22/04/2026
मैडम बोली मण्डी किसानों की है आपका कोई हक नहीं है।
आढ़तियों को कहा आप कैसे तय करोगे कि किसान गेहूं लेकर आये या ना आए किसानों का जब मन करेगा तभी लेकर आएगा। किसान कोई नशा बैचने नहीं आते खाने के दाने बेच रहे हैं, कोई है जो अपने बच्चों का पेट बांध कर खाने के दाने बेच देगा,
जिसके पैर पकड़ने चाहिए उसके गले पड़ रहे हो।आप
ने क़र्ज़ दिया है एक साथ नहीं दिया जैसे किसान ने 5000/10000 करके लिया है वैसे उतारेगा।
आप की तरह नक़ली बीज, नकली खाद नहीं बेचता अगर मेने कार्यवाही कर दी ना फेर मत भागना नेताओं के पास में।
अपनी मेहनत की रोटी खाती हुं कोई भीख नहीं लेती।
ऐसे इमानदार कर्मचारी हो देश में तो देश चीन से भी आगे निकल जाएगा।
किसानों की सुनने वाला ऐसा प्रशासन चाहिए।
ये वाक्यांश संगरिया, हनुमानगढ़ जिला राजस्थान के SDM साहिबा के है।