07/09/2024
जब मैंने 2014-2015 में एक ताइक्वांडो खिलाड़ी होने के साथ-साथ कोच बनकर ताइक्वांडो का प्रशिक्षण देना शुरू किया, तो शुरुआती दिनों में 2015, 2016, और 2017 में क्रमशः भवानी सिंह, निहाल सिंह दिनराज, और रिया सिंह ने हमारी अकादमी "एम ताइक्वांडो एकेडमी" में प्रशिक्षण लेना शुरू किया। इन तीनों खिलाड़ियों में कई कमजोरियां थीं, जिन्हें दूर करने के लिए मैं रोज़ाना 30 किलोमीटर की दूरी बाइक से तय करके गोपालगंज से सुबह और शाम बरौली स्थित अपनी अकादमी पहुँचता था। कभी-कभी शाम की देर तक ट्रेनिंग कराने के कारण मुझे अकादमी में ही रात गुजारनी पड़ती थी।
सुबह उठकर फिर से प्रशिक्षण का सिलसिला जारी रहता था। हमारे अकादमी में उस समय सिर्फ 12-15 खिलाड़ी थे, बाद में शहबाज अली और रजनीश गुप्ता ने भी अकादमी जॉइन किया। इन कठिन दिनों के दौरान मुझे कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई बार, सभी खिलाड़ियों को अपनी जिम्मेदारी पर ताइक्वांडो प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए अलग-अलग जिलों और राज्यों में ले जाना पड़ता था। खुद से ज्यादा मुझे इन बच्चों का ख्याल रखना पड़ता था, और जब हारकर हम घर लौटते थे तो इनका रोना देखना मेरे लिए कठिन था। लेकिन न तो मैं हार मानने वाला था, और न ही ये जिद्दी खिलाड़ी।
संघर्ष जारी था, और हार-जीत का सिलसिला चलता रहा। निहाल सिंह दिनराज और भवानी सिंह दोनों ही बेहतरीन ताइक्वांडो खिलाड़ी थे, लेकिन छोटी-छोटी गलतियों के कारण हार जाते थे। इन गलतियों को दूर करने के लिए मैंने हर संभव प्रयास किया, ताकि सफलता मिल सके। हालांकि, 2018-19 तक यह हार-जीत का दौर जारी रहा, लेकिन इन खिलाड़ियों का संघर्ष और दृढ़ संकल्प अद्वितीय था।
इन खिलाड़ियों के साथ कुछ लोगों ने अन्याय भी किया; अन्याय इस कदर बढ़ गया कि प्रतिभावान खिलाड़ियों को दबाया जाने लगा, गंदी राजनीति के तहत साजिश करके उनको पिछे किया जाने लगा तथा अपने व्यक्तिगत हितों को साधने के लिए इन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया गया। तब मैने एक कठिन दौर से गुजरने लगा क्योंकि मेरा मेहनत और तपस्या खत्म होता दिख रहा था और इन प्रतिभावान खिलाड़ियों का नजर मुझपर टिका था फिर वो समय आया जब मै अपने जीवन का एक बड़ा फैसला लिया और एक गोपालगंज मे एक स्वतंत्र ताईक्वांडो संघ का निर्माण किया फिर ताईक्वांडो संघ बिहार से मान्यता लेकर इन खिलाड़ियों के उम्मिद को जगाया इतने संघर्षों और साजिशो के बाद भी, इन खिलाड़ियों ने कभी हार नहीं मानी और आज ये सभी सितारे राज्यभर में चमक रहे हैं।
यदि आज ये खिलाड़ी इस मुकाम तक पहुँचे हैं, तो इसका श्रेय निहाल सिंह दिनराज के पिता श्री टिंकु सिंह और माता श्रीमती निवेदिता जी को भी जाता है, जिन्होंने हर कदम पर, दिन-रात खिलाड़ियों का पूरा साथ दिया। आज ये सभी खिलाड़ी, जो "एम ताइक्वांडो एकेडमी" के गौरव हैं, न केवल पूरे जिले को गौरवान्वित कर रहे हैं, बल्कि बिहार भर में अपनी चमक बिखेर रहे हैं।