30/08/2026
बिहार की पहचान मखाने की खेती को लेकर भी रही है। यहां के मखाने ने विश्व में अपनी पहचान बनाई है। अब बिहार के मखाने की वैश्विक पहचान के साथ उत्पादन और क्षेत्र विस्तार भी लगभग दोगुना हो गया है। एक साल पहले तक मिथिलांचल और सीमांचल के 10 जिलों में मखाने की खेती हो रही थी, अब 21 जिलों में मखाने की खेती पहुंच गई है। मखाने की बड़े पैमाने पर खेती के लिए बागवानी निदेशालय की ओर से किसानों को पिछले साल ही प्रशिक्षण दिया गया था। इसके बाद सारण, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, वैशाली, बक्सर और पटना में मखाने की खेती शुरू हो गई है।अब मखाने की खेती दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, शिवहर, मुंगेर, भागलपुर, पश्चिम चंपारण, सारण, वैशाली, बक्सर और पटना जिले में भी हो रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, बिहार में मखाने का क्षेत्र 10 हेक्टेयर तक बढ़ने की संभावना है। बिहार में पिछले साल तक 41 हेक्टेयर में मखाने की खेती हो रही थी। मखाने का सटीक क्षेत्र आकलन करने के लिए बागवानी निदेशालय की ओर से सेटेलाइट आधारित क्षेत्र की गणना कराया गया है। कृषि विभाग क्षेत्र विस्तार की रिपोर्ट तैयार कर रहा है। बागवानी निदेशक अभिषेक कुमार का मानना है कि इस साल 30 फीसदी तक मखाने का उत्पादन बढ़ सकता है।