18/06/2022
माँ भारती के हम सभी संतान हैं, और अपनी माता की भूमि अथवा संपत्ति को नष्ट करना, कष्ट देना .... क्या शोभनीय है? संभव है कुछ हमारे ही राष्ट्र-भाई बहन उम्र और सामाजिक उत्साह के कारण लड़कपन कर रहे हों. फिर भी आप का व्यक्तित्व तो उज्जवल हो, ऐसी अपेक्षा आपकी माता, भारत माता करती ही है...!
एक सैनिक के भीतर में सभ्य एवं सौम्य आचरण का प्रभाव होना चाहिए। देश के प्रति मर मिटने की निष्ठा और समर्पण होना चाहिए। देश की संपत्ति के प्रति अपनापन का भाव होना चाहिए। यह आचरण ही उस सैनिक को अपने कर्तव्य के प्रति दृढ़ निश्चयी बनाता है। वह अग्नि के समान तप से अपनी वीरता दिखलाने वाला हो. और फिर वही सैनिक अग्निवीर कहलाता है.
पूर्णतः नैतिक आचरण युक्त नवयुवकों का निर्माण करना तथा उन्हें एक सशक्त राष्ट्रवीर बनाने के उद्द्येश्य को पूर्ण करना, यह एक राजधर्मी के लक्षण है। इस राजधर्म के मार्ग को अपनाने के लिए हम सबको नैतिक होना है। नैतिकता ही एकमात्र वह संस्कार है जो आपको एक हड्डी और मांस के ढांचे की वैज्ञानिक संज्ञा से एक राष्ट्र मानव का रूप देगा।
जो भी सेवा दे, सुरक्षा दे वह सैनिक है. मैं तो सैनिक हूँ. क्या आप सैनिक हैं?