Vikash umpire

Vikash umpire I am Vikash Maury, a cricket umpire with the Delhi District Cricket Association (DDCA).

Since 2018, I have officiated local leagues, district matches, and tournaments, committed to fair, accurate, and professional decision-making.

मुगलों आक्रांताओं से बचने के लिए औरत जौहर करती थी पर उसके साथ साथ हिन्दू शासकों से बचने के लिए भी औरतें जौहर करती थी 🔥🔥ब...
03/09/2026

मुगलों आक्रांताओं से बचने के लिए औरत जौहर करती थी पर उसके साथ साथ हिन्दू शासकों से बचने के लिए भी औरतें जौहर करती थी 🔥🔥

ब्राह्मण समाज से आने वाली इतिहासकार डॉ रुचिका शर्मा पंडित ने मनुवादियों को गांव उपर करवाकर शीर्षासन करवा दिया, रुचिका कहती हैं कि भारतीय इतिहास में महिलाओं के साथ क्रुर और जघन्य अपराध हुआ था।

यह भ्रम फैलाया गया कि केवल मुस्लिम शासकों से बचने के लिए जौहर किया जाता था, लेकिन यह आधा इतिहास का सच है, हिन्दू आक्रांताओं से बचने के लिए भी महिलाए जौहर करती थी,

डॉ. रुचिका ने 12 वी शताब्दी की हिस्ट्री किताब कालहान की राजतरंगिणी अकाउंट का हवाला देते हुए कहती है कि राजा हर्ष के 1101 में अटैक हुआ उन्हीं के भांजे उच्छल द्वारा,

अटैक के दौरान उन्होंने औरतों को उठाना शुरू कर दिया, जिससे हर्ष की रानी वसंतलेखा के साथ 17 महिलाओं ने जौहर कर लिया जिसमें हर्ष की बहुएं भी शामिल थी,

उन्होंने मनुस्मति के चेप्टर 7 के 96 श्लोक का हवाला दिया जिसमें क्षत्रिय युद्ध के दौरान स्त्रियों को लूट सकते थे यही नियम था,

मतलब इतिहास का हर पृष्ठ महिलाओं के शोषण की दास्ताँ उजागर करता है ।

वह तो एहसान हो बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर जी का जो औरतों के दुख दर्द को समझा और औरतों के सुरक्षा हक अधिकार के लिए नियम और कानून बनाए

पर गड़दुल्ले इतिहासकार बहुत सारा‌ झोल किए इतिहास लिखने में सच को झूठ और झूठ को सच लिखा पर अब ऐसा नहीं कर पाएंगे ।



30/08/2026
30/08/2026

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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां लाजवाब हैं। उन्होंने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के एलएलएम दीक्षांत समारोह में कह...
30/08/2026

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुइयां लाजवाब हैं। उन्होंने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली के एलएलएम दीक्षांत समारोह में कहा है कि जब छात्र अलग दृष्टिकोण व्यक्त करते हैं, जब छात्र सवाल पूछते हैं, तो उन्हें धमकाया नहीं जा सकता। उन्हें दंडात्मक कार्रवाई की धमकी नहीं दी जा सकती। यह असंवैधानिक है। यह शक्ति और पद का दुरुपयोग है।

जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कहा कि सिर्फ इसलिए छात्रों को धमकाया या उन पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि उन्होंने अधिकारियों या सत्ता में बैठे लोगों से अलग राय रखी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सवाल पूछने का अधिकार लोकतांत्रिक नागरिकता के लिए बहुत जरूरी है।

उन्होंने कहा, “लोकतंत्र में, सवाल पूछने का अधिकार कोई अवज्ञा नहीं है। यह नागरिकता, स्वतंत्रता और संवैधानिक जिम्मेदारी की एक अनिवार्य अभिव्यक्ति है।”

सैल्यूट जस्टिस भुइयां

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