Astha Ayurvedic Acupressure Holistic Treatment &training Center

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03/06/2026
*सर्वाइकल स्पाइन और नसों का स्वास्थ्य: गर्दन दर्द को न करें नजरअंदाज - प्रो. डॉ. नवीन सिंह**‎आधुनिक जीवनशैली, मोबाइल और ...
03/06/2026

*सर्वाइकल स्पाइन और नसों का स्वास्थ्य: गर्दन दर्द को न करें नजरअंदाज - प्रो. डॉ. नवीन सिंह*
*‎आधुनिक जीवनशैली, मोबाइल और कंप्यूटर के बढ़ते उपयोग से बढ़ रही सर्वाइकल समस्याएं; समय पर पहचान और योग से किया जा सकता है बचाव*
‎बस्ती। आस्था आयुर्वेदिक एक्यूप्रेशर हॉलिस्टिक ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर,कटेश्वर पार्क बस्ती के निदेशक प्रो डॉ नवीन सिंह ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली, लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर का उपयोग, गलत बैठने की आदत तथा शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण सर्वाइकल स्पाइन (गर्दन की रीढ़) से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार गर्दन की रीढ़ की हड्डियां, नसें और मांसपेशियां हमारे शरीर के संतुलन, गतिविधियों तथा मस्तिष्क से शरीर के विभिन्न अंगों तक संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
‎डॉ नवीन सिंह ने बताया कि मानव गर्दन में कुल सात सर्वाइकल वर्टिब्रा (C1 से C7) होती हैं, जिनके बीच स्थित डिस्क झटकों को सहन करने का कार्य करती हैं। किसी कारणवश डिस्क के बाहर निकलने या नसों पर दबाव पड़ने की स्थिति में गर्दन दर्द, कंधों में जकड़न, हाथों में झुनझुनी, सुन्नपन तथा कमजोरी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
‎विशेषज्ञ डॉ नवीन सिंह के अनुसार C6-C7 स्तर पर होने वाली डिस्क हर्निएशन (स्लिप डिस्क) नसों पर दबाव बनाकर दर्द और अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण पैदा कर सकती है। यदि समय रहते उचित उपचार और सावधानी न बरती जाए तो समस्या गंभीर रूप धारण कर सकती है तथा दैनिक जीवन की गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है।
‎स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लगातार गर्दन दर्द, चक्कर आना, हाथों में झुनझुनी या कमजोरी महसूस होने पर स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। नियमित योगाभ्यास, सही बैठने की मुद्रा, कार्य के दौरान बीच-बीच में विश्राम तथा गर्दन संबंधी व्यायाम सर्वाइकल समस्याओं की रोकथाम में सहायक हो सकते हैं।
‎विशेषज्ञ डॉ नवीन सिंह का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच और संतुलित जीवनशैली अपनाकर सर्वाइकल स्पाइन से जुड़ी अधिकांश समस्याओं से बचाव संभव है। स्वस्थ गर्दन न केवल शरीर की गतिशीलता बनाए रखती है, बल्कि तंत्रिका तंत्र के सुचारु संचालन में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

30/05/2026

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🖋️ हिंदी पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🖋️30 मई 1826 को हिंदी के प्रथम समाचार पत्र "उदन्त मार्तण्ड" के प्रकाशन के...
30/05/2026

🖋️ हिंदी पत्रकारिता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🖋️
30 मई 1826 को हिंदी के प्रथम समाचार पत्र "उदन्त मार्तण्ड" के प्रकाशन के साथ हिंदी पत्रकारिता का शुभारंभ हुआ। यह दिवस हमें सत्य, निष्पक्षता, जनजागरण और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित पत्रकारिता की गौरवशाली परंपरा का स्मरण कराता है।
पत्रकारिता केवल समाचारों का संप्रेषण नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने, लोकतंत्र को सशक्त बनाने और जनमानस की आवाज़ को मंच प्रदान करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
आइए, हिंदी पत्रकारिता दिवस पर हम सभी सत्य, नैतिकता, निष्पक्षता और जनहित के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लें।
कलम की शक्ति से समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक परिवर्तन का प्रकाश फैलता रहे।
🌹 हिंदी पत्रकारिता दिवस की सभी पत्रकार बंधुओं एवं मीडिया कर्मियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं। 🌹
स्लोगन: "सत्य की आवाज़, जन-जन का विश्वास — हिंदी पत्रकारिता का गौरवशाली इतिहास।" ✍️🇮🇳

डॉ नवीन सिंह - सम्पादक
वेदांत टाइम्स/बस्ती टाइम्स 24
[email protected]
9415628668 , 9517133111

21वीं सदी में एक्यूप्रेशर एवं कलर चिकित्सा बनी आसान उपचार पद्धतिरंगों की ऊर्जा से घर बैठे पाएँ स्वास्थ्य लाभ : विशेषज्ञ ...
28/05/2026

21वीं सदी में एक्यूप्रेशर एवं कलर चिकित्सा बनी आसान उपचार पद्धति
रंगों की ऊर्जा से घर बैठे पाएँ स्वास्थ्य लाभ : विशेषज्ञ डॉ नवीन सिंह
बस्ती। आस्था आयुर्वेदिक एक्यूप्रेशर हॉलिस्टिक ट्रीटमेंट एंड ट्रेनिंग सेंटर कटेश्वर पार्क के निदेशक प्रो. डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली, बढ़ता तनाव, अनियमित खान-पान और दवाइयों पर बढ़ती निर्भरता के बीच अब लोग प्राकृतिक एवं वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। 21वीं सदी में एक्यूप्रेशर चिकित्सा के साथ “कलर थेरेपी” अर्थात रंग चिकित्सा एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी उपचार पद्धति के रूप में उभर रही है, जिसके माध्यम से लोग घर बैठे अनेक शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं से राहत पा सकते हैं।
विशेषज्ञ डॉ नवीन सिंह के अनुसार मानव शरीर केवल मांस और हड्डियों का ढांचा नहीं, बल्कि ऊर्जा का एक जीवंत केंद्र है। शरीर में उपस्थित ऊर्जा चक्रों और नसों के संतुलन को बनाए रखने में रंगों की विशेष भूमिका होती है। अलग-अलग रंग शरीर और मन पर अलग प्रकार का प्रभाव डालते हैं। यही सिद्धांत कलर चिकित्सा का आधार है।
क्या है कलर चिकित्सा?
कलर चिकित्सा एक प्राकृतिक उपचार पद्धति है जिसमें विभिन्न रंगों की किरणों, प्रकाश, वस्त्रों, जल, भोजन अथवा मानसिक एकाग्रता के माध्यम से शरीर में संतुलन स्थापित किया जाता है। माना जाता है कि प्रत्येक रंग विशेष प्रकार की ऊर्जा उत्पन्न करता है जो शरीर के विभिन्न अंगों और चक्रों को प्रभावित करती है।
कौन-सा रंग किस रोग में लाभकारी?
लाल रंग – शरीर में ऊर्जा और रक्तसंचार बढ़ाने में सहायक
नीला रंग – मानसिक शांति, अनिद्रा और तनाव कम करने में उपयोगी
हरा रंग – हृदय एवं मानसिक संतुलन के लिए लाभकारी
पीला रंग – पाचन शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक
नारंगी रंग – उत्साह एवं सकारात्मकता प्रदान करता है
बैंगनी रंग – ध्यान, आध्यात्मिकता और मानसिक एकाग्रता में सहायक माना जाता है
एक्यूप्रेशर और रंग चिकित्सा का संयुक्त प्रभाव
विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर रंगों का प्रयोग किया जाए तो उपचार की प्रभावशीलता और बढ़ जाती है। शरीर के विशेष बिंदुओं पर रंगीन चुंबक, प्रकाश या रंगीन टेप का उपयोग कर ऊर्जा प्रवाह को संतुलित किया जाता है। इससे सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, गैस, जोड़ों का दर्द, थकान और मानसिक अशांति जैसी समस्याओं में लाभ देखा गया है।
घर बैठे कैसे करें आसान प्रयोग?
अपने कमरे में हल्के और सकारात्मक रंगों का प्रयोग करें
सुबह सूर्य की हल्की किरणों का सेवन करें
रंगों के अनुसार वस्त्र पहनें
ध्यान करते समय शांत रंगों पर ध्यान केंद्रित करें
रंगीन पानी चिकित्सा का उपयोग विशेषज्ञ की सलाह से करें
एक्यूप्रेशर बिंदुओं पर रंगीन टेप या प्रकाश का प्रयोग करें
दवा नहीं, संतुलन पर आधारित चिकित्सा
विशेषज्ञों का कहना है कि कलर चिकित्सा का उद्देश्य केवल रोग हटाना नहीं, बल्कि शरीर, मन और भावनाओं के संतुलन को स्थापित करना है। यह चिकित्सा बिना किसी दुष्प्रभाव के प्राकृतिक तरीके से स्वास्थ्य सुधारने में सहायक मानी जाती है।
बढ़ रही लोगों की रुचि
आजकल योग, प्राकृतिक चिकित्सा और वैकल्पिक उपचार पद्धतियों के बढ़ते प्रभाव के कारण युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक में कलर चिकित्सा के प्रति रुचि बढ़ रही है। कई लोग इसे तनाव मुक्ति, मानसिक शांति और जीवनशैली सुधार के लिए अपना रहे हैं।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि गंभीर रोगों में किसी भी वैकल्पिक चिकित्सा को अपनाने से पहले प्रशिक्षित चिकित्सक या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। सही मार्गदर्शन में कलर चिकित्सा स्वास्थ्य संवर्धन का प्रभावी माध्यम बन सकती है।

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Kateshwar Park Gandhi Nagar
Basti
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05542281040

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