08/01/2026
स्वीटी बूरा—रिंग की #हार नहीं, जीवन की लड़ाई का दूसरा दौर
गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय नोएडा, उत्तर प्रदेश की रिंग में मंगलवार को मुक्केबाज़ों की दुनिया एक बार फिर भावनाओं से भरी थी। नौवीं एलीट राष्ट्रीय महिला एवं पुरुष मुक्केबाजी चैंपियनशिप में महिला वर्ग के 70–75 किग्रा भार वर्ग में असम की लवलीना बोरगोहेन ने हरियाणा की स्वीटी बूरा को 3–2 के बेहद करीबी अंतर से मात दी। यह वही स्वीटी हैं जिन्होंने बीते वर्षों में अपने पदक महिलाओं को समर्पित किए, जिनकी जीतों ने लड़कियों को पहल, हौसला और सपने दिए।
लेकिन इस बार स्वीटी #बिना पदक के लौटी हैं। और खेल की इस वापसी में सिर्फ निराशा नहीं — एक जीवन की दूसरी परत भी थी।
पिछले कुछ दिनों से स्वीटी बूरा अपने ग्रहस्थ जीवन से जुड़ी घटनाओं को लेकर चर्चा में थीं। थाने में हुई बातचीत के दौरान उनके पति दीपक निवास हुड्डा पर जानलेवा हमला करने का मुकदमा दर्ज हुआ — एक ऐसा मामला जिसने रिंग से बाहर भी उन्हें मजबूती से खड़ा रहने की चुनौती दी। जीवन में आई यह उथल-पुथल किसी भी खिलाड़ी को भीतर से तोड़ सकती थी, मगर स्वीटी रिंग से दूर नहीं हुईं।
ये वही पल हैं जहाँ खेल और जीवन एक-दूसरे की छाया में दिखाई देते हैं। रिंग में मुक्कों से लड़ाई आसान होती है — वहाँ प्रतिद्वंद्वी सामने दिखता है, नतीजा तय रहता है, और समय सीमित होता है। लेकिन घर, समाज, और रिश्तों की लड़ाई कहीं ज़्यादा जटिल होती है — वहाँ कोई टाइमिंग नहीं, कोई रेफरी नहीं, और कोई पुरस्कार नहीं। सिर्फ सहनशीलता, धैर्य और आत्म-सम्मान साथ होते हैं।
इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वीटी ने #ओलिंपिक वज़न वर्ग चुनकर अपने करियर की दिशा को फिर से परिभाषित करने का प्रयास किया। यह वही निर्णय था जो कई बार एथलीटों के भविष्य के रास्ते खोलता है। लेकिन दूसरे दौर में उनका मुकाबला टोक्यो ओलिंपिक की पदक विजेता लवलीना से हुआ — खेल की भाषा में यह वो मोड़ था जहाँ हार भी मानवीय बन जाती है।
स्वीटी की यह हार सिर्फ पदक की नहीं — बल्कि जीवन की ढेरों अनकही दास्तानों की साक्षी है।
कभी-कभी खेल समाज से जीतता है, कभी समाज खेल से; मगर दोनों मिलकर एक इंसान को बनाते हैं। स्वीटी बूरा की यात्रा आज भी अधूरी नहीं — यह सिर्फ एक नया दौर है जहाँ वे रिंग में भी और जीवन में भी अपनी कहानी लिख रही हैं।
आज वे बिना पदक लौटी हैं,
लेकिन शायद आने वाले समय में वे यह साबित करेंगी कि जीवन के मुक्कों से बचकर रिंग में लौटना ही असली चैंपियन का काम होता है।
Boxing Federation of India
Saweety boora
Lovlina Borgohain