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शिवाजी स्कूल में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए रिजल्ट घोषित किए जाने पर एक विशेष ध्यान पक्षियों को रखते हुए प्रत्येक...
28/05/2022

शिवाजी स्कूल में बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए रिजल्ट घोषित किए जाने पर एक विशेष ध्यान पक्षियों को रखते हुए प्रत्येक बच्चो को पक्षियों का घोशला ( birds house ) दिया गया

19/02/2022

दिनांक 19 फरवरी 2022 वार शनिवार को शिवाजी बाल निकेतन स्कूल में छत्रपती शिवाजी महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में केक काटकर शिवाजी महाराज का हर्षोउल्लास के साथ जन्म महोत्सव मनाया गया । जिसमें निर्देशक रामस्वरूप रक्षक, प्रधानाचार्य मुकेश रक्षक ,वार्ड पार्षद महेंद्र माली, राजेश रक्षक,मांगीलाल जांगिड़, धर्मेंद्र सिंह , दौलतराम, भगवाना राम मेघवाल,मानवेन्द्र रक्षक, युवराज सिंह,राधेश्याम ,नरेंद्र सिंह राजपुरोहित,सूर्यप्रकाश रक्षक, सोनू सिंह, सूर्य प्रताप,पंकज जांगिड़,महेश जांगिड़ , कमल प्रजापत,आदि उपस्थित रहे है।

नेशनल रैंकिंग टेबल टेनिस चेम्पियन शीप पंचकुला हरियाणा
03/11/2021

नेशनल रैंकिंग टेबल टेनिस चेम्पियन शीप पंचकुला हरियाणा

27/06/2021

Shivaji bal niketan sr.sec.school Bidasar churu

26/06/2021

कल दिनांक 27 जून को
बीदासर में 18 प्लस एज ग्रुप फर्स्ट डोज
ओर 45 प्लस एज ग्रुप
( केवल सेकंड डोज) दोनो का कोविड वैक्सिनेशन होगा.....

18 प्लस एज ग्रुप वैक्सिनेशन का स्थान...
1. सेठ दुलीचंद सेठिया स्कूल
2.शिवाजी बाल निकेतन स्कूल

45 प्लस एज ग्रुप वैक्सिनेशन का स्थान
सीएचसी बीदासर

कोरोना काल के रेड अलर्ट जन अनुशासन पखवाड़े को मध्य नजर रखते हुए शिवाजी बाल निकेतन आम जन से अपील घरों में रहे सुरक्षित रहे...
27/05/2021

कोरोना काल के रेड अलर्ट जन अनुशासन पखवाड़े को मध्य नजर रखते हुए शिवाजी बाल निकेतन आम जन से अपील घरों में रहे सुरक्षित रहे ।
पेंटिंग का एक ही उद्देश्य आम जन
निज पर शासन फिर अनुशासन

*बीदासर की दिनभर की खबरे अपडेट*https://youtu.be/W8vieIc_p0wकोराना के चलते शिवाजी बाल निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय बीदास...
24/05/2021

*बीदासर की दिनभर की खबरे अपडेट*

https://youtu.be/W8vieIc_p0w
कोराना के चलते शिवाजी बाल निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय बीदासर द्वारा रंगोली के जरिये आमजन को बचाव हेतु आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

जीएज न्यूज़ पर समाचार देने के लिए सम्पर्क करें...9314580462

13/05/2021

एक युवक ने विवाह के दो साल बाद परदेस जाकर व्यापार करने की इच्छा पिता से कही ।
पिता ने स्वीकृति दी तो वह अपनी गर्भवती पत्नी को माँ-बाप के जिम्मे छोड़कर व्यापार करने चला गया । परदेश में मेहनत से बहुत धन कमाया और वह धनी सेठ बन गया ।
सत्रह वर्ष धन कमाने में बीत गए तो सन्तुष्टि हुई और वापस घर लौटने की इच्छा हुई । पत्नी को पत्र लिखकर आने की
सूचना दी और जहाज में बैठ गया ।
उसे जहाज में एक व्यक्ति मिला जो दुखी मन से बैठा था ।
सेठ ने उसकी उदासी का कारण पूछा तो उसने बताया कि
इस देश में ज्ञान की कोई कद्र नही है । मैं यहाँ ज्ञान के सूत्र बेचने आया था पर कोई लेने को तैयार नहीं है ।
सेठ ने सोचा 'इस देश में मैने बहुत धन कमाया है, और यह मेरी कर्मभूमि है, इसका मान रखना चाहिए !'
उसने ज्ञान के सूत्र खरीदने की इच्छा जताई ।
उस व्यक्ति ने कहा- मेरे हर ज्ञान सूत्र की कीमत 500
स्वर्ण मुद्राएं है । सेठ को सौदा तो महंगा लग रहा
था.. लेकिन कर्मभूमि का मान रखने के लिए 500 स्वर्ण मुद्राएं दे दी । व्यक्ति ने ज्ञान का पहला सूत्र दिया-

कोई भी कार्य करने से पहले दो मिनट
रूककर सोच लेना ।
सेठ ने सूत्र अपनी किताब में लिख
लिया ।
कई दिनों की यात्रा के बाद रात्रि के समय
सेठ अपने नगर को पहुँचा ।
उसने सोचा इतने सालों बाद घर लौटा हूँ तो क्यों न चुपके से बिना खबर दिए सीधे
पत्नी के पास पहुँच कर उसे आश्चर्य उपहार दूँ ।
घर के द्वारपालों को मौन रहने का इशारा करके सीधे अपने पत्नी के कक्ष में गया तो वहाँ का नजारा देखकर उसके पांवों के
नीचे की जमीन खिसक गई ।
पलंग पर उसकी पत्नी के पास एक
युवक सोया हुआ था ।
अत्यंत क्रोध में सोचने लगा कि मैं परदेस में भी इसकी चिंता करता रहा और ये यहां अन्य पुरुष के साथ है ।
दोनों को जिन्दा नही छोड़ूगाँ । क्रोध में तलवार निकाल ली ।
वार करने ही जा रहा था कि उतने में ही उसे 500 स्वर्ण मुद्राओं से प्राप्त
ज्ञान सूत्र
याद आया-
कि कोई भी कार्य करने से
पहले दो मिनट सोच लेना । सोचने के लिए रूका ।
तलवार पीछे खींची तो एक बर्तन से टकरा गई ।
बर्तन गिरा तो पत्नी की नींद खुल गई ।जैसे ही उसकी नजर अपने पति पर पड़ी वह ख़ुश हो गई और बोली-
आपके बिना जीवन सूना सूना था ।इन्तजार में इतने वर्ष कैसे निकाले
यह मैं ही जानती हूँ ।
सेठ तो पलंग पर सोए पुरुष को देखकर कुपित था ।
पत्नी ने युवक को उठाने के लिए कहा- बेटा जाग ।
तेरे पिता आए हैं ।
युवक उठकर जैसे ही पिता को प्रणाम
करने झुका माथे की पगड़ी गिर गई ।
उसके लम्बे बाल बिखर गए ।
सेठ की पत्नी ने कहा- स्वामी ये
आपकी बेटी है ।
पिता के बिना इसके मान को कोई आंच न आए
इसलिए मैंने इसे बचपन से ही पुत्र के समान ही
पालन पोषण और संस्कार दिए हैं ।
यह सुनकर सेठ की आँखों से अश्रुधारा बह निकली ।
पत्नी और बेटी को गले लगाकर
सोचने लगा कि यदि आज मैने उस ज्ञानसूत्र को नहीं
अपनाया होता
तो जल्दबाजी में कितना अनर्थ हो जाता । मेरे ही हाथों मेरा निर्दोष परिवार
खत्म हो जाता ।
ज्ञान का यह सूत्र उस दिन तो मुझे महंगा
लग रहा था लेकिन ऐसे सूत्र के लिए तो 500 स्वर्ण मुद्राएं बहुत कम हैं ।
'ज्ञान तो अनमोल है ' इस कहानी का सार यह है कि जीवन के दो मिनट जो दुःखों से
बचाकर
सुख की बरसात कर सकते हैं ।
वे हैं - 'क्रोध के दो मिनट'
इस कहानी को शेयर जरूर करें
क्योंकि आपका एक शेयर किसी
व्यक्ति को
उसके क्रोध पर अंकुश रखने के लिए
प्रेरित कर सकता है..🙏
जीवन की महत्ता को पहचान ही वास्तविक मुल्य हैं।

12/01/2021

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