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SANTOSH KUMAR YADAV
Engineer at Maruti Suzuki India Ltd, Gurgaon .

"जीवन" में ऐसे कई "लोग"होते हैं,           जिन्हें आप "समय" के साथ "भूल" जाते हैं!"लेकिन" ऐसे कुछ ही "लोग" होते हैं,    ...
17/06/2026

"जीवन" में ऐसे कई "लोग"होते हैं,
जिन्हें आप "समय" के साथ "भूल" जाते हैं!

"लेकिन" ऐसे कुछ ही "लोग" होते हैं,
जिनके साथ आप "समय" भूल जाते हैं,उन्हें कभी न "भूलें"!

*🙏सुप्रभात🙏*

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कमेटी बनी है??वो पता लगा रही हैं कि आखिर चढ़ावा चोरी की बात लीक किसने की!!!😜😜😂😂
16/06/2026

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर कमेटी बनी है??

वो पता लगा रही हैं कि आखिर चढ़ावा चोरी की बात लीक किसने की!!!
😜😜😂😂

16/06/2026
पानी की टंकी भर गई है — यह सायरन कैसे काम करता है?आजकल कई घरों में पानी की टंकी भरने पर अपने-आप सायरन या घंटी बजने वाली ...
16/06/2026

पानी की टंकी भर गई है — यह सायरन कैसे काम करता है?

आजकल कई घरों में पानी की टंकी भरने पर अपने-आप सायरन या घंटी बजने वाली व्यवस्था लगाई जाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जैसे ही टंकी भरती है, हमें तुरंत पता चल जाता है और पानी ओवरफ्लो होकर बर्बाद नहीं होता।

यह सिस्टम बहुत आसान सिद्धांत पर काम करता है — पानी दो तारों के बीच रास्ता बनाकर सर्किट पूरा कर देता है।

जब टंकी खाली या आधी भरी होती है, तब पानी ऊपर लगे दोनों सेंसर तारों तक नहीं पहुँचता। इसलिए दोनों तारों के बीच कोई कनेक्शन नहीं बनता और सायरन बंद रहता है।

लेकिन जैसे-जैसे पानी ऊपर चढ़ता है और दोनों तारों के नंगे सिरों को छू लेता है, पानी दोनों तारों के बीच एक हल्का विद्युत रास्ता बना देता है। पानी में घुले हुए लवण और खनिज थोड़ी मात्रा में बिजली को गुजरने देते हैं। इसी कारण सर्किट पूरा हो जाता है।

जैसे ही सर्किट पूरा होता है, कंट्रोल यूनिट को सिग्नल मिल जाता है और वह सायरन चालू कर देती है। सायरन बजते ही हमें पता चल जाता है कि पानी की टंकी भर चुकी है।

इस सिस्टम में घर की बिजली पैनल से पहले AC सप्लाई कंट्रोल यूनिट में जाती है। अच्छे और सुरक्षित सिस्टम में यही कंट्रोल यूनिट AC को कम वोल्टेज DC में बदल देती है। फिर इसी कम वोल्टेज DC के दो सेंसर तार टंकी के अंदर ऊपर की तरफ लगाए जाते हैं।

टंकी के अंदर सीधे 220V AC तार डालना खतरनाक हो सकता है। इसलिए सेंसर तारों में हमेशा कम वोल्टेज DC सप्लाई ही दी जाती है। इससे सिस्टम सुरक्षित रहता है और पानी के संपर्क में आने पर भी खतरा कम हो जाता है।

आसान भाषा में समझें तो पूरा क्रम यह है—

बिजली पैनल से AC सप्लाई आती है।
AC सप्लाई कंट्रोल यूनिट में जाती है।
कंट्रोल यूनिट उसे कम वोल्टेज DC में बदलती है।
दो सेंसर तार टंकी के ऊपरी हिस्से में लगाए जाते हैं।
जब पानी नीचे होता है, सर्किट खुला रहता है।
जब पानी दोनों तारों को छूता है, सर्किट पूरा हो जाता है।
सर्किट पूरा होते ही सायरन बजने लगता है।

निष्कर्ष

पानी की टंकी का सायरन एक छोटा लेकिन बहुत उपयोगी सिस्टम है। इसमें पानी खुद एक सेंसर की तरह काम करता है। जब पानी ऊपर लगे दोनों तारों को छूता है, तो सर्किट पूरा हो जाता है और सायरन बजकर बता देता है कि टंकी भर गई है।

यानी थोड़ी-सी समझदारी वाली वायरिंग और कंट्रोल यूनिट की मदद से पानी की बर्बादी आसानी से रोकी जा सकती है।

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16/06/2026

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1. Mercury → 2. Venus → 3. Earth → 4. Mars → 5. Jupiter → 6. Saturn → 7. Uranus → 8. Neptune

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10/06/2026

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