन रूप सिंह लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड प्रदान किया जाता है
महत्वपूर्ण स्मारक -
• जर्मनी के म्यूनिख में कैप्टन रुप सिंह द्वारा सन् 1936 में खेले गये बर्लिन ओलम्पिक में उनके द्वारा फील्ड हॉकी में अद्भुद और अविस्मर्णीय प्रदर्शन के लिये सन 1972 में एक मार्ग का नाम "कैप्टन रुप सिंह बैंस मार्ग" रखा गया।
• लंदन में सन् 2012 में कैप्टन रुप सिंह के फील्ड हॉकी में दिये गये अविस्मर्णीय और अभूतपूर्व योगदान के लिये एक ट्यूब स्टेशन का नाम कैप्टन रुप सिंह के नाम पर किया गया है।
• ग्वालियर में कैप्टन रूप सिंह स्टेडियम स्थित है।