29/08/2018
मेजर ध्यानचन्द जी , के जन्मदिवस
राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर विशेष
स्व. मेजर ध्यानचन्द जी का जन्म प्रयाग इलाहावाद में २९.०८.१९०५ को हुआ। ध्यानचंद सेना में १७ वर्ष की उम् में भरती हुए, जहाँ से उन्होने अपने हॉकी खेल को सूबेदार भोले तिवारी के प्रशिक्षण में खेल को निखारना शुरू कियां।
ध्यानसिंह जिनके १९२८-३२ में चमक दार खेल से टीम मैनेजर पंकज गुप्ता ने ध्यानसिंह की जगह ध्यानचंद कहना शुरू कर दिया। जैसा चाँद चमकता है वैसे ध्यानसिंह का खेल और इस प्रकार ध्यानसिंह जी ध्यानचन्द कहलाने लगे।
• १९२८ एम्सटडम ओलम्पिक खेलों मे भारत के लिए प्रथम स्वर्ण पदक।
• १९२८ एम्सटडम ओलम्पिक खेलों मे एशिया महाद्वीप के लिए प्रथम स्वर्ण पदक।
• १९२८ एम्सटडम ओलम्पिक खेलों मे फाईनल मैच में ध्यानचंद द्वारा तीन गोल ओलम्पिक हॉकी के इतिहास की पहली फायनल मैच में हैट्रकि ।
• १९३२ लाँस एंजलिस ओलम्पिक खेलों में अमेरिका को २४ के मुकाबले १ गोल से परास्त किया ओलम्पिक में हॉकी की आज तक सबसे बड़ी जीत।
• १९३२ लाँस एंजलिस ओलम्पिक खेलों में भारत के लिए दूसरा ओलम्पिक स्वर्ण पदक।
• १९३६ बर्लिन ओलम्पिक में भारत के लिए तीसरा स्वर्ण पदक और इस प्रकार भारत के लिए ओलम्पिक खेलों में स्वर्ण पदकों की हैट्रिक
• ध्यानचन्द के नेतृत्व में १९३६ बर्लिन ओलम्पिक जीत १५ अगस्त को मिली और देश १५ अगस्त १९४७ को आजाद हुआ।
• ध्यानचन्द के नेतृत्व में १९३६ बर्लिन ओलम्पिक फाईनल मैच के पहले उस समय का तिरंगा और बन्दे मातरम के साथ मैच में जीतने की शपथ ली गई जो कि गुलामी के उस दौर में देश भिक्त का अनुपम उदाहरण हैं। यहां उल्लेखनीय है कि ध्यानचन्द जी ने महान क्रांतिकारी चन्दशेखर आजाद को स्वतंत्रता के आंदोलन के दौरान अपने निवास में शरण दी थी।
• ध्यानचन्द दुनिया के एक मात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके जन्म दिन को खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है और खेल दिवस को घोषित करवाने में पण्डित विश्वनाथ शर्मा की भूमिका को कभी नही भुलाया जा सकता।
• ध्यानचन्द दुनिया के एक मात्र ऐसे खिलाड़ी है जिनकी चार हाथों वाली मूर्ति वियनावसियो द्वारा वियना में स्थापित की है। क्योकि वियनावासियों का मानना है कि ध्यानचंन्द ने जो करिश्माई खेल दिखाया है वह केवल भगवान ही कर सकता है। इसके अलावा भारत में ध्यानचन्द जी की कई प्रतिमायें विभिन्न शहरों में स्थापित है।
• ध्यानचन्द दुनिया के एक मात्र ऐसे खिलाड़ी है जिन्होंने अपने ओलम्पिक केरियर एवं अन्तरराष्ट्रीय हॉकी केरियर में कोई मैच नहीं हारा।
• ध्यानचन्द एक ऐसे खिलाड़ी है जिनके नाम पर नेशनल स्टेडियम नई दिल्ली में स्थापित किया गया है।
• ध्यानचन्द भारत के प्रथम खिलाड़ी हे जिनके जन्मदिन पर खेल पुरूस्कार वितरित किये जाते है।
• ध्यानचन्द भारत के सर्व प्रथम खिलाड़ी है जिन्हे ६ अक्टूबर १९५६ को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
• ध्यानचन्द भारत के सर्व प्रथम खिलाड़ी हे जिने फोटो के साथ भारत सरकार द्वारा डाक टिकिट जारी किया गया।
• ध्यानचन्द भारत के सर्व प्रथम ऐसे खिलाडी है जिन्होने लगातार तीन ओलम्पिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
• ध्यानचन्द भारत के सर्व प्रथम ऐसे खिलाड़ी है जिन्होने लगातार ओलम्पिक खेलो में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को स्वर्ण पदक की हैट्रिक से सम्मानित किया।