20/01/2024
कामाख्ये वरदे देवि नीलपर्वतवासिनि । त्वं देवि जगतां मातर्योनिमुद्रे नमोऽस्तु ते ॥
आदि पराशक्ति तंत्र जननी मां कामाख्या देवी के दर्शन भाव विभोर करने वाले थे, गर्भगृह की ऊर्जा तो शब्दो मे वर्णित ही नहीं की जा सकती। अध्यात्म और रहस्य कामाख्या तीर्थ क्षेत्र के कण कण में व्याप्त हैं।
आज भी मां की प्रत्यक्ष अनुभूति होती हैं और साथ ही में यहाँ होने वाले अनुष्ठान और चारो दिशाओं में बने अलग अलग मंदिर इस क्षेत्र को और भी खास बनाते हैं।
जीवन की प्रथम केवल स्वयं के साथ और अभी तक की सबसे लंबी यात्रा रही परंतु मां की कृपा से कश्मीर से आई साध्वी जी ने मुझ पर इतनी कृपा की जिसके विषय में मैंने कभी सोचा भी ना था।
जय मां कामाख्या