04/09/2026
झारखंड के रांची के रहने वाले अमरदीप कुमार एक अंतरराष्ट्रीय थ्रोबॉल खिलाड़ी हैं। उन्होंने इंडो-नेपाल, इंडो-भूटान और एशियाई स्तर की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए एक-दो नहीं, बल्कि 4 इंटरनेशनल गोल्ड मेडल्स अपने नाम किए हैं।
लेकिन सोने के तमगे घर का चूल्हा नहीं जला पाते।
लाखों रुपये के इनाम और सरकारी नौकरियों की घोषणाएं अक्सर गिने-चुने खेलों तक ही सीमित रह जाती हैं। थ्रोबॉल जैसे गैर-क्रिकेट खेल से जुड़े होने के कारण अमरदीप को न तो खेल कोटे से कोई सरकारी नौकरी मिली और न ही कोई आर्थिक सहयोग। आज आलम यह है कि परिवार का पेट पालने के लिए यह अंतरराष्ट्रीय चैंपियन रांची की सड़क किनारे अपने पिता के साथ ठेले पर धनिया, हरी मिर्च और सब्ज़ियां बेचने को विवश है।
अमरदीप का कहना है कि उन्होंने देश के लिए पसीना बहाया, पदक जीते, लेकिन सिस्टम ने कभी उनकी ओर मुड़कर नहीं देखा। यह तस्वीर सिर्फ एक खिलाड़ी की बेबसी नहीं है, बल्कि उन हजारों एथलीट्स का दर्द है जो सुविधाओं और मान्यता के अभाव में गुमनामी के अंधेरे में चले जाते हैं।
अगर देश का प्रतिनिधित्व करने वाले अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडलिस्ट को सब्ज़ी का ठेला लगाना पड़े, तो आने वाली पीढ़ी खेलों में अपना भविष्य कैसे तलाशेगी?🫡🇮🇳✨
(फोटो प्रतीकात्मक है, लेकिन खबर सही है)
#कवि_प्रदीप_महाजन