06/04/2026
अल्लामा इक़बाल रह० ने अपनी नज़्म "तौहीद" के आख़िरी शेर में बहुत पहले ही फ़रमाया है :
क़ौम क्या चीज़ है, क़ौमों की इमामत क्या है
इस को क्या समझें ये बेचारे दो रकअत के इमाम
ये दो रकअत के इमाम तब भी क़ौम के लिए नासूर थे और अब भी नासूर ही है. इनका अदब ओ अहतराम मस्जिद के अंदर तक रखो क्योंकि इन्होंने इस्लाम को वहीं तक क़ैद किया हुआ है. ये जितने भी मस्जिद से बाहर आकर हुनूद को मुसलमानों का सियासी इमाम बनाने की ताईद करते हैं उन्हें अपने जूती की नोंक पर रक्खो.
#लिफ़ाफ़ा_गैंग