05/04/2026
ये तो वही हुआ कि आपके पास कोई लक्जरी फोर व्हीलर खड़ी हो लेकिन आप बाइक से ही लक्ष्य तक पहुंचना पसंद करें। रियान पराग ने लगभग ऐसा ही किया है। ठीक है इस बार तो बाइक से ही आसानी से लक्ष्य तक तो पहुंच ही गए लेकिन इतना बड़ा रिस्क लेने की जरूरत ही क्या थी? कहीं मौसम खराब हो गया होता तो सारी हीरोगिरी निकल जाती। वही लोग जो अभी रियान पराग की वाह! वाह! कर रहे हैं वही हुआं हुआं करने लग जाते।
आखिरी 12 गेंद और गुजरात टाइटंस को जीत के लिए महज 15 रनों की जरूरत थी। क्रीज पर राशिद खान और कागिसो रबादा थे। कोई जल्दबाजी नहीं थी क्योंकि उनके पास तीन और विकेट भी थे। दोनों सेट थे। राजस्थान रॉयल्स के कप्तान के पास तीन तेज गेंदबाजी विकल्प थे। जोफरा आर्चर, नांद्रे बर्गर और तुषार देशपांडे।
19वाँ ओवर रियान पराग ने आर्चर को दिया। ये एक गेम चेंजर मोमेंट साबित हुआ। आर्चर ने इस ओवर में कसी हुई गेंदबाजी की और महज 4 रन ही खर्च किए। अब आखिरी ओवर में गुजरात टाइटंस को जीत के लिए 11 रनों की जरूरत थी। कप्तान रियान पराग के पास नांद्रे बर्गर का विकल्प था। इसके बावजूद उन्होंने तुषार देशपांडे को आखिरी ओवर थमाया। सोचकर गुस्सा लग रहा था कि आखिर ये बंदा ऐसा क्यों कर रहा है। बर्गर बेहतर विकल्प हो सकते थे। बर्गर के अलावा अनुभवी संदीप शर्मा भी थे जिन्होंने एक दफा आखिरी ओवर में धोनी को भी छकाया था।
नया कप्तान नया दिमाग लगाया और युवा तुषार देशपांडे पर भरोसा किया। यह रियान पराग का भरोसा था या हीरो बनने की चुल्ल यह तो आगे के मुकाबलों में साफ ही हो जाएगा लेकिन इस मुकाबले में तो तुषार देशपांडे ने अपनी सटीक गेंदबाजी से साबित किया कि रियान पराग का फैसला सही था। तुषार देशपांडे ने कसी हुई गेंदबाजी की और राशिद खान को आउट करने के अलावा मात्र 4 रन ही खर्च किए और राजस्थान रॉयल्स मुकाबले को 6 रनों से जीतने में सफल रहा। तुषार देशपांडे और रियान पराग दोनों ही इस जीत के असल हीरो साबित हुए। रियान पराग की इस मुकाबले में कप्तानी लाजवाब रही। आखिरी ओवर में तुषार देशपांडे ने जो किया वह देखकर अच्छा लगा कि एक भारतीय गेंदबाज आखिरी ओवरों की जिम्मेदारी उठाने में सफल हुआ है।